The spiritual business! | Sakar Murli Churnings 12-11-2019

The spiritual business! | Sakar Murli Churnings 12-11-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. जबकि बाबा आए है… हमें नई दुनिया-सतयुग का वर्सा देने… पूज्य-जीवनमुक्त सम्पन्न-सम्पूर्ण देवता-शहजादा के रूप मे, सोल्वन्त-सुखी राज्य

2. तो हमारा भी फर्ज है, इस ज्ञान को उगारते… चलते-फिरते कार्य-व्यवहार करते, बाकी सब भूल, अपने को आत्मा समझ (जो ही पार्ट बजाती) पतित-पावन सर्वशक्तिमान बाबा को याद करना… जिस शक्ति से ही पाप-कट हो, पावन-सतोप्रधान बनते…

3. दूसरा फर्ज है… सबकि सेवा करना (अर्थात्‌ रास्ता दिखाना, बाबा का परिचय देना, भूं-भूं करना)… अन्त में तो बहुत आएंगे…

4. बाकी समय थोड़ा है… तो अन्तर्मुख हो अपने याद के चार्ट को चेक करते रहना है… हम तो है ही बाबा के बच्चें-आशिक

चिन्तन

जबकि बाबा ने हमें याद का रूहानी धंधा सिखाया है… तो सदा इनसे होने वाली सर्वश्रेष्ठ प्राप्तियों को ध्यान में रखते, थोड़ा समय निकाल याद में अवश्य बैठे… और ज्ञान-योग के थोड़े चिन्तन-अभ्यास द्वारा सर्व परमात्म गुण-शक्तियों को स्वयं में समाकर, सारा पुराना-पन स्वाहा कर… बहुत सहज आगे बढ़ते-बढ़ाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


Recent Sakar Murli Churnings:

Thanks for reading this article on ‘The spiritual business! | Sakar Murli Churnings 12-11-2019’

The love for Yaad & Seva! | Sakar Murli Churnings 11-11-2019

The love for Yaad & Seva! | Sakar Murli Churnings 11-11-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. जबकि स्वयं निराकार पतित-पावन मोस्ट beloved शिवबाबा ने हमें, ज्ञान वा माया को वश करने का महामंत्र मन्मनाभव दिया है… जिससे नई दुनिया-स्वर्ग, लक्ष्मी-नारायण-देवताओं का राज्य स्थापन होता, पवित्रता-सुख-शान्ति हेल्थ-वेल्थ-हैप्पीनेस सम्पन्न… हम सारे चक्र को जानते, बाकी समय बहुत थोड़ा है

2. तो सदा श्रीमत पर याद-सेवा में मस्त रहना है, तो बाबा भी हमेंं याद करते, यह कितनी खुशी की बात है… सदा फोलो फादर

चिन्तन

जबकि बाबा ने हमें सर्वश्रेष्ठ ईश्वरीय-जीवन प्रदान किया है, तो सदा अपनी दिनचर्या को ज्ञान-योग-सेवा सम्पन्न बनाते… सम्पर्क में शुभ भावना-खुशियां बांटते, परिस्थिति बाबा को सौप, बाबा से शक्तियां लेते रह… बहुत सहज आगे बढ़ते-बढ़ाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


Recent Sakar Murli Churnings

Thanks for reading this article on ‘The love for Yaad & Seva! | Sakar Murli Churnings 11-11-2019’

Spiritual Significance of Holi! | Avyakt Murli Churnings 10-11-2019

Spiritual Significance of Holi! | Avyakt Murli Churnings 10-11-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. हमारे संगमयुगी-जीवन का हर दिन उमंग-उत्साह-खुशी सम्पन्न है (हम ज्ञान-अमृत पीते, खुशी में नाचते, सुख-स्नेह के गीत गाते)… मनाने के साथ होली बनते-बनाते

2. होली विशेष तीन-प्रकार से मनाते:

  • जलाने की… अर्थात्‌ पुराने स्वभाव-संस्कार को योग-अग्नि में जलाना
  • फिर रंगों से खेलना… अर्थात्‌ बाप के संग-रंग में रंग बाप-समान बन जाना, ज्ञान-गुण-शक्तियों सहित… जो अविनाशी जन्म-जन्म चलेंगे
  • फिर मंगल-मिलन मनाना… अर्थात्‌ आत्मा-परमात्मा का मिलन, जिसमें हम कम्बाइन्ड हो जाते

3. और सूक्ष्म बातें:

  • होलिका जलने की कहानी… अर्थात्‌ माया को जलाना
  • खुशी से मनाते… क्योंकि हम खुश रहते
  • हल्के हो जाते… क्योंकि हम डबल-लाइट रहते
  • पुराना-पन भूलते… क्योंकि 63 जन्म का पुराना-पन हम भूलते
  • समान-भाव से मनाते (बच्चें-बूढे सब)… क्योंकि हम देह-भान से परे, भाई-भाई की स्मृति में स्थित होते
  • दुश्मनी भूल जाते… क्योंकि हमने पुराने स्वभाव-संस्कार (आत्मा के दुश्मन) को योग-अग्नि में भस्म कर दिया है
  • पिचकारी उड़ाते… क्योंकि हम रूहानी-दृष्टि द्वारा सुख-शान्ति-खुशी-प्रेम लुटाते… एसा रंग कोई मिटाना नहीं चाहते

जिनके हर कर्म मनाये जाते (हम)… वह खुद कितने महान होंगे!

4. पुराना-पन जरा भी याद न आए… हमारा तो सब नया है, नया जन्म-दुनिया-संसार-संस्कार-बातें… नयी भाषा, रीति-रस्म, सम्बन्ध-सम्पर्क… नये गीत (हाय-हाय, क्यों-क्या से परे… सदा अहो-वाह)

5. हमारे जैसे मौजों की जीवन, कोई वर्ग की नहीं:

  • हम बेफिक्र-बेगमपुर-बीन कोड़ी बादशाह है
  • मेहनत समाप्त हो गई, मोहब्बत में
  • चिंता के बदले शुभ-चिन्तक
  • सोने की गोली के बदले… बाबा के साथ सोना

अन्त में सब साथ हो जाएंगे… सिर्फ बाबा की touching सेकण्ड में कैच करने, बुद्धि की लाइन क्लियर रखनी है… औरों को शक्ति देने भी शायद रुकना पड़े, सब श्रीमत पर, लगाव नहीं

हमारे स्नेह-उत्साह-प्रतिज्ञा के पत्रों प्रति

1. बाबा हमें “जैसे बाप, वैसे हम” का वरदान देते (हर संकल्प-कर्म पहले चेक करना बाप-समान है, तो शक्तिशाली-सफल रहेंगे, सफलता हमारे गले की माला है)… बाबा सदा हमारी विशेषताएं-भाग्य के गीत गाते, याद-प्यार देते

2. हम बाबा की छत्रछाया में है (माया कुछ नहीं कर सकती), सिर्फ छोटी बातों को बड़ा नहीं बनाना… इसके लिए सदा ऊपर (बाबा के साथ) रहना है, तो सेफ रहेंगे

सार (चिन्तन)

जबकि होली हमारी ही सर्वश्रेष्ठ खुशियों-भरी जीवन का यादगार है… तो सदा माया की पुरानी बातों को भूल, बाबा की छत्रछाया-संग-मोहब्बत में रंग बाप-समान बन… सदा शान्ति-प्रेम-आनंद के गीत गाते-नाचते, सबको दृष्टि-शुभ भावना द्वारा बांटते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


Recent Avyakt Murli Churnings

Thanks for reading this article on ‘Spiritual Significance of Holi! | Avyakt Murli Churnings 10-11-2019’

