Answers from Sakar Murli 13-08-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 13-08-2020*

1. जबकि सबसे अक्लमंद ऊंच ते ऊंच सुप्रीम टीचर निराकार भगवान पढ़ाते, हमे उत्तम ते उत्तम पुरुष लक्ष्मी-नारायण पैराडाइज़ के मालिक बनाने (प्योरिटी, पीस, प्रासपर्टी से सम्पन्न), तो बाबा ने कहा एकदम रोमांच खड़े हो जाने चाहिए। *फिर क्या पुरुषार्थ करना है?* (4)
° सयाना बन एकदम इस *पढ़ाई में लग जाना* चाहिए।
इसमें बहुत *अटेन्शन* देना है। *पूरी रीति पढ़ना* चाहिए ना।(आत्मा ही पढ़ती है)
° उनकी *मत* पर चलना चाहिए। बाप कहते हैं *पवित्र* रहो।
° और मुझे *याद* करो। (आत्मा समझ बाप को याद करो। छोटे बच्चे को माँ-बाप के सिवाए दूसरा कोई उठाते हैं तो उनके पास जाते नहीं। तुम भी बेहद के बाप के बने हो तो और कोई को देखना पसन्द भी नहीं आयेगा, फिर कोई भी हो।)
° *दैवीगुण धारण* किये तो तुम यह बन जायेंगे।

2. बाबा हमे *डबल सिरताज* राजाओं का राजा बनाते। कौन-से दो ताज? (और कैसे मिलते?)
° *लाइट का ताज* (मनमनाभव)
° *रतन जड़ित ताज* (मध्याजीभव)।
° (निश्चय हो जाता है हम इस पढ़ाई से विश्व का मालिक बनते हैं)

3. सिंगल ताज वाले राजाओं को *गॉड-गॉडेज* कहेंगे। _(सही / गलत)_
° *गलत*
° जो पवित्र डबल सिरताज थे उन्हों को बिगर ताज वाले अपवित्र पूजते हैं। वो हो गये *पुजारी राजायें* । उनको तो गॉड-गॉडेज नहीं कहेंगे क्योंकि इन *देवताओं की पूजा करते* हैं। (आपेही पूज्य, आपेही पुजारी, पतित बन जाते हैं तो रावण राज्य शुरू हो जाता है।)

4. वरदान में बाबा ने *सेवा की सफलता* लिए कौन-सी विधि सुनाई? (2)
° जब आप बच्चे हिम्मतवान बनकर *संगठन में एकमत और एकरस* अवस्था में रहते वा *एक ही कार्य में* लग जाते हो तो स्वयं भी सदा प्रफुल्लित रहते और धरनी को भी फलदायक बनाते हो। (जैसे आजकल साइन्स द्वारा अभी-अभी बीज डाला अभी-अभी फल मिला, ऐसे ही साइलेन्स के बल से सहज और तीव्रगति से प्रत्यक्षता देखेंगे।)
° जब स्वयं *निर्विघ्न एक बाप की लगन में मगन, एकमत और एकरस* रहेंगे तो अन्य आत्मायें भी स्वत: सहयोगी बनेंगी और धरनी फलदायक हो जायेगी।

5. इस योग की ताकत से आत्मा _______ बन गोल्डन एज में चली जायेगी, फिर उनके लिए राज्य चाहिए। बोलो इस याद के बल से हम _____ बनते हैं। योगबल क्या चीज़ है, जिससे तुम विश्व पर _____ पाते हो और कोई थोड़ेही जानते। बाप ही पतित-पावन है। ______ दुनिया जरूर स्थापन करके ही छोड़ेंगे। ड्रामा अनुसार नूँध है। डीटी डिनायस्टी थी तो ______ थे।
°सतोप्रधान, पवित्र, विजय, पावन, पवित्र

6. यह है ______ परिवार। बाप के बच्चे हैं, पोत्रे और पोत्रियां हैं, बस और कोई ______ नहीं। नई सृष्टि इनको कही जाती है फिर देवी-देवता तो थोड़े बनेंगे। फिर आहिस्ते-आहिस्ते _______ होती है।
°ईश्वरीय, संबंध, वृद्धि

7. जो अभिमान को शान समझ लेते, वह _____ नहीं रह सकते।
°निर्मान

8. बाप को तुम भूल जाते हो, _____ नहीं आती है, वह नशा नहीं चढ़ता है। यहाँ से बहुत अच्छा रिफ्रेश हो जाते हैं फिर वहाँ ______ हो जाते हैं। तुमको तो अब बाप मिला है, तुम सारे सृष्टि चक्र को जानते हो तो खुशी में ______ होना चाहिए।
°लज्जा, सोडावाटर, गदगद

9. आज बाबा ने *स्वदर्शन चक्र* कैसे फिराया? (2)
° अभी तुम बच्चों को मालूम पड़ा है – असुल में हम आत्मायें बाप के साथ अपने घर में रहती हैं। बाप का बनने से अभी तुम स्वर्ग के मालिक बनते हो फिर बाप को भूल आरफन बन पड़ते हो। फिर परमपिता परमात्मा प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा नई सृष्टि ब्राह्मणों की रचते हैं। (84 जन्मों की कहानी!)
° आत्मा ही सीखती है। बाप तुम बच्चों को *आत्म-अभिमानी* बनाते हैं। तुम आत्मा हो मूलवतन की रहने वाली। तुम आत्मा कितनी छोटी हो। अनेक बार तुम आई हो पार्ट बजाने। मैक्सीमम हैं ही 84 जन्म।

10. बाबा ने कहा इंगलिश में भी तुम लोग अच्छी रीति समझा सकते हो। जो इंगलिश जानते हैं तो ट्रांसलेशन कर फिर समझाना चाहिए। बाबा ने आज कौन-से *अंग्रेजी शब्द* प्रयोग किये? (4)
° फादर *नॉलेजफुल* है, उनको ही यह *नॉलेज* है कि सृष्टि का चक्र कैसे फिरता है। यह है पढ़ाई। ( *स्प्रीचुअल* नॉलेज)
° योग को भी बाप की याद कही जाती है, जिसको अंग्रेजी में *कम्यूनियन* कहा जाता है। बाप से कम्यूनियन, टीचर से कम्यूनियन, गुरू से कम्यूनियन।
° यह है *गॉड फादर* से कम्यूनियन। खुद बाप कहते हैं मुझे याद करो और कोई भी देहधारी को याद नहीं करो।
° यह लक्ष्मी-नारायण *पैराडाइज़* / गोल्डन एज के मालिक थे ना, *प्योरिटी, पीस, प्रासपर्टी* सब थी।

11. जब यह ज्ञान अच्छे से फॉरेन में सुनाएंगे, तो वह खुश होकर *क्या कहेंगे*? (6)
° तुमको वहाँ 1000 रूपया मिलते हैं, हम आपको 10-20 हज़ार रूपया देंगे। *हमको भी नॉलेज सुनाओ।*
° यह बातें अच्छी रीति समझाओ तो वह *चक्रित हो जायेंगे। कहेंगे यह हम सुनें तो सही।* हम बाप से पढ़ते हैं, यह बातें सुनकर चक्रित हो जायेंगे।
° कहेंगे *यह तो स्प्रीचुअल नॉलेज है।* यह तो डायरेक्ट उस सुप्रीम फादर का बच्चा है, उनसे राजयोग सीख रहा है
° सुनकर कहेंगे *ओहो! यह तो गॉड फादर के बच्चे हैं।*
° समझेंगे यह तो *कोई अथॉरिटी है*, इनमें गॉड ने आकर प्रवेश किया है।
° ऐसी-ऐसी बातें समझाने से बहुत *वन्डर खायेंगे* । (ऐसी-ऐसी बातें बताते रहेंगे तो वह खुश होंगे। ऐसे-ऐसे बैठ समझायें तो कितना मज़ा कर दिखायें)

12. बाबा ने कहा बात करने में होशियार चाहिए, स्पीड भी अच्छी हो। तो *फॉरेन वालों को कौन-कौन सी बातें* सुना सकते? (7)
° एक बाप को ही कहते हो लिबरेटर, गाइड *जबकि वही लिबरेटर है तो फिर उनको ही याद करना चाहिए* (धर्म स्थापक भी उनकी ओर इशारा करते)
° *पैराडाइज़ की स्थापना हो रही* है, उसके लिए यह महाभारत लड़ाई भी है। बाप कहते हैं मैं तुमको राजाओं का राजा डबल सिरताज बनाता हूँ। *प्योरिटी, पीस, प्रासपर्टी सब थी*। विचार करो, कितने वर्ष हुए? *क्राइस्ट से 3 हज़ार वर्ष पहले* इन्हों का राज्य था।
° *फिर अपने समय पर धर्म स्थापक आकर* तुम्हारा धर्म स्थापन करेंगे।
° बोलो बाकी सब आत्मायें स्वीट होम में रहती हैं। बाप ही ले जाते हैं, सर्व का सद्गति दाता वह बाप है। उनका *बर्थ प्लेस है भारत।* यह कितना बड़ा तीर्थ हो गया।
° बोलो हम इस *याद के बल से पवित्र* बनते हैं और सबका विनाश हो जायेगा। नैचुरल कैलेमिटीज भी आने वाली हैं। हमारा रियलाइज़ किया हुआ है और दिव्य दृष्टि से देखा हुआ है। यह सब खलास होना है।
° यह बताओ कि *आत्माओं का बाप* कौन है। भगवान तो *निराकार* ही है। वही इस पतित दुनिया को *पावन बनायेंगे* ।
° तुम जानते हो सबको तमोप्रधान बनना ही है। पुनर्जन्म सबको लेना है, *वापिस कोई भी जा नहीं सकते।* ऐसी-ऐसी बातें समझाने से बहुत वन्डर खायेंगे।

Answers from Sakar Murli 12-08-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 12-08-2020*

