*Om Shanti*
*Answers from Sakar Murli 23-07-2020*
1. बाबा ने आते ही कौन-से *बहुत सुन्दर शब्दों में हमारे भाग्य का वर्णन* किया, जिसकी हमे बहुत खुशी होनी चाहिए। (3) हमारा जीवन *अमूल्य* क्यों है?
° ऊंच ते ऊंच भगवान तुमको (अपने से भी) *ऊंच ते ऊंच* सारे विश्व का मालिक बनाते हैं।
° किसी को कुछ पता नहीं। दुनिया क्या है, *वैकुण्ठ* क्या है। भल कितने भी कोई नवाब, मुगल आदि होकर गये हैं, भल अमेरिका में कितने भी पैसे वाले हैं परन्तु इन *लक्ष्मी-नारायण* जैसे तो हो न सकें। वह तो व्हाईट हाउस आदि बनाते हैं परन्तु वहाँ तो *रत्न जड़ित गोल्डन हाउस* बनते हैं।
° तुम्हारा ही *हीरो-हीरोइन* का पार्ट है। तुम *डायमण्ड* बनते हो। गोल्डन एज थी। अब है आइरन एज। बाप कहते हैं तुम कितने *भाग्यशाली* हो। भगवान खुद बैठ समझाते हैं।
° यह तुम्हारा जीवन बहुत अमूल्य है क्योंकि तुम विश्व की सर्विस करते हो।
2. फिर भी *खुशी चली जाये*, तो क्या करना है? (2) *अपार खुशी* में कौन रह सकते हैं? (2)
° जो भी शंका हो (जिस कारण देह-अभिमान में आते) तो *बाबा से पूछो*।
° *कान भी प्योर* करना चाहिए। प्योरिटी फर्स्ट। पवित्रता होगी तो धारणा होगी।
° अपार खुशी उन्हें ही रहेगी जो सदा *दूसरों की खिदमत* (सेवा) में रहते हैं (स्थूल-सूक्ष्म दोनों, सच्ची सत्य नारायण की कहानी सुनाते।)
° मुख्य धारणा *चलन बहुत-बहुत रॉयल* हो। खान-पान बहुत सुन्दर हो।
3. कैसा *स्नेह का सागर* बनना है?
° जो *क्रोध समीप भी न आ सके*।
4. बाबा ने आज कौन-सा *जबरदस्त उल्हना* दिया? (2)
° पतित दुनिया में ही मुझे बुलाते हैं। पारसनाथ बनाता हूँ। तो बच्चे खुद पारसपुरी में आ जाते हैं। वहाँ तो मुझे कभी *बुलाते ही नहीं* हैं। कभी बुलाते हो कि बाबा पारसपुरी में आकर थोड़ी विजिट तो लो? बुलाते ही नहीं।
° गायन भी है दु:ख में सिमरण सब करें, पतित दुनिया में याद करते हैं, सुख में करे न कोई। *न याद करते* हैं, न बुलाते हैं।
5. अमरलोक में *ऊंच पद* पाने के लिए क्या करना है? (3) *अविनाशी ज्ञान रत्नों के व्यापार* पर बाबा ने क्या सुनाया? (3)
° (ऊंच पद लिए) एक तो *पवित्र* बनना है, दूसरा फिर *दैवीगुण* भी धारण करने हैं। अपना रोज़ *पोतामेल* रखो।
° व्यापारी लोग इन बातों को अच्छी रीति समझेंगे। यह हैं ज्ञान रत्न। *कोई विरला व्यापारी* इनसे व्यापार करे। कोई तो अच्छी रीति व्यापार कर *स्वर्ग का सौदा* लेते हैं – *21 जन्म* के लिए। 21 जन्म भी क्या 50-60 जन्म तुम *बहुत सुखी* रहते हो। *पद्मपति* बनते हो। (देवताओं के पैर में पद्म दिखाते हैं ना।)
° स्थूल व्यापार तो इनके आगे कुछ भी नहीं है।
6. बाबा कहा तो *बाबा माना बाबा* । यह कहकर बाबा ने अपनी कौन-सी *महिमा* सुनाई? (3)
° भक्तिमार्ग में भी गाया जाता है पतियों का *पति* , गुरूओं का *गुरू* एक ही है। वह हमारा *फादर* है।
° ज्ञान का सागर *पतित-पावन* है।
° तुम बच्चे कहते हो बाबा हम कल्प-कल्प आपसे वर्सा लेते आये हैं। आप बेहद के बाप से हमको जरूर *बेहद का वर्सा* मिलेगा। बाबा माना वर्सा। *बेहद का बाप* तो एक ही है। अच्छा।
7. अभी तुम बच्चों को कितनी _____ करनी चाहिए। बाप समझाते हैं तुमको तो ______ का दाना बनना है। ऐसे मीठे-मीठे बाबा को _______ भी कहते हैं। ऐसे बाप की ____ पर भी चलना चाहिए ना। बाबा कितना समझाते हैं, _चार्ट_ रखो। नहीं तो बहुत पछताना पड़ेगा।मीठे-मीठे _____________ वाले बच्चों प्रति बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निंग।
°तैयारी,विजय माला, बाबा-बाबा, राय, 5 हज़ार वर्ष बाद फिर से आकर मिलने
8. *कृष्ण* कैसे बना?
इन भक्ति मार्ग की बातों का आध्यात्मिक रहस्य क्या है:
° *मानसरोवर* में टुबका लगाये तो परी बन जाये।
° पाण्डवों के बहुत *बड़े-बड़े चित्र*
° विष्णु की *नाभी* से ब्रह्मा निकला
° कृष्ण ने *भगाया*!
उत्तर:
° *आगे जन्म में शिवबाबा को याद* करने से ही कृष्ण बना।
° वास्तव में है *ज्ञान मानसरोवर*। उसमें तुम क्या से क्या बन जाते हो। *शोभनिक* को परी कहते हैं।
° क्योंकि पाण्डव को महावीर कहा जाता (ऊंची *ऊंची स्थिति* )
° ब्रह्मा सो विष्णु, विष्णु *सो* ब्रह्मा बनते हैं। ब्रह्मा को विष्णु बनने में सेकण्ड लगता है। सेकण्ड में जीवनमुक्ति
° भगवान् अभी हमें (बुद्धि से भगाकर!) पटरानी बनाते। स्वर्ग की महारानी!
9. समय प्रति समय जैसे हमारी स्टेज आगे बढ़ती जा रही है, *माया* का क्या होना चाहिए? यदि माया आ भी जाए, तो क्या करना चाहिए? निर्भय वा *मायाजीत* कौन बन सकते?
° अब माया का वार नहीं होना चाहिए, *माया नमस्कार* करने आये वार करने नहीं।
° यदि माया आ भी जाए तो उसे *खेल* समझकर देखो। ऐसे अनुभव हो जैसे *साक्षी* होकर हद का *ड्रामा* देखते हैं। माया का कैसा भी विकराल रूप हो आप उसे खिलौना और खेल समझकर देखेंगे तो बहुत मजा आयेगा, फिर उससे डरेंगे वा घबरायेंगे नहीं।
° जो बच्चे सदा *खिलाड़ी* बनकर साक्षी हो माया का खेल देखते हैं वह सदा निर्भय वा मायाजीत बन जाते हैं।
