
मैं राजयोगी आत्मा… सेकण्ड में सार-स्वरूप में स्थित… सारा विस्तार समा गया है
मैं खुदा दोस्त की अधिकारी… व्यर्थ की दगमग से परे… मीठे बाबा पर एकाग्रचित्त हूँ
मैं पावन दिव्य आत्मा… शान्त स्वरूप स्थिति में स्थित… सबकी आशीर्वाद की पात्र हूँ

मैं राजयोगी आत्मा… सेकण्ड में सार-स्वरूप में स्थित… सारा विस्तार समा गया है
मैं खुदा दोस्त की अधिकारी… व्यर्थ की दगमग से परे… मीठे बाबा पर एकाग्रचित्त हूँ
मैं पावन दिव्य आत्मा… शान्त स्वरूप स्थिति में स्थित… सबकी आशीर्वाद की पात्र हूँ

मैं सहजयोगी आत्मा हूँ… हर संकल्प-कर्म से… सबको स्नेह की अनुभूति कराती
सदा बाबा से सुख-शान्ति-प्रेम-खुशी का अनुभव कर…. बाबा मिला सबकुछ मिला, इसी खुमारी-नशे में रहती… स्वयं भगवान् मुझपर कुर्बान है
बाबा मुझे सर्वश्रेष्ठ राजयोग सिखाते… पतित-पावन बाबा को याद कर… मैं सतोप्रधान, सुन्दर बन रहा
कर्म करते भी बाबा की याद से सोने की बुद्धि बन रही.. मैं हीरे-तुल्य बन रहा… डबल-सिरताज श्रेष्ठ देवता
More Meditation Commentaries:

अपनी आदि-अनादि पवित्रता की महानता से सर्व प्राप्तियां अनुभव करने-कराने लिए फुलस्टाप योगी सम्पूर्ण पवित्र बनो | Baba Milan Murli Churnings 30-01-2021
1. आज बापदादा चारों ओर के महान बच्चों को देख रहे। क्या महानता की? जो दुनिया असम्भव कहती है उसको सहज सम्भव कर दिखाया वह है पवित्रता का व्रत। परिवर्तन का दृढ़ संकल्प का व्रत लिया है। व्रत करना अर्थात् वृत्ति द्वारा परिवर्तन करना। क्या वृत्ति परिवर्तन की? संकल्प किया हम सब भाई-भाई हैं। पवित्रता की वृत्ति अर्थात् हर एक आत्मा प्रति शुभ भावना शुभ कामना। दृष्टि हर एक आत्मा को आत्मिक स्वरूप में देखना स्वयं को भी सहज सदा आत्मिक स्थिति में अनुभव करना। ब्राह्मण जीवन का महत्व मन वचन कर्म की पवित्रता है।
2. ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन है पवित्रता और पवित्रता द्वारा ही परमात्म प्यार और सर्व परमात्म प्राप्तियां हो रही। सदा पवित्रता के बल से पवित्र आत्मा को 3 विशेष वरदान मिलते:
तीनों की दुआओं से सदा उड़ता और उड़ाता रहता। सदा रूहानी नशा दिल में फलक रहती है? पवित्रता का फल ही अतीन्द्रिय सुख है। सभीअपने को मास्टर सर्वशक्तिवान कहते हो। मास्टर हैं इसका अर्थ ही है मास्टर तो बाप से भी ऊंचा होता पवित्र आत्मा का मन-वचन-कर्म सम्बन्ध-सम्पर्क स्वप्न स्वत: शक्तिशाली होता है। अमृतवेले विशेष हर एक अपने को चेक करना – कितनी परसेन्टेज़ में पवित्रता का व्रत निभा रहे हैं?
3. समय की पुकार, भक्तों की पुकार, आत्माओं की पुकार सुन रहे हो और अचानक का पाठ तो सबको पक्का हैै। विश्व परिवर्तक अर्थात् आत्माओं को प्रकृति को सबको परिवर्तन करना। पर उपकारी वा विश्व उपकारी बनने के लिए तीन शब्द को खत्म करना – पराचिंतन, परदर्शन, परमत। अभी आवश्यकता है हर एक दु:खी आत्मा को मन्सा सकाश द्वारा सुख शान्ति की अंचली देना। संस्कार ऐसे बनाओ जो दूर से ही आपको देख पवित्रता के वायब्रेशन लें
4. बच्चों से प्यार तो है ना और बच्चों के साथ जाना है अकेला नहीं जाना है। बाप यही चाहते हैं कि मेरा एक बच्चा भी रह नहीं जाए। अमृतवेले से लेके रात तक जो भी हर कर्म की श्रीमत मिली है वह चेक करना। मजबूत है ना! साथ चलना है ना! समान बनेंगे तब तो हाथ में हाथ देकर चलेंगे ना। करना ही है बनना ही है यह दृढ़ संकल्प करना।
5. एक सेकण्ड में परिवर्तन कर फुलस्टाप लगाना इसकी कमी है। लगाना फुलस्टाप है लेकिन लग जाता है क्वामा दूसरों की बातें याद करते यह क्यों होता यह क्या होता इसमें आश्चर्य की मात्रा लग जाती। और क्वेश्चन की क्यू लग जाती। तो इसको चेक करना। अगर फुलस्टाप लगाने की आदत नहीं होगी तो अन्त मते सो गति श्रेष्ठ नहीं होगी। एक सप्ताह फुलस्टाप सेकण्ड में लगाने का बार-बार अभ्यास करो। अभी फास्ट तीव्र पुरूषार्थ करो। अभी ढीला-ढाला पुरूषार्थ सफलता नहीं दिला सकेगा।
6. प्युरिटी को पर्सनैलिटी, रीयल्टी, रॉयल्टी कहा जाता है। तो अपनी रॉयल्टी को याद करो:

सभी जिम्मेवारी निभाते हुए… मैं डबल लाइट… बाबा का समीप रत्न हूँ
एकान्तवासी-अन्तर्मुखी बन… बाबा-प्राप्तियों की स्मृतियों के… शक्तिशाली अनुभव से मायाजीत रहता
मैं सूक्ष्मवतनवासी फरिश्ता… स्थूल हड्डी-मास से परे…. याद की खुशी में रहता
मैं सम्पूर्ण पावन… देव आत्मा… स्वराज्य अधिकारी हूँ
मैं ब्राह्मण आत्मा हूँ… निराकार शिवबाबा से वर्सा प्राप्त कर रही… प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा
More Meditation Commentaries:

मैं हर ज्ञान की प्वाइंट को स्वयं में समाकर… उस स्थिति-स्वरुप का अनुभव कर… शुभ संकल्पों के ख़ज़ाने से भरपूर मेहसूस करता
मैं ज्ञान-अनुभव की डबल अथॉरिटी… मस्त फकीर रमता योगी हूँ
बाबा मेरी सेवा पर उपस्थिति हुआ है, बुलावे पर… बहुत सहज रास्ता बताते… मन्मनाभव
मैं आत्मा मुसाफिर हूँ… बाबा आए हैं मुझे अपने साथ ले जाने… नई दुनिया का दैवी फूल बनाने
मैं ज्ञान-नेत्र से सदा अपने आत्मिक स्वरूप… बाबा के स्वरूप को देख… बाबा पर बलिहार जाती
More Meditation Commentaries:


मैं पद्मापद्म भाग्यशाली आत्मा… स्वयं भगवान् मुझे मात-पिता, वा सर्व-सम्बन्धों की अलौकिक पालना देते… स्वयं सर्वशक्तिमान मेरा सेवक बना है
सदा अपने भाग्य के खुशी-नशे में रहता… शान्त रह, मुख से सदा फूल निकलते… सब पर आत्मिक सुख-प्यार बरसाता
चलते-फिरते बुद्धि में ज्ञान रखने वाला चैतन्य लाइट हाउस… मैं बाबा का अति लाडला-लवली बच्चा हूँ… बाबा मुझपर कुर्बान है, सिर पर रखते
मैं सदा समर्थ संकल्प-वान… तन-मन से सदा खुश रहता
More Meditation Commentaries:

योग कमेंटरी | बाबा से रिफ्रेश हो दिव्यगुणों की कमाई | Sakar Murli Churnings 27-01-2021
मैं बाबा-वर्से की स्मृति में सदा रिफ्रेश-खुश… दैवीगुणों की कमाई करने वाली भाग्यवान आत्मा… श्रीमत पर श्रेष्ठ बन रही
बाबा की मुझसे बहुत लव-प्रीत है… मुझे लवली-प्यारा कह.. सम्पूर्ण गोरा बनाते
मैं स्वयं-सेवा-सर्व से सन्तुष्टता का सर्टिफिकेट लेने वाली… सन्तुष्टमणि… सिद्धि स्वरुप आत्मा हूँ
संकल्प-स्वप्न में भी आत्मिक स्थिति में स्थित… बाबा-बाबा के अनहद शब्द की अनुभवी… सच्ची धारणा-मूर्त ब्राह्मण आत्मा हूँ
More Meditation Commentaries:

योग कमेंटरी | हमारा रूहानी सतोगुणी स्वधर्म | Sakar Murli Churnings 26-01-2021
मैं बाप-सर्व की दुआओं का पात्र… उड़ती कला का अनुभवी… उड़ता योगी हूँ
सबको अपनी रूहानी शक्ति-स्वरूप का अनुभव कराता… मैं एकाग्रता से सम्पन्न, व्यर्थ-मुक्त आत्मा… ज्ञान-सुर्य के चमत्कार दिखाता
सर्व दिव्यगुणों से सम्पन्न… मैं दैवी चलन वाली, देव आत्मा हूँ… अपने पवित्रता-सुख-शान्ति के स्वधर्म मैं स्थित
मैं योगबल से सम्पन्न… सम्पूर्ण पावन आत्मा, कर्मातीत… विजय माला का मणका हूँ
More Meditation Commentaries:

योग कमेंटरी | ब्राह्मण सो फरिश्ता सो देवता | Sakar Murli Churnings 25-01-2021
चैतन्य-बीजरूप बाबा के संग.. मैं आत्मा बीजरूप स्थिति में स्थित हूँ… सारे वृक्ष को किरणें पहुंच रही
मै देह-भान के आकर्षण से भी परे… अशरीरी आत्मा हूँ… स्वयम पर रहमदिल
मैं आकार-अव्यक्त-शान्त फरिश्ता हूँ… एक सेकण्ड की स्मृति-वृत्ति-दृष्टि की शक्ति से… सबको शान्ति का सहयोग देता
मैं दिव्यगुण-सम्पन्न, ईश्वरीय बुद्धि… देव आत्मा हूँ… श्रेष्ठाचारी, पूज्य
More Meditation Commentaries:
