Checking ourself! | Sakar Murli Churnings 20-01-2020

Checking ourself! | Sakar Murli Churnings 20-01-2020

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. जबकि 100% पवित्रता-सुख-शान्ति सम्पन्न दैवी-सतयुगी स्वराज्य हमारे सामने है… और स्वयं righteous-निराकार रत्नागर ज्ञान-सागर पतित-पावन शिवबाबा हमें प्यार से अपना बनाकर ज्ञान-रत्नों से भरपूर करते

2. तो हम ब्राह्मण-बच्चों को भी अपनी जाँच करनी है (कितने पाप-पुण्य है, आज दुःख-कुदृष्टि तो नहीं गई), बाबा को चार्ट भेजने से खबरदार-उन्नति होती रहेंगी… प्यार से याद-योग में रह विकर्म-विनाश कर कमल-फूल समान पवित्र रहना है… सेवा के शौक द्वारा ज्ञान-दान, कल्याण, राह दिखाते रहना (प्रदर्शनी-बैज-पर्चेे-धन द्वारा)

चिन्तन

जबकी हम सब दुःख की अनुभूति से परे रहना चाहते (और कर्मों के ज्ञाता भी है), तो सदा अपने कर्मों पर पूरा अटेन्शन रहे… सदा श्रीमत पर ज्ञान-चिन्तन वा योग-अभ्यास द्वारा ऊँची शान्ति-प्रेम आनंद से सम्पन्न निर्विकारी-पावन स्थिति का अनुभव करते-कराते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Becoming an embodiment of solutions through powerful pledge! | दृढ़ प्रतिज्ञा द्वारा निवारण-स्वरूप | Baba Milan Murli Churnings 18-01-2020

Becoming an embodiment of solutions through powerful pledge! | दृढ़ प्रतिज्ञा द्वारा निवारण-स्वरूप | Baba Milan Murli Churnings 18-01-2020

1. आज स्मृति-समर्थी दिवस की बढ़ाई देते… स्नेह-सागर बाबा हम स्नेही-लवली-लवलीन बच्चों को मेरे-लाडले-सिरताज बच्चे कहते (हम भी मेरा-मीठा बाबा कहते, स्नेह-विमान वा फरिश्ता-रूप में पहुँच गए)… हमारी स्नेह-मोती-माला बाबा के गले में, उनकी स्नेह-भुजाएं-माला हमारे गले मेंं, हम उनके स्नेह में समा गये… एक-एक स्मृति सेकण्ड में समर्थी-नशा चढ़ाती:

  • पहली स्मृति, हम कल्प-पहले वाली भाग्यवान-आत्माएं है (जिससे परमात्म-बाप का नशा चढ़ता)…
  • दिल से निकला मेरा बाबा (जिससे सभी प्राप्ति-खज़ाना-पालना अपनी हो गई)…
  • जिस मेरेपन से सहजयोगी समर्थ-आत्मा मायाजीत बन गए

2. यह वर्ष न्यारा-प्यारा मेहनत-समस्या मुक्त बनने का है (तब ही स्वयं-औरों को मुक्ति दिला सकेंगे)… इसलिए ऐसे-वैसे वा करना-पड़ता के बहाने (पुरानी भाषा-चलन-अलबेलेपन) से परे रहना, इसका निवारण-समाधान है दृढ़-प्रतिज्ञा (भल झुकना-सुनना-सहना-बदलना पड़े)… तब ही पर्दे खुल-प्रत्यक्षता होंगी (सब अच्छे बनेंगे… अब सब बहुत दुःखी हैं), मन्सा-वाचा के साथ स्नेह-सहयोग-चेहरे-चलन के कर्म द्वारा (हमारी अवस्था देख सब ठीक हो जायेंगे)… जबकि बाबा के साथ चलना-राज्य करना है, तो सेवा में भी साथ रहना (सहयोगी-समान बनना, हाथों में हाथ)

पार्टियों से

  • (गुजरात)… सेवाधारी-सेवा बहुत है (वाचा-सेवा में पास है)… अब पावरफुल-मन्सा द्वारा मन्सा-सेवा सकाश देना (वे माइक बनेंगे)
  • (फूलों के श्रृंगार वालें)… स्नेह के कारण श्रृंगार-सुगन्ध और अच्छी हो गई, बाबा भी पदमगुणा-स्नेह देते
  • (डबल-विदेशी)… हम मधुबन के श्रृंगार, सबको प्यारे है (कोटों में कोई)… अब चैतन्य-म्युजियम बनना है (मस्तक-नैन-मुस्कान से सेवा).. सूक्ष्म रियलाइजेशन द्वारा विन कर नम्बर-वन बनना
  • (मधुबन) दूर बैठे भी सब पास है, फिर भी सम्मुख-मधुबन में गोल्डन-चांस है… मुरली से प्यार अर्थात् मुरलीधर से प्यार निभाने वाले
  • (याद-प्यार) हम श्रीमत-बाप के कदम पर चलने वाले सहजयोगी-नॉलेजफुल-पावरफुल स्वमान-सम्मानधारी है… इन्तजार समाप्त कर, इन्तजाम करने वाले

सार (चिन्तन)

जबकि स्नेह-सागर बाबा हम पर इतना स्नेह लुटाते… तो हम भी मुरली से प्यार वा मेरे-मीठे बाबा की स्मृति द्वारा समर्थ-सहजयोगी बन, दृढ़-प्रतिज्ञा द्वारा निवारण-स्वरूप हो… बाप-समान चैतन्य-म्युजियम बन, चेहरे-चलन-पावरफुल मन्सा द्वारा सबकी सर्वश्रेष्ठ-सेवा करते, नम्बर-वन बनते-बनाते, सतयुग बनाते रहे… ओम् शान्ति!


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Being royal! | Sakar & Avyakt Murli Churnings 18-01-2020

Being royal! | Sakar & Avyakt Murli Churnings 18-01-2020

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

साकार मुरली चिन्तन

1. जबकि स्वर्णिम नई दुनिया-राज्य हमारे सामने है (बापदादा भी हमें रूहानी-लव से ज्ञान-श्रीमत पढ़ाते)… तो सदा अन्तर्मुखी ज्ञान-सिमरण करते, बाबा को प्रीत-बुद्धि बन याद करे…

2. जिससे श्रेष्ठ-पावन-हीरा बनते, सदा खुश-नशे-उल्लास से सम्पन्न, देवताई-रॉयल मीठी-चलन वाले (जैसे कर्म हम करेंगे, हमें देख सब करेंगे… कभी तंग नहीं होना)… सबकी अलौकिक-सेवा करते रहना

अव्यक्त मुरली चिन्तन

1. प्योरिटी (संकल्प-स्वभाव-संस्कार में… ईर्षा-घृणा से परे) ही आधार है… यूनिटी का (स्वभाव-संस्कार मिलना, न मिले तो भी मिलाना, जैसे रास) … जबकि हम महारथी की लिस्ट में गिने जाते

2. ऐसा महाकाली-स्वरूप धारण करना है, कि कमज़ोर-वातावरण को भी परिवर्तन कर सके… फिर हम औरों को भी बिल्कुल स्पष्ट परखने वाले नॉलेजफुल बन जाएंगे

सार (चिन्तन)

तो इस 18 जनवरी को… सदा अपने परम-पवित्र मास्टर-सर्वशक्तिमान विश्व-महाराजन् स्वरूप को emerge कर… बाबा की मीठी-शिक्षाओं को अन्तरमुखी बन चिन्तन द्वारा स्वयं में समाते, उसकी प्रीत-भरी याद में डूबे, पावन-मीठे-हीरा बनते-बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Giving our heart to One! | Sakar Murli Churnings 17-01-2020

Giving our heart to One! | Sakar Murli Churnings 17-01-2020

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. इस संगम-स्कूल-ब्रह्मा द्वारा… निराकार-शिवबाबा-राम, पतित-पावन सद्गति-दाता कालों का काल ज्ञान-सागर नॉलेजफुल… हम रूहानी-ब्राह्मण-बच्चे निराकार-सालिग्राम-आत्मा को… ज्ञान-पढ़ाई सुनाते-समझाते

2. हम अन्तर्मुखी-शान्त हो कार्य करते भी, पिताव्रता-बलिहार हो, याद-योग में रहते… माया-वश औरों से दिल लगाकर सजा के पात्र नहीं बनना, भूलों को दोहराना नहीं… तो विकर्म-विनाश देहभान गलता, सतोप्रधान-खुशी से भरपूर होते… औरों से सेवा नहीं लेनी, हमें तो शौक होना चाहिए अंधों की लाठी बन आप-समान बनाने वा कल्याण करने की सेवा करने में (चित्र-प्रदर्शनी-मेले-सेन्टर-हॉल द्वारा)

3. जबकि विनाश सामने खड़ा है, तो scholarship ले माला में आने का लक्ष्य जरूर रखना है… सुख-शान्ति-सतोप्रधान दुनिया सतयुग-स्वर्ग के मालिक बनने

चिन्तन

जबकि बाबा को दिल देने में ही सर्व-प्राप्तियां है (वा औरों को दिल देने में सब नुकसान है)… तो आज सच्चे-दिल से स्वयं को शिव-साजन पर समर्पित-बलिहार कर, सारा दिन के अपने योग के चार्ट को दिन-प्रतिदिन बढ़ाते… सदा शान्ति-प्रेम-आनंद से भरपूर दिव्यगुण-सम्पन्न बनते-बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Remaining protected from Maya’s April Fool! | Sakar Murli Churnings 16-01-2020

Remaining protected from Maya’s April Fool! | Sakar Murli Churnings 16-01-2020

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. इस संगम-पाठशाला-प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा… ऊँच परमात्मा-ईश्वर-भगवान् निराकार-शिवबाबा ज्ञान सूर्य-नॉलेजफुल पवित्रता-सुख-शान्ति-प्रेम सागर… हम आत्मा-बिन्दी हीरो-हीरोइन पार्टधारी को… ज्ञान पढ़ाते-सिखाते

2. हम याद-योग करते (बाबा-बाबा करते, ओहो-प्रेम से बाते करते)… विकर्म-विनाश पावन-सतोप्रधान खुशी-नशे-गदगद हो… मास्टर-प्रेम-सागर की चलन द्वारा, रूहानी-पण्डा बन सबको मुक्ति-शान्तिधाम-घर का रास्ता दिखाने की सेवा करते… नई-पावन-सतोप्रधान दुनिया सतयुग-शिवालय-क्षीरसागर-राम राज्य के मालिक, पावन-दिव्यगुण सम्पन्न देवता (प्योरिटी-पीस-प्रासपर्टी-हेल्थ-वेल्थ सम्पन्न) बनते

चिन्तन

जबकि माया सदा हमें अप्रेल-फूल बनाना चाहती… तो सदा सुबह-अमृतवेला उठते ही बाबा की शक्तियों से ऐसा सम्पन्न बन, ऊँच frequency पर आ जाए, कि… माया कभी हमपे वार न कर सके, हम सदा शान्ति-प्रेम-आनंद से भरपूर सर्व-प्राप्ति-सम्पन्न रहते-करते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Being a spiritual nurse! | Sakar Murli Churnings 15-01-2020

Being a spiritual nurse! | Sakar Murli Churnings 15-01-2020

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. कल्प-कल्प संगम पर, ब्रह्मा-तन द्वारा… गुप्त पण्डा-शर्राफ-कलंगीधर परलौकिक-परमात्मा शिवबाबा… हम मीठे-लाड़ले-रूहानी ब्राह्मण-बच्चे-आत्माओं को… ज्ञान-पढ़ाई समझाकर-सिखाकर रिफ्रेश करते

2. हम ट्रस्टी बन याद-मन्मनाभव का पुरुषार्थ-अभ्यास करते (पॉइंट्स नोट-धारण कर, अपने से बातें-स्वदर्शन कर)… विकर्म-विनाश पावन-खुशी-नशे सम्पन्न बन सच्ची कमाई करते… अपने मीठे-भाईयों की रूहानी-सेवा कर सिखाना-समझाना-राह दिखाकर कल्याण-रिफ्रेश करना है (निमित्त-भाव से सेंटर खोलना भी अच्छा)

3. (वाया मुलवतन-घर-शान्तिधाम) जिससे नई दुनिया-सद्गति-वर्से स्वर्ग-सतयुग-सुखधाम-राम राज्य के मालिक… हीरे-समान पुण्य-आत्मा देवता बनते… हेल्थ (लम्बी-आयु), वेल्थ (सुख) सम्पन्न… हम इस झाड़ को जानते

चिन्तन

जबकि बाबा ने हमें सबकी सेवा-अर्थ रूहानी-नर्स बनाया है… तो सदा पहले अपने को ज्ञान-योग द्वारा माया के रोगों से मुक्त (सदा-खुश) रख… सबको अपने श्रेष्ठ अनुभवों-वाइब्रेशन द्वारा बाबा से जुड़ाकर सम्पूर्ण-स्वस्थ (शान्ति-प्रेम-आनंद से सम्पन्न) करते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Being spiritually non-violent! | Sakar Murli Churnings 14-01-2020

Being spiritually non-violent! | Sakar Murli Churnings 14-01-2020

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. इस कल्याणकारी-पुरूषोत्तम-संगमयुग पर… स्वयं निराकार-रूहानी-सर्वशक्तिमान् सुप्रिम-श्री श्री-ऊँच ते ऊँच परमात्मा-भगवान शिव बाप-टीचर-सतगुरू… दिव्य-अलौकिक जन्म ले, ब्रह्मा-तन द्वारा… हम मीठे-सिकिलधे बचो-अवतरीत आत्माओं-शिव शक्तियों को adopt-रिफ्रेश कर… पढ़ाते-सिखाते, श्रीमत देते

2. हम उनकी याद-योग द्वारा विकर्म-विनाश (मायाजीत बन), पावन-सतोप्रधान अतीन्द्रिय-सुख सम्पन्न बन… नई दुनिया-वर्से स्वर्ग-सतयुग-अमरलोक-सुखधाम के मालिक, सर्वगुण-सम्पन्न 16 कला सम्पूर्ण देवता श्री-लक्ष्मी-नारायण बनते (हेल्थ-वेल्थ-हैप्पीनेस-पीस prosperity सम्पन्न)

3. अंधों की लाठी बन सबका कल्याण करना है… पावन बन-बनाना ही सच्ची-रूहानी सेवा है, धन है तो हॉस्पिटल-cum-यूनिवर्सिटी अवश्य खोलनी है

चिन्तन

जबकि हम रूहानी डबल-अहिंसक आत्माएं है… तो पहले योगबल से भरपूर हो, माया के वार से परे रह… बहुत शीतल-हल्कि-शान्त अतीन्द्रिय सुख-आनंद सम्पन्न स्थिति का अनुभव कर…. सबको भी शुभ भावना-सकाश द्वारा सम्पन्न करते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Creating a royal fortune! | Sakar Murli Churnings 13-01-2020

Creating a royal fortune! | Sakar Murli Churnings 13-01-2020

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. इस संगम-पाठशाला-शिव जयंती में… ईश्वर-परमात्मा शिवबाबा-टीचर… हम ब्राह्मण-बच्चे आत्मा-एक्टर्स को… चक्र-राजयोग का ज्ञान देते, जिसका सिमरण कर हम बाबा की याद-मन्मनाभव में रह (भल माया भुलाए, हमारा विनाशी दुनिया में कोई ममत्व नहीं), पवित्र-हर्षित-खुश बनते… श्रीमत पर खुदाई-खिदमतगार बन सबका कल्याण करते (चित्र-बैज-प्रदर्शनी-सेन्टर-शमशान, ढेर युक्तियां है)… जिससे नई-पवित्र दुनिया स्वर्ग-सतयुग-परिस्तान-सुखधाम के मालिक बनते (देवता, लक्ष्मी-नारायण रूप में)… फिर झाड़-सीढ़ी-चक्र हम जानते

2. तो चुस्त-स्टूडेंट बनना है (औरों को याद कर लड़ते नहीं रहना, हम तो देह-दुम को भी भूल कर्मातीत बनने वाले है)… बाकी रहे थोड़े समय में सबकुछ सफल कर अपनी श्रेष्ठ-तकदीर अवश्य बनानी है

चिन्तन

जबकि हमें दिव्य-तकदीर बनाने का स्वर्णिम-अवसर मिला है… तो सदा श्रीमत के आधार पर श्रेष्ठ-जीवन बनाते, हर बात में बाबा से बातें कर सच्चे रह, उनकी प्यार-भरी यादों से स्वयं को समप्न्न-सतोप्रधान बनाते… सदा शक्तिशाली शान्ति-प्रेम-आनंद से भरपूर रहने-करते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Giving all burdens to Baba! | Sakar Murli Churnings 11-01-2020

Giving all burdens to Baba! | Sakar Murli Churnings 11-01-2020

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. स्वयं हाइएस्ट-ईश्वर पतित-पावन बागवान शिवबाबा-टीचर-सतगुरू… हाइएस्ट-प्रजापिता ब्रह्मा (ग्रेट-ग्रेट ग्रैन्ड फादर) द्वारा… हम मीठे-मीठे सिकीलधे-रूहानी बच्चों-आत्माओं को… ज्ञान-ईश्वरीय श्रीमत देते (बाबा रेसपॉन्सिबुलिति लेते)

2. और हम उन्हें चलते-फिरते प्रेम से याद कर… विकर्म-विनाश कमाई करते, लवली-खुशी-नशे में रहते (किसी को दुःख नहीं देते)… सबको फूल बनाने की सेवा करते… समझाते कैसे नई दुनिया-सद्गति-वर्से शिवालय-फूलों के बगीचे-सुखधाम का मालिक बन सकते (श्रेष्ठ-पावन-जीवनमुक्त देवता रूप में)

चिन्तन

जबकि बाबा हमारी जिम्मेवारी लेने तैयार है… तो सदा श्रीमत को सिरमाथे रख, बीच-बीच में बार-बार ज्ञान-चिन्तन से योग के प्रयोग करते… अपने बाबा के साथ कनेक्शन को लम्बा-एकरस बनाकर, सर्व प्राप्ति सम्पन्न रहते-करते… बेफिक्र बादशाह का जीवन अनुभव करते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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The power of unity! | Avyakt Murli Churnings 12-01-2020

The power of unity! | Avyakt Murli Churnings 12-01-2020

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. हम श्रेष्ठ वृत्ति-दृष्टि-बोल द्वारा उमंग-उत्साह दिलाने वाले विश्व-परिवर्तन की सेवा के आधार-स्वरूप निमित्त आत्माएं है… आधार-स्वरूप अर्थात् हर समय-संकल्प-कर्म जिम्मेवारी के ताजधारी… मीटिंग में आना अर्थात्‌ याद-सेवा-परिवार-स्नेह के सूत्र में बँधना

2. हम तो है ही आधर-उद्धार स्वरूप उदारचित्त-उदारदिल… उदारचित्त अर्थात्‌ बड़ी फ्राखदिल से प्राप्त गुण-विशेषता-शक्तियों द्वारा गुणवान बनाना, शुभ भावना देना, आदि… ऐसे फालो-फादर… तीन बातों से परे रहना:

  • ईर्षा… जो अग्नि-समान स्वयं-सर्व को परेशान करता
  • घृणा… जो स्वयं-सर्व को गिराती
  • Criticise… जो भी दुःख देना है (औरों को धक्का देकर गिराने जैसा)

जैसे प्लान अच्छे है, बाबा हमें भी अच्छे कहते.. अब सिर्फ एक बन एक को प्रत्यक्ष करना है (इसी की निशानी, सहयोग की एक उंगली देना दिखाते)

3. सेवा के सफलता की दो मुख्य भुजाएं है (जिससे चतुर्भुज सत्यनारायण-महालक्ष्मी साक्षात्कार-मूर्त बनते… बाबा हमारी मीटिंग में आते, उनके पास हम सबके मन के स्थिति की टेप-चित्र-वीडियो है)

  • एकता
  • एकाग्रता (निर्व्यर्थ-निर्विकल्प)

ऐसे गोल्डन-स्वरूप (गोल्डड-नचेहरा, चमकता मस्तक-आँखें… अभी-अभी (फरिश्ता-देवता) द्वारा गोल्डन दुनिया दिखाना

4. दिल के उमंग से सबमें भी उमंग आता, हम सबका एक ही उमंग है (किसी भी देश-zone में रहे)… इस एक शब्द (एकता) की अटल-प्रतिज्ञा करनी है (मर्यादा का कंगन, भण्डारी कि चिटकी)

5. जबकि एक रूहानी-गुलाब भी इतनी खुशबु फैलाता, तो यह संगठन कितना कमाल करेंगा (हम एक-एक सितारों में दुनिया है)… न समस्य बनना, न समस्या में अटकना (एसा निर्विघ्न-निर्विकल्प-निर्विकारी)

6. श्रेष्ठ संकल्प-उमंग की सिद्धि तो मिलती, अभी मंसा-सेवा केे ट्रायल करने है (जो चुम्बक-समान दूर से भी आकर्षित करता)… इसके लिए बनानी है लाइट-हॉउस माइट-हाउस स्थिति, माइट बन माइक का प्रयोग करना (ऐसी अवतार समान पॉवरफुल स्टेज)

चिन्तन

सदा अपने को विश्व-कल्याण के आधार-स्वरूप जिम्मेदार समझ… बाप-समान उदार-चित्त बन बड़े दिल से अपनी गुण-विशेषता-शक्तियां सबको लुटाते, अपने गोल्डन रूहानी-गुलाब स्वरूप वा सम्पूर्ण एकता-एकाग्रता द्वारा बाबा को प्रत्यक्ष करते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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