The power of newness! | Avyakt Murli Churnings 26-01-2020

The power of newness! | Avyakt Murli Churnings 26-01-2020

1. हम नई-दुनिया की नई-रचना (अधिकारी-प्यारे बच्चों) लिए सब नया है (युग-जीवन, संकल्प-स्वभाव-संस्कार-सम्बन्ध, धर्म-कर्म)… अंश-मात्र भी पुराने संकल्प-स्वभाव-संस्कार न हो (तब ही सर्व-प्राप्तियों का अतीन्द्रिय-सुख, फरिश्ते-समान डबल-लाइट जीवन अनुभव करेंगे)… इसलिए सिर्फ इतना ही चेक करना, हर संकल्प-बोल-कर्म नया है? (मर्यादा-पूर्वक), तो स्वास्तिका-समान:

  • श्रेष्ठ स्व-स्थिति रहेंगी
  • (गणेश-समान) नॉलेजफुल ज्ञान-स्वरूप बन हर संकल्प-कर्म करने से सदा सफल रहेंगे

जबकि हम हैं ही दाता-विधाता-वरदाता के बच्चे… सिर्फ औरों को नहीं देखना (ब्रह्मा-बाबा को भल देखो), परिस्थिति को देखने के बदले स्वदर्शन-चक्रधारी

2. विश्व-विद्यालय की गोल्डन-जुबली अर्थात्‌ हम सब (ब्रह्मा के ब्राह्मण-ब्रह्माकुमार) की… इसलिए गोल्डन-ऐजड सतोप्रधान संकल्प-संस्कार emerge करने… सम्मान मिलने के साथ समान बनना

3. (पदयात्री से)… उमंग-हिम्मत से किये सेवा का प्रत्यक्षफल-खुशी अनुभव की… अभी सबको रूहानी-अलौकिक-न्यारे यात्री लगे (यात्रा करने-कराने वाले), उड़ती कला में उड़ने-उड़ाने वाले फरिश्ते

4. सुनने के साथ समाकर, बाप-समान शक्तिशाली बनना (हममे और बाप में कोई अन्तर न लगे, सदा सम्पन्न, समय पर शक्तियां काम आए)

सार

सदा स्वदर्शन-चक्रधारी, फॉलो-फादर द्वारा हर ज्ञान के पॉइंट को स्वयं में समाकर… अपने नये जीवन की स्मृति द्वारा सर्व प्राप्तियों के अतीन्द्रिय सुख से सम्पन्न-शक्तिशाली रूहानी यात्री बनते-बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Being royal! | Sakar & Avyakt Murli Churnings 18-01-2020

Being royal! | Sakar & Avyakt Murli Churnings 18-01-2020

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

साकार मुरली चिन्तन

1. जबकि स्वर्णिम नई दुनिया-राज्य हमारे सामने है (बापदादा भी हमें रूहानी-लव से ज्ञान-श्रीमत पढ़ाते)… तो सदा अन्तर्मुखी ज्ञान-सिमरण करते, बाबा को प्रीत-बुद्धि बन याद करे…

2. जिससे श्रेष्ठ-पावन-हीरा बनते, सदा खुश-नशे-उल्लास से सम्पन्न, देवताई-रॉयल मीठी-चलन वाले (जैसे कर्म हम करेंगे, हमें देख सब करेंगे… कभी तंग नहीं होना)… सबकी अलौकिक-सेवा करते रहना

अव्यक्त मुरली चिन्तन

1. प्योरिटी (संकल्प-स्वभाव-संस्कार में… ईर्षा-घृणा से परे) ही आधार है… यूनिटी का (स्वभाव-संस्कार मिलना, न मिले तो भी मिलाना, जैसे रास) … जबकि हम महारथी की लिस्ट में गिने जाते

2. ऐसा महाकाली-स्वरूप धारण करना है, कि कमज़ोर-वातावरण को भी परिवर्तन कर सके… फिर हम औरों को भी बिल्कुल स्पष्ट परखने वाले नॉलेजफुल बन जाएंगे

सार (चिन्तन)

