Answers from Sakar Murli 26-06-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 26-06-2020*

1. *स्वदर्शन चक्रधारी* इनमें से किन्हें कहेंगे? _(बाबा, ब्राह्मण, देवता)_
° *बाबा* वा *ब्राह्मणों* को (देवताओं को नहीं)

2. सब थोड़ेही राजा बनेंगे। _(सही / गलत)_
° *गलत* (अरे तुम सबका चिंतन क्यों करते हो! स्कूल में यह ओना (फिकर) रखते हैं क्या कि सब थोड़ेही स्कॉलरशिप पायेंगे? पढ़ने लग पड़ेंगे ना।)

3. तुम अभी श्रीमत पर _______ की अति में जाते हो, तुम्हें बाप से ______ का वर्सा मिलता है, ______ में सब कुछ आ जाता है। आत्मा तो स्वयं _____ स्वरूप है। इस शरीर द्वारा सिर्फ पार्ट बजाना होता है।
°साइलेन्स, शान्ति, शान्ति, शान्त

4. सबसे *महान पुण्य* कौन-सा है? और सबसे श्रेष्ठ *दान* ?
° *घर-घर में प्रदर्शनी* खोलो। इन जैसा महान पुण्य कोई होता नहीं।
° किसको *बाप का रास्ता बताना*, इन जैसा दान कोई नहीं।

5. ______ की भावना रखने से सम्पन्न आत्मा हो जायेंगे और जो सम्पन्न होंगे वह सदा ______ होंगे। मैं देने वाले दाता का बच्चा हूँ-देना ही लेना है, यही भावना सदा _______ , इच्छा मात्रम् अविद्या की स्थिति का अनुभव कराती है। सदा एक लक्ष्य _____ की तरफ ही नज़र रहे, और कोई भी बातों के विस्तार को देखते हुए नहीं देखो, सुनते हुए भी नहीं सुनो।
°दातापन, तृप्त, निर्विघ्न, बिन्दू

6. यह प्रदर्शनी तो तुम्हारे _________ में होनी चाहिए क्योंकि तुम बच्चे ब्राह्मण हो। इन पर समझाना बहुत ______ है। अच्छा – तुमको एक _______ दे देंगे। बोर्ड पर भी लिख दो – _____ के द्वार कैसे खुल रहे हैं – आकर समझो।
°घर-घर, सहज, ब्राह्मणी (टीचर), स्वर्ग

7. बुद्धि वा स्थिति यदि कमजोर है, तो उसका कारण है _______।
°व्यर्थ संकल्प

8. विकर्माजीत बन ऊंच पद पाना है तो कौन-सा *चिन्तन* खत्म करना है, और कौन-सा चिन्तन करना है?
° यह क्यों होता है, यह ऐसे क्यों करता है। इन सब *फालतू बातें* को छोड़ना।
° एक ही चिंतन रहे कि *हमें तमोप्रधान से सतोप्रधान बनना है*। जितना बाप को याद करेंगे उतना विकर्माजीत बन ऊंच पद पायेंगे।

9. बाप को बुलाते भी इसलिए हो हे पतित-पावन, लिबरेटर, गाइड आओ। तुम्हारा भी नाम ______ गाया हुआ है। बाप भी _______ है। सभी आत्माओं को ले जायेंगे।
°पाण्डव, पण्डा

10. कोई _____ 7 रोज़ का कोर्स उठाते हैं। किसको ____ में भी तीर लग सकता है।
पुरानों से भी तीखे चले जाते हैं, क्यों?
° विरले, सेकेण्ड
° क्योंकि अच्छी-अच्छी प्वाइंट्स, तैयार माल मिलता है।

11. यह बाबा _______ इतना ऊंच पद पाते हैं, हम क्यों नहीं बनेंगे।
मीठे मीठे बच्चों ______ बनो। अपने को ________ समझकर बाप को याद करो। तुम मेरे लाडले _____ हो ना। आधाकल्प के तुम ____ हो।
°बूढ़ा, देही-अभिमानी, आत्मा, बच्चे, आशिक

12. बाबा ने कौन-सी *बेहद* की 4 बाते बतायी?
° बेहद का *बाप* बेहद का *वर्सा* दे रहे हैं। बेहद की *नॉलेज* सुना रहे हैं। तो *त्याग* भी बेहद का चाहिए।

13. जब _____ पतित दुनिया बनती है तब ही बाप आकर ______ पावन दुनिया बनाते हैं।
तुम बुलाते आये हो हे _________ , अब मैं आया हूँ, तुमको कहता हूँ यह अन्तिम जन्म ______ रहो। तो तुम _____ दुनिया के मालिक बनेंगे।
°सम्पूर्ण, सम्पूर्ण, पतित-पावन, पवित्र, पवित्र

Answers from Sakar Murli 27-06-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 27-06-2020*

1.______ और ________ के अनुभव द्वारा सदा सफलतामूर्त भव
°साथी,साक्षीपन

2. धंधा आदि भी भल करो। बाप कहते हैं हाथों से काम करो, _______ बाप की याद में रहे।
°दिल

3.आत्म-अभिमानी बनने पर बाबा ने क्या समझाया?
° रोज़-रोज़ बोलने की दरकार नहीं रहती कि अपने को आत्मा समझो। आत्म-अभिमानी भव अथवा देही-अभिमानी भव… अक्षर है तो वही ना। बाप कहते हैं अपने को आत्मा समझो। आत्मा में ही 84 जन्मों का पार्ट भरा हुआ है। एक शरीर लिया, पार्ट बजाया फिर शरीर खलास हो जाता है। आत्मा तो अविनाशी है।

4. जितनी-जितनी धारणा करेंगे उतना तुम्हारे पास नॉलेज की _____ होती जायेगी, नॉलेज की धारणा से तुम कितना धनवान बनते हो। वास्तव में कोई चीज़ का ______ नहीं है सिवाए एक बाप के।
°वैल्यु,मूल्य

5. यह बोर्ड लिख दो – कौन-सा?
° विश्व में शान्ति बेहद का बाप कैसे स्थापन कर रहे हैं सो आकर समझो। एक सेकण्ड में विश्व का मालिक 21 जन्म लिए बनना है तो आकर समझो।

6. गृहस्थ व्यवहार में रहकर कमल फूल समान ______ बनना है।
°पवित्र

7. इस ईश्वरीय सभा का कायदा क्या है?
°जिन्हें ज्ञान रत्नों का कदर है, कभी उबासी आदि नहीं लेते हैं उन्हें आगे-आगे बैठना चाहिए।

8. _______ की निशानी है-मन उदास और खुशी गायब।
°व्यर्थ संकल्पों

9. माया भुलाकर तूफान में ला देती है, इसमें _____ हो विचार सागर मंथन करना है।
°अन्तर्मुख

10. _____ अवस्था वाले होंगे वह कोई धर्मराज पुरी में सज़ायें थोड़ेही भोगेंगे।
°कर्मातीत

Answers from Sakar Murli 17-06-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 17-06-2020*

1. तुमको क्या *कण्ठ* करना है?
° *बाप* को

2. तुम _____ बच्चे हो, बच्चों को ______ रत्न कहा जाता है।तुमको अपना बनाया है तो तुम भी _____ हुए ना। अब तुम बच्चे बाप के पास आते हो तो तुम्हारी ______ में कितनी खुशी रहनी चाहिए।
°लाडले, नूरे, हमारे, दिल

3. सतयुग में यह मालूम रहेगा कि हमने यह संगम पर 21 जन्मों का वर्सा लिया हुआ है। _(सही / गलत)_
वहां शरीर कैसे छोड़ेंगे?
° गलत (यह अभी जानते हो हम 21 जन्मों का वर्सा आधाकल्प के लिए ले रहे हैं)
° जब शरीर बूढ़ा होगा तब समय पर शरीर छोड़ेंगे। जैसे सर्प पुरानी खल छोड़ नई ले लेते हैं। हमारा भी पार्ट बजाते-बजाते यह चोला पुराना हो गया है।

4. जो भी बच्चे _____ में रहते हैं, वो सदैव साथ में हैं। और _____ विनाश होते हैं फिर शुरू होता है _________ संवत। यह तुम ब्राह्मणों की बुद्धि में बाबा ________ करा रहे हैं। तुम बच्चे भी पहले इस ______ की नॉलेज को कुछ भी नहीं जानते थे।
°याद, विकर्म, विकर्माजीत, धारणा, बेहद

5. सतयुग में देवतायें यह जानते हैं कि हम आदि सनातन देवी-देवता धर्म के हैं। _(सही / गलत)_
° *गलत* (वहाँ तो धर्म की बात ही नहीं है। है ही एक धर्म)

6. ज्ञान तो सहज है, उसमें इतना टाइम नहीं लगता है, जितना ________ पर लगता है। बच्चों, एक बाप को याद करते रहो। यही ______ मंत्र है। तुम रावण पर जीत पहन _______ बनते हो। घड़ी-घड़ी अपने को _____ समझो। यह शरीर तो यहाँ 5 तत्वों का बना हुआ है। बनता है, छूटता है फिर बनता है। अब आत्मा तो ______ है, जिन्हें _______ बाप पढ़ा रहे हैं संगमयुग पर।
°याद की यात्रा, वशीकरण, जगतजीत, आत्मा, अविनाशी, अविनाशी

