*Om Shanti*
*Answers from Sakar Murli 04-09-2020*
1. स्नेह ही सहज _____ का साधन है इसलिए सदा स्नेही रहना और स्नेही बनाना।
°याद
2. *स्वमान में रहने वालो* की कौन-सी वन्डरफुल निशानियाँ हैं? (4)
° उन्हें कभी भी अभिमान नहीं आ सकता, वे *सदा निर्मान* होते हैं।
° जितना बड़ा स्वमान उतना ही *हाँ जी* में निर्मान।
° छोटे बड़े, ज्ञानी-अज्ञानी, मायाजीत या माया-वश, गुणवान या पुरूषार्थी हो लेकिन स्वमान वाले *सभी को मान देने वाले दाता* होते हैं अर्थात् स्वयं सम्पन्न होने के कारण *सदा रहमदिल* होते हैं।
3. बाबा आया है तुम्हें _____ बनाने, तब ही यह भारत काँटों के जंगल से सम्पूर्ण _____ बनेगा। बागवान भी ______, माली भी ______ आत्मा है। वहां यह देवतायें रहते थे। सब प्रार्थना करते हैं, हमको ऐसा _____ आत्मा बनाओ।
° फूल, बगीचा, निराकार, निराकार, पुण्य
4. लक्ष्मी-नारायण के लिए सब कहेंगे स्वर्ग के ______ थे। कोई ______ की बात नहीं लिखते।शिव का बड़ा लिंग बना देते। कहते भी हैं कि आत्मा _____ मिसल है, तो जरूर बाप भी ऐसा होगा ना। परन्तु उनकी पूरी पहचान नहीं है।
°मालिक, ग्लानि, स्टार
5. *मन्दिर लायक बनने* लिए किन बातों पर विशेष ध्यान देना है? (2)
° *चलन बहुत मीठी रॉयल* होनी चाहिए। (इतना मीठापन हो जो दूसरों को उसकी महसूसता आये।)
° अनेकों को बाप का परिचय दो। अपना कल्याण करने लिए अच्छी रीति पुरुषार्थ कर *सर्विस पर लगे रहो।*
6. *प्रजा* को भी मन्दिर लायक वा जगतजीत कहेंगे। _(सही / गलत)_
° *गलत* (बाप कहते हैं मैं आकर सबको मन्दिर लायक बनाता हूँ, परन्तु *सब मन्दिर लायक नहीं बनते* हैं। प्रजा को तो मन्दिर लायक नहीं कहेंगे ना। जगतजीत अर्थात् राजा-रानी, प्रजा को जगतजीत नहीं कहेंगे।)
7. यह ड्रामा का *खेल बना हुआ* है। सब आत्मायें जो भी *पार्ट* बजाती हैं, वह *सब नूंधा* हुआ है। इसके लिए बाबा ने कौन-से 2 जबरदस्त मिसाल सुनायै?
° *जैसे कठपुतलियाँ होती हैं* ना, ऐसे नाचती रहती हैं। यह भी ड्रामा है, हर एक का इस ड्रामा में पार्ट है। पार्ट बजाते-बजाते तुम तमोप्रधान बने हो। फिर अब ऊपर जाते हो, सतोप्रधान बनते हो। बाप ऊपर ले जाते।
° वास्तव में वह *मछलियाँ तार में लटकती* हैं (ऐसा एक खेल है), इस तार में मनुष्यों को डालना चाहिए। ऐसे उतरती कला फिर चढ़ती कला होती है। 5 हज़ार वर्ष लगते हैं ऊपर जाकर फिर उतरने में।
8. अगर *छोटेपन से ही नॉलेज में* लग जाएं, तो क्या प्राप्तियां है? (2)
° *धारणा* होती जायेगी। समझेंगे इसने बहुत भक्ति की हुई है, *बहुत होशियार* हो जाए, क्योंकि आरगन्स बड़े होने से फिर *समझ भी जास्ती आती* है। (परन्तु जब वह लगन भी लगे)
9. हमने कौन-सी 2 जबरदस्त *प्रतिज्ञाएं* की है?
° हम यह प्रतिज्ञा करते हैं कि श्रीमत पर हम इस *भारत की भूमि (और विश्व) को पतित से पावन बनायेंगे* (पावन बनने का रास्ता बताते। अच्छा पुरूषार्थ थोड़े करते हैं, पवित्र तो सारी दुनिया बन जाती है।)
° *पवित्रता की प्रतिज्ञा* करते हैं (बता सकते हम कैसे बाप की श्रीमत से पवित्र रहते हैं। फिर पवित्र दुनिया सतयुग का मालिक जगतजीत बनेंगे। लक्ष्मी-नारायण, सबसे ऊँच पद!)
