*Om Shanti*
*Answers from Sakar Murli 05-08-2020*
1. संकल्पों की _____ श्रेष्ठ परिवर्तन में फास्ट गति ले आती है।
°एकाग्रता
2. बापदादा की श्रीमत है बच्चे व्यर्थ बातें न सुनो, न सुनाओ और न सोचो। *सदा शुभ भावना से सोचो, शुभ बोल बोलो*। तो यदि कोई व्यर्थ सुनाये, फिर क्या करना है?
° व्यर्थ को भी शुभ भाव से सुनो। *शुभ चिंतक* बन बोल के भाव को *परिवर्तन* कर दो। *सदा भाव और भावना श्रेष्ठ* रखो, *स्वयं को परिवर्तन* करो न कि अन्य के परिवर्तन का सोचो। स्वयं का परिवर्तन ही अन्य का परिवर्तन है (इसमें पहले मैं – इस मरजीवा बनने में ही मजा है। इसी को ही महाबली कहा जाता है। इसमें खुशी से मरो – यह मरना ही जीना है, यही सच्चा जीयदान है।)
3. हीरे जैसे परमपिता परमात्मा *भोलानाथ देने वाला* है। वो क्या, कब ओर कैसे देते हैं? (आज की मुरली का मुख्य टॉपिक।) तो अब *हमे क्या करना* है?
° (क्या देते) भोलेनाथ ने ही नई दुनिया-स्वर्ग-सुखधाम की *बादशाही-राज्य भाग्य श्री लक्ष्मी-नारायण (उत्तम पुरूष) को दी* (वा कृष्ण को दी)
° (कब देते) इसके पहले जरूर पुरानी दुनिया-कलियुग-नर्क था… तो जरूर *बीच के कल्याणकारी पुरूषोत्तम संगमयुग (लीप युग) में* पतित-पावन बाप ने राजयोग सिखाया होगा। (जिस पुरूषार्थ की प्रालब्ध फिर नये जन्म में मिलती, वा सर्व की गति-सद्गति हो जाती।)
° (कैसे देते) इसके लिए जरूर अलौकिक जन्म (शिवजयन्ती) पहले हुआ होगा। अर्थात् बहुत जन्मों के अन्त के साधारण तन में प्रवेश / एडाप्ट कर ब्राह्मण रचते। (कृष्ण की आत्मा के ही 84 वे जन्म में प्रवेश करते, वह फिर कृष्ण बनती।)
° (हमे क्या करना है) पवित्र बनने की *प्रतिज्ञा* कर (सबसे भारी प्रतिज्ञा!) *मामेकम् याद* -योगबल द्वारा *पावन* बन पावन दुनिया के *मालिक* बन जायेंगे। (डबल-अहिंसक!)
4. इसमें *जन्माष्टमी* की समझानी कैसे आ जाती?
° राधे-कृष्ण, प्रिन्स-प्रिन्सेज ही लक्ष्मी-नारायण महाराजा-महारानी बनते हैं। उन्हों ने ही 84 जन्म लिए फिर अन्त के जन्म में ब्रह्मा-सरस्वती बने। बहुत जन्मों के अन्त में बाप ने प्रवेश किया। और इनको ही कहते हैं तुम अपने जन्मों को नहीं जानते हो। तुम पहले जन्म में लक्ष्मी-नारायण थे। (चित्र में दिखाया है – पुरानी दुनिया को लात मार रहे हैं। नई दुनिया हाथ में है। अभी पढ़ रहे हैं इसलिए कहा जाता है – श्रीकृष्ण आ रहे हैं)
5. बाकी थोड़ा टाइम है _____ का। यह पाठशाला है, इसमें सबसे जास्ती टाइम लगता है _____ मे। बच्चे मेहनत करते रहते हैं बाप को ