Celebrating Shiv Jayanti inside! | Sakar Murli Churnings 22-01-2020

Celebrating Shiv Jayanti inside! | Sakar Murli Churnings 22-01-2020

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. स्वयं नॉलेजफुल-लिबरेटर-गाइड शिवबाबा एक्यूरेट समय पर आकर … हम मीठे-ब्राह्मण बच्चों को… याद-मन्मनाभव-राजयोग सिखाते (अपने को आत्मा-दीप समझ पतित-पावन शिवबाबा को याद करना)

2. जो सच्चाई से करने से विकर्म-विनाश पावन-खुश बनते (जिससे गोल्डन ऐज-गार्डन ऑफ फ्लावर्स-सतयुग-वर्से-सद्गति में ऊँच पद पाते, सम्पूर्ण सतोप्रधान-पावन-दिव्य रूप में)… शिव-जयन्ती पर खूब अच्छी सजावट-लाइट्स द्वारा योगयुक्त ज्ञान-गंगा बन सेवा करनी है

चिन्तन

जबकि शिव-जयन्ती नजदीक आ रही; जिसमें हमें बहुत योगयुक्त हो सेवा करनी है… तो अभी से अपने सलोने शिव साजन से combined; शिवमयी शिव शक्ति बन… सदा मायाजीत शान्ति-प्रेम-आनंद से भरपूर सर्व-प्राप्ति-सम्पन्न बन… सबके लिए भी विघ्न-विनाशक बन जियदान देते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Being a spiritual cloud! | Sakar Murli Churnings 21-01-2020

Being a spiritual cloud! | Sakar Murli Churnings 21-01-2020

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. संगम पर हम मीठे-मीठे बच्चे… (ज्ञान-सुख-शान्ति) सागर के बच्चें रूहानी-बादल है (जो सागर से मीठा पानी खिंचते, अर्थात् धारणा करते), और फिर खूब बरसते (सबको धारणा कराते), जिससे महिमा होती (राजा बनते)… मुख्य ज्ञान है आत्मा का (अविनाशी-आत्मा में 84 जन्म-ड्रामा का पार्ट नुन्धा है), और ऊँच-ते-ऊँच परमात्मा-भगवान् शिवबाबा-टीचर-सर्जन का ज्ञान

2. सबकुछ भूल, देही-अभिमानी बन बिन्दु बाप-हसीन मुसाफिर-सलोने शिव-साजन की याद में कुर्बान जाना है… जिससे सतोप्रधान-स्वच्छ-सर्वगुण सम्पन्न बनते (स्वर्ग-वन्दर ऑफ वर्ल्ड-सतयुग में)… हम सारे चक्र को जानते, जिसका सिमरण कर हर्षित रहना है (माया से परे), अपना तन-मन-धन सफल करना

चिन्तन

जबकि हम सर्व गुण-शक्तियों के सागर के बच्चें रूहानी-बादल है… तो सदा शिव-सागर से मीठा ज्ञान-पानी खिंचते, सर्व गुण-शक्तियों के सर्व प्राप्तियों से सम्पन्न धारणा-मूर्त बन… सबको भी अपने दिव्य-वाइब्रेशन मीठे-बोल रॉयल-सुखदाई व्यवहार-चलन द्वारा रिफ्रेश करते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Checking ourself! | Sakar Murli Churnings 20-01-2020

Checking ourself! | Sakar Murli Churnings 20-01-2020

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. जबकि 100% पवित्रता-सुख-शान्ति सम्पन्न दैवी-सतयुगी स्वराज्य हमारे सामने है… और स्वयं righteous-निराकार रत्नागर ज्ञान-सागर पतित-पावन शिवबाबा हमें प्यार से अपना बनाकर ज्ञान-रत्नों से भरपूर करते

2. तो हम ब्राह्मण-बच्चों को भी अपनी जाँच करनी है (कितने पाप-पुण्य है, आज दुःख-कुदृष्टि तो नहीं गई), बाबा को चार्ट भेजने से खबरदार-उन्नति होती रहेंगी… प्यार से याद-योग में रह विकर्म-विनाश कर कमल-फूल समान पवित्र रहना है… सेवा के शौक द्वारा ज्ञान-दान, कल्याण, राह दिखाते रहना (प्रदर्शनी-बैज-पर्चेे-धन द्वारा)