7. सच के लिए क्या कहावत है?
° सच की नांव हिलेगी, डुलेगी लेकिन डूबेगी नहीं।

8. तुम सच्चे-सच्चे ब्राह्मण को *भ्रमरी* क्यों कहा जाता है?
° तुम कीड़ों को आपसमान ब्राह्मण बनाती हो। तुम्हें कहा जाता है कि कीड़े को ले आकर बैठ भूँ-भूँ करो।

9. *जास्ती धारणा नहीं कर सकते*, तो बाबा ने क्या कहा?
° हर्जा नहीं। याद की तो धारणा है ना। बाप को ही याद करते रहो। जिनकी मुरली नहीं चलती है तो यहाँ बैठे सिमरण करें। (इस ज्ञान-योग से स्वतः सब धारणाएं होती जाएंगी)

10. _______ बन हर आत्मा की कमजोरी को परखते हुए, उन्हें ________ स्वरूप से समाप्त कर देना, कांटे को ______ बना देना, स्वयं भी _______ के समान सन्तुष्ट रहना और सर्व को सन्तुष्ट करना, जिसके प्रति सब निराशा दिखायें, ऐसे व्यक्ति वा ऐसी स्थिति में सदा के लिए ______ के दीपक जगाना अर्थात् दिलशिकस्त को ______ बना देना-ऐसा श्रेष्ठ कर्तव्य चलता रहे तो _______ , सन्तुष्टमणि का वरदान प्राप्त हो जायेगा।
°त्रिकालदर्शी, कल्याणकारी, फूल, सन्तुष्टमणी, आशा, शक्तिवान, परोपकारी

11. शिव के इतने *मन्दिर* क्यों बनते है?
° उनके बनते हैं क्योंकि भारत की और सारी दुनिया के *बच्चों की सर्विस करते* हैं।

12. जिसकी हम ______ करते थे वह हमको पढ़ा रहे हैं। जिन लक्ष्मी-नारायण के हम _______ थे वह अभी हम खुद बन रहे हैं। यह ज्ञान बुद्धि में है। ______ करते रहो फिर औरों को भी सुनाओ।
°पूजा, पुजारी, सिमरण

13. *श्रेष्ठ* किन्हें कहा जाता है?
° पवित्र देवताओं को

14. यह एक ही _______ है जबकि तुमको अपने को आत्मा समझ एक बाप को याद करना है। 5 हज़ार वर्ष पहले भी सिखाया था, और कोई की _______ नहीं जो ऐसे समझा सके। _______ है ही एक बाप, दूसरा कोई हो न सके।
°समय,ताकत, ज्ञान सागर,

15. सारा खेल दो बातों पर बना हुआ है। कौन-सी?
° *भारत की हार और भारत की जीत।* भारत में सतयुग आदि के समय पवित्र धर्म था, इस समय है अपवित्र।

16. परीक्षा के समय_____ याद आये तब प्रत्यक्षता होगी।
°प्रतिज्ञा

17. स्वर्गवासी बनने के लिए पाण्डवों ने कौन-सा पुरुषार्थ किया?
° जीते जी देह-अभिमान से गलने का पुरूषार्थ। तुम अभी यह पुरानी जुत्ती छोड़ने का पुरूषार्थ करते हो

18. गायन है ना- ______छोड़ विष काहे को खाए।
°अमृत

19. दूरदेशी बाप हमें दूरांदेशी बनाने लिए कौन-सा *दूरांदेशी ज्ञान* देते?
° *आत्मा कैसे चक्र में भिन्न-भिन्न वर्णों में आती* है। तुम जानते हो अभी हम ब्राह्मण वर्ण के हैं इसके पहले जब ज्ञान नहीं था तो शूद्र वर्ण के थे, उसके पहले वैश्य….. वर्ण के थे। दूरदेश में रहने वाला बाप आकर यह दूरांदेशी बनने का सारा ज्ञान बच्चों को देते हैं।

Murli Yog 28.12.2024

A

एक-दो के विचारों 💭 का… सम्मान रखने वाले… हम माननीय आत्मा ⭐ हैं!

अनादि स्वरूप में स्थित रहते… इसलिए हम ब्राह्मणों का विशेष लक्षण है; सदा स्वयं से सन्तुष्ट ☺️ रहना, सबको सन्तुष्ट करना… तब ही आगे बढ़ते!

इस कल्याणकारी 💫 युग में… हम कल्याणकारी स्वयं-सर्व का कल्याण करते (प्रकृति को भी सुखदाई बनाते!)… तो अकल्याण की हलचल का प्रभाव पड़ नहीं सकता; हम प्रकृतिजीत, मायाजीत है!

ओम् शान्ति 😌 अर्थात्; मैं (अनादि से) शान्त स्वरूप आत्मा हूँ… अभी भ्रकुटी में बैठ; कानों द्वारा यह रूहानी पढ़ाई सुन रही… याद द्वारा श्रेष्ठ, पावन; फिर से सतोप्रधान सुखी देवता बन रही!

तो निराकार परमपिता अपनी ईश्वरीय मत द्वारा… हमें सर्व खज़ानों 🪙 से मालामाल कर… स्वर्ग के मालिक 👑, सदा सुखी 😀 बनाते!

कैसे इन मीठी-मीठी लवली 💞, रमणीक, दिल ❤️ को छूने वाली बातों द्वारा… मन्मनाभव के महा वशीकरण मंत्र में हमें स्थित 🎯 करते… फिर हम भी भूँ-भूँ 🐝 कर आप समान 🧖 बनाते (और राजतिलक पाते 🎉!)


Thanks for reading this article on ”

Murli Yog 27.9.24

Murli Yog 27.9.24

मीठी शान्ति, दिव्य सुख वा खुशी की चमत्कारी ताकत के वन्डरफुल मालिक 👑 बनना; यही है स्नेह ❤, प्यार का सबूत; साथ-साथ स्वमान में स्थित रह सर्व को सम्मान देने वाले माननीय बनना; श्रेष्ठ कार्यों के जिम्मेवार बन मन्दुरूस्त रहना… Murli Yog 27.9.24!

हमें सम्मुख गर्म-गर्म हलुआ 😋 मिलता… अर्थात् मीठे-मीठे, रूहानी बच्चें कह वह रूहानी, सुप्रीम, बेहद बाप हम आत्माओं 🪔 को राजयोग 🧘‍♀️ की शिक्षा पढ़ाते… ओम् शान्ति अर्थात् हम आत्मा-स्टार्स ऊपर शान्ति, निराकारी, ब्रह्म तत्व में थी; इस कर्मक्षेत्र पर शरीर ले कर्म करती…

… हम आत्माएं 🕯️ ही पहले ईश्वरीय राज्य, वैकुण्ठ, सुखधाम में लक्ष्मी-नारायण 🫅🏻👸🏻 मालिक के ऊंच पद 🏆 वाले देवता थे; ईश्वरीय वन्डर ऑफ वर्ल्ड पैराड़ाइज के वर्से में deitism… आत्मा में ही राज्य करने की ताकत 💪🏻 है!

याद में रहने वाले है पुण्य आत्मा, सतोप्रधान; पवित्र, चमत्कारी; महारथी पहलवान 🤼‍♂️, विजयी 🇲🇰 (क्योंकि बाबा है पतित-पावन, सर्वशक्तिमान, वर्ल्ड ऑलमाइटी अथॉरिटी!)… तो दिल अन्दर कितनी खुशी होनी चाहिए; हम हेवन स्थापन कर रहे…

… पढ़ाई भी सहज है; बिगर खर्चे मम्मा कैसी नम्बरवन, होशियार 🧠, राजयोगिन बन गयी… परन्तु खबरदार, अक्लमंद भी रहना है; भाई-बहन सो भाई-भाई बनना है (फिर वहां ऊपर भी भाई-आत्माओं से मिलेंगे!)…

… यह न्यारा ज्ञान है… इस ड्रामा 🎭 में एक सेकण्ड न मिले दूसरे से… आबू सर्वोत्तम, श्रेष्ठ, बड़ा तीर्थ है जहां से सर्व की सद्गति होती; अन्त में महिमा होंगी (अहो शिवबाबा ✨ तेरी लीला!)

हम सदा स्वमान में स्थित 🎯 रह… सर्व को सम्मान देने वाले… माननीय है!

हद की इच्छाओं से परे रह… सभी श्रेष्ठ सेवा के कार्यों में, ब्राह्मण आत्माओं की उन्नति, आदि में जिम्मेवार बनने से… प्रत्यक्षफल सदा मन्दुरूस्त, खुश, मन्मनाभव रहते!

हम स्नेही वा ज्ञानी आत्माओं के प्यार का सबूत है… सबकुछ न्योछावर, कुर्बान करना… (व्यर्थ संकल्प 💭, गुण-विशेषता का अभिमान, आदि सर्व मूल कमजोरियां!)


