The importance of the present times! | (82nd) Avyakt Murli Revision 21-01-71 (1st)

The importance of the present times! | (82nd) Avyakt Murli Revision 21-01-71 (1st)

1. बाबा हमारे मस्तक पर ऊंचा भाग्य देख रहे… यही समय है वरदान प्राप्त करने का, यह चान्स पद्मापद्म भाग्यशाली आत्माओं को ही मिलता… अब नहीं तो कब नहींस्व-समय, इन दो शब्द को याद रखने से, श्रेष्ठ प्रारब्ध बनती

2. ड्यूटी से ऑफ होने के बाद, तुरन्त घर याद आना चाहिए… य़ह एक सम्बन्ध ही अनेक प्राप्तियां कराने वाला है… अपने को देह-भान से परे, अकाल-मूर्त आत्मा समझने से, अकाले मृत्यु-समस्याओं से परे रहेंगे

सार

जबकि बाबा नें हमें पद्मापद्म भाग्यशाली बना दिया है… तो सदा इस अमूल्य समय का लाभ लेते, अपने को अकाल-मूर्त आत्मा समझ एक बाबा के सर्व वरदान-प्राप्तियों से सम्पन्न बनते-बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Becoming a complete Brahmin! | Sakar Murli Churnings 28-11-2019

Becoming a complete Brahmin! | Sakar Murli Churnings 28-11-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. इस संगम पर स्वयं बाप-टीचर-सतगुरु-लिबरेटर-guide शिवबाबा हमें पढ़ाने-सद्गति करने की सेवा करते… हमारे बुद्धि में रचता-रचना का सारा ज्ञान है (विराट रूप, ब्रह्मा सो विष्णु, आदि)… हम सम्पूर्ण ब्राह्मण-कर्मातीत बन रहे, फिर नई-सतोप्रधान दुनिया में पहुँच जाएंगे

2. सारा दिन बुद्धि में ज्ञान घूमता रहे (ज्ञान-भक्ति का अन्तर, आदि)… हम छोटे-सितारे आत्माएं, अकाल-तख्त पर विराजमान हो अनादि पार्ट बजा रहे… अब याद द्वारा सतोप्रधान-श्रेष्ठ-देवता बन रहे (श्री श्री की श्रीमत से श्रेष्ठ), अभी ब्राह्मण है… सब को बाबा का परिचय देना है (अन्त में सब स्वीकार करेंगे)

चिन्तन

जबकि स्वयं भगवान् नें हमे adopt कर अपना श्रेष्ठ-पवित्र ब्राह्मण बच्चा बनाया है… तो सदा इस सर्वश्रेष्ठ ब्राह्मण कल्चर को दिल से अपनाते, श्रीमत अनुसार श्रेष्ठ-ईश्वरीय दिनचर्या को अपनाकर… सदा ज्ञान-चिन्तन वा बाबा-साथ द्वारा दिव्य-अलौकिक शान्ति-प्रेम-खुशी सम्पन्न स्थिति का अनुभव करते-कराते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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A golden vessel! | Sakar Murli Churnings 27-11-2019

A golden vessel! | Sakar Murli Churnings 27-11-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. इस संगम पर हम दूरांदेशी-बच्चें सब जानते:

  • यह 5000 वर्श का चक्र… पहले नई-दुनिया सुख में थोड़ी आत्माएं (हद) होती, फिर सब बेहद हो जाता, फिर हद-बेहद से पार घर जाते
  • भगवान्… ऊँच ते ऊँच परमात्मा बाप-नॉलेजफुल-सतगुरू, जो ब्रह्मा-मुख (आकाश) द्वारा वाणी चलाते, हमें विश्व का मालिक सर्व-प्राप्ति-सम्पन्न बनाते
  • (माला का उदाहरण) बाप-फुल के बाद युगल-मेरु (महाराजा-महारानी), फिर सारी माला
  • यह सब उल्टे झाड़ के रूप में समझना सहज है

2. यह सब धारण करने लिए चाहिए पवित्र-सोने का बर्तन… जिसके लिए एक बाप से बुद्धियोग चाहिए (उल्टे-सिलते विचारों से परे)… तब ही मास्टर नॉलेजफुल बन अविनाशी ज्ञान रत्नों का दान कर सकेंगे… बहुत मीठा कमल-फुल-समान बनना है, माया तो आएगी, हम याद द्वारा विजयी बनना है

चिन्तन

जबकि बाबा रोज़ हम पर अमूल्य-ज्ञान-रत्नों की वर्षा करते, तो इन सबको अपनी बुद्धि में समाने लिए… सदा नॉलेजफुल बन सच्ची-अविनाशी खुशी को चुनते, सदा ज्ञान-चिन्तन वा याद में बुद्धि को बिजी़ रख शान्ति-प्रेम-आनंद से सम्पन्न रहते-करते… अपने हर कार्य-व्यवहार को यादगार-कल्याणकारी बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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The powerful day! | (81st) Avyakt Murli Revision 18-01-71