1. कहा जाता *अन्तर्मुखी सदा सुखी* । ऐसा क्यों? तो हमें क्या करना है?
° (क्योंकि) जो बच्चे सदा *अन्तर्मुखी भव का वरदान प्राप्त कर लेते, वह बाप समान सदा सुख के सागर में लवलीन रहते* हैं। सुखदाता के बच्चे स्वयं भी *सुख दाता* बन जाते हैं। सर्व आत्माओं को सुख का ही खजाना बांटते हैं।
° (क्या करना) तो अब *अन्तर्मुखी बन ऐसी सम्पन्न मूर्ति बन जाओ* जो आपके पास कोई भी किसी भी भावना से आये, अपनी भावना सम्पन्न करके जाये। जैसे बाप के खजाने में अप्राप्त कोई वस्तु नहीं, वैसे आप भी *बाप समान भरपूर* बनो।

2. रूहानी _____ में रहो तो कभी भी अभिमान की फीलिंग नहीं आयेगी।
°शान

3. बेहद-बाबा हम बच्चों से बात ऐसे करते हैं जैसे हम आपस में करते। तो जबकि बाबा ने हमे आत्म-अभिमानी बनाकर पार्टधारी की स्मृति दे घर जाने का रास्ता बताया है (की सतोप्रधान बनना है), तो *अब हमें प्रैक्टिकल में क्या करना है?* (5)
° जो *श्रीमत* (ईश्वरीय मत, डायरेक्शन) बाबा देते, उस पर सपूत बन चलना हैं।
° तो अब श्रीमत पर *कर्म श्रेष्ठ* करना चाहिए (अर्थात्‌ दैवीगुण धारण करने हैं।) भोजन भी शुद्ध, किसी को भी दु:ख न दो लड़कर। विकार में मत जाओ। (बाबा सुधारने आये हैं तो अच्छी रीति सुधरना चाहिए ना।)
° बहुत *खुशी में हर्षित* रहना चाहिए।
° बाप कहते हैं अपने को *आत्मा समझ बाप को (मामेकम्) याद करो* और सर्व संबंधों को हल्का करते जाओ। *8 घण्टा* याद रखनी है। *मैं बाप का बच्चा हूँ*, यह नहीं भूलो।
° सबको *बाप का परिचय* देना है।

4. बाप कहते हैं मेरा ऐसा पार्ट है जो *बीमार को अच्छा* कर दूँ। _(सही / गलत)_
° *गलत*
° हमारा पार्ट है रास्ता बताना कि तुम पवित्र कैसे बनो? पवित्र बनने से ही तुम घर में भी जा सकेंगे। राजधानी में भी जा सकेंगे।
° अर्थात्‌ बाबा बीमारी के बीज (अपवित्रता) को ही समाप्त करने के कर्म हमें सिखलाते है। (यही सच्चा सदाकाल का समाधान है!)

5. हमारा *धन्धा* क्या है? इसमे *क्या समझाना* है?
° हमारा भी वही धन्धा है – सबको रास्ता बताना, *अन्धों की लाठी* बनना।
° (चित्र भी तुम्हारे पास हैं।) तुम तो फिर समझाते हो तुम *आत्मा* हो, शरीर नहीं हो। बाप कहते हैं तुम सभी आत्मायें *भाई-भाई* हो ना। गॉड *फादर* कहते हो ना। तो कभी भी आपस में *लड़ना-झगड़ना नहीं* चाहिए। *वर्सा* दादे से लेना है इसलिए दादे को ही *याद* करते हैं।

6. बाप _____ का ______ है, सब झगड़ों से छुड़ा देते हैं। तुम बच्चों को _______ खुशी बहुत होनी चाहिए। हम बाबा के बच्चे बने हैं। बाप ने हमको ______ किया है वर्सा देने।
°वकीलों, वकील, आन्तरिक, एडाप्ट

7. बाबा हम ब्राह्मण कुल भूषण को *देवताओं से भी ऊंच* कहते। क्यों?
° तुम भारत की बहुत *ऊंच सेवा करते* हो। फिर तुम पूज्य बन जायेंगे। अब *पुजारी को पूज्य, कौड़ी से हीरे जैसा बना रहे* हैं।

8. बाबा ने हमे *आत्म-अभिमानी* बनाने लिए कौन-सी बातें सुनाई? (3)
° निराकार भगवानुवाच – निराकारी आत्माओं प्रति। असुल तुम *निराकार* हो फिर साकारी बनते हो। साकार बिगर तो आत्मा कुछ कर ही नहीं सकती। आत्मा शरीर से निकल जाती तो *चुरपुर* कुछ भी हो नहीं सकती। आत्मा फौरन जाकर दूसरे *शरीर में अपना पार्ट* बजाती है। (इन बातों को अच्छी रीति समझो, अन्दर घोटते रहो।)
° हम *आत्मा बाबा से वर्सा लेते* हैं। वर्सा मिलता है सतयुग का।
° यह समझना है – मैं आत्मा हूँ, बाबा आया हुआ है, हमको *पवित्र बनाकर अपने घर ले जाते हैं। फिर राजधानी* में आ जायेंगे।

9. वह सत्य चैतन्य ज्ञान-सागर *स्वदर्शन चक्रधारी बाबा* हमे क्या कहते? (2)
° बाप कहते हैं वास्तव में *मैं हूँ स्वदर्शन चक्रधारी।* आत्मा में सारे सृष्टि चक्र का ज्ञान आ जाता।
° बाबा भी परमधाम में रहने वाला है। बाप आकर *अपना परिचय देते* हैं। मैं पतित-पावन आया हूँ तुम्हारे पास। मुझे बुलाया ही है कि आकर पतित से पावन बनाओ, लिबरेट करो। बाप कहते हैं मैं आता ही हूँ तब जब रात पूरी होती है, तो दिन बनाने आता हूँ। दिन में 21 जन्म फिर रात में 63 जन्म, आत्मा ही भिन्न-भिन्न जन्म लेती है। तुमको भी स्वदर्शन चक्रधारी बनाता हूँ।

10. बाबा हमें राजयोग सिखाते भविष्य 21 जन्मों के लिए। साथ मे सच्ची गीता, सच्ची रामायण सुनाते। तो आज *सच्ची रामायण* के विषय पर कौन-सी बेहद बाते सुनाई? (3)
° एक राम-सीता की बात नहीं थी। इस समय तो *सारी दुनिया लंका है*। चारों ओर पानी है ना। यह है बेहद की लंका, जिसमें रावण का राज्य है।
° एक बाप है ब्राइडग्रूम ( *राम* )। बाकी सब हैं ब्राइड्स ( *सीताएं* )।
° तुमको अब रावण राज्य से बाप छुड़ाते हैं। यह है शोक वाटिका। *सतयुग को कहा जाता है अशोक वाटिका* । (वहाँ कोई शौक होता नहीं। इस समय तो शोक ही शोक है। अशोक एक भी नहीं रहता।)

11. बाप का बनें तो *सबकुछ छोड़ यहाँ आकर बैठ जाना* है। _(सही / गलत)_
° *_गलत_*
° *सबको यहाँ तो नहीं बिठा सकते।* घर में रहकर भी याद करना है।
° नौकरी तो करनी ही है। कितने ढेर बच्चे हैं, इतने सब तो रह नहीं सकते। रहना सबको गृहस्थ व्यवहार में है।
° ऐसे भी नहीं यहाँ आकर हॉस्टल में रहना है। नहीं, गृहस्थ व्यवहार में बाल बच्चों के साथ रहना है। *बाबा पास आते ही हैं रिफ्रेश होने।*

12. बेहद का वैराग्य सिखलाने वाला चाहिए। बाप ने समझाया था यह _______ है, इनके बाद परिस्तान बनना है। यह _____ -लोक है। यह तो पराया रावण का छी-छी ____ है। बाप कहते हैं – बच्चे, अब नया _____ प्रवृत्ति मार्ग स्थापन हो रहा है। यह ज्ञान बाप ______ पर ही देते हैं क्योंकि अभी तुमको पतित से पावन होना है। अच्छा!
°कब्रिस्तान, मृत्यु, घाट, दैवी, संगम

Answers from Sakar Murli 07-08-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 07-08-2020*

1. _____ की विशेषता से डायमण्ड की चमक को बढ़ाओ।
°सत्यता

2. तुम अभी सच्ची _____ कर रहे हो। स्वर्ग में तुमको सब कुछ _____ माल मिलेगा।अभी तुम जानते हो बाप को ______ करते-करते हम गोल्डन एज में चले जायेंगे।
°कमाई, नया, याद

3. सतयुग में होते हैं *आत्म-अभिमानी*। _(सही / गलत)_
° *सही*
° अपने को (शरीर छोड़ते समय) आत्मा जानते हैं। हमारा शरीर बड़ा हुआ है, अब यह छोड़कर फिर छोटा लेना है।

4. तुम जानते हो वहाँ ( *सतयुग में* ) हमें क्या नहीं मिलेगा! क्या- *क्या मिलेंगा?* (3)
° *बेहद की बादशाही* , बेहद का सुख मिलता है।
° वहाँ कोई बीमारी आदि होती नहीं। *हेल्थ वेल्थ हैप्पीनेस सब* रहता है।
° *बुढ़ापा भी वहाँ बहुत अच्छा* रहता। खुशी रहती है। कोई प्रकार की तकलीफ नहीं रहती है। प्रजा भी ऐसी बनती है।