तो इस 18 जनवरी को… सदा अपने परम-पवित्र मास्टर-सर्वशक्तिमान विश्व-महाराजन् स्वरूप को emerge कर… बाबा की मीठी-शिक्षाओं को अन्तरमुखी बन चिन्तन द्वारा स्वयं में समाते, उसकी प्रीत-भरी याद में डूबे, पावन-मीठे-हीरा बनते-बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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The power of unity! | Avyakt Murli Churnings 12-01-2020

The power of unity! | Avyakt Murli Churnings 12-01-2020

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. हम श्रेष्ठ वृत्ति-दृष्टि-बोल द्वारा उमंग-उत्साह दिलाने वाले विश्व-परिवर्तन की सेवा के आधार-स्वरूप निमित्त आत्माएं है… आधार-स्वरूप अर्थात् हर समय-संकल्प-कर्म जिम्मेवारी के ताजधारी… मीटिंग में आना अर्थात्‌ याद-सेवा-परिवार-स्नेह के सूत्र में बँधना

2. हम तो है ही आधर-उद्धार स्वरूप उदारचित्त-उदारदिल… उदारचित्त अर्थात्‌ बड़ी फ्राखदिल से प्राप्त गुण-विशेषता-शक्तियों द्वारा गुणवान बनाना, शुभ भावना देना, आदि… ऐसे फालो-फादर… तीन बातों से परे रहना:

  • ईर्षा… जो अग्नि-समान स्वयं-सर्व को परेशान करता
  • घृणा… जो स्वयं-सर्व को गिराती
  • Criticise… जो भी दुःख देना है (औरों को धक्का देकर गिराने जैसा)

जैसे प्लान अच्छे है, बाबा हमें भी अच्छे कहते.. अब सिर्फ एक बन एक को प्रत्यक्ष करना है (इसी की निशानी, सहयोग की एक उंगली देना दिखाते)

3. सेवा के सफलता की दो मुख्य भुजाएं है (जिससे चतुर्भुज सत्यनारायण-महालक्ष्मी साक्षात्कार-मूर्त बनते… बाबा हमारी मीटिंग में आते, उनके पास हम सबके मन के स्थिति की टेप-चित्र-वीडियो है)

  • एकता
  • एकाग्रता (निर्व्यर्थ-निर्विकल्प)

ऐसे गोल्डन-स्वरूप (गोल्डड-नचेहरा, चमकता मस्तक-आँखें… अभी-अभी (फरिश्ता-देवता) द्वारा गोल्डन दुनिया दिखाना

4. दिल के उमंग से सबमें भी उमंग आता, हम सबका एक ही उमंग है (किसी भी देश-zone में रहे)… इस एक शब्द (एकता) की अटल-प्रतिज्ञा करनी है (मर्यादा का कंगन, भण्डारी कि चिटकी)

5. जबकि एक रूहानी-गुलाब भी इतनी खुशबु फैलाता, तो यह संगठन कितना कमाल करेंगा (हम एक-एक सितारों में दुनिया है)… न समस्य बनना, न समस्या में अटकना (एसा निर्विघ्न-निर्विकल्प-निर्विकारी)

6. श्रेष्ठ संकल्प-उमंग की सिद्धि तो मिलती, अभी मंसा-सेवा केे ट्रायल करने है (जो चुम्बक-समान दूर से भी आकर्षित करता)… इसके लिए बनानी है लाइट-हॉउस माइट-हाउस स्थिति, माइट बन माइक का प्रयोग करना (ऐसी अवतार समान पॉवरफुल स्टेज)

चिन्तन

सदा अपने को विश्व-कल्याण के आधार-स्वरूप जिम्मेदार समझ… बाप-समान उदार-चित्त बन बड़े दिल से अपनी गुण-विशेषता-शक्तियां सबको लुटाते, अपने गोल्डन रूहानी-गुलाब स्वरूप वा सम्पूर्ण एकता-एकाग्रता द्वारा बाबा को प्रत्यक्ष करते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Being God’s true companion! | Avyakt Murli Churnings 05-01-2020

Being God’s true companion! | Avyakt Murli Churnings 05-01-2020

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. हम आदि से बाबा के सदा स्नेही-सहयोगी-साथी है, हर संकल्प-बोल-कदम साथ निभा-फोलो कर बाप-समान (मास्टर-सर्वशक्तिमान) बनने वाले… इसलिए सदा मन-बुद्धि-दिल में गीत बजता रहे “मैं दिलाराम-बाबा का, बाबा-वर्सा मेरा”, फिर जैसी स्मृति वैसी स्थिति-कर्म बनते

2. बाबा बढ़ाई देते हमारे सेवा के उमंग-उत्साह को, सहज आगे बढ़ रहे, प्रत्यक्षता-विजय का झण्डा लहरायेंगे (जिसके नीचे सब गीत गाएंगे “गति-सद्गति दाता बाबा आ गया”, और सुख-शान्ति के वर्से के पुष्पों की वर्षा)… सिर्फ अब सेवा में होना है निर्विघ्न, न विघ्न-रूप बनना न विघ्न में घबराना-हिलना… ब्राह्मण बनना माना ही माया को चैलेंज दे, मायाजीत-विजयी विजयी-रत्न बन, माला में आना

3. पास-विद-आनर बनने लिए, पवित्रता के साथ सम्बन्ध-सम्पर्क-सेवा में सन्तुष्ट रहना-करना… स्व-स्थिति वा याद (अव्यभिचारी-याद) में अचल…. इसके लिए तीन बातों से परे रहना:

  • लगाव… जिस पर बाबा ने पिछली मुरली में सुनाया 
  • तनाव (वा खिंचातान)… जिसका कारण मैं-पन है, जो सेवा में तीव्र नहीं जाने देता… इसके बदले सबको आगे बढ़ाना
  • कमज़ोर स्वभाव-नेचर… जो उड़ती कला में नहीं रहने देता… वास्तव में स्वभाव अर्थात स्व-आत्मा का श्रेष्ठ-आत्मिक भाव, बाप-समान रहमदिल-मधुर-निर्माण-आगे बढ़ाने वाले, स्वमान से अभिमान समाप्त.. (इसलिए देश-धर्म-संग का बहाना नहीं, हम सब एक-एक के है, सिर्फ सेवा लिए भिन्न स्थान पर है)

इनका त्याग-भाग्य अनुभव कर सबको बांटना (ब्रह्मा-बाप समान, ऐसी विशेषता स्वयं में लानी है, त्याग के भाग्य का भी त्याग)… जो सहज मिले, वह श्रेष्ठ भाग्य (उसमे सब की आशीर्वाद होती)

4. सदा बैलेन्स (याद-सेवा, गंभीरता-रमणीकता) द्वारा बाबा की ब्लैसिंग प्राप्त कर ब्लिसफुल-लाइफ अनुभव करना:

  • हर संकल्प-बोल-कर्म में रीयल्टी (मिक्स नहीं)… जिससे सदा खुशी में नाचते रहते (सच तो बिठो नच)
  • रॉयल्टी… छोटी बातों में झुकना नहीं, सदा प्राप्ति-स्वरुप
  • यूनिटी.. कोई डिसयुनिटी भी करे, हमारी यूनिटी की शक्ति से वह भी अचल बनें

बाबा हमें योगी-योग्य-भाग्यवान रूप में देखते… बाबा रोज़ अमृतवेला हमारी गुण-विशेषता-सेवा को अविनाशी का वरदान-पालना-शक्ति देते

सार

सदा बाबा के सच्ची साथी बन फॉलो करते, अपने श्रेष्ठ आत्मिक-भाव वा बाबा की अव्यभिचारी याद द्वारा रीयल्टी-रॉयल्टी-यूनिटी सम्पन्न बन… लगाव-तनाव-स्वभाव से परे निर्विघ्न-सेवा कर सन्तुष्ट रहते-करते, सबको सुख-शान्ति का वर्सा दिलाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Becoming free from subtle bondages! | Avyakt Murli Churnings 29-12-2019

Becoming free from subtle bondages! | Avyakt Murli Churnings 29-12-2019

1. आज बाबा सच्चे-ब्राह्मणों के स्थान-स्थिति को देख रहे थे… कई स्थान तपस्या-वायुमण्डल वाले सादगी-श्रेष्ठता सम्पन्न थे… और स्थिति में, जबकि हम बन्धनमुक्त-योगयुक्त-जीवनमुक्त एवर-रेडी आत्माएं है (कर्मातीत बनने वाली)… बाप-समान (बाबा को बच्चों से प्यार होते भी, समय पर सम्पूर्ण बन किनारा छोड़ दिया)… फिर भी बच्चों में दो सूक्ष्म-बन्धन देखे (जो महीन-बुद्धि से दिखते):

  • सेवा के साथी (जिनकी गुण-विशेषता-मदद-सहयोग कारण सेवा में वृद्धि होती) प्रति झुकाव-लगाव-सहारा बनना (उससे “ही” बात करना-सुनना अच्छा लगता)… इसलिए समय पर बाप बदले, वह याद आते (फिर बाबा से याद की लिंक जोड़ने की मेहनत करनी पड़ती)… यह कमज़ोरी फिर पक्की बन जाती
  • साधनों के वश हो सेवा करना… जबकि हमारा आधार सिर्फ एक बाबा है, विनाशी-साधन सिर्फ सेवा-वृद्धि लिए मिले है

2. परखने की शक्ति बढ़ाने से स्व वा सेवा में उन्नति होंगी… जिसके लिए बुद्धि की लगन एक बाप में एकाग्र-मगन करनी है, फिर ही उड़ती कला में एकरस होंगेे… जिद्द-सिद्ध नहीं करना, नहीं तो कमज़ोरी और बढ़ेंगी… एक-एक बात सहज क्रॉस कर विजयी बनना… रॉयल-धागे (सोने के हिरण) पीछे बाबा का साथ-मौज नहीं छोड़ना.. हम बाबा के संकल्प से पैदा हुए, योग्य-बच्चों को बाबा सम्पूर्ण-योगी बनाना चाहते

3. (परदादी से)… पहले से सदा साथ रहे, अब भी साथ का अनुभव कम नहीं (हमें तो सदा साथ का वायदा-वरदान मिला है, सारे कल्प का सम्बन्ध)… हम सेवा के उमंग-उत्साह वाली वरदानी आत्माएं है, वरदान-दृष्टि से सेवा करनी वाली चैतन्य मुर्ति-देवीयां

सार

सदा बाबा के साथ-लगन में एकाग्र हो परखने की शक्ति-सम्पन्न बन… सर्व सूक्ष्म बन्धनों से परे, बाप-समान योगयुक्त-जीवनमुक्त उड़ती-कला में एकरस रह… अपने वरदानी स्वरूप-दृष्टि द्वारा सबकी सेवा करते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Now or never! | अब नहीं तो कभी नहीं | Avyakt Murli Churnings 22-12-2019

Now or never! | अब नहीं तो कभी नहीं | Avyakt Murli Churnings 22-12-2019

1. आज लवफुल-लॉफुल बाबा, हम बच्चों के ज्ञान-शक्ति समय-संकल्प का जमा का खाता देख रहे (क्योंकि यही 21 जन्म फिर भक्ति में चलता, अर्थात् सारा कल्प)… “अब नहीं तो कभी नहीं” इसी संकल्प-उमंग द्वारा श्रेष्ठ-कर्म होते, नहीं तो बीच-समय में माया चांस लेकर, समय-धन सफल करने का भाग्य कम कर देती… समर्थ का सौगुना मिलता, व्यर्थ खुशी को बिल्कुल गुम कर देता (फिर यह उदासी, combined-बाबा से भी दूर ले जाती)… दृढ़ता ही सफलता-चाबी है

2. जैसे ब्रह्मा-बाबा ने तुरन्त-दान महा-पुण्य किया, तो कृष्ण की सब रूप में पूजा होती (बाल-युवा-गोप-नारायण) हमारी भी होंगी

3. बाबा सदा तीनों कालों को जान… हमारे सम्पूर्ण-स्वरूप को देख, विशेषताओं की खुशबु लेते

4. स्नेही बन, सबकी स्नेह से सेवा करने से, सब बाबा से जुड़ जाते, हमारा अविनाशी-बैंक में जमा हो जाता… सदा मोहब्बत में रह मेहनत से परे रहना है… साधन भी सेवा में लगाना है

5. सदा उड़ती-कला में रह, याद-सेवा के बैलैंस द्वारा श्रेष्ठ-कर्मातीत स्थिति का अनुभव करते रहना (कभी नीचे नहीं आना)

सार

अब नहीं तो कभी नहीं, इसी स्मृति से दृढ़ता-सम्पन्न बन… बाबा से combined रह उड़ती कला द्वारा अपना सम्पूर्ण-स्वरूप अनुभव करते… स्नेह से सबकुछ सेवा में सफल कर सर्वश्रेष्ठ भाग्यवान बनते-बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Being in God’s spiritual army! | Avyakt Murli Churnings 15-12-2019

Being in God’s spiritual army! | Avyakt Murli Churnings 15-12-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. आज रूहानी-सेनापति-बाप, हम नई-विश्व-रचना वाले रूहानी-सेना को देख रहे, कहाँ तक नॉलेज द्वारा शक्तिशाली-शस्त्रधारी बने है, कि … एक जगह बैठे दूर आत्माओं को टच कर सके… ऐसा विजय-चक्र हमें मिला हुआ है, ऐसे हम निश्चयबुद्धि स्वदर्शन-चक्रधारी है

2. एक पढ़ाई होते भी नम्बर-वार होने का कारण है, कोई ज्ञान को पॉइंट-रूप में धारण करते, कोई शक्ति-रूप से… जैसे कि:

  • कोई ड्रामा की पॉइन्ट समझते-वर्णन करते भी रोते रहते (क्या हो गया)… कोई सदा एकरस-अचल-अडो़ल बन जाते
  • आत्मा की पॉइंट (मैं शक्ति-स्वरूप आत्मा हूँ, सर्वशक्तिमान की सन्तान).. फिर कोई परिस्थिति बड़ी नहीं

ऐसे ही परमात्मा, 84 चक्र का पॉइंट, आदि… बुद्धि में धारण कर सेवा में लगने कारण सेफ तो रहते (लेकिन सदा मायाजीत नहीं रह सकते)… इसलिए ज्ञानवान (नॉलेजफुल) के साथ शक्तिशाली (पावरफुल) बनना है, लाइट-माइट सम्पन्नसमय पर विजयी बनना अर्थात्‌ ही, नॉलेज को शस्त्र के रूप में धारण (मायाजीत बनने लिए तो शस्त्र मिले है)

3. जैसे कोर्स-प्रोग्राम सब प्यार-लगन-अथक हो करते (तन-मन-धन से), वैसे अब फोर्स भरना है… इसलिए कोर्स को फिर से revise करना (हर पॉइंट में क्या-कितनी शक्ति है, किस समय काम आती)… फिर चेक करना, सारा दिन कितना प्रैक्टिकल में रहा (परिस्थिति में भी)

4. यूथ में बुद्धि-शरीर दोनों की शक्ति है, जिसे हम शान्त-स्वरूप बन, दुःख दूर कर बिगड़ी बनाने लिए प्रयोग कर रहें… जबकि हम दुःखधाम से संगम पर आ गए, तो दुःख का एक भी संकल्प न हो

5. जैसे पढ़ाई-बाप-सेवा से प्यार है (नॉलेजफुल-सर्विसएबुल-तीव्र पुरूषार्थी भी है)… ऐसे अब सदा निर्विघ्न-खुश-हल्के-बाबा की छत्रछाया में रहना है (सदा साफ़, कोई दाग-जोड़ नहीं)… सब सहज है (जबकि समय का भी साथ है, अव्यक्त-मदद है, निमित्त की पालना है, सब बना-बनाया है)

6. अनन्य-रत्न सदा आगे बढ़ते, हर कदम पद्मो की कमाई जमा करते-कराते रहते… उनके हर संकल्प से सेवा होती, सब उमंग-उत्साह में आ जाते.. बाबा हमें देख निश्चिंत है (faith है), सब एक-दो से आगे, विशेष है

चिन्तन

सदा अपने को बाबा की रूहानी-सेना के शक्तिशाली-शस्त्रधारी समझ, बाबा की छत्रछाया-मदद-पालना का अनुभव करते… ज्ञान के हर पॉइंट को शक्ति-रूप से धारण कर, सदा एकरस-अचल-अडो़ल मायाजीत-वजयी बन… सदा हल्के-खुश-निर्विघ्न रहते, सब की बिगड़ी को बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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The beauty of contentment! | Avyakt Murli Churnings 08-12-2019

The beauty of contentment! | Avyakt Murli Churnings 08-12-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. हम स्नेही दिल-तख्तनशीन बच्चों में इतनी ताकत है… जो निर्बन्धन-बाप को भी स्नेह-बन्धन में बाँध लियानिर्वाण रहने वालें दिलवर को, दिल की रूह-रूहान करने खींच लिया

2. हम सदा सन्तुष्ट रहने वाल (स्वयं-संस्कार-परिवार-वायुमण्डल सबसे), सन्तुष्ट-मणियां हैं… कभी भी सन्तुष्टता की गुण-विशेषता-खज़ाना-श्रृंगार नहीं छोड़ सकते… इस खुशी से ही सब आकर्षित होते, सबके स्नेही-सहयोगी-समीप-दिल के प्यारे बनते (सर्व खज़ानों की चाबी बाबा मिला, तो सभी सेवा के चांस भी स्वतः मिलते)

3. सदा श्रीमत-मर्यादाओं की लकीर अन्दर रहने वाली आज्ञाकारी-सन्तुष्ट आत्माएं, माया को दूर से पहचान लेती (इसलिए घबरा नहीं सकते)… माया आती ही है कमजोरी द्वारा, इसलिए सदा बाबा के साथ (जैसा संग वैसा रंग) रहने से, माया का बीज ही जल जाएंगा… फिर सदा योगी-प्राप्ति स्वरूप-मौज में रहेंगे

4. जैसे उमंग-लगन में आगे है, वैसे सदा साथ रहने में भी आगे रहना है… जैसे पहचानने में नम्बर-वन है, वैसे मायाजीत बनने में भी हो… सिर्फ हमें स्वराज्य-अधिकारी राजा (ताज-तख्त-तिलकधारी) बनना है, बाकी और स्नेही-सहयोगी स्वतः तैयार हो जाएंगे

5. हम सब नये जन्म-धारी ब्राह्मण है (एक ही बाप-रास्ता-रीति-स्वभाव वालें), भल कहीं भी रहें

सार (चिन्तन)

सदा स्वयं को बाबा के दिल-तख्तनशीन, वा सिरताज की सन्तुष्ट-मणियां समझ… सदा बाबा के साथ (वा ईश्वरीय-मर्यादाओं की लकीर अन्दर) रह, मायाजीत बन… सदा सर्व-प्राप्ति-सम्पन्न सन्तुष्ट स्वराज्य-अधिकारी स्थिति का अनुभव करते-कराते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Being a Master & serving all! | Avyakt Murli Churnings 01-12-2019

Being a Master & serving all! | Avyakt Murli Churnings 01-12-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. निर्वाण-स्थिति (निर्विकल्प-निर्विकारी) द्वारा निराकारी सो साकारी स्वरूप-धारी रहना है (निराकार की स्मृति न भूले, जबकि यही असली स्वरूप है)… तो स्वतः सर्व गुण-शक्तियां emerge हो (माँ का उदाहरण), हम मास्टर-सर्वशक्तिमान के सिंहासन-धारी बन जाएंगे (सभी शक्तियां हमारे ऑर्डर पर चलने वाले सेवाधारी)… तो मेहनत से मुक्त रहेंगे (स्थूल सेवा भी खेल-मुहब्बत में सहज लगती)

2. सेवा करना अर्थात्‌ करावनहार-बाबा के साथ रहना, तो सदा सफलता-आशीर्वाद प्राप्त करने वाले महान-पुण्यात्मा मेहसूस करते… हर बोल द्वारा सबको अनुभव कराना (शान्ति-आनंद, आदि का), तब ही प्रत्यक्षता होंगी

3. सदा खुशी-सुख-सर्व प्राप्तियों के सागर में लहराते (याद), सबको भी हाथ पकड़ कर लहरवाना (सेवा)… इसी में बिजी़ रहने से (और कुछ न दिखे), सहज आगे बढ़ते-बढ़ाते रहेंगे… बाबा होशियार बनाकर गए हैं, अव्यक्त-रूप में सदा साथ हैं

सार

सदा निराकारी सो साकारी स्वरूप का अभ्यास करते, सर्व गुण-शक्तियों से सम्पन्न मास्टर सर्वशक्तिमान बन… शक्तियों को ऑर्डर में चलाए मेहनत-मुक्त बन… सदा सर्व प्राप्तियों के सागर में लहराते, सबको हर बोल द्वारा अनुभव कराते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Revealing the Truth! | Avyakt Murli Churnings 24-11-2019

Revealing the Truth! | Avyakt Murli Churnings 24-11-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. सत् बाप-टीचर-गुरू बाबा ने… हमें सत्य-अविनाशी ज्ञान-प्राप्ति-स्नेह-परिवार से अपना शक्ति-स्वरुप बच्चा बनाया है… ऐसे सबको बनाना है

2. स्नेह-सम्पर्क वा शान्ति-राजयोग का आकर्षण तो अच्छा है, अब कहे यह एक ही सत्य बाप का सत्य रास्ता है (तब विश्व-शान्ति वा प्रत्यक्षता होंगी)… जबकि अपना ही श्रेष्ठ-पवित्र स्टेज-वातावरण है, तो बाबा के सत्य ज्ञान का स्पष्ट परिचय देना है (कैसे यह नया-विशेष ज्ञान, श्रेष्ठ कर्तव्य है, नया युग लाने वाला… भगवान् ही यह कर सकता… निर्माणता-रहम से)… अपने अनुभव-प्राप्तियों के आधार से समझाना है:

  • सर्वव्यापी के बदले… कैसे एक रूप से याद करने से सर्व प्राप्ति होती
  • कैसे परमधाम में बाबा को याद करने से बुद्धि सहज एकाग्र होती
  • बाबा से सम्बन्ध द्वारा प्राप्तियां… कैसे भगवान् ही सत्य बाप-गुरू हो सकता
  • ड्रामा की नई पॉइंट्स… कैसे सतयुग आना है

अन्त में चार्टर आदि देने के साथ, बातों में इस ज्ञान की नवीनता भी स्पष्ट करनी है, आध्यात्मिक ज्ञान-शक्ति क्या चीज़ है, यह डायरेेक्ट भगवन् का कार्य चल रहा… नम्रता से, ताकि दर्द भी न हो, खुशी से नाचने लगे… हल चल गया, है, अब बीज डालना है

पार्टियो से

1. हम ब्रह्मा-बाप के आह्वान-स्नेह-सहयोग से जन्में अच्छे-तन्दुरस्त बच्चें है… इसलिए हमारा ब्रह्मा-बाबा से विशेष स्नेह है, चित्र में चैतन्यता, आकार में साकार अनुभव होता… उन जैसी सेवा की लगन है

2. जुबली भी गोल्डन, और स्वयं भी गोल्डन (अर्थात्‌ स्व-सेवा की उन्नति का बैलेन्स), तब ही ब्लैसिंग ले-दे सकते… प्लान रूपी बीज में स्व-स्थिति की शक्ति भरने से ही श्रेष्ठ फल निकलेगा

3. हम कहाँ भी रहते, हर संकल्प-सेकण्ड सेवा ही है…. हमको देखने से ही बाबा याद आते, ऐसे सफलता-मूर्त हो जाना है… सेवा का चक्कर लगाना अर्थात्‌ सब की उन्नती कराना, बाबा से प्राप्त स्नेह-सहयोग की शक्ति सबको बांट, उमंग-उत्साह में उड़ाना… साथ में नवीनता-रमणीकता-टोटके भी हो

सार (चिन्तन)

जबकि बाबा की प्रत्यक्षता तो निश्चित भावी है… सदा अपने सत्य स्वरुप में स्थित हो, सत्य बाप से सर्व प्राप्तियां अनुभव करते… स्व-सेवा के बैलेन्स द्वारा सब को स्नेह-सहयोग की शक्ति बांटते, अपने अनुभव-प्राप्तियों द्वारा बाबा के सत्य ज्ञान को प्रत्यक्ष करते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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