चिन्तन

जबकी हम सब दुःख की अनुभूति से परे रहना चाहते (और कर्मों के ज्ञाता भी है), तो सदा अपने कर्मों पर पूरा अटेन्शन रहे… सदा श्रीमत पर ज्ञान-चिन्तन वा योग-अभ्यास द्वारा ऊँची शान्ति-प्रेम आनंद से सम्पन्न निर्विकारी-पावन स्थिति का अनुभव करते-कराते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Becoming an embodiment of solutions through powerful pledge! | दृढ़ प्रतिज्ञा द्वारा निवारण-स्वरूप | Baba Milan Murli Churnings 18-01-2020

Becoming an embodiment of solutions through powerful pledge! | दृढ़ प्रतिज्ञा द्वारा निवारण-स्वरूप | Baba Milan Murli Churnings 18-01-2020

1. आज स्मृति-समर्थी दिवस की बढ़ाई देते… स्नेह-सागर बाबा हम स्नेही-लवली-लवलीन बच्चों को मेरे-लाडले-सिरताज बच्चे कहते (हम भी मेरा-मीठा बाबा कहते, स्नेह-विमान वा फरिश्ता-रूप में पहुँच गए)… हमारी स्नेह-मोती-माला बाबा के गले में, उनकी स्नेह-भुजाएं-माला हमारे गले मेंं, हम उनके स्नेह में समा गये… एक-एक स्मृति सेकण्ड में समर्थी-नशा चढ़ाती:

  • पहली स्मृति, हम कल्प-पहले वाली भाग्यवान-आत्माएं है (जिससे परमात्म-बाप का नशा चढ़ता)…
  • दिल से निकला मेरा बाबा (जिससे सभी प्राप्ति-खज़ाना-पालना अपनी हो गई)…
  • जिस मेरेपन से सहजयोगी समर्थ-आत्मा मायाजीत बन गए

2. यह वर्ष न्यारा-प्यारा मेहनत-समस्या मुक्त बनने का है (तब ही स्वयं-औरों को मुक्ति दिला सकेंगे)… इसलिए ऐसे-वैसे वा करना-पड़ता के बहाने (पुरानी भाषा-चलन-अलबेलेपन) से परे रहना, इसका निवारण-समाधान है दृढ़-प्रतिज्ञा (भल झुकना-सुनना-सहना-बदलना पड़े)… तब ही पर्दे खुल-प्रत्यक्षता होंगी (सब अच्छे बनेंगे… अब सब बहुत दुःखी हैं), मन्सा-वाचा के साथ स्नेह-सहयोग-चेहरे-चलन के कर्म द्वारा (हमारी अवस्था देख सब ठीक हो जायेंगे)… जबकि बाबा के साथ चलना-राज्य करना है, तो सेवा में भी साथ रहना (सहयोगी-समान बनना, हाथों में हाथ)

पार्टियों से

  • (गुजरात)… सेवाधारी-सेवा बहुत है (वाचा-सेवा में पास है)… अब पावरफुल-मन्सा द्वारा मन्सा-सेवा सकाश देना (वे माइक बनेंगे)
  • (फूलों के श्रृंगार वालें)… स्नेह के कारण श्रृंगार-सुगन्ध और अच्छी हो गई, बाबा भी पदमगुणा-स्नेह देते
  • (डबल-विदेशी)… हम मधुबन के श्रृंगार, सबको प्यारे है (कोटों में कोई)… अब चैतन्य-म्युजियम बनना है (मस्तक-नैन-मुस्कान से सेवा).. सूक्ष्म रियलाइजेशन द्वारा विन कर नम्बर-वन बनना
  • (मधुबन) दूर बैठे भी सब पास है, फिर भी सम्मुख-मधुबन में गोल्डन-चांस है… मुरली से प्यार अर्थात् मुरलीधर से प्यार निभाने वाले
  • (याद-प्यार) हम श्रीमत-बाप के कदम पर चलने वाले सहजयोगी-नॉलेजफुल-पावरफुल स्वमान-सम्मानधारी है… इन्तजार समाप्त कर, इन्तजाम करने वाले