Valuing the Murli! | Sakar Murli Churnings 09-11-2019

Valuing the Murli! | Sakar Murli Churnings 09-11-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. हमारी याद wonderful है, जो एक साथ निराकार-सुप्रीम पतित-पावन बाप-टीचर-सतगुरू को याद करते (अपने को अकाल-तख्तनशीन आत्मा समझ)… जो बाबा हमें वर्से में शिवालय-विश्व का मालिक बनाते (ऊँच-देवता लक्ष्मी-नारायण के रूप में), जहां सच्ची पवित्रता-शान्ति होंगी… हम सारे चक्र-ड्रामा को जानते, बाबा के डायरेक्शन पर conference-निमंत्रण द्वारा भी सब की सेवा करनी है

2. जबकि बाबा हमें यह सर्वश्रेष्ठ पढ़ाई-स्प्रीचुअल नॉलेज देते… तो मुरली कभी मिस न हो (उसमें नई-नई पॉइंट्स आती, योग के साथ ज्ञान भी जरूरी है, मुरली द्वारा हम बाबा से सम्बंध अनुभव करते)… ज्ञान-चिन्तन द्वारा सदा हर्षित-अतीन्द्रिय सुख-नशे में रहना है

चिन्तन

जबकि हमें सर्वश्रेष्ठ ज्ञान-खजा़ना मिला है, तो सदा इसका पूरा regard रख… मुरली को बहुत ध्यान से सुन, बार-बार पढ़ते, सारा दिन उसके हर पॉइंट का मनन-चिन्तन करते, उसका स्वरुप बन… बहुत सहज बाबा की प्यार-भरी यादों में, योगयुक्त शान्ति-प्रेम-आनंद से भरपूर बन… सबको खुशियां बांटते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


Recent Sakar Murli Churnings:

Thanks for reading this article on ‘Valuing the Murli! | Sakar Murli Churnings 09-11-2019’

The sweetest medicine! | Sakar Murli Churnings 08-11-2019

The sweetest medicine! | Sakar Murli Churnings 08-11-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. हम शान्त-स्वरुप होते भी शान्ति मांगते थे, क्यूँकी पाँच-विकार अन्दर भरे थे… अब संगम पर स्वयं अविनाशी-वैद्य ज्ञान-सागर बाप-टीचर-सतगुरू शिवबाबा हमें मन्मनाभव की मीठी-दवाई देते (अपने को निराकार-आत्मा समझ, बाबा को याद करना)… जिससे ही पावन-सतोप्रधान-सुखी बनते (चेहरा खुशी से खिला रहता), जो संस्कार फिर 21 जन्म चलते नई-डीटी दुनिया (सद्गति) में

2. भल माया आए, हम तो श्रीमत पर सारे विश्व को चेंज करने वाले है (तो सदा श्रीमत पर चलते रहना है)… अपने आत्मा-भाइयों की सेवा कर, उनका कल्याण अवश्य करना है

चिन्तन

जबकि हमें मन्मनाभव की मीठी दवाई मिली है… तो सदा इसी याद की यात्रा के अनुरूप हमारी ईश्वरीय-दिनचर्या बनाते, सदा ज्ञान-चिन्तन करते, बाबा की मीठी यादों में डूबे रह… सदा शान्ति-प्रेम-आनंद से भरपूर, सर्व प्राप्ति सम्पन्न बनते-बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


Recent Sakar Murli Churnings:

Thanks for reading this article on ‘The sweetest medicine! | Sakar Murli Churnings 08-11-2019’

The spiritual talent! | Sakar Murli Churnings 07-11-2019

The spiritual talent! | Sakar Murli Churnings 07-11-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. जैसे साइंस वाले चांद तक जाते… हमारा भी योग का रूहानी हुनर हैै:

  1. वे चांद तक जाते… हम उससे भी परे (मुलवतन-स्वीट हॉम शान्ति-मुक्तिधाम) जाते
  2. उन्हें बहुत खर्चा होता… हम कोई खर्चा नहीं
  3. उन्हें जीवन का डर रहता… हमारा तो शरीर यहीं रहता
  4. उन्हें बहुत सौगातें मिलती… हमें तो 21 जन्म स्वर्ग के बादशाही की prize स्वयं बाप देते
  5. वह रॉकेट में जाते… हम तो खुद ही आत्मा-रूपी रॉकेट है
  6. वह आवाज़ करते… हम शान्त रहते
  7. वह है जिस्मानी science का हुनर… यह है रूहानी silence का हुनर
  8. वह खोज करने जाते, प्लॉट बनाने का सोचते… हमें तो सम्पूर्ण ज्ञान है (यह सिर्फ बेहद-माण्डवे की बत्तियां है)

2. इस संगम पर स्वयं सुप्रीम-बाप हमें यह highest ज्ञान-पढ़ाई-शिक्षा देते… जिससे हम सद्गति-जीवनमुक्ति पाते, स्वर्ग में, दिव्यगुण-सम्पन्न देवता लक्ष्मी-नारायण रूप में

3. मुख्य है योगबल से पावन बनना (भल माया आए)… हमारी तो बाबा से लव marriage है (वह हमें 21 जन्म की बादशाही देते)… बाकी थोड़ा समय है, सब की बहुत अच्छे से सेवा करनी है

चिन्तन

जबकि हम राजयोग का सर्वश्रेष्ठ हुनर जानते… तो सदा अपने जीवन को सर्वश्रेष्ठ धारणा-मूर्त बनाएं, विधिपूर्वक योग का अभ्यास कर, उनकी सर्व प्राप्तियों से सम्पन्न, सदा दिव्यता-शान्ति प्रेम-आनंद से भरपूर रहते-करते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


Recent Sakar Murli Churnings:

Thanks for reading this article on ‘The spiritual talent! | Sakar Murli Churnings 07-11-2019’

Checking our quality of Yog! | Sakar Murli Churnings 06-11-2019

Checking our quality of Yog! | Sakar Murli Churnings 06-11-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

हम सम्पूर्ण-ज्ञानी ब्रह्माकुमार है… तो जबकि श्रीमत पर अपने को आत्मा समझ पतित-पावन बाबा को याद करने से ही पावन-देवता बनते, ऊँच पद वाले (सचखण्ड-गार्डन ओफ अल्लाह-डीटी वर्ल्ड में)… तो जबकि समय निकाल हम योग में बैठते, चेक-नोट करना है कितना समय बाबा से बुद्धि लगी रही (उतनी ही देर पावन बनते), और कितनी-कहाँ बुद्धि भटकी, तब ही अन्त में सम्पूर्ण-कर्मातीत (दुःखों से परे, विश्व-मालिक बनने लायक) बनेंगे… भारीपन बाबा को सुनाकर हल्का हो जाना है

चिन्तन

जब भी योग में बैठे… सदा आत्म-अभिमानी बनने के श्रेष्ठ संकल्प-दृश्यों द्वारा शक्तिशाली आत्म-अभिमानी स्थिति बनाए… बाबा को बहुत प्यार से देखते-बातें करते, उससे बुद्धि का लिंक जुड़े रख, उनकी शक्तियां मेहसूस कर, सारा पुराना-पन स्वाहा कर दे… भिन्न-भिन्न योग-अभ्यासों द्वारा नवीनता बनाए रख, बहुत शक्तिशाली बनते-बनाते (रोज़ चार्ट चेक कर उन्नति अनुभव करते), सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


Recent Sakar Murli Churnings:

Thanks for reading this article on ‘Checking our quality of Yog! | Sakar Murli Churnings 06-11-2019’

