
राजयोग के 50 विभिन्न अभ्यास | List of 50 Rajyoga Meditation Practices
हमारी ईश्वरीय पढ़ाई के 4 सब्जेक्ट है:
- ज्ञान
- योग
- दिव्यगुणों की धारणा
- सेवा
इसमे बहुत महत्वपूर्ण सब्जेक्ट है योग
तो आपके योग को बहुत सहज, नवीन और आनंदमय बनाने के लिए… यह योग के 50 विभिन्न अभ्यास दिए हुए है (हर एक अभ्यास को dark में लिखा हुआ है)
स्व से संबंधित
- आत्मा का अभ्यास
- देही अभिमानी स्थिति (मैं आत्मा इस शरीर द्वारा कर्म कर / करा रही हूं)
- आत्म अभिमानी स्थिति (आत्मा के 7 अनादि गुणों का अनुभव… ज्ञान, पवित्रता, शान्ति, प्रेेेेम, सुख, आनंद, शक्तियां)
- अशरीरी स्थिति (बैठे हुए अनुभव हो, कि यह देह अलग और मैं आत्मा अलग हूं)
- विदेही स्थिति (परमधाम निवासी, बीजरूप स्थिति)
- फरिश्ता स्वरूप का अभ्यास
- देवता स्वरूप का अभ्यास
- पांच स्वरूपों की ड्रिल (अनादि, आदि, पूज्य, ब्राह्मण, फरिश्ता)
- भिन्न भिन्न स्वमान का अभ्यास (मास्टर ज्ञान सूर्य, स्वराज्य अधिकारी, आदि)
स्थानों से संबंधित
- परमधाम में टिकना
- सूक्ष्मवतन में रहना
- सतयुग में जाना
- मन बुद्धि से मधुबन की सैर करना
बाबा की याद
- शिवबाबा को याद करना (निराकार ज्योति बिन्दु स्वरूप)
- बापदादा की याद (शिव बाबा, अव्यक्त ब्रह्मा बाबा के तन में)…. (दृष्टि लेना, वरदान लेना, तिलक लगवाना)
- बाबा से रूहरुहान (अर्थात बातें) करना
- बाबा से सर्व संबंधों का अनुभव (माँ, बाप, शिक्षक, सतगुरु, बंधु, सखा, साजन, सर्जन, बच्चा)
- बाबा को भिन्न भिन्न titles के आधार से याद करना (बागवान, खीवैया, रत्नागर, जादूगर, आदि)
कर्मयोग के अभ्यास
- में आत्मा इस शरीर द्वारा कर्म कर / करा रही हूं (देही अभिमानी स्थिति)
- बाबा के साथ का अनुभव (हाथों में हाथ, बाबा की छत्रछाया सिर पर, दुआओं का हाथ सिर पर)
- भोजन करते हुए (बाबा मुझे खिला रहे हैं, बाबा की शक्तिशाली किरणें भोजन पर पड़ रही है)
- सोते हुए (बाबा की गोद में सोना)
औरों से संबंधित
- आत्मिक दृष्टि (अर्थात औरों को आत्मा देखना)
- बातें करते हुए (मैं आत्मा बोल रही हूँ, आत्मा से बात कर रही हूं)
- बातें सुनते हुए (मैं आत्मा सुन रही हूँ, आत्मा से सुन रही हूं)
- सकाश देना
- किसी की याद आए तो, उन्हें आत्मा देखकर शुभ भावना का दान देना
स्मृति में रखना की
- अब घर जाना है
- यह संगमयुग का समय चल रहा है
- बाबा आया हुआ है
- आदि
सार (राजयोग के 50 विभिन्न अभ्यास)
तो चलिए आज सारा दिन… योग के विभिन्न अभ्यास करते हुए अपने योग के चार्ट को बढ़ाते जाए, और निरन्तर सहजयोगी बनने के हमारे लक्ष्य तक जल्दी से जल्दी पहुंच जाएं!… ओम् शान्ति!
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