5. ज्ञान है बुद्धि के लिए भोजन। तो चिन्तन कर आपेही भोजन बनाना चाहिए। बाबा ने आज कहा त्रिमूर्ति शिव भगवानुवाच।
a) तो *शिवबाबा का पार्ट / सर्विस* सबसे ऊँच कैसे है?
b) ब्रह्मा और विष्णु का तो बड़ा पार्ट है 84 जन्मों का। (हम जानते हैं विष्णु का अथवा कृष्ण का अन्तिम 84 वां जन्म, जिसका नाम ब्रह्मा रखा है।) तो सबसे *जास्ती पार्ट किसका कहेंगे* – ब्रह्मा या विष्णु का?
c) शिवबाबा की रचना तो सब है फिर भी वास्तविक (डायरेक्ट) *बच्चा किसे कहेंगे* ? का
d) मनुष्य तो कह देते – *शंकर* आंख खोलते हैं तो विनाश हो जाता है। इस पर क्या सुनाया?
° a) *सारे झाड़ का बीजरूप है शिवबाबा*। जितनी शिव की रचना है उतनी ब्रह्मा की नहीं। सभी आत्मायें उनकी औलाद हैं। *बेहद की आत्माओं का कल्याण करते* । ब्रह्मा द्वारा स्वर्ग की स्थापना करते। तुम सबका हिसाब-किताब चुक्तू कराए तुमको पतित से पावन बनाए ले जाता हूँ।
° b) ब्रह्मा का भी बहुत थोड़ा समय पार्ट है। विष्णु का सतयुगी राजधानी में 8 जन्म पार्ट चलता है। ब्रह्मा का तो एक ही जन्म का पार्ट है। *विष्णु का पार्ट बड़ा कहेंगे*।
° c) यह दोनों बच्चे हैं शिव के। वास्तव में बच्चा एक है (एडाप्टेड)। हिसाब करेंगे तो *ब्रह्मा है शिव का बच्चा* । बाप और दादा।
° d) सब कुछ *प्रैक्टिकल* में चाहिए ना। सिर्फ आंख खोलने से थोड़ेही हो सकता।

6. *ब्रह्मा बाबा* के कौन-कौन से नाम आज मुरली में सुनाये? (6)
° ब्रह्मा, आदि देव, एडम, आदम, प्रजापिता, अलौकिक फादर।

7. तुम यहाँ मेहनत कर रहे हो _____ बनने के लिए। तुम बच्चे ब्रह्मा द्वारा ब्राह्मण बन फिर _____ बन जाते हो, विष्णुपुरी के मालिक। अब बाप समझाते हैं – मैं आया हूँ पत्थरबुद्धियों को _____ -बुद्धि बनाने। दिन-प्रतिदिन बाप तुम बच्चों को ______ बुद्धि बनाते हैं। तुम बच्चों को तो बड़ी _____ में नाचना चाहिए – हमको पढ़ाते कौन हैं? शिवबाबा। त्रिमूर्ति शिव।हम बाप से वर्सा ले रहे।
°पावन, देवता,पारस, रिफाइन, खुशी

8. प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा शिवबाबा स्थापना कर रहे हैं। तो हम ब्राह्मणों का *धंधा* क्या है? (2)
° तुम ब्राह्मण *श्रीमत पर सेवा* करते हो।
° सिर्फ मनुष्यों को *रास्ता बताते* हो – मुक्ति और जीवनमुक्ति को पाना है तो ऐसे पा सकते हो। दोनों चाबी हाथ में हैं। तुम्हारा सारा दिन यही धंधा है।
° तुम्हारा धन्धा है रचना के आदि-मध्य-अन्त को जानना और किसको मुक्ति-जीवनमुक्ति का रास्ता बताना।

9. तुम किसको भी समझाओ तो हमेशा *योग* अक्षर बोलो। _(सही / गलत)_
° *गलत* (योग अक्षर रांग है। टीचर को स्टूडेन्ट की *याद* रहती है। फादर है सुप्रीम सोल। तुम आत्मा सुप्रीम नहीं हो। तुम हो पतित। अब बाप को याद करो। टीचर को, बाप को, गुरू को याद किया जाता है।)

10. गुरू लोग मंत्र देते। तो हमारा सतगुरू *बाबा कौन-सा मंत्र देते* ? (2)
° उनका मंत्र एक ही है – *मनमनाभव* ।
° फिर क्या होगा? *मध्याजी भव* । तुम विष्णुपुरी में चले जायेंगे।

11. पुरुषार्थ नहीं होता तो कोई हर्जा नहीं – *प्रजा तो प्रजा ही सही*। _(सही / गलत)_
° *गलत* (फिर तो ऐसे होंगे जैसे यहाँ के भील। सूर्यवंशी लक्ष्मी-नारायण बनना है तो फिर इतना *पुरूषार्थ करना चाहिए*। अच्छा!)

12. *अमरलोक* कैसे कह सकते?
° आत्मा तो अविनाशी है, वह कभी मरती नहीं। *एक शरीर छोड़ फिर दूसरा लेकर पार्ट बजाती है*। उनको मृत्युलोक नहीं कहा जाता। वह है ही अमरलोक। चोला सिर्फ बदलती है। यह बातें बड़ी सूक्ष्म समझने की हैं।

13. सबके सहयोगी रहते कम्पेनियन सिर्फ एक को बनाने से क्या *प्राप्ति* होती? (3) तो अब *क्या करना* है? (2)
° (प्राप्ति) *मायाजीत, मोहजीत, विजयी* रहेंगे। (अगर जरा भी किसी में मोह होगा तो तीव्र पुरूषार्थी के बजाए पुरूषार्थी बन जायेंगे)
° इसलिए क्या भी हो, कुछ भी हो *खुशी में नाचते रहो* , मिरूआ मौत मलूका शिकार – इसको कहते हैं नष्टोमोहा। ऐसा *नष्टोमोहा* रहने वाले ही विजय माला के दाने बनते हैं।

14. गाया भी जाता है – सेकेण्ड में जीवनमुक्ति। यह *तुरन्त मिल जाती*। _(सही / गलत)_
° *गलत* (ऐसे थोड़ेही मिल जाती है, यह *समझा जाता है* – बच्चे बनेंगे तो मिलेगी जरूर)

15. पेट कोई जास्ती नहीं खाता है – एक मनुष्य का पेट 4-5 रूपया, एक मनुष्य का पेट 400-500 रूपया। पैसा बहुत है तो ____ हो जाती है। गरीबों को पैसे ही नहीं तो _____ भी नहीं। वह सूखी रोटी में ही खुश होते हैं। बच्चों को जास्ती _____ के हंगामें में भी नहीं जाना चाहिए। ____ का शौक नहीं रहना चाहिए।
°हबच, हबच, खान-पान,खाने

16. *गन्धर्वी विवाह* किया यह खुशी की बात है। _(सही / गलत)_
° *गलत* (यह तो *कमज़ोरी है*। कुमारी अगर कहे हम पवित्र रहना चाहते हैं तो कोई मार थोड़ेही सकते हैं। ज्ञान कम है तो डरते हैं।)

Answers from Sakar Murli 10-08-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 10-08-2020*

1. जो *श्रेष्ठ वेला में जन्म लेने वाले भाग्यशाली बच्चे* हैं, उनकी निशानियाँ क्या है? (3)
° वह जन्मते ही *अपने पन का अनुभव* करते हैं।
° वह जन्मते ही *सर्व प्रापर्टी के अधिकारी* होते हैं। (जैसे बीज में सारे वृक्ष का सार समाया हुआ है ऐसे नम्बरवन वेला वाली आत्मायें सर्व स्वरूप की प्राप्ति के खजाने के आते ही अनुभवी बन जाते हैं।)
° वे कभी ऐसे नहीं कहेंगे कि सुख का अनुभव होता, शान्ति का नहीं, शान्ति का होता सुख का व शक्ति का नहीं। *सर्व अनुभवों से सम्पन्न* होते हैं।

2. अपने प्रसन्नता की छाया से शीतलता का अनुभव कराने के लिए ____ और _____ बनो।
°निर्मल, निर्मान

3. हम बच्चों को किस बात की बहुत खुशी होनी चाहिए? (2)
° तुम बच्चों को कितनी खुशी होनी चाहिए। बाबा *कल्प-कल्प* आकर हमको *राजयोग* सिखलाए मनुष्य से *देवता* बनाते हैं।
° तुमको मालमू पड़ा है हम सो *देवी-देवता थे फिर अब बनते* हैं। यहाँ तुम आते ही हो सत्य नारायण की कथा सुनने, जिससे *नर से नारायण* बनेंगे। नारायण बनेंगे तो जरूर लक्ष्मी भी होगी। *लक्ष्मी-नारायण* होंगे तो जरूर उन्हों की *राजधानी* भी होगी ना।

4. इस पार से उस पार जाने के लिए याद की यात्रा में अच्छा ____ बनना है। माया के _____ नहीं खाने हैं। _______ याद करना है। याद नहीं करते तो घुटका खाते हैं।
°तैराक, घुटके, मामेकम्

5. *आज का गीत* 🎶 कौन-सा था? इसका कौन-सा *अर्थ* है, जो सिर्फ हम रूहानी ब्राह्मण-बच्चे ही जानते?
° *तुम्हें पाके हमने* जहान पा लिया है……..
° अब बेहद के बाप *शिवबाबा को तो पा लिया* है। बेहद के बाप से हमे (यहाँ शान्ति में बैठ, ब्रह्मा द्वारा) स्वर्ग-सुखधाम का वर्सा मिलता है, जिस *वर्से को कोई भी छीन नहीं सकता।*
° हम आदि सनातन *देवी-देवता धर्म के, पूज्य, विश्व के मालिक* होंगे। जहां एक धर्म, एक राज्य, *पवित्रता-शान्ति-सुख-सम्पत्ति-महल* सबकुछ होंगा, सतोप्रधान *नैचुरल ब्यूटीफुल* , आधाकल्प से भी जास्ती सुख (फिर भल ड्रामा-नाटक अनुसार रावण राज्य में वर्सा का नशा चला जाता, पुजारी बन जाता।)