The proof of purity! | Sakar Murli Churnings 05-11-2019

The proof of purity! | Sakar Murli Churnings 05-11-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. सिर्फ ओम् शान्ति से भी स्वधर्म-घर-वर्सा-बाप (अर्थात्‌ सारा ज्ञान) याद आ जाता.. स्वयं पतित-पावन भगवान् हमें नॉलेजफुल-पवित्र-दिव्य-शान्त स्वरुप बनाते (श्रेष्ठ कैरेक्टर, इस संगम की ऊँच ते ऊँच पढ़ाई से)… जिससे ही नई-पावन दुनिया स्वर्ग-राम राज्य (सद्गति-दिन) में मालिक बनते… बहुत मीठे-सुन्दर-ऊँच लक्ष्मी-नारायण के रूप में

2. तो बहुत-बहुत खुशी में रहना है (कहीं ममत्व न रहे, इस डर्टी-दुनिया को तो आग लगनी है), सच्चा पारस-बुद्धि हंस बनना है… पवित्रता का सबूत अवश्य देना है (जो हमारे लिए बहुत सहज है योगबल से, और 21 जन्म की जबरदस्त लॉटरी से)

चिन्तन

जबकि हम आन्तरिक पवित्रता से सम्पन्न आत्माएं है… तो सदा अपने:

  • श्रेष्ठ संकल्प
  • दिव्य वाइब्रेशन
  • हर्षित चेहरे
  • मीठे बोल
  • सुखदाई स्वभाव
  • रॉयल व्यवहार
  • श्रेष्ठ शान्ति-प्रेम-आनंद की स्थिति
  • शुभ-भावना सम्पन्न वृत्ति
  • विशेषताएं देखती दृष्टि
  • अलौकिक स्मृतियां
  • शक्तिशाली धारणाओं

द्बारा हर कदम अपनी पवित्रता (वा पढ़ाने वाले बाप) का स्वतः सबूत दिखाते… सबको आप-समान श्रेष्ठ बनने की प्रेरणा दिलाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


Recent Sakar Murli Churnings:

Thanks for reading this article on ‘The proof of purity! | Sakar Murli Churnings 05-11-2019’

A godly Intellect! | Sakar Murli Churnings 04-11-2019

A godly Intellect! | Sakar Murli Churnings 04-11-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. इस संगम पर स्वयं सत्य-चैतन्य-अमर-बीजरूप शिवबाबा हमें टीचर बनकर पढ़ाते-श्रीमत देते, तो हमें भी सब को समझाना है, कि… एक बाप के बच्चें, हम सब आत्माएं भाई-भाई है, शरीर द्वारा पार्ट बजाते… अभी बाबा आए है, हम आत्माओं को फिर से पतित से पावन बनाने, जिससे हम नई-सतोप्रधान दुनिया स्वर्ग-हेवन-वैकुण्ठ के मालिक बनेंगे, श्रेष्ठ-निर्विकारी-देवता रूप में

2. जबकि बाबा ने हमें ईश्वरीय-बुद्धि दी है, तो सदा स्मृति में रहें, हम पढ़ रहें भगवान् से… देह-सहित सबकुछ भूल, अपने को आत्मा समझ एक बाबा को याद करना है (भल माया आए), तब ही पाप-कट हो पावन-सतोप्रधान बनेंगे… बाबा को फोलो कर, खूब सेवा करनी है

चिन्तन

जबकि बाबा न हमें सही-गलत की सत्य समझ, ईश्वरीय-बुद्धि दे दी है… तो सदा उठते ही अपने को श्रेष्ठ संकल्पों से एसा चार्ज कर ले, कि सारा दिन ही बहुत सहज व्यर्थ-मुक्त रहे… बीच-बीच में भी मुरली के कुछ वाक्य पढ़ते-चिन्तन करते, उसका स्वरूप बन… श्रेष्ठ शान्ति-प्रम-आनंद से सम्पन्न स्थिति का अनुभव करते-कराते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


Recent Sakar Murli Churnings:

Thanks for reading this article on ‘A godly Intellect! | Sakar Murli Churnings 04-11-2019’