The powerful day! | (81st) Avyakt Murli Revision 18-01-71

1. जितना आवाज़ से परे हो बोलेंगे, तो इस अव्यक्त-प्रवाह के कारण, सुनने वाले भी सेकण्ड में अव्यक्त स्थिति का अनुभव कर सकेंगे… जिसके फल-स्वरूप वह कभी भी हिलेंगे नहीं, वारिस-क्वालिटी बनेंगे… यही है सेवा का प्रत्यक्ष-प्रमाण. यही नवीनता लानी है… इसके लिए मंथन के साथ मग्न अवस्था चाहिए

2. य़ह दिन है आवाज से परे जाने का, स्मृति सो समर्थी दिवस… स्नेह द्बारा बाबा से अनेक शक्तियां के वरदान लेने का दिन, सिर्फ इन्हें कैच करना है… यह दिन है सहज याद का

3. चेक करना है… कहाँ तक श्रेष्ठता-सम्पूर्णता वा सबसे समीपता, सम्बन्धों में सन्तुष्टता-शूरवीरता आई है… ऎसा ट्रान्सपेरेंट बनना है, कि देह के अन्दर विराजमान आत्मा वा आत्मिक स्थिति ही दिखाई दे

सार

तो चलिए आज सारा दिन… बाबा से सर्व शक्तियों के वरदान को कैच कर, सदा आवाज़ से परे स्थिति का अभ्यास कर… फिर सेवा में आते, सब को अव्यक्त स्थिति का अनुभव कराते, वारिस क्वालिटी बनते-बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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The wonder of Shrimat! | Sakar Murli Churnings 26-11-2019

The wonder of Shrimat! | Sakar Murli Churnings 26-11-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. आसुरी मत नीचे गिराती (जो सबसे मिलती), और सुप्रीम-नॉलेजफुल बाप-गुरू की ईश्वरीय-श्रीमत (याद द्वारा) दिव्यगुण-सम्पन्न बनाती, ऊंचा चढ़ाती (श्रेष्ठ-पुण्य आत्मा देवता बनाती, नई-सतोप्रधान दुनिया स्वर्ग-सुखधाम-सद्गति में, 21 जन्म पद्मापद्म-भाग्यशाली)

2. सहज-याद के बीच माया आएंगी, उसमें भी योग के पुरूषार्थ-बल से ही विजय है (हमें आत्मा-परमात्मा का सम्पूर्ण-सत्य ज्ञान है, और ब्रह्मा-बाबा से तो कम ज़िम्मेवारी है)… साथ में कमल-फुल समान रहना है (धन्धा, आदि करते भी); हमारी विजय निश्चित है (हम सारे ड्रामा को जानते)

3. हमारे संगठित शुभ-भावनाओं के सहयोग-बल से ही सेवाओं में सफलता है, ऐसे हर कदम में पदम जमा करते जाना है

चिन्तन

जबकि सिर्फ एक श्रीमत से ही क्या से क्या बन, कहाँ से कहा पहुंच जाते… तो सदा हर संकल्प-कर्म में बाबा वा उसकी श्रीमत को सिरमाथे रख, सदा ज्ञान-चिन्तन वा बाबा की प्यारी-मीठी यादों में डूबे रह, शान्ति-प्रेम-आनंद से भरपूर सर्व प्राप्ति सम्पन्न बनते-बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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The power of checking! | Sakar Murli Churnings 25-11-2019

The power of checking! | Sakar Murli Churnings 25-11-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. हमें मंत्र तो मिल गया है… घर-गृहस्थ में भी जितना देह-अभिमानी बन (आत्मा ही सबकुछ करती, इसलिए पुराने-स्थूल का लगाव न हो)… और बाबा को याद करते (मीठी बाते, चिन्तन, आदि)… उतना वर्सा मिलता (खुशी रहती, पावन बनते)

2. तो स्वयं की जांच करनी है (कितना सम्पन्न बने है, क्या कमी-खामी-भूत-अवगुण है)… क्योंकि हमारा लक्ष्य बहुत ऊंचा है (परफेक्ट बन, लक्ष्मी को वरना, सुखधाम में)

3. खूब सेवा करनी है (मन्दिरों-गांवों में, चित्र-सहित)… सेवा तो बहुत है, सिर्फ शौक चाहिए… योग में रहने से ही तीर लगता, बाकी सबका अपना पार्ट है, माया भी अजगर-डुबन है

चिन्तन

जबकि सर्व प्राप्तियों के सागर बाबा (और उनसे शक्ति लेने की सर्वश्रेष्ठ विधि) हमारे सामने है… तो सदा चेकिंग द्वारा सभी व्यर्थ-leakage को बन्द कर, अपनी आत्मा-रूपी गागर को भरपूर-सम्पन्न करते रहे… तो सदा हमारी स्थिति शान्ति-प्रेम-आनंद से भरपूर-सम्पन्न रह… हमारे वाइब्रेशन-चेहरे-चलन से स्वतः सेवा होंगी, हम सबकी जीवन को सर्वश्रेष्ठ बनाते, सतयुग बनाते रहेंगे… ओम् शान्ति!


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Summary of all 1970 Murlis | Coming closer to perfection!

Summary of all 1970 Murlis | Coming closer to perfection!

1. जबकि हम मास्टर नॉलेजफुल आत्माएं है, तो सदा अपने को सम्पूर्ण समर्पित (विवाहित) समझ, श्रीमत पर… मास्टर सर्वशक्तिमान की दृढ़ता द्वारा समेटने की शक्ति से सेकण्ड में आवाज़ से परे जाने का अभ्यास करते रहे… जिसे सहज करने अपनी श्रेष्ठ स्मृतियों का टाइम-टेबल, appointment डायरी, दिनचर्या फिक्स रखे… फिर धीरे-धीरे, चलते-फिरते बिन्दु-रूप में रहना भी सहज हो जाएंगा

2. तब कहेंगे सम्पूर्णअव्यक्त श्रेष्ठ स्टेज के समीप (मार्जिन समाप्त)महारथी, मायासंस्कारदेह भानसर्कस के खेल पर विजयी

3. जिससे स्वतः हमारी सेवा दर्पणप्रोजेक्टरलाइट हाउस समान होंगी, हम शक्ति-स्नेह के बैलेन्स, दिव्य-दृष्टि से सम्पन्न कामधेनु आकर्षण-मूर्त बन जाएंगे… बाबा को प्रत्यक्ष करने वाले

4. हमारा जीवन ही उत्सवहोलीदिवाली बन, हम सदा अपने सम्पूर्ण स्वरुप को देखते, विश्व मेकरराजन् बन, समय का सदुपयोग करतें रहेंगे

सार का सार (चिन्तन)

समय के महत्व को जान… सदा अपनी श्रेष्ठ स्मृतियों का टाइम-टेबल फिक्स रख, बार-बार सेकण्ड में आवाज़ से परे जाने का अभ्यास करते, अपने सम्पूर्ण-अव्यक्त स्थिति के समीप पहुंचते रहे… तो हमारा सम्पूर्ण-जीवन उत्सव बन, हम लाइट-हाउस समान सबकी सेवा करते… विश्व महाराज् बनते-बनाते, सतयुग बनाते रहेंगे… ओम् शान्ति!


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Revealing the Truth! | Avyakt Murli Churnings 24-11-2019

Revealing the Truth! | Avyakt Murli Churnings 24-11-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. सत् बाप-टीचर-गुरू बाबा ने… हमें सत्य-अविनाशी ज्ञान-प्राप्ति-स्नेह-परिवार से अपना शक्ति-स्वरुप बच्चा बनाया है… ऐसे सबको बनाना है

2. स्नेह-सम्पर्क वा शान्ति-राजयोग का आकर्षण तो अच्छा है, अब कहे यह एक ही सत्य बाप का सत्य रास्ता है (तब विश्व-शान्ति वा प्रत्यक्षता होंगी)… जबकि अपना ही श्रेष्ठ-पवित्र स्टेज-वातावरण है, तो बाबा के सत्य ज्ञान का स्पष्ट परिचय देना है (कैसे यह नया-विशेष ज्ञान, श्रेष्ठ कर्तव्य है, नया युग लाने वाला… भगवान् ही यह कर सकता… निर्माणता-रहम से)… अपने अनुभव-प्राप्तियों के आधार से समझाना है:

  • सर्वव्यापी के बदले… कैसे एक रूप से याद करने से सर्व प्राप्ति होती
  • कैसे परमधाम में बाबा को याद करने से बुद्धि सहज एकाग्र होती
  • बाबा से सम्बन्ध द्वारा प्राप्तियां… कैसे भगवान् ही सत्य बाप-गुरू हो सकता
  • ड्रामा की नई पॉइंट्स… कैसे सतयुग आना है

अन्त में चार्टर आदि देने के साथ, बातों में इस ज्ञान की नवीनता भी स्पष्ट करनी है, आध्यात्मिक ज्ञान-शक्ति क्या चीज़ है, यह डायरेेक्ट भगवन् का कार्य चल रहा… नम्रता से, ताकि दर्द भी न हो, खुशी से नाचने लगे… हल चल गया, है, अब बीज डालना है

पार्टियो से

1. हम ब्रह्मा-बाप के आह्वान-स्नेह-सहयोग से जन्में अच्छे-तन्दुरस्त बच्चें है… इसलिए हमारा ब्रह्मा-बाबा से विशेष स्नेह है, चित्र में चैतन्यता, आकार में साकार अनुभव होता… उन जैसी सेवा की लगन है

2. जुबली भी गोल्डन, और स्वयं भी गोल्डन (अर्थात्‌ स्व-सेवा की उन्नति का बैलेन्स), तब ही ब्लैसिंग ले-दे सकते… प्लान रूपी बीज में स्व-स्थिति की शक्ति भरने से ही श्रेष्ठ फल निकलेगा

3. हम कहाँ भी रहते, हर संकल्प-सेकण्ड सेवा ही है…. हमको देखने से ही बाबा याद आते, ऐसे सफलता-मूर्त हो जाना है… सेवा का चक्कर लगाना अर्थात्‌ सब की उन्नती कराना, बाबा से प्राप्त स्नेह-सहयोग की शक्ति सबको बांट, उमंग-उत्साह में उड़ाना… साथ में नवीनता-रमणीकता-टोटके भी हो

सार (चिन्तन)

जबकि बाबा की प्रत्यक्षता तो निश्चित भावी है… सदा अपने सत्य स्वरुप में स्थित हो, सत्य बाप से सर्व प्राप्तियां अनुभव करते… स्व-सेवा के बैलेन्स द्वारा सब को स्नेह-सहयोग की शक्ति बांटते, अपने अनुभव-प्राप्तियों द्वारा बाबा के सत्य ज्ञान को प्रत्यक्ष करते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Achieving the highest position! | Sakar Murli Churnings 23-11-2019

Achieving the highest position! | Sakar Murli Churnings 23-11-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. हम लकी सितारे जितना आत्मा समझ सर्वशक्तिमान बाबा को याद करते (बाकी सब भूल)… उतना पवित्र बन, मुक्ति-जीवनमुक्ति में पहुँच जाते (नई-सतोप्रधन दुनिया स्वर्ग-शिवालय के मालिक, 21 पीढ़ी सुख-धन सम्पन्न)…

2.

  • जितना पुरूषार्थ, उतना पद… (हमें तो पास विद् आनर लक्ष्मी-नारायण बनना है)
  • इसलिए चार्ट रखना है… (हमारा बाप-टीचर-सतगुरु बैठा है; हमें पावन बनने का रास्ता दे, फिर साथ ले जाने)
  • फॉलो फादर करना है

3. हम सारे चक्र को जानते (तो अच्छे से खूब सेवा करनी है… इसके लिए होशियार बनना है, चित्र तो हमारे पास है, गाँव-गाँव में सेवा करनी है)

चिन्तन

जबकि हमें विश्व का सर्वश्रेष्ठ पद लक्ष्मी-नारायण बनने का चान्स मिला है… तो सदा श्रेष्ठ संकल्पों में रमण करते, दिन में बार-बार बुद्धि की तार बाबा से जोड़ते… सदा अपने अन्दर शान्ति-प्रम-आनंद की ऊर्जा बढ़ाते, सहज परिवर्तन अनुभव करते, सदा खुश रहते-करते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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The single wonder of the world! | Sakar Murli Churnings 22-11-2019

The single wonder of the world! | Sakar Murli Churnings 22-11-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. इस संगम पर, हम श्रीमत पर अपने को आत्मा समझ निराकार पतित-पावन शिवबाबा की सहज याद-योग में ज्ञान-सहित बैठते… अर्थात्‌ हम जानते इससे पाप-कट पावन-सतोप्रधान (श्रृंगारे हुए कंचन-सच्चा सोना) बन… नई-पावन दुनिया स्वर्ग के मालिक बनते, लम्बी आयु-नेेचुरल ब्यूटी वाले-धनवान पद्मापद्म भाग्यशाली श्रेष्ठाचारी देवता-रूप में … हम सारे चक्रड्रामा को जानते

2. तो बाबा का हाथ पक्का-एकरस पकड़ कर रखना है… याद में रहने से ही माया से बच सकते… सबकी सेवा करते रहना है

3. माया मेहनत कराती, बाबा की छत्रछाया मौज में रखती (विजयी होने का सम्पूर्ण निश्चय)… ऐसे मौज में रहना-करना ही सच्ची सेवा है

चिन्तन

जबकि हम सच्चे-सच्चे वन्दर ऑफ वर्ल्ड सतयुग में जा रहे (जहां सम्पूर्ण सुख है)… तो सदा अपने को दिव्य आत्मा समझ, ज्ञान-योग-ईश्वरीय मर्यादा-सम्पन्न दिनचर्या बनाकर… सदा दिव्यता-शान्ति-प्रेम-आनंद से भरपूर स्थिति बनाकर हर कार्य करते, सब के लिए प्रत्यक्ष प्रमाण बन आप-समान बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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