6. जो भी मनुष्य मात्र हैं उन्हों को अपने शरीर के नाम का नशा है। क्यों? हम *आत्मा* के बारे में क्या-क्या जानते? (3)
° क्योंकि मनुष्य देह-अभिमानी हैं। हम आत्मा हैं यह जानते ही नहीं। (आत्मा सो परमात्मा कहते)
° (हम क्या जानते) *सुनती तो आत्मा है* । हम आत्मा हैं, न कि शरीर।
° हम आत्माओं का *स्वधर्म है ही शान्त*।
° *आत्मा सो विश्व के मालिक देवी-देवता बन रही*। हम सो देवता फिर क्षत्रिय घराने में आयेंगे (84 जन्मों का हिसाब)। फिर घर जाते फिर सुख का पार्ट।

7. वहाँ देवताओं को दाढ़ी आदि भी नहीं होती। क्लीनशेव होती है। _(सही / गलत)_
° *सही* (नैन-चैन से मालूम पड़ता है यह मेल है, यह फीमेल है। आगे चल तुमको बहुत साक्षात्कार होते रहेंगे।)

8. ज्ञान का सागर पतित-पावन तो ____ भगवान है। बाप आकर सब बातें समझाए अ- ____ बनाते हैं। बाप तो न कभी शरीर में आते हैं, न ___ करते हैं। न सिर्फ रास्ता बताते हैं परन्तु ____ भी बनाते हैं।
°निराकार, भुल, भूल, लाइफ

9. कोई को भी *दृष्टि से तीर* कब लगेगा?
° जब वह *जौहर* भरता (इसके लिए अभी याद की यात्रा में मस्त रहना है।)

10. दिन-प्रतिदिन तुम नई-नई प्वाइंट्स सुनते रहते हो। तो *प्वाइंट्स नोट करना* क्यों अच्छा है? (2)
° *भाषण करते समय रिहर्सल* करेंगे। यह-यह प्वाइंट्स समझायेंगे।
° *टॉपिक की लिस्ट* होनी चाहिए। आज इस टॉपिक पर समझायेंगे।

11. *’रावण कौन है, राम कौन है?’* सच क्या है, वह हम आपको बताते हैं। इस टॉपिक पर क्या समझानी है?
° रावण (5 विकार) तो आज सबमें हैं। इस समय रावण राज्य सारी दुनिया में है। बाप (निराकार राम) आकर फिर रामराज्य की स्थापना करते हैं। यह हार और जीत का खेल है।

12. कोई-कोई चार्ट दिखाते हैं – हम सारे दिन में *5 घण्टा याद में रहा*। बाबा ने क्या कहा?
° हम विश्वास नहीं करते, जरूर भूल हुई है। (याद के चार्ट को समझते ही नहीं)

13. कोई समझते हैं हम *जितना समय यहाँ पढ़ते हैं उतना समय तो चार्ट ठीक* रहता है। यह ठीक हैं?
° नहीं। बहुत हैं यहाँ बैठे हुए भी, सुनते हुए भी बुद्धि बाहर में कहाँ-कहाँ चली जाती है। पूरा सुनते भी नहीं हैं। इधर-उधर देखते रहते हैं। (इसलिए बाबा कहते हैं नये-नये को जल्दी यहाँ क्लास में आने की छुट्टी न दो। नहीं तो वायुमण्डल को बिगाड़ते हैं।)

14. *सबसे बड़ी भूल* कौन-सी है?
° *अपने स्वधर्म को भूलना* (अभी तुम्हें अभुल बनना है, अपने घर और राज्य को याद करना है।)

15. हम सृष्टि चक्र का राज़ समझते हैं। वह समझते हैं कि धर्म स्थापक गॉड के पास पहुँचे। कई फिर यह समझते हैं वह भी पुनर्जन्म लेते-लेते अभी तमोप्रधान है। *सच* क्या है? हम और कौन-सी *वन्डरफुल बात* जानते?
° (सच) जो भी धर्म स्थापन करने आते हैं वह सब पुनर्जन्म लेते-लेते अभी आकर तमोप्रधान बने हैं। अन्त में सारा झाड़ जड़जड़ीभूत अवस्था को पा लिया है। (इसलिए उनको गुरू नहीं कह सकते। वह धर्म स्थापन करने आते हैं। *सद्गति दाता सिर्फ एक है*।)
° (वन्डरफुल बात) धर्म स्थापक *फिर अपने समय पर धर्म स्थापन करने आयेंगे* ।

Answers from Sakar Murli 08-08-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 08-08-2020*

1. _______ आत्मा की निशानी है सन्तुष्टता, सन्तुष्ट रहो और सन्तुष्ट करो।
°सर्व प्राप्तियों से सम्पन्न

2. बेहद का बाप तुमको विश्व का मालिक बनाते हैं, सो भी _______ विश्व का। बाप बैठ बच्चों को पारसपुरी का ______ बनाते हैं। यहाँ कौड़ियाँ, वहाँ ____ होंगे। भारत है सबसे _____ ते _____ ।
°गोल्डन एजेड, मालिक, हीरे, ऊंच, ऊंच

3. हमें खुशी है कल्प-कल्प भोलानाथ बाबा हम मीठे-मीठे बच्चो को बेहद सुख का वर्सा (स्वर्ग की बादशाही) देते अर्थात् मनुष्य से देवता बनाते हैं। यह समझकर पूरा पुरुषार्थ करने लिए ड्रामा के कुछ राज़ समझना बहुत जरूरी है। इस सन्दर्भ में बाबा ने:
° a) *मोक्ष* के बारे में क्या सुनाया?
° b) *प्रलय* के बारे में क्या सुनाया?
° c) यह सब समझना *क्यों जरूरी* है?
°°° उत्तर)
° a) इस बने-बनाये ड्रामा में हर एक आत्मा-एक्टर-पार्टधारी निर्वाणधाम से आती है इस नाटकशाला-कर्मक्षेत्र मे पार्ट बजाने, जो फिर *रिपीट* होता रहता है। यह *बना बनाया* ड्रामा है, एक भी एक्टर न एड हो सकता, न कम हो सकता है। सभी को अपना-अपना *पार्ट मिला हुआ* है। मोक्ष को पा नहीं सकते। (फिर तो पार्ट विनाशी हो जाए, रिपीट कैसे हो!)
° b) भल वे सोचते हैं महाभारत बाद प्रलय हो गई फिर समुद्र में पीपल के पत्ते पर एक बच्चा अंगूठा चूसता आया। (लेकिन इनसे फिर दुनिया कैसे पैदा होगी।) वास्तव में प्रलय कभी भी होती नहीं ( *भारत अविनाशी खण्ड है, कभी विनाश नहीं होता*)। हिसाब-किताब चुक्तू कर जाना हैं। फिर नयेसिर तुम आयेंगे।
° c) यह बाबा इसलिए समझाते क्योंकि हमे जीवन-जिम्मेवारियों से भागना नहीं है (मोक्ष-प्रलय की आश में), बल्कि ज्ञान-योग द्वारा मन को मजबूत कर श्रेष्ठ जीवन अनुभव कर सबकी जीवन श्रेष्ठ बनानी है। ( *जितना याद में रहेंगे उतना पवित्र बनेंगे और ऊंच पद पायेंगे*।)

4. *बचपन* के नाज़ नखरे किन्हें कहेंगे? *वानप्रस्थ* में कौन-सा कार्य करना होता? और कब? (वरदान)
° छोटी-छोटी बातों में संगम के अमूल्य समय को गंवाना बचपन के नाज़ नखरे हैं।
° अब यह नाज़ नखरे शोभते नहीं, वानप्रस्थ में सिर्फ एक ही कार्य रह जाता है – *बाप की याद और सेवा।* इसके सिवाए और कोई भी याद न आये।
° *उठो* तो भी याद और सेवा, *सोओ* तो भी याद और सेवा – *निरन्तर* यह बैलेन्स बना रहे। (त्रिकालदर्शी बनकर बचपन की बातें वा बचपन के संस्कारों का समाप्ति समारोह मनाओ, तब कहेंगे वानप्रस्थी।)

5. तुम सबके _____ बनते हो, अन्धों की लाठी बनते हो सबको रास्ता बताने के लिए। यथा बाप _____ तथा तुम बच्चों को भी बनना है। सबको रास्ता बताना है। तुम आत्मा, वह परमात्मा है, उनसे बेहद का वर्सा मिलता है। भारत में बेहद का राज्य था, अब नहीं है। तुम हो सच्चे-सच्चे ब्राह्मण, तो सबको _____ चिता पर बिठाते हो।
°गाइड, गाइड, ज्ञान

6. जिसकी भक्ति करते, तो उनकी बायोग्राफी को भी जानना चाहिए। तुम बच्चे अभी सबकी बायोग्राफी जानते हो बाप के द्वारा। *बाप की बायोग्राफी* का पता है। क्या है बाप की बायोग्राफी?
° बाप है पतित-पावन, लिबरेटर, गाइड। (और पढ़ाकर पावन-देवता बनाते, स्वर्ग की बादशाही का वर्सा देते।)

7. शिव भगवानुवाच, हम इन ______ के द्वारा स्वर्ग के द्वार खोल रहे हैं। ______ पर कलष रखा है। वह फिर सबको ज्ञान _____ पिलाती हैं। तुम _____ सारे विश्व का उद्धार करती हो। अभी फिर बाप तुम _____ को कितना ऊंच बनाते
बुलाते हैं
°माताओं, माताओं, अमृत, मातायें, माताओं

8. गाते है पतित-पावन आओ परन्तु अपने को पतित समझते थोड़ेही हैं। बाप बच्चों को सुजाग करते हैं, तुम घोर अन्धियारे से सोझरे में आये हो। बाप पतित से *पावन बनने की कौन-सी बहुत सहज युक्ति* बताते?,
° अपने को *आत्मा समझ बाप को याद* करो। (आत्मा में ही खाद पड़ने से मुलम्मे की बन गई है। जो पारसबुद्धि थे वही अब पत्थरबुद्धि बने हैं। तुम बच्चे अभी बाप के पास पत्थरनाथ से पारसनाथ बनने आये हो।)

9. *याद* करने लिए शरीर निर्वाह अर्थ धन्धा आदि सब छोड़ना पड़ेगा। _(सही / गलत)_
° *गलत* (शरीर निर्वाह अर्थ धन्धा आदि भी करना है। छोड़ना कुछ भी नहीं है। बाबा कहते हैं *सब कुछ करते हुए मुझे याद करते रहो*। भक्ति मार्ग में भी तुम मुझ माशूक को याद करते आये हो कि हमको आकर सांवरे से गोरा बनाओ। उनको मुसाफिर कहा जाता है।)

10. बाप आकर शूद्र से _____ बनाते हैं। यज्ञ में ______ जरूर चाहिए। यह है ____यज्ञ, भारत में यज्ञ बहुत रचते हैं। अब यह तो है ______ यज्ञ, जिसमें सारी पुरानी दुनिया स्वाहा होनी है।
°ब्राह्मण, ब्राह्मण, ज्ञान, रूद्र ज्ञान

11. कई कहते हमको तो मुक्ति ही पसन्द है। हम वहाँ ही बैठे रहें। क्या यह *हो सकता है?* यदि नहीं, तो इन आत्माओं का क्या *पार्ट* है?
° ऐसे थोड़ेही हो सकता है।
° ड्रामा में नूँधा हुआ है, जाकर *पिछाड़ी में आयेंगे जरूर*। बाकी सारा समय शान्तिधाम में रहते हैं। यह बेहद का ड्रामा है। अच्छा!

Answers from Sakar Murli 11-08-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 11-08-2020*

1. संगमयुगी श्रेष्ठ आत्माओं का कौन-सा *वन्डरफुल स्थान* है? उनकी *निशानी* क्या है?
° *बापदादा का दिलतख्त*। (ऐसा तख्त सारे कल्प में नहीं मिल सकता – यह इतना विशाल तख्त है जो चलो, फिरो, खाओ-सोओ लेकिन सदा तख्तनशीन रह सकते हो।
° (निशानी) जो बच्चे सदा बापदादा के दिलतख्तनशीन रहते हैं वे इस *पुरानी देह वा देह की दुनिया से विस्मृत रहते* हैं, इसे देखते हुए भी नहीं देखते।

2. वण्डरफुल *रंग-बिरंगी* कौन-सी चीजें है? (3)
° यह *खेल* रंग-रंगीला है।
° *स्वर्ग-बैकुण्ठ* कितना रंग-बिरंगा है, खूबसूरत (हीरे-जवाहरातों के महल, खेलना, रास-विलास)। वण्डर ऑफ दी वर्ल्ड!
° यहाँ है *माया का राज्य* । यह भी कितना वण्डरफुल है। (मनुष्य क्या-क्या करते रहते हैं। दुनिया में यह कोई भी नहीं समझते कि हम नाटक में खेल कर रहे हैं।)

3. हम वण्डर ऑफ वर्ल्ड स्वर्ग लिए अपनी तकदीर अनुसार पुरुषार्थ कर रहे। याद में रहते, बहुत हर्षित रहते। तो और क्या करना है, कि माया हमे भील-मुर्दे समान खुशी उड़ा न दे? (3)
° *श्रीमत* पर चलना है (श्रीमत पर न चलने का तो जैसे कसम उठा लेते हैं।)
° *सर्विसएबुल* बनना है।(बच्चों को तो जैसे सर्विस ही सर्विस सूझती रहेगी। समझते हैं बाबा की सर्विस नहीं की, किसको रास्ता नहीं बताया तो गोया हम अन्धे रहे। यह समझने की बात है ना।)
° *मामेकम् याद* करो। देह के सब धर्म छोड़ अपने को आत्मा समझो।

5. *याद* में रहने से कौन-कौन सी प्राप्तियां है? (3)
° आत्मा *कंचन* बनेंगी ही याद की यात्रा से। (बाप कहते हैं मामेकम् याद करो – यह फरमान मानने से तुम *गोरे* बन जायेंगे। )
° बाप कहते हैं मुझे याद करो तो जन्म-जन्मान्तर के *पाप कट* जायेंगे, *पावन* बन *पावन दुनिया का मालिक* बन जायेंगे।
° याद की जब मेहनत करेंगे तब ही *वाणी जौहरदार* होगी। अभी वह ताकत कहाँ है। योग है नहीं।

6. इन ____ की बहुत वैल्यु है। यह ज्ञान रत्न _____ करने हैं। अभी तुम ज्ञान ____ से डायरेक्ट सुनते हो तो फिर और कुछ भी सुनने की दरकार ही नहीं।
°रत्नों, धारण, सागर

7. *भाषण* करने के लिए बाबा ने कौन सी सुन्दर तैयारी सिखाई? (3)
° बच्चों को *विचार सागर मंथन* करना है, तब ही प्वाइंट्स निकलेंगी।
° भाषण करना है तो *सवेरे उठकर लिखना* चाहिए।
° *फिर पढ़ना* चाहिए। भूली हुई प्वाइंट्स फिर *एड* करनी चाहिए। इससे धारणा अच्छी होगी (फिर भी लिखत मुआफिक सब नहीं बोल सकेंगे। कुछ न कुछ प्वाइंट्स भूल जायेंगे।)

8. बाबा ने कहा *कृष्ण जन्माष्टमी* पर भी होशियार हैं वह खुशी से समझायेंगे। कौन-कौन सी वन्डरफुल पॉइंट्स सुना सकते? (9)
° श्रीकृष्ण वण्डर ऑफ वर्ल्ड का प्रिन्स था। वह *सतयुग फिर कहाँ गया* ! सतयुग से लेकर सीढ़ी कैसे उतरे। सतयुग से कलियुग कैसे हुआ? उतरती कला कैसे हुई?
*° श्रीकृष्ण आ रहे हैं* । कृष्ण का राज्य फिर स्थापन हो रहा है।
° श्रीकृष्ण है प्रिन्स। *कृष्ण कौन है*, यह तो वण्डर ऑफ वर्ल्ड का मालिक था। भारत ही पैराडाइज था। उस पैराडाइज का मालिक श्रीकृष्ण था। (हम आपको सन्देश सुनाते हैं कि श्रीकृष्ण आ रहे हैं। राजयोग भगवान ने ही सिखाया है। अब भी सिखला रहे हैं। पवित्रता के लिए भी पुरुषार्थ करा रहे हैं, डबल सिरताज देवता बनाने के लिए।)
° *कृष्ण के चित्र* में भी लिखत बड़ी फर्स्टक्लास है। इस लड़ाई के बाद स्वर्ग के द्वार खुलने हैं। इस लड़ाई में जैसे स्वर्ग समाया हुआ है।
° बच्चों को भी बहुत खुशी में रहना चाहिए, जन्माष्टमी पर मनुष्य कपड़े आदि नये पहनते हैं। लेकिन तुम जानते हो कि अभी हम यह पुराना शरीर छोड़ *नया कंचन शरीर लेंगे।* कंचन काया कहते हैं ना अर्थात् सोने की काया। आत्मा भी पवित्र, शरीर भी पवित्र।
° कृष्ण के लिए कहते श्याम-सुन्दर। *श्याम-सुन्दर का अर्थ* समझाकर कहो कि तुम भी अब राखी बांध, काम चिता से उतर ज्ञान चिता पर बैठेंगे तो गोरा बन जायेंगे। अब बाबा आये हैं सुन्दर बनाने।
° *कृष्ण का जन्म कब* हुआ, यह भी किसको पता नहीं है।
° *बैज में भी कृष्ण* का चित्र है, इस पर भी तुम समझा सकते हो।
° *मुख छोटा बात बड़ी* – यह कृष्ण के लिए कहते हैं। अभी तुम कितनी बड़ी बातें सुनते हो, इतना बड़ा बनने के लिए।

9. बच्चों की _____ तो बड़ी फर्स्टक्लास होनी चाहिए। मुख से सदैव ____ निकलने चाहिए। बच्चे, अच्छे _____ धारण करो, कुल का नाम बाला करो। तुम जानते हो अभी हम ऊंच ते ऊंच ब्राह्मण कुल के हैं।
°चलन, रत्न, गुण

10. हद के नाम, मान, शान के पीछे दौड़ लगाना अर्थात _____ के पीछे पड़ना।
°परछाई

11. भारतवासी ही परिस्तानी थे, अब कब्रिस्तानी बने हैं फिर _____ पर बैठ ______ धारण कर परिस्तानी बनते हैं। इतना _____ चाहिए – हमको भगवान पढ़ाते हैं। भगवान के साथ रहते हैं। भगवान के बच्चे भी हैं तो फिर हम पढ़ते भी हैं। यह बाप का _____ तो सबको देना है।
°ज्ञान चिता, दैवी गुण, नशा, पैगाम

12. हम किसको *पवित्र बनने की राखी* बांध सकते? और कभी?
° *किसको भी* तुम राखी बांध सकते हो (यूयूरोपियन, वेश्याओं, आदि)। पवित्र बनना है।
° भल राखी बंधन का दिन न हो, *कभी भी* राखी बांध सकते हो। (तुम्हारा धन्धा ही यह है। बोलो, बाप के साथ प्रतिज्ञा करो। बाप कहते हैं मामेकम् याद करो तो पवित्र बन जायेंगे।)

13. कहना है – भगवानुवाच, जरूर कोई ____ से कहेंगे ना। शिवबाबा पढ़ाते हैं। ____ बिगर तो पढ़ा न सकें, इशारा देना ही बस है।
°तन, रथ

14. बहुत कहते हैं हमारे में मम्मा आती है, शिवबाबा आते हैं। बाबा ने कहा यह बिल्कुल गलत है। बाबा ने यह कैसे *सिद्ध* किया? (3)
° परन्तु *नई-नई प्वाइंट्स तो मुकरर तन द्वारा ही सुनायेंगे* कि दूसरे किसी द्वारा सुनायेंगे। यह हो नहीं सकता।
° ऐसे तो बच्चियाँ भी बहुत प्रकार की *अपनी प्वाइंट्स* सुनाते हैं। (जैसे मैगजीन में, ऐसे नहीं कि मम्मा-बाबा उनमें आते, वह लिखवाते हैं। नहीं)
° बाप तो यहाँ डायरेक्ट आते हैं, *तब तो यहाँ सुनने के लिए आते* हो। अगर मम्मा-बाबा कोई में आते हैं तो फिर वहाँ ही बैठ उनसे पढ़ें। नहीं, यहाँ आने की *सबको कशिश होती* है। (दूर रहने वालों को और ही जास्ती!)