Being an invaluable jewel! | Avyakt Murli Churnings 03-11-2019

Being an invaluable jewel! | Avyakt Murli Churnings 03-11-2019

1. हम रत्नागर-बाप के अलौकिक-अमूल्य रत्न है (सारे विश्व के खज़ानों से भी ज्यादा मूल्यवान)… क्योंकि हम है डायरेक्ट ईश्वरीय सन्तान (जिस ईश्वर का सर्वश्रेष्ठ नाम-महिमा-धर्म-कर्म है), उसने कहा है तुम मेरे, मैं तेरा… तो भक्ति में भी हम रत्नों की विघ्न-विनाशक रूप में वैल्यू होती

  • अभी प्यार के सागर की दृष्टि पड़ने से… सारा कल्प प्यार के पात्र बन गए, भक्त भी कितना प्यार से देवताओं को देखते 
  • अभी बाप द्वारा पवित्रता जन्मसिद्ध-अधिकार है… तो सतयुग में भी सम्पूर्ण-पवित्र पालना मिलती, और भक्ति में भी सम्पूर्ण पवित्रता-स्वच्छता से पूजते
  • अभी भगवान् मात-पिता रूप में अविनाशी स्नेह से सम्भालते… तो सारे कल्प सब रोयल्टी-स्नेह-रिगार्ड से रखते

तो सदा अपने श्रेष्ठ मूल्य को स्मृति में रखना है, और किसने हमें अमूल्य बनाया… इस विधि से सहज सिद्धि को पाते (पूज्य बनते, पाप नहीं चढ़ते)

2. पवित्रता हमारा जन्मसिद्ध-अधिकार है, एसी अधिकारी आत्माओं को पवित्रता सहज है… यदि माया संकल्प-स्वप्न में परिक्षा भी ले, तो नॉलेजफुल बन अंश का सोच-विस्तार कर वंश नहीं बनाते, तुरन्त भगा देते मास्टर-सर्वशक्तिमान बन… रत्न है तो मिट्टी से नहीं खेलना-घबराना

पार्टियों से

1. सदा अपने को बाबा के नैनों में समाई हुई हल्की-बिन्दी समझने से… सदा डबल-लाइट उड़ती-कला में रह, आगे बढ़ते रहते… बड़ों के इशारों को regard देने से भाग्य श्रेष्ठ बनता रहता

2. हमारे मस्तक पर भाग्य का सितारा अखण्ड चमकता रहता (क्योंकि हम ज्ञान-सूर्य की याद से शक्तियां लेते रहते)… याद-सेवा के balance से सहज सफलता मिलती (शक्तिशाली याद से शक्तिशाली आत्माओं का आह्वान होता)… लौकिक कार्य भी डायरेक्शन पर करते, याद-सेवा की लगन है, तो बाबा का हाथ-साथ है ही

3. घर बैठे भगवान मिल गया, इसी श्रेष्ठ भाग्य की स्मृति द्वारा हर्षित सुख-शान्ति सम्पन्न बनना है… संगम के हर दिन नया उमंग-उत्साह हो

4. हम बाबा को स्नेह से याद तो करते, अभी लगन को अग्नि-रूप बनाना है… तो सब बन्धन भस्म हो, स्वतंत्र बन सिद्धि को पाएंगे

सार (चिन्तन) 

जबकि इश्वर का बनने से हम सदाकाल के सर्वश्रेष्ठ प्यार-पवित्रता-स्नेह के पात्र बन गए हैं… तो सदा अपने श्रेष्ठ भाग्य को स्मृति में रख हर्षित-सुख-शान्ति सम्पन्न बन, बाबा की याद में समाए हुए डबल लाइट बन, याद को अग्नि-रूप बनाते माया के अंश को भी समाप्त कर… हर दिन याद-सेवा में नये उमंग-उत्साह का अनुभव करते, सब का कल्याण करते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


Recent Avyakt Murli Churnings

Thanks for reading this article on ‘Being an invaluable jewel! | Avyakt Murli Churnings 03-11-2019’