10. प्रदर्शनी म्युज़ियम में पूछते हैं तुम *भारत की क्या सेवा करते* हो?
° हम भारत की बहुत अच्छी सर्विस करते हैं, *जंगल से बगीचा बना रहे* हैं। (सतयुग है गार्डन। यह है काँटों का जंगल। एक-दो को दु:ख देते रहते हैं। यह तुम अच्छी रीति समझा सकते हो।)
° हम सब बच्चे बाप की श्रीमत पर *भारत की रूहानी सर्विस* करते हैं अपने ही तन-मन-धन से।
10. तुम बच्चों को _____ सोशल सर्विस भी करनी है, इस सेवा में अपना जीवन ______ करना है। अपने ______ के लिए अच्छी रीति पुरूषार्थ कर सर्विस में लगे रहो। बाप भी सर्विस पर है ना। तुम बच्चे भी ______ सर्विस पर रहो। बाप द्वारा समझते हैं, वह समझाने लायक भी बनते हैं। _______ धारण करते।
°रूहानी, सफल, कल्याण, दिन-रात, दैवीगुण
11. लक्ष्मी-नारायण का ____ भी बहुत अच्छा बनाना चाहिए। _____ भी इसलिए करते हैं कि क्या-क्या सर्विस करें जो बहुतों को बाप का परिचय मिले।
°चित्र, सेमीनार
12. हमारे सेवा से किसको *तीर* कब लगेगा? (3)
° *याद में रहें तब* किसको तीर भी लगे। घड़ी-घड़ी देह-अभिमान में आ जाते हैं। बाप कहते हैं *आत्म-अभिमानी बनो*। (आत्मा ही शरीर धारण कर पार्ट बजाती। आत्माओं में जो पार्ट की नूंध है उसको हम साक्षी हो देखते हैं।)
° जब *खुद फूल बने होंगे*। (खुद ही कांटा होगा तो किसको फूल कैसे बनायेंगे, उनका तीर पूरा लगेगा नहीं।)
13. *शिवजयन्ती की चिट्ठियों* में ऐसी लिखत हो, जो किसको भी दिखायें तो समझ जाएं। जैसे लिखते हैं *शिवबाबा केयरऑफ ब्रह्मा* वा बापदादा, इस पर क्या समझानी है?
° वह रूहानी पिता (शिवबाबा), वह जिस्मानी (प्रजापिता ब्रह्मा)। उनसे जिस्मानी रचना रची जाती। बाप है मनुष्य सृष्टि का रचता। *बाप ब्रह्मा द्वारा अब नई रचना रच रहे हैं*। ब्राह्मण हैं चोटी फिर देवता, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र।
° (बापदादा) शिवबाबा को बाप, ब्रह्मा को दादा कहते हैं। (एक को कभी कोई बापदादा कहते हैं क्या? यह तो *वन्डरफुल बात* है, इसमें सच्चा-सच्चा ज्ञान है।)
14. कईयों की *बुद्धि में ठहरता ही नहीं* इसलिए किसको समझा नहीं सकते। बाबा ने उन्हों के लिए कौन-सा मिसाल दिया?
° आत्मा बिल्कुल ही *गर्म तवा*, तमोप्रधान पतित है। उन पर ज्ञान अमृत डाला जाता तो भी ठहरता नहीं। (जिसने बहुत भक्ति की है, उनको ही तीर लगेगा, झट धारणा होगी। हिसाब ही वन्डरफुल है – पहले नम्बर में पावन, वही फिर पतित बनते हैं।)
15. तुम हो रूहानी _____ । तुम 5 विकारों पर जीत पाने से जगत जीत बनने वाले हो। जन्म-जन्मान्तर के पाप कटने लिए बाबा युक्तियाँ बताते हैं। तुम बहुत ______ वारियर्स हो। जब तक राजधानी स्थापन न हो जाए तब तक _____ नहीं होगा। फिर सतयुग में कभी _______ होती नहीं।
°मिलेट्री, गुप्त, विनाश, लड़ाई
16. इस प्रवृत्ति मार्ग (जोड़ी की दौड़ी) में *दूसरे ने* काम महाशत्रु में गिराया। _(सही / गलत)_
° *गलत* (ऐसे थोड़ेही उसने गिराया। गिरना, न गिरना *अपने हाथ में है*। कोई धक्का थोड़ेही देते हैं, हम गिरें क्यों? *कुछ भी हो जाए हम गिरेंगे नहीं*। गिरे तो खाना खराब, जोर से चमाट लगती है। फिर पछताते भी हैं, *हड्डी-हड्डी टूट जाती है*। बहुत चोट लगती है।)