Answers from Sakar Murli 06-08-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 06-08-2020*

1. _____ की शमा चारों ओर जलाओ तो बाप को सहज देख सकेंगे।
°पवित्रता

2. अभी तुम जानते हो – हम कितने साहूकार थे। अभी फिर बनते हैं। बाबा लिखते भी हैं तुम ______ -पति बनते हो। तुम बच्चे जानते हो बाबा हमारा ______ भरपूर कर देते हैं। आधाकल्प के लिए जितना चाहिए उतना ____ लो, परन्तु पुरूषार्थ पूरा करो। गफलत नहीं करो। कहा जाता है ना फालो _____ । तो यह जाकर बनेंगे। नर से _____ , नारी से लक्ष्मी।
°पदमापदम, खजाना, धन, फादर, नारायण

3. यह बहुत ही नया-रमणीक- रहस्ययुक्त ज्ञान है, जब कोई ऐसी बात सुनी जाती है तो चिन्तन चलता है। तुम बच्चों का भी *सवेरे-सवेरे उठ यही चिन्तन-सिमरण करना है*। किन बातों का? (4) इस चिन्तन के फलस्वरूप हमें *कैसा बनना* है?
° कितनी छोटी (वन्डरफुल!) *आत्मा के आधार पर यह कितना बड़ा शरीर चलता* है।
° *आत्मा में 84 जन्मों का पार्ट* नूँधा हुआ है। शरीर तो विनाश हो जाता है। बाकी आत्मा रहती है।
° *आत्म-अभिमानी बनना है* । (आत्मा की महिमा है तो शरीर की भी महिमा होती है।) आत्मा इन शरीर के कानों द्वारा *सुनती* । आत्मा ही *बोलती* है शरीर द्वारा। आत्मा ही शरीर द्वारा अच्छे वा बुरे *कर्म करती* है। (अब फिर हम घर जायेंगे। जहाँ सब आत्मायें आती हैं, वह हमारा घर है।)
° इस शरीर में जो आत्मा है, उनको *परमपिता परमात्मा पतित-पावन ज्ञान-सुख-शान्ति सागर बैठ पढ़ाते* हैं। (आत्मा का ज्ञान रत्नों से श्रृंगार करते)
° (कैसा बनना) जैसे बाप मीठा है, ऐसे *मीठा गुल-गुल* बन सबको *सुख देना* है। कोई भी अकर्तव्य कार्य नहीं करना है। *उत्तम से उत्तम कल्याण का ही कार्य करना* है। (इसके लिए बाप-समान शरीर में होते भी देही-अभिमानी- अशरीरी-नष्टोमोहा रहना है।) (जबकि बाप ब्रह्मा द्वारा ऊंच ब्राह्मणों को रच नई दुनिया की स्थापना कर रहे हैं। हमारा यह ईश्वरीय गोद में जन्म अति-दुर्लभ हीरे जैसा है।)

4. हम आत्माओं को बाप कहते हैं मीठे-मीठे बच्चों! तुम कितना _____ बन रहे हो। तुम्हारी बुद्धि में सृष्टि के आदि-मध्य-अन्त का सारा _____ है।
°समझदार, ज्ञान

5. तुम भी सागर से निकली हुई ज्ञान ____ हो। तुम भी ज्ञान सागर से निकली हो फिर सब ______ चली जायेंगी, जहाँ बाबा रहते हैं, वहाँ तुम आत्मायें भी रहती हो। ज्ञान सागर आकर तुमको _____ मीठा बनाते हैं। आत्मा जो ____ बन गई है उनको मीठा बनाते हैं। 5 विकारों रूपी छी-छी ______ तुमसे निकल जाती है, तो तुम तमोप्रधान से सतोप्रधान बन जाते हो।
°नदी, वहाँ (घर), पवित्र, खारी, नमकीन

6. क्या लक्ष्मी-नारायण को कहेंगे *सदैव* पवित्रता का सागर?
° नहीं। *एक बाप ही* सदैव पवित्रता का सागर है।

7. ______ आत्मा को _______ बाप द्वारा ________ मत मिलती है। अभी की श्रीमत ही _______ बन जाती है, जो आधाकल्प चलती है। कुछ भी नहीं समझते हो तो बाप से पूछो क्योंकि बाप है _______ सर्जन।
°अविनाशी, अविनाशी, अविनाशी, अविनाशी, अविनाशी

8. *मोहजीत राजा की कहानी* है (बच्चे ने शरीर छोड़ा यह खबर सुनाई, फिर भी उनके परिवार में कोई रोया नहीं), वह सचमुच सतयुग में था। _(सही / गलत)_
° *गलत* (कोई मोहजीत राजा वास्तव में होता नहीं। यह तो कथायें बहुत बनाई हैं ना। वहाँ अकाले मृत्यु होती नहीं। तो पूछने की भी बात नहीं रहती। इस समय तुमको मोहजीत बनाते हैं।)

9. हम ब्राह्मण *नई दुनिया में* है। _(सही / गलत)_
° *गलत* (नई दुनिया स्थापन होती है।)

10. बाबा के *सम्मुख* आते हो, तो पहले क्या याद करना है? और क्यों?
° (क्या याद करना) हम *ईश्वर बाप के सम्मुख* जाते हैं। *शिवबाबा* तो *निराकार* है। उनके सम्मुख हम कैसे जायें। तो उस बाप को *याद* कर फिर बाप के सम्मुख आना है। तुम जानते हो वह इसमें बैठा हुआ है। यह शरीर तो पतित है।
° (क्यों) शिवबाबा की याद में न रह कोई काम करते हो तो (देह-भान के संस्कार पक्के होते अर्थात्‌) पाप लग जाता है।

11. बाप श्रीमत देते हैं तो फिर उस पर चलना है। _______ का उल्लंघन नहीं करना है। श्रीमत से ही तुम _____ बनते हो।
°कायदे कानून, श्री

12. बाबा ने कहा मंजिल बड़ी है, इसलिए अपना *रोज़ का खाता* रखो। उसमे क्या-क्या चेक करना है? (3)
° कमाई की या नुकसान किया?
° बाप को कितना याद किया?
° कितने को रास्ता बताया? (अन्धों की लाठी तुम हो ना। तुमको ज्ञान का तीसरा नेत्र मिलता है। अच्छा!)

13. भारत अब _____ जैसा कंगाल है ना। पुरूषार्थ कर अपनी जीवन ____ जैसी बनानी है। गफलत नहीं करनी है। _____ के पिछाड़ी हैरान नहीं होना है। अभी बाबा हमको क्या बनाते हैं। एम-ऑब्जेक्ट तो है ना। हम नर से नारायण बनते हैं।
°कौड़ी, हीरे, कौड़ियों

14. *चैलेन्ज और प्रैक्टिकल की समानता* द्वारा स्वयं को पापों से सेफ रखने वाले विश्व सेवाधारी भव। तो कौन-सी *छोटी बातें* भी पाप को बढ़ाती है? (5) अब *क्या करना* है? (2)
° (छोटी बातें) संकल्प में भी किसी भी विकार की कमजोरी, व्यर्थ बोल, व्यर्थ भावना, घृणा वा ईर्ष्या की भावना पाप के खाते को बढ़ाती है।
° (क्या करना) इसलिए *पुण्य आत्मा भव* के वरदान द्वारा स्वयं को *सेफ* रख *विश्व सेवाधारी* बनो। संगठित रूप में *एकमत, एकरस* स्थिति का अनुभव कराओ।

Answers from Sakar Murli 31-08-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 31-08-2020*

1. जब हर _____ श्रेष्ठ होगा तब स्वयं का और विश्व का कल्याण होगा। अभी तक जो कुछ हुआ – उसे ______ लगाओ। बीती को चिंतन में न लाना – यही _____ पुरूषार्थ है। अभी _____ करने का समय नहीं है क्योंकि संगमयुग की दो घड़ी अर्थात् अनेक वर्ष। फुलस्टॉप लगाना अर्थात् सर्व ______ से फुल बनना।
°संकल्प, फुलस्टॉप, तीव्र, वेस्ट, खजानों

2. इस दुनिया को तो हम जानते हैं। बाकी *पुण्य की दुनिया* कौन-सी है? (2)
° *मुक्ति और जीवनमुक्ति* पुण्य की दुनिया को कहा जाता है। वहाँ पाप होता नहीं। (पाप होता है दु:खधाम रावण राज्य में।)

3. *सतयुग में पवित्रता* के आधार पर कितने प्रकार (कैटेगरी) की आत्माएं होंगी?
° सतयुग में तो मलेच्छ होते नहीं। है ही पवित्र दुनिया। *एक ही कैटेगरी है* ।

4. हम इस समय *पूरा* रावण राज्य में हैं। _(सही / गलत)_
° *गलत* (रावण राज्य में है, परन्तु किनारा किया हुआ है। *हम अभी पुरुषोत्तम संगमयुग पर हैं*। बच्चे जब यहाँ आते तो बुद्धि में है – हम उस बाप के पास जाते हैं जो हमको मनुष्य से देवता बनाते हैं। सुखधाम का मालिक बनाते हैं।)

5. *सुखधाम का मालिक* बनाने वाले हैं ब्रह्मा बाबा। _(सही / गलत)_
° *नहीं* (कोई भी देहधारी नहीं। बनाने वाला है ही *शिवबाबा*, जिसको देह नहीं है। तुम समझते हो हम *बेहद के बाप* पास जाते हैं। वह हमको श्रेष्ठ मत देते हैं।)

6. बाबा के पास आते हैं, बाबा ज्ञान का _____ कराते हैं आत्मा को। समझते हो हम आत्मा ज्ञान से _____ होंगी। फिर शरीर भी ______ मिलेगा। आत्मा और शरीर दोनों पवित्र ______ में होते हैं।
°श्रृंगार, पवित्र, पवित्र, सतयुग

7. तुम अभी जानते हो हम आत्मा ______ हैं। पहले-पहले हम सुखधाम में आये फिर अब दु:खधाम में आये हैं। अब बाप फिर सुखधाम में ले जाने आये हैं। कहते हैं मुझे ______ करो और _______ बनो।
°एक्टर, याद, पवित्र

8. संगमयुग पर जो *अच्छे पुरुषार्थी* हैं, वह क्या समझते होंगे? (2)
° हमने *84 जन्म* लिए हैं फिर इन *लक्ष्मी-नारायण के साथ* ही हम *सतयुग में राज्य* करेंगे। (सिर्फ एक ने तो 84 जन्म नहीं लिया है ना।)

9. *पहली सब्जेक्ट* कौन-सी हे? _(आज की मुरली अनुसार)_
° मुख्य बात है *बाप को याद करो तो विकर्म विनाश हों*। यह है पहली सब्जेक्ट।

10. जबकि हम सारे राज़ को जानते (रचता बाप, सूक्ष्मवतन, भविष्य मर्तबा आदि)। तो बाप कहते ऐसे *दैवीगुण* भी धारण करने हैं। फिर *आँखों को शीतल* करने लिए कौन-सी जबरदस्त युक्ति सुनाई? (2)
° आत्मा इन *खिड़कियों से देखती* है (जैसे बाप)। हमारी भी *दृष्टि आत्मा पर* जाती है। आत्मा को समझाते।
° अपने को *अशरीरी* समझो। (यह कर्मातीत अवस्था पिछाड़ी में होगी सो भी जब बाबा को अपना *चार्ट* भेज देंगे।)

11. बाबा किन्हें *सच्चा ऑनेस्ट बच्चा* समझते?
° *जो चार्ट लिखते* हैं। (चार्ट के साथ फिर मैनर्स भी चाहिए। बच्चे चार्ट नहीं लिखते हैं तो जरूर कुछ खामियां हैं, जो बाबा से छिपाते हैं।)

12. चार्ट में क्या-क्या *नोट* कर सकते?
° हमने किसी को *दु:ख* तो नहीं दिया? कोई से लड़ा- *झगड़ा* तो नहीं? उल्टा-सुल्टा तो नहीं *बोला* ? कोई *अकर्तव्य* कार्य तो नहीं किया? *दृष्टि* ठीक रही?

13. बाबा कहते किसी को भी दु:ख न दो। फिर कोई दिखाते हैं बाबा हमारा चार्ट देखो। *हमने ज़रा भी किसको दु:ख नहीं दिया* है। तो बाबा ने उनकी किन श्रेष्ठ शब्दों में महिमा की? (2)
° बाबा कहेंगे यह बच्चा तो *बड़ा मीठा* है। *अच्छी खुशबू* निकाल रहे हैं।
° बाबा *बुलायेंगे* भी ऐसे अच्छे बच्चे को *हम देखें तो सही* । सपूत बच्चों को बाप *बहुत प्यार करते* हैं।

14. *टीचर* बनने में कितना समय लगता? (2)
° *एक दिन में भी* टीचर बन सकते। (बाप तुमको 84 का राज़ समझाते, टीच करते। फिर जाकर उस पर मनन करना है। हमने 84 जन्म कैसे लिये?)
° टीचर बनना तो *सेकण्ड का काम* है। (कई टीचर से भी जास्ती दैवीगुण धारण करते। याद की यात्रा में तीखे निकलते। तो टीचर से भी ऊंच पद पायेंगे।)

15. बाबा ने कहा रोज़ *शिव के मन्दिर में* जाकर टीच करो। वहां क्या समझा सकते?
° *शिवबाबा कैसे आकर* स्वर्ग की स्थापना करते हैं? *स्वर्ग का मालिक बनाते* हैं। (समझाना बहुत ही सहज है।)

16. तुम कितना *प्रदर्शनी* में भी समझाते। निकलते बिल्कुल थोड़े हैं। इसलिए सेवा करनी ही नहीं चाहिए। _(सही / गलत)_
° गलत (ड्रामा में था, किया! *कहाँ निकलते भी हैं* प्रदर्शनी से। कहाँ नहीं निकलते हैं। *आगे चल आयेंगे*, ऊंच पद पाने का पुरूषार्थ करेंगे।

17. (कुछ ठीक नहीं होता, तो) कहते *भगवान ने* ऐसे क्यों किया?
° यह अनादि ड्रामा बना हुआ है (कर्मों के हिसाब-किताब भी है)। *भगवान ने थोड़ेही कुछ किया।*

18. हर एक कहते भी हैं पार लगाओ। अब पार तो जायेंगे ______ में। परन्तु वहाँ पद ऊंच पाना है तो _____ बनना है। मेहनत करनी है।
°सतयुग, पवित्र

19. भगवान, देवी-देवता आदि के लिए *अनेक प्रश्न* करते। बाबा ने कौन-सा श्रेष्ठ समाधान सुनाया?
° पहली-पहली मुख्य बात भगवान कौन है, उनको तो समझो। *अपने को आत्मा* समझेंगे तो कहेंगे यह तो बात ठीक है। हमको पतित से *पावन* जरूर बनना है। *याद करना* है उस एक भगवान को। सब धर्मों में भगवान को याद करते हैं।

20. बलिहारी गुरू आपकी…… अर्थात्‌ बलिहारी उस सतगुरू की जिसने गोविन्द श्रीकृष्ण का साक्षात्कार कराया। बस *साक्षात्कार ही काफी* है! _(सही / गलत)_
° गलत (साक्षात्कार से सिर्फ मुख मीठा नहीं होता। मीरा साक्षात्कार कर सचमुच स्वर्ग में तो गई नहीं। *गोविन्द को सिर्फ देखना नहीं है, ऐसा बनना है।* तुम यहाँ आये ही हो ऐसा बनने। यह नशा रहना चाहिए हम उनके पास जाते हैं जो हमको ऐसा बनाते हैं। *गुरू द्वारा तुम गोविन्द बनते* हो।)

21. भल कितने भी *बड़े-बड़े मकान* हैं, सुख के सब साधन हैं तो भी कहेंगे पतित पुरानी दुनिया है। _(सही / गलत)_
° *सही* (विषय वैतरणी नदी में गोता खाते रहते हैं। यह भी नहीं समझते कि विकार पाप है। बुलाते भी हैं – हे भगवान, हे पतित-पावन आकर इस पतित दुनिया को पावन बनाओ। स्वर्ग में एक भी पतित होता नहीं।)

22. बाबा ने कहा चाल-चलन का सारा मदार आंखों पर है। तो *आंखें* कैसे-कैसे धोखा देती हैं? (3)
° यह आंखें क्रिमिनल हैं, कोई को देखने से *विकार* की दृष्टि जाती है (तो उनके 84 जन्म नहीं होंगे। वह नर से नारायण बन नहीं सकेंगे। जब इन आंखों पर जीत पा लेंगे तब कर्मातीत अवस्था होगी।)
° आंखे देखती हैं – यह *क्रोध* करते हैं तो खुद भी लड़ पड़ते हैं।
° चीज़े उठा लेना ( *लोभ* )।

23. *शिवबाबा का यज्ञ* है ना। तो कुछ भी उठा सकते। _(सही / गलत)_
° गलत (चार्ज वाली के बिगर पूछे चीज़ उठा नहीं सकते। *तो और भी ऐसे करने लग पड़ेंगे*। वह भी पाप बन जाता।)

24. (सम्पूर्ण योग लगाकर कल्प-कल्पानतर सर्व प्राप्ति सम्पंन बनने लिए बेहद का वैराग्य चहिए) इसलिए इस *पुरानी दुनिया* को बाबा ने आज कौन-कौन से नाम दिए? (7)
° रावण राज्य, पतित दुनिया, कंगाल दुनिया, दु:खी दुनिया, पाप की दुनिया, दु:खधाम, नर्क!