Thanks for reading this article on Murli Yog 27.9.24”

Murli Yog 26.9.24

Murli Yog 26.9.24

मीठे, लाड़ले, प्रिय बन एक से प्रीत, संग, पास रह कल्याणकारी 💫 खुशी, सुख, शान्ति के मालिक बनना; ऐसे रूहानी वायब्रेशन द्वारा शक्तिशाली वायुमण्डल 🌬️ बनाना अर्थात् देने से स्वतः सम्पन्न 🪙 बनना; यह है ज्ञान-घृत द्वारा सदाकाल के लिए आत्म-दीप 🪔 जगाना वा स्नेह ❤ का रिटर्न देना… Murli Yog 26.9.24!

जबकि हमें मीठा बाबा मिला है… हम लाड़ले बच्चे उनके पास आये हैं… उसके अति प्रिय ईश्वरीय सन्तान बने हैं (और इसी ईश्वरीय संग में रहते!)… तो ईश्वर से पूरा वर्सा लेने…

… सदा ईश्वरीय मत, राय पर उठते, बैठते, चलते, फिरते 🚶 याद द्वारा पावन, सतोप्रधान बनना; अर्थात् आत्म-दीप जगाने का कल्याण कर, सद्गति पानी है; सदा खुश, सुधरा हुआ क्रोध-जीत बनना है…

… तो सुखधाम की बादशाही, राज्य के मालिक लक्ष्मी-नारायण 🫅🏻👸🏻 बनने का ऊंच ते ऊंच पद 🏆 प्राप्त करते… जहां सब सतोप्रधान अर्थात् आत्म-ज्योति जगी हुई है; 21 जन्मों के लिए ज्ञान-घृत भरपूर!

तो इस वन्डरफुल 👌🏻 ज्ञान द्वारा सबको पावन बनाए, सच्ची खुशी दिलानी है; यह बाबा को मदद देनी है… रूहानी बाप, टीचर, सतगुरू की रूहानी 💐 पढ़ाई, विद्या द्वारा जन्म-जन्मांतर कल्प-कल्पान्तर का फायदा है… तो खबरदारी से चलना; यह होलीएस्ट ऑफ होली स्थान है!

ऐसे हम रूहानी वायब्रेशन्स द्वारा शक्तिशाली वायुमण्डल बनाने वाले; सबसे श्रेष्ठ सेवाधारी है… सर्व की शुभ इच्छाएं पूर्ण करने वाली मूर्ति बनने का दृढ़ संकल्प 💭 करने से; अर्थात् देने से स्वयं स्वतः सम्पन्न बन जाते!

बाबा का हमसे इतना स्नेह है कि कमी देख नहीं सकते; हमारी गलती भी अपनी समझते; हमें सम्पन्न, सम्पूर्ण 💯🔋, समान देखना चाहते… तो इस स्नेह का रिटर्न; स्वयं को टर्न करना अर्थात् सिर्फ रावण का शीश उतार देना है!

Thanks


Murli Yog 24.9.24

Murli Yog 24.9.24

सबसे प्यारे ❤️ के समीप रहने का विशेष, हीरे 💎 समान, हीरो पार्ट बजाते जीवनमुक्त सुखों के दैवी स्वराज्य 👑 की कमाई जमा करना; ईश्वरीय बुद्धि, अच्छे पुरूषार्थी अर्थात् सिर्फ हिम्मत 💪🏻 का पहला कदम उठाने से बाबा की सम्पूर्ण मदद प्राप्त करना… Murli 💌 Yog 24.9.24!

जबकि बाबा सबसे प्यारी चीज़ है… हमारी उनसे अलौकिक सगाई है… उनका परिचय मिला है… वह कहते भी हैं मामेकम् याद करो…

… तो बाबा पढ़ाने आये, उससे 15 मिनट पहले ही आकर… उस रूहानी, आत्माओं 🪔 के, कल्याणकारी 💫 बाबा की याद में बैठना है… जिससे बाबा के समीप, नजदीक, पास मुक्ति में जाते…

… फिर नये सुखधाम, स्वर्ग की राजधानी, बादशाही के वर्से में फुल पूज्य देवता; नारायण, श्रीकृष्ण-समान बनते… तो ऐसी वन्डरफुल कमाई लिए अपना याद का समय नोट करना; अर्थात् सच्चा-सच्चा चार्ट 📝 लिखने में ही फायदा, कल्याण है!