सार (चिन्तन)

जबकि स्नेह-सागर बाबा हम पर इतना स्नेह लुटाते… तो हम भी मुरली से प्यार वा मेरे-मीठे बाबा की स्मृति द्वारा समर्थ-सहजयोगी बन, दृढ़-प्रतिज्ञा द्वारा निवारण-स्वरूप हो… बाप-समान चैतन्य-म्युजियम बन, चेहरे-चलन-पावरफुल मन्सा द्वारा सबकी सर्वश्रेष्ठ-सेवा करते, नम्बर-वन बनते-बनाते, सतयुग बनाते रहे… ओम् शान्ति!


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Being royal! | Sakar & Avyakt Murli Churnings 18-01-2020

Being royal! | Sakar & Avyakt Murli Churnings 18-01-2020

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

साकार मुरली चिन्तन

1. जबकि स्वर्णिम नई दुनिया-राज्य हमारे सामने है (बापदादा भी हमें रूहानी-लव से ज्ञान-श्रीमत पढ़ाते)… तो सदा अन्तर्मुखी ज्ञान-सिमरण करते, बाबा को प्रीत-बुद्धि बन याद करे…

2. जिससे श्रेष्ठ-पावन-हीरा बनते, सदा खुश-नशे-उल्लास से सम्पन्न, देवताई-रॉयल मीठी-चलन वाले (जैसे कर्म हम करेंगे, हमें देख सब करेंगे… कभी तंग नहीं होना)… सबकी अलौकिक-सेवा करते रहना

अव्यक्त मुरली चिन्तन

1. प्योरिटी (संकल्प-स्वभाव-संस्कार में… ईर्षा-घृणा से परे) ही आधार है… यूनिटी का (स्वभाव-संस्कार मिलना, न मिले तो भी मिलाना, जैसे रास) … जबकि हम महारथी की लिस्ट में गिने जाते

2. ऐसा महाकाली-स्वरूप धारण करना है, कि कमज़ोर-वातावरण को भी परिवर्तन कर सके… फिर हम औरों को भी बिल्कुल स्पष्ट परखने वाले नॉलेजफुल बन जाएंगे

सार (चिन्तन)

तो इस 18 जनवरी को… सदा अपने परम-पवित्र मास्टर-सर्वशक्तिमान विश्व-महाराजन् स्वरूप को emerge कर… बाबा की मीठी-शिक्षाओं को अन्तरमुखी बन चिन्तन द्वारा स्वयं में समाते, उसकी प्रीत-भरी याद में डूबे, पावन-मीठे-हीरा बनते-बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Giving our heart to One! | Sakar Murli Churnings 17-01-2020

Giving our heart to One! | Sakar Murli Churnings 17-01-2020

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. इस संगम-स्कूल-ब्रह्मा द्वारा… निराकार-शिवबाबा-राम, पतित-पावन सद्गति-दाता कालों का काल ज्ञान-सागर नॉलेजफुल… हम रूहानी-ब्राह्मण-बच्चे निराकार-सालिग्राम-आत्मा को… ज्ञान-पढ़ाई सुनाते-समझाते

2. हम अन्तर्मुखी-शान्त हो कार्य करते भी, पिताव्रता-बलिहार हो, याद-योग में रहते… माया-वश औरों से दिल लगाकर सजा के पात्र नहीं बनना, भूलों को दोहराना नहीं… तो विकर्म-विनाश देहभान गलता, सतोप्रधान-खुशी से भरपूर होते… औरों से सेवा नहीं लेनी, हमें तो शौक होना चाहिए अंधों की लाठी बन आप-समान बनाने वा कल्याण करने की सेवा करने में (चित्र-प्रदर्शनी-मेले-सेन्टर-हॉल द्वारा)

3. जबकि विनाश सामने खड़ा है, तो scholarship ले माला में आने का लक्ष्य जरूर रखना है… सुख-शान्ति-सतोप्रधान दुनिया सतयुग-स्वर्ग के मालिक बनने

चिन्तन

जबकि बाबा को दिल देने में ही सर्व-प्राप्तियां है (वा औरों को दिल देने में सब नुकसान है)… तो आज सच्चे-दिल से स्वयं को शिव-साजन पर समर्पित-बलिहार कर, सारा दिन के अपने योग के चार्ट को दिन-प्रतिदिन बढ़ाते… सदा शान्ति-प्रेम-आनंद से भरपूर दिव्यगुण-सम्पन्न बनते-बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Remaining protected from Maya’s April Fool! | Sakar Murli Churnings 16-01-2020

Remaining protected from Maya’s April Fool! | Sakar Murli Churnings 16-01-2020

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. इस संगम-पाठशाला-प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा… ऊँच परमात्मा-ईश्वर-भगवान् निराकार-शिवबाबा ज्ञान सूर्य-नॉलेजफुल पवित्रता-सुख-शान्ति-प्रेम सागर… हम आत्मा-बिन्दी हीरो-हीरोइन पार्टधारी को… ज्ञान पढ़ाते-सिखाते

2. हम याद-योग करते (बाबा-बाबा करते, ओहो-प्रेम से बाते करते)… विकर्म-विनाश पावन-सतोप्रधान खुशी-नशे-गदगद हो… मास्टर-प्रेम-सागर की चलन द्वारा, रूहानी-पण्डा बन सबको मुक्ति-शान्तिधाम-घर का रास्ता दिखाने की सेवा करते… नई-पावन-सतोप्रधान दुनिया सतयुग-शिवालय-क्षीरसागर-राम राज्य के मालिक, पावन-दिव्यगुण सम्पन्न देवता (प्योरिटी-पीस-प्रासपर्टी-हेल्थ-वेल्थ सम्पन्न) बनते

चिन्तन

जबकि माया सदा हमें अप्रेल-फूल बनाना चाहती… तो सदा सुबह-अमृतवेला उठते ही बाबा की शक्तियों से ऐसा सम्पन्न बन, ऊँच frequency पर आ जाए, कि… माया कभी हमपे वार न कर सके, हम सदा शान्ति-प्रेम-आनंद से भरपूर सर्व-प्राप्ति-सम्पन्न रहते-करते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Being a spiritual nurse! | Sakar Murli Churnings 15-01-2020

Being a spiritual nurse! | Sakar Murli Churnings 15-01-2020

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. कल्प-कल्प संगम पर, ब्रह्मा-तन द्वारा… गुप्त पण्डा-शर्राफ-कलंगीधर परलौकिक-परमात्मा शिवबाबा… हम मीठे-लाड़ले-रूहानी ब्राह्मण-बच्चे-आत्माओं को… ज्ञान-पढ़ाई समझाकर-सिखाकर रिफ्रेश करते

2. हम ट्रस्टी बन याद-मन्मनाभव का पुरुषार्थ-अभ्यास करते (पॉइंट्स नोट-धारण कर, अपने से बातें-स्वदर्शन कर)… विकर्म-विनाश पावन-खुशी-नशे सम्पन्न बन सच्ची कमाई करते… अपने मीठे-भाईयों की रूहानी-सेवा कर सिखाना-समझाना-राह दिखाकर कल्याण-रिफ्रेश करना है (निमित्त-भाव से सेंटर खोलना भी अच्छा)

3. (वाया मुलवतन-घर-शान्तिधाम) जिससे नई दुनिया-सद्गति-वर्से स्वर्ग-सतयुग-सुखधाम-राम राज्य के मालिक… हीरे-समान पुण्य-आत्मा देवता बनते… हेल्थ (लम्बी-आयु), वेल्थ (सुख) सम्पन्न… हम इस झाड़ को जानते

चिन्तन

जबकि बाबा ने हमें सबकी सेवा-अर्थ रूहानी-नर्स बनाया है… तो सदा पहले अपने को ज्ञान-योग द्वारा माया के रोगों से मुक्त (सदा-खुश) रख… सबको अपने श्रेष्ठ अनुभवों-वाइब्रेशन द्वारा बाबा से जुड़ाकर सम्पूर्ण-स्वस्थ (शान्ति-प्रेम-आनंद से सम्पन्न) करते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Being spiritually non-violent! | Sakar Murli Churnings 14-01-2020

Being spiritually non-violent! | Sakar Murli Churnings 14-01-2020

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. इस कल्याणकारी-पुरूषोत्तम-संगमयुग पर… स्वयं निराकार-रूहानी-सर्वशक्तिमान् सुप्रिम-श्री श्री-ऊँच ते ऊँच परमात्मा-भगवान शिव बाप-टीचर-सतगुरू… दिव्य-अलौकिक जन्म ले, ब्रह्मा-तन द्वारा… हम मीठे-सिकिलधे बचो-अवतरीत आत्माओं-शिव शक्तियों को adopt-रिफ्रेश कर… पढ़ाते-सिखाते, श्रीमत देते

2. हम उनकी याद-योग द्वारा विकर्म-विनाश (मायाजीत बन), पावन-सतोप्रधान अतीन्द्रिय-सुख सम्पन्न बन… नई दुनिया-वर्से स्वर्ग-सतयुग-अमरलोक-सुखधाम के मालिक, सर्वगुण-सम्पन्न 16 कला सम्पूर्ण देवता श्री-लक्ष्मी-नारायण बनते (हेल्थ-वेल्थ-हैप्पीनेस-पीस prosperity सम्पन्न)

3. अंधों की लाठी बन सबका कल्याण करना है… पावन बन-बनाना ही सच्ची-रूहानी सेवा है, धन है तो हॉस्पिटल-cum-यूनिवर्सिटी अवश्य खोलनी है

चिन्तन

जबकि हम रूहानी डबल-अहिंसक आत्माएं है… तो पहले योगबल से भरपूर हो, माया के वार से परे रह… बहुत शीतल-हल्कि-शान्त अतीन्द्रिय सुख-आनंद सम्पन्न स्थिति का अनुभव कर…. सबको भी शुभ भावना-सकाश द्वारा सम्पन्न करते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Creating a royal fortune! | Sakar Murli Churnings 13-01-2020

Creating a royal fortune! | Sakar Murli Churnings 13-01-2020

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. इस संगम-पाठशाला-शिव जयंती में… ईश्वर-परमात्मा शिवबाबा-टीचर… हम ब्राह्मण-बच्चे आत्मा-एक्टर्स को… चक्र-राजयोग का ज्ञान देते, जिसका सिमरण कर हम बाबा की याद-मन्मनाभव में रह (भल माया भुलाए, हमारा विनाशी दुनिया में कोई ममत्व नहीं), पवित्र-हर्षित-खुश बनते… श्रीमत पर खुदाई-खिदमतगार बन सबका कल्याण करते (चित्र-बैज-प्रदर्शनी-सेन्टर-शमशान, ढेर युक्तियां है)… जिससे नई-पवित्र दुनिया स्वर्ग-सतयुग-परिस्तान-सुखधाम के मालिक बनते (देवता, लक्ष्मी-नारायण रूप में)… फिर झाड़-सीढ़ी-चक्र हम जानते

2. तो चुस्त-स्टूडेंट बनना है (औरों को याद कर लड़ते नहीं रहना, हम तो देह-दुम को भी भूल कर्मातीत बनने वाले है)… बाकी रहे थोड़े समय में सबकुछ सफल कर अपनी श्रेष्ठ-तकदीर अवश्य बनानी है

चिन्तन

जबकि हमें दिव्य-तकदीर बनाने का स्वर्णिम-अवसर मिला है… तो सदा श्रीमत के आधार पर श्रेष्ठ-जीवन बनाते, हर बात में बाबा से बातें कर सच्चे रह, उनकी प्यार-भरी यादों से स्वयं को समप्न्न-सतोप्रधान बनाते… सदा शक्तिशाली शान्ति-प्रेम-आनंद से भरपूर रहने-करते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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