Answers from Sakar Murli 04-08-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 04-08-2020*

1. हर संकल्प में _____ की विशेषता को प्रैक्टिकल में लाओ तो प्रत्यक्षता हो जायेगी।
°दृढ़ता

2. भल कांटों के जंगल दुःखधाम मे कोई भी समस्या हो (तन की बीमारी, धन ऊपर-नीचे आदि), सुखदाता बाप के बच्चो को *स्वप्न में भी दु:ख की फीलिंग / लहर नहीं* आ सकती। यह कैसे होता?
° क्योंकि *योगबल से चुक्तू* कर सुख-स्वरूप रहते (जब दु:ख आये तो मंत्र ले लो जिससे दु:ख भाग जायेगा। जैसे सागर में लहरें आती हैं और चली जाती हैं लेकिन जिन्हें उन लहरों में लहराना आता है वह उसमें सुख का अनुभव करते हैं, लहर को जम्प देकर ऐसे क्रास करते हैं जैसे खेल कर रहे हैं। तो सागर के बच्चे सुख स्वरूप हो, दुख की लहर भी न आये।)

3. परमात्मा का कौन-सा *यथार्थ परिचय* हम जानते, जिससे ब्रह्मा का राज़ भी स्पष्ट हो जाता?
° ऊंच ते ऊंच है भगवान *शिवबाबा*
° जो प्रजापिता ब्रह्मा में *प्रवेश* कर उन्हें क्रियेट कर हमारे ऊंच ब्राह्मण कुल को रचते। (प्रजापिता जरूर यहां स्थूल वतन में होंगे, और यह वही कृष्ण-नारायण-विष्णु की आत्मा का 84 वा जन्म है)
° फिर शिवबाबा नॉलेजफुल बन आदि-मध्य-अन्त की *नॉलेज देते*, वा ज्ञान-यज्ञ (ईश्वरीय विद्यालय) रचते
° हम आत्मायें *मामेकम् याद* में मस्त रह (ड्रामा को *साक्षी* देख) पावन-डबल सिरताज-देवता बनते।

4. यह _____ सब आत्माओं के रथ हैं। अकालमूर्त आत्मा का बोलता चलता _____ है। जो _____ में पहले-पहले होते हैं, वहाँ भी वह पहले आयेंगे। बाप कहते हैं ____ में रहने से तुम सेफ्टी में रहेंगे।
°(शरीर), तख्त, पढ़ाई, याद

5. वैकुण्ठ को विष्णुपुरी कहा जाता है अर्थात् _____ का राज्य था। अभी तुम पुरूषार्थ करते हो – हम नई दुनिया में जायें। वहाँ जाकर नये-नये _____ बनाने पड़ेंगे।
°लक्ष्मी-नारायण, महल

6. ज्ञान से या तो है सेकण्ड में _____ या तो फिर कहते सागर को ____ बनाओ तो भी पूरा नहीं हो। या तो सिर्फ कहते हैं ____ को याद करो।
°जीवनमुक्ति, स्याही, अल्फ

7. ब्राह्मण बनने से तुम _____ के बन गये। आत्मायें कहती हैं – शिवबाबा, हमारी तो आपसे _____ हो गई। अब आपसे हम मिलें कैसे? शिवबाबा तो पतियों का _____ है। बच्चों पर अब है _____ की दशा।
°धनी, सगाई, पति, ब्रहस्पति

8. राधे वा कृष्ण के माँ-बाप का *पद* उनसे ज्यादा ऊँच है। _(सही / गलत)_
° *गलत* (वह सेकण्ड क्लास का पद है जो सिर्फ निमित्त बनते हैं कृष्ण को जन्म देने। ऐसे नहीं कि कृष्ण की आत्मा से वह ऊंच पढ़ा हुआ है। राधे-कृष्ण है नम्बर-वन!)

9. हमारा *ज्ञान* कभी कम-जास्ती होता रहता। _(सही / गलत)_
° *गलत* (ज्ञान कभी कम-जास्ती नहीं होता। याद की यात्रा ही कभी कम, कभी जास्ती होती है। ज्ञान तो जो मिला है सो है ही। याद की यात्रा में कभी उमंग रहता है, कभी ढीला।)

10. अगर कोई ____ में गिरा तो बुद्धि में धारणा हो नहीं सकती। बाबा कहते हैं तुम ऐसी कड़ी भूल करेंगे तो ______ हो जायेंगे। तुमको हम गोरा बनाने के लिए आये हैं, फिर तुम ______ कैसे करते हो। भल स्वर्ग में आयेंगे, पाई पैसे का पद पायेंगे। राजधानी स्थापन हो रही है ना। कोई तो हार खाकर जन्म-जन्मान्तर पद भ्रष्ट हो जाते हैं। पिछाड़ी में तुमको सब _______ होंगे। ______ का ही मान है।
°विकार, चकनाचूर, काला मुँह, साक्षात्कार, पवित्रता

Answers from Sakar Murli 03-08-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 03-08-2020*

1. *एकान्तवासी* बनना अर्थात् क्या?
° *एक के अन्त में* खो जाना!

2. *विजयी रत्नों* को कौन-सा नशा रहता? (3) इससे *प्राप्ति* क्या है? (3)
° (कौन-सा नशा) सदा यही नशा रहे कि हम *बाबा के गले का हार* विजयी रत्न हैं,
° हम *विश्व के मालिक के बालक* हैं।
° *हमें जो मिला* है वह किसी को भी मिल नहीं सकता
° (प्राप्ति) यह नशा और खुशी स्थाई रहे तो किसी भी प्रकार की *आकर्षण से परे* रहेंगे।
° जो सदा विजयी हैं वो *सदा हर्षित* हैं।
° एक बाप की *याद के ही आकर्षण में आकर्षित* हैं।

3. तुमको बाप द्वारा पता पड़ा है कि हमारा _____ धर्म है। बाप आकर फिर तुमको उस धर्म में _____ करते हैं। तुम जानते हो हमारा धर्म कितना _____ देने वाला है।
°आदि सनातन देवी-देवता, ट्रांसफर, सुख

4. बाबा ने आते ही कहा बच्चों को *नशा* चढ़ता है। कौन-सा नशा?
° हमको माया से लड़कर (विजयी बन) इस विश्व पर गुप्त रीति *राज्य स्थापन करना* है अथवा *बाप से वर्सा लेना है*।

5. इसको वास्तव में *लड़ाई भी नहीं* कहेंगे। क्यों? (3)
° ड्रामा अनुसार तुम जो सतोप्रधान से तमोप्रधान बने हो सो *फिर सतोप्रधान बनना है*।
° तुमको कोई से लड़ाई आदि नहीं करनी है। तुमको तो अपने *स्वधर्म में टिकना* है। अन्दर में यह स्मृति रहनी चाहिए – मैं *आत्मा शान्त स्वरूप* हूँ। (ड्रामा का चक्र पूरा हुआ, अभी फिर पवित्र बन हमको वापिस घर जाना है।)
° और *बाप को याद करना है*। (तुमको नशा चढ़ेगा हम ईश्वर की सन्तान हैं। बाप को याद करने से ही विकर्म विनाश होते हैं। कितना सहज है – याद से हम पवित्र बन फिर शान्तिधाम में चले जायेंगे। यही सच्ची कमाई है।

6. सर्व का सद्गति दाता, ज्ञान का सागर उस परमपिता परमात्मा को कहा जाता है। और कोई को ____ -वान कह नहीं सकते। फिर सब हैं _____-वान। यहाँ तो घर में रहते, सब कुछ करते ____ को याद करना है। इस टीचर से तो बहुत-बहुत ऊंच ____ मिलता है। टीचर की याद रहे तो भी ____ और ____ याद जरूर आयेंगे।
°ज्ञान, भक्ति, टीचर, पद, बाप, गुरू

7. बाप सर्विस के लिए कितना उछलते हैं (अखबार, देहली, बनारस, कॉन्फ्रेंस, बड़ा मेला, गीता का भगवान, आदि)। हमको भी बहुत मदद देते। फिर भी बच्चों को *रूहानी सर्विस का हौंसला / उछल* क्यों नहीं? (6)
° बुद्धि कहाँ न कहाँ फँसी हुई है।
° क्रिमिनल आई बड़ा नुकसान करती है। यह बीमारी बड़ी कड़ी है इसलिए उछलते नहीं हैं।
° धन के भूखे हैं (लोभ)
° झरमुई झगमुई में बहुतों की बुद्धि अटकी रहती है।
° मोह
° देह-अभिमान

8. सर्विस को *स्वतः तेज़* करने लिए कौन-सी युक्तियां है? (2)
° आपस में *क्षीरखण्ड* होना चाहिए। अपना पाण्डवों का *किला* तो बनायें। आपस में मिलकर राय करो। (विहंग मार्ग की सेवा लिए)
° ज्ञान में याद की यात्रा का जौहर चाहिए। बाप कहते हैं तुम *याद में मस्त* रहो तो सर्विस बढ़ती जायेगी। (ज्ञान सुनाना तो प्रत्यक्ष है। याद ही गुप्त मेहनत है, जिससे शक्ति मिलती है। ज्ञान से शक्ति नहीं मिलती। तुम पतित से पावन याद के बल से बनते।)

9. तुम तो सिर्फ सोये हुए को _____ हो। बच्चों को बाप का _____ करना है। बाप तो आये हैं पतितों को ____ बनाने।
°जगाते, शो, पावन

10. देह-अभिमान ने ही सत्यानाश की है। अब बाप *सत्या ऊंच* करने की कितनी सहज बात बताते हैं। कौन-सी?
° *बाप को याद* करो तो शक्ति आये। (नशे से, हम किस बाप के बच्चे हैं।)

11. बच्चों को कब बहुत *खुशी* रहती, और कब खुशी गायब हो जाती?
° *याद जब एकरस* रहती है, *अवस्था अच्छी* है तो बहुत खुशी रहती है।
° और *जब याद ठीक नहीं*, किसी बात में घुटका खाते हैं तो खुशी गायब हो जाती है।

12. सबसे *ऊंच ते ऊंच सेवा* कौन-सी है?
° *बाप की याद* ही है ऊंच ते ऊंच सेवा। मन्सा-वाचा-कर्मणा बुद्धि में बाप की याद रहे।
° मुख से भी *ज्ञान* की बातें सुनाओ। किसको दु:ख नहीं देना है। कोई अकर्तव्य नहीं करना है।
° टाइम वेस्ट नहीं करो। अच्छी रीति *धारणा* करो।

13. हम पतित से पावन *ज्ञान के बल* से बनते हैं। _(सही / गलत)_
° *गलत* (याद के बल से!)

14. इस _____ दुनिया में माया का शो बहुत है। कितना फैशन हो गया है। छी-छी दुनिया से _____ आनी चाहिए।
°छी-छी, ऩफरत