हम ब्राह्मण ही निमित्त है ज्ञान का रास्ता देने (इसलिए देवियों की पूजा 🙏🏻 होती!)… ईश्वरीय सेवा से हमारी कमाई जमा हो; साल्वेन्ट, पद्मापद्म-पति बनते… परन्तु जब उस समर्थ, वर्ल्ड ऑलमाइटी अथॉरिटी की याद में करते (जो अभी सम्मुख, डायरेक्ट है; भल फिर ब्राह्मण ही शिवबाबा के खज़ाने, भण्डारे से पलते!)

इस पुरूषोत्तम संगमयुग पर हमें डायरेक्ट श्रीमत द्वारा ईश्वरीय बुद्धि मिली है; जो आत्मा समझ, पवित्र बन, दिव्यगुण धारण करते… बाबा भक्ति की हर बात पीछे की प्रैक्टिकल एक्टिविटी; अर्थात् वन्डरफुल बातें सुनाते (रूद्र, सालिग्राम; महालक्ष्मी, दुर्गा, आदि) … अभी वह अव्यक्त हमारे साथ है!

इस संगमयुग, स्मृति 💭 के युग में हम स्मृति-स्वरूप रह हीरो पार्ट बजाने वाले विशेष, हीरे-समान आत्माएं है… तो सदा यह दिल का गीत बजता रहे ‘वाह मेरा श्रेष्ठ भाग्य’… तो सदा अपना अविनाशी ऑक्युपेशन ‘मैं श्रेष्ठ आत्मा हूँ’ याद रहे, तब कहेंगे विशेष आत्मा!

हर बात में सिर्फ हिम्मत 💪🏻 का पहला कदम उठाने से, हम बाबा की सम्पूर्ण 💯 मदद के पात्र हैं… सिर्फ अच्छा पुरूषार्थ ✊🏻 करना है (इच्छा नहीं रखनी है), तब प्रालब्ध जमा होती! ✅


Thanks for reading this article on Murli Yog 24.9.24 ”

Avyakt Murli 💌 Yog 22.9.24 (Rev. 18.1.02)

Avyakt Murli 💌 Yog 22.9.24 (Rev. 18.1.02)

अटूट स्नेह ❤, प्यार, लव की शक्ति में एकरस समाकर, लीन हो सारे विश्व 🌍 को समर्थी, मुक्ति, सुख-शान्ति; निःस्वार्थ स्नेह, सम्मान, सहारा दे सन्तुष्ट कर सहज, फर्स्टक्लास दुआएं, पुण्य की लिफ्ट प्राप्त करने वाले भाग्यवान सिकीलधे, खुश वाह-वाह, लवली जागती ज्योत बन सन शोज़ फादर करना… Avyakt Yog 22.9.24 (Rev. 18.1.02)!

आज हम स्मृति 💭 स्वरूप, समर्थ स्वरूप बच्चे स्नेह ❤ की यादों में समाये हैं (हम बाबा को स्नेह-माला पहनाते, बाबा हमें!)… इस परमात्म-स्नेह के वरदान ने हमें बाबा का बनाये, नई जीवन प्रदान की है… ब्रह्मा बाप जैसे सदा, निरन्तर स्नेह में समाये, लव में लीन रहने से यह स्नेह छत्रछाया ☂️ के रूप में हमें मायाजीत, मेहनत-मुक्त, सदा सहज रखता… सहज समर्पित करता, बाप समान बनने का सबूत दिलाता, मजे में रखता!

हम सदा समर्थ. व्यर्थ-मुक्त रहेंगे तब सारे विश्व 🌍 को समर्थी दिला सकेंगे… अभी पुकार सुन बेहद मास्टर मुक्तिदाता का पार्ट बजाना है (तो छोटी बातों से स्वतः मुक्त रहेंगे!)… दुखियों को सुख-शान्ति की अंचली देनी है (यह भी फॉलो 👣 फादर है!)

ब्रह्मा बाप का अन्त में नष्टोमोहा स्मृति-स्वरूप बनना ही अर्जुन के यादगार रूप में चलता; अभी अव्यक्त रूप में हमारे बैकबॉन, करावनहार बन सॉन शोज़ फादर द्वारा फास्ट सेवा करा रहे; तो वाह ड्रामा 🎭 वाह… अभी लास्ट सो फास्ट एक्जाम्पल बनने तीन शब्दों की अन्तिम शिक्षा रूपी शिवमंत्र को स्वरूप में लाते (मन्सा निराकारी, वाचा निरहंकारी, कर्मणा निर्विकारी!)… तो दिन में भी बीच-बीच में समय निकाल सेकण्ड में देह से न्यारे, निराकारी आत्म स्वरूप में स्थित 🎯 होना; कर्म में भी साकार कर्मेन्द्रियों द्वारा कराने वाली करावनहार, न्यारी, बन्धनमुक्त ✂️ आत्मा हूँ (जैसे बाप; इसलिए निराकारी स्थिति से निराकार बाप की याद स्वतः रहती!)

