Answers from Sakar Murli 24-07-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 24-07-2020*

1. हज़ूर को बुद्धि में _____ रखो तो सर्व प्राप्तियां जी ____ करेंगी।
°हाज़िर, हज़ूर

2. बाबा, *माया भुला देती है*। _(सही / गलत)_
° *गलत*… (दोष माया पर रखते हैं। अरे, याद तो तुमको करना है। बाप को भूल जाते हो, अच्छा टीचर को याद करो। (गुरू भी) तुमको 3 चांस दिये जाते हैं। एक भूले तो दूसरे को याद करो।)

3. जबकि बहुत प्यार से बाबा को याद करना है, तो बाबा ने आज आते ही कौन-सी *याद की युक्ति* बताई? किन-किन बातों को *ज्ञान* कहेंगे? 84 के *चक्र को याद* करने से क्या प्राप्ति है? आत्मा की *वैल्यू* कब है?
° (याद की युक्ति) जब मुरली पहले बैठते हैं, अन्दर में हो शिव भोले बाबा आये हैं। समझो आधा घण्टा शान्त में बैठ जाते हैं, बोलते नहीं हैं तो तुम्हारे अन्दर आत्मा कहेगी कि शिवबाबा कुछ बोले। जानते हो शिवबाबा विराजमान है, परन्तु बोलते नहीं हैं। *यह भी तुम्हारी याद की यात्रा है ना। बुद्धि में शिवबाबा ही याद है*। अन्दर में समझते हो बाबा कुछ बोले, ज्ञान रत्न देवे।
° (ज्ञान) *बाबा जो कुछ समझायेंगे उसको ज्ञान कहेंगे*। (देही-अभिमानी हो रहो। बाप को याद करो। यह ज्ञान हुआ। बाप कहते हैं इस ड्रामा के चक्र को, सीढ़ी को और बाप को याद करो – यह ज्ञान हुआ। बाबा जो कुछ समझायेंगे उसको ज्ञान कहेंगे। याद की यात्रा भी समझाते रहते हैं। यह सब है ज्ञान रत्न।
°(84 के चक्र की याद से) स्मृति रहेंगी चक्र पूरा हुआ, हम पवित्र आये थे फिर *पवित्र* होकर ही जाना है। *कर्मातीत* अवस्था में जाना है और बाप से *पूरा वर्सा* लेना है। वह तब मिलेगा, जब आत्मा *सतोप्रधान* बन जायेगी याद के बल से। (नहीं तो सज़ायें खानी पड़ेंगी।) पुरानी जुत्ती से *वैराग्य* होगा।
° (आत्मा की वैल्यू) वहाँ तुम्हारी आत्मा की कितनी वैल्यु रहती है। *सतोप्रधान* है ना।वहाँ आत्मा पवित्र है, तो बहुत वैल्यु है। अभी 9 कैरेट बन गई है तो कोई वैल्यु नहीं है इसलिए बाप कहते हैं आत्मा को पवित्र बनाओ तो फिर शरीर भी पवित्र मिलेगा। जैसा सोना वैसा जेवर। सतयुग में हम आत्मा और शरीर दोनों पवित्र थे। (यह ज्ञान और कोई दे न सके।)

4. बाबा ने आज कौन-सी 5 *अलौकिक* बाते बताई?
° शिवबाबा है निराकार, *उनका अलौकिक जन्म* है।
° तुम *बच्चों को भी अलौकिक जन्म* देते हैं।
° अलौकिक *बाप*
° अलौकिक *बच्चे*
° अलौकिक बाप से अलौकिक *वर्सा* मिलता है।

5. अपने को आत्मा समझना कभी-कभी मुश्किल रहता। धन्धे आदि में वह अवस्था नहीं रहती। बाप कहते हैं अच्छा अपने को *आत्मा नहीं समझ सकते हो, तो* यह करो। क्या? (2)
° *शिवबाबा को याद* करो। (हथ कार डे दिल यार डे।)
° धंधा आदि करते यही मेहनत करो कि मैं *आत्मा* इस शरीर से काम करती हूँ। मैं *आत्मा* ही शिवबाबा को याद करती हूँ। *आत्मा* ही पहले-पहले पवित्र थी, अब फिर पवित्र बनना है।

6. बाबा ने कहा इस पुरुषार्थ में *बड़ी जबरदस्त कमाई* है (दुनिया की तुलना में)। कैसे?
° यहाँ कितने भी साहूकार हैं, अरब-खरब हैं परन्तु वह सुख नहीं है। *सबके सिर पर दु:ख* हैं।

7. कौन-सी 3 बातों की *जांच* रखनी है?
° तुम बच्चे अपनी जांच करते रहो, कोई हमारे में *अवगुण* तो नहीं है? *याद* में रहते हैं? *पढ़ाई* भी पढ़नी है।

8. प्रैक्टिकल में तुम _____ में जाकर राज्य करेंगे। तुम गुप्त वेष में _______ से अपना गँवाया हुआ राज्य लेते हो।अब तुम बच्चों को 21 जन्म विश्राम पाने के लिए ___ तो जरूर बनना पड़े। इस पुरानी दुनिया से ______ होना है।
°वैकुण्ठ, दिल व जान, सिक व प्रेम, पावन, नष्टोमोहा

9. बाप समझाते हैं – बच्चे, नर से नारायण बनना है तो तुम्हारी जो ____ है, वही करनी हो। पहले अपनी _____ को देखना है। बाबा हम तो आपसे पूरा वर्सा लेकर ही छोड़ेंगे, तो वह _____ भी चाहिए।
°कथनी, अवस्था, चलन

10. *नई दुनिया में नये भारत* का बाबा ने क्या वर्णन किया? (3)
° कैपीटल भी जानते हो, *जमुना का कण्ठा* था, जिसको परिस्तान भी कहते थे।
° उसमें देवी-देवता थे। वहाँ नैचुरल ब्युटी रहती है। आत्मा पवित्र बन जाती है तो पवित्र आत्मा को शरीर भी पवित्र मिलता है। बाप कहते हैं मैं आकर तुमको *हसीन सो देवी-देवता* बनाता हूँ।
° है ही *वाइसलेस* वर्ल्ड। वहाँ होते ही हैं मोहजीत।

11. परमात्मा *सृष्टि का मालिक* है। _(सही / गलत)_
° * *गलत* (बाप समझाते हैं – मीठे-मीठे बच्चों, मैं इस सृष्टि का मालिक नहीं हूँ। तुम मालिक बनते हो और फिर राज्य गँवाते हो। फिर बाप आकर विश्व का मालिक बनाते हैं।)

12. इस *पढ़ाई* की कौन-सी विशेषताएं आज बाबा ने सुनाई? (6)
° यह पढ़ाई है *ऊंच ते ऊंच* ,
° *पढ़ाने वाला भी* है ऊंच ते ऊंच शिवबाबा।
° वहाँ तो मनुष्य, मनुष्य को पढ़ाते हैं। हो तुम भी मनुष्य परन्तु बाप तुम *आत्माओं को बैठ पढ़ाते* हैं। पढ़ाई के संस्कार आत्मा में ही रहते हैं। यह है *रूहानी नॉलेज* । तुम्हारी रूह को रूहानी बाप बैठ नॉलेज सुनाते हैं।
° 5 हज़ार वर्ष पहले भी तुमने सुनी थी। सारे मनुष्य सृष्टि भर में ऐसे कभी कोई पढ़ाता नहीं होगा। किसको भी पता नहीं, *ईश्वर कैसे पढ़ाते* हैं?
° तुम बच्चे जानते हो अभी इस *पढ़ाई से किंगडम* स्थापन हो रही है।
° यह एक ही पढ़ाई है, *नर से नारायण* बनने की।

13. जबकि *पढ़ाई से किंगडम* स्थापन हो रही है, तो हाइएस्ट कौन बनते और प्रजा में कौन आते?
° जो अच्छी रीति पढ़ते और *श्रीमत* पर चलते हैं वह हाइएस्ट बनते हैं।
° जो बाप की जाए निंदा कराते हैं, हाथ छोड़ जाते हैं वह प्रजा में बहुत कम पद पाते हैं।

14. ____ नहीं करते हैं तो मोस्ट वैल्युबुल टाइम नुकसान होता है।
°याद

15. इस *खेल* के बारे में क्या-क्या सुनाया? (3)
° यह *हार और जीत* का खेल है।
° यह *अनादि* खेल चला आता है। चक्र फिरता रहता है, प्रलय होती नहीं। भारत तो अविनाशी खण्ड है।
° सूर्य-चांद इस *माण्डवे की बत्तियां* हैं।

16. *सच्ची सत्य नारायण की कथा* किसे कहेंगे? *अल्लाह अवलदीन* का आध्यात्मिक रहस्य क्या है? *हातमताई* की कहानी से कौन-सी धारणा की पॉइंट सीखनी है?
° (सच्ची सत्य नारायण की कथा) तुमको पहचान मिली है – *हम तो मालिक थे, सूर्यवंशी देवतायें थे। अभी फिर वह बनने के लिए पुरूषार्थ कर रहे* हो क्योंकि यहाँ तुम सत्य नारायण की कथा सुन रहे हो ना। बाप द्वारा हम नर से नारायण कैसे बनें? बाप आकर राजयोग सिखलाते हैं।
° (अल्लाह अवलदीन) दिखाते हैं ठका करने से खजाना निकल आया। अभी तुम बच्चे जानते हो – *अल्लाह तुमको ठका करने से क्या से क्या बनाते* हैं।
° (हातमताई) मुहलरा मुख में डालते थे तो माया गुम हो जाती थी। मुहलरा निकालने से माया आ जाती थी। रहस्य तो कोई समझ न सके। बाप कहते हैं बच्चे *मुख में मुहलरा डाल दो। तुम शान्ति के सागर (की सन्तान) हो, आत्मा शान्ति में अपने स्वधर्म में रहती* है।

17. जैसे स्थूल सीजन का इन्तजाम करते, जिससे किसी को कोई तकलीफ न हो, समय व्यर्थ न जाए। ऐसे ही अब *हमें क्या करना* है? इसके लिए क्या *पुरुषार्थ* है?
° सर्व आत्माओं की गति-सद्गति करने की अन्तिम सीजन आने वाली है, तड़फती हुई आत्माओं को क्यू में खड़ा करने का कष्ट नहीं देना है, *आते जाएं और लेते जाएं*।
° इसके लिए *एवररेडी* बनो। पुरूषार्थी जीवन में रहने से ऊपर अब दातापन की स्थिति में रहो। *हर संकल्प, हर सेकण्ड में मास्टर दाता* बन करके चलो।

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