समय पर बाबा को पहचान, वर्से के अधिकारी ✊🏻 बनना, यह सर्वश्रेष्ठ भाग्य है… हम महान, फास्ट संकल्प शक्ति से जन्म लेने कारण फास्ट पुरूषार्थ, प्रालब्ध वाले सिकीलधे है (सब खुश हो वाह-वाह करते; साइंस भी हमें बेहद सेवा में साथ देंगी, सब सहज करेंगी!)… हम शक्तियों ⚡ में मायाजीत बनने की शक्ति है… फूल 🌸 सजाना भी स्नेह की निशानी, सबूत हैं!

हम फीचर्स द्वारा फ्यूचर का साक्षात्कार कराते… सेवा से समीप आते, और प्राप्त दुआओं के पुण्य का खाता एक्स्ट्रा लिफ्ट का कार्य करता… हम मधुबन 🏫 के रूहानी चांसलर सबको राजी करने की सेवा करते, इसलिए बाबा खास याद करते (अटूट प्यार में अच्छे पास है!)… गुलज़ार दादी जी की हिम्मत 💪🏻 को विशेष मुबारक है, जो रथ के रूप में ब्रह्मा बाप समान 33 वर्ष पूरे किए!

अथक, जागती ज्योत 🕯️ बन देखने, सुनने, खुशी में नाचने वाले बाबा के समीप है (तो नाम-सहित पर्सनल यादगार स्वीकार कर मीठा मुस्कराते रहना!)… लिविंग वैल्यू सिखाते लवली लिविंग बन गयी… दुआएं 🌬️ लेने का नम्बरवन, सहज पुरुषार्थ है (साथी हमें देखकर ही खुश हो जाये!)… ऐसे निःस्वार्थ सेवा के लिए बालक 👶🏻 सो मालिक बन सबकी राय को सम्मान देते आगे बढ़ना 🚶 (तो सफलता ✅ ही सफलता है!)… निःस्वार्थ स्नेह ही सबको समीप, सम्मान के सम्बन्ध में लाता; सहारा बनता, संस्कार परिवर्तन करता, माला में पिरोता… हम शक्तिशाली आत्माओं 🪔 के तपस्या का बल अभी सेवा करा रहा (अनुभूति कराने लिए अनुभूति स्वरूप बनना!)

हम सदा सन्तुष्ट रह, सन्तुष्ट करने वाले सन्तुष्टमणि है… दृढ़ता के वरदान से सहज सफलता पाते; जैसा समय. वैसी विधि 📝 से सिद्धि पाते; संकल्प रूपी बीज शक्तिशाली तो वाणी, कर्म स्वतः सफल; तो हर कर्म त्रिकाल के दर्शी बन करना… एक के रस 🍹 में एकरस रहने से और कोई प्राप्ति आकर्षित नहीं करती!


Thanks for reading this article on Avyakt Murli 💌 Yog 22.9.24 (Rev. 18.1.02)

Murli Yog 21.9.24

Murli Yog 21.9.24

मीठे, पावन मिलन से श्रृंगारे, दिव्य ✨, प्यारे प्रिन्स ?? बनने का रूहानी नशा; ‘सब अच्छा है’ की मज़बूत स्मृति ? से अचल-अड़ोल रहना… Murli Yog 21.9.24… आज विश्व शान्ति दिवस पर; शान्ति सागर ? में समाये शान्त स्वरूप, शान्तिदूत बन; सबको शान्ति की अंचली देते रहना!

हम मीठी-मीठी रूहानी आत्माएं ?️… अपने रूहानी, निराकार, पतित-पावन बाप के पास, कल्याणकारी ? मिलन मेले में अर्थात् मामेकम् याद, राजयोग ?‍♀️ की अग्नि में है… तो बाबा धोबी बन हमें योगबल से शुद्ध, पावन बनाने का श्रृंगार कर घर ले जाते; फिर सद्गति!

हम इस अकाल-तख्त पर निराकार, अविनाशी आत्मा है जो श्रेष्ठ कर्म करती… हम आत्मा ? ही एक शरीर छोड़ दूसरा लेती; ऐसी अविनाशी पार्टधारी है…

… हम आत्मा भाई-भाई अपने बेहद बाप से बेहद वर्सा, मिलकियत, प्रॉपर्टी में… गोल्डन, कंचन दुनिया ?; स्वर्गिक, नई बादशाही, राजधानी के मालिक बनते… हम देवता होंगे; श्रीकृष्ण स्वर्ग का पहला, प्यारा, नम्बरवन प्रिन्स; पानी भी कितना शुद्ध होंगा!

तो कितना नशा हो; फिर ऐसे पारलौकिक बाप को भूल कैसे सकते; औरों को भी परिचय क्यों नहीं दे! … ज्ञान सागर वा सूर्य ☀ हमें पढ़ाकर नॉलेजफुल बनाते; तो जरूर बोलने लिए मुख चाहिए… तो श्रीकृष्ण के ही अन्तिम जन्म के भाग्यशाली रथ में प्रवेश कर; उन्हें ग्रेट ग्रेट ग्रैण्ड फादर, प्रजापिता बनाते; जिनके हम एडाप्टेड़ ब्राह्मण बच्चे है… यह अनादि, अविनाशी बना, बनाया ड्रामा है!

हम बालक ?? सो मालिक, अधिकारी ✊? है… जिनके पास मन-घोडे को वश करने श्रीमत की मज़बूत लगाम है… तो मन-बुद्धि ? साइडसीन देखने में लग भी जाए; फिर श्रीमत की लगाम टाइट करने से मंजिल पर पहुंच जायेंगे! (AV 9.1.96; पांच दिन से!)

जो हो रहा अच्छा, जो होने वाला और भी अच्छा; इस स्मृति से अचल-अड़ोल ?? रहते… अपने परिवार के सहयोगी आत्माओं, भाई-बहनों को वस्तु, सैल्वैशन, नाम, मान, शान दे… स्वयं निर्मान रहना; यह देने में ही सदाकाल का लेना समाया हुआ है!


Thanks for reading this article on Murli Yog 21.9.24

Murli Yog 20.9.24

Murli Yog 20.9.24

नई. पावन, दिव्य, सुहावनी सुख, शान्ति, आनंद, तृप्ति के स्वराज्य ? की प्राप्ति से सिरताज प्रिन्स ?? बनना-बनाना; महादानी, शुभ कामना-धारी, विश्व-कल्याणकारी बन… Murli ? Yog 20.9.24!

उस सर्व आत्माओं के रूहानी, पतित-पावन परमपिता; शान्ति, आनंद सागर ?; सर्व के सद्गति दाता, बीज… उनकी याद, राज-योग-अग्नि से सतोप्रधान बनते…

… साथ में अपना स्वीट, शान्तिधाम घर भी याद करते (जहां जाना हैं!)… फिर प्राप्ति, सुख वा माल-मिलकियत के पावन स्वर्ग, पैराड़ाइज, राम राज्य को भी याद करते!

यह उत्तम बनने का सुहावना, कल्याणकारी ? संगम है; जबकि भगवान् ? शिवबाबा हमें नई दुनिया के मालिक; पवित्र, सिरताज, दैवी प्रिन्स बनाते… हम सच्चे खुदाई खिदमतगार सबको समझाते, एक से अनेक होते; इसलिए यह बड़ी, ईश्वरीय यूनिवर्सिटी ? चाहिए!

आत्मा में ही पार्ट है, वा अच्छे-बुरे संस्कार बनते जिसका फल ? मिलता; अभी हम ग्रेट ग्रेट ग्रांड-फादर के एडाप्टेड़ ब्राह्मण बच्चे है… यह वैरायटी धर्मों का बेहद झाड़, विराट लीला, कुदरती ड्रामा, बाजोली का खेल है जो रिपीट होता; जिसका क्रियेटर, डायरेक्टर स्वयं एक्ट में आया है!

हम समर्थ होने कारण… सर्व शक्तियों ⚡ केे खज़ाने के… अधिकारी है!

फीलिंग, किनारा, परचिंतन नहीं… परन्तु जो बाबा के संस्कार वह हमारे ओरिजनल संस्कार… सदा विश्व-कल्याणकारी, शुभ चिन्तनधारी; और सर्व लिए शुभ-भावना शुभ कामना-धारी! (AV 9.1.96; चार दिन से!)

महादानी कभी किसके प्रति यह बदले, सहयोग दे, कदम आगे बढ़ाये; ऐसी भावना नहीं रखते (वह भी परवश, शक्तिहीन से!)… इन्साफ, आदि मांगने से भी परे रहने वाले ही तृप्त रह सकते!


Thanks for reading this article on Murli Yog 20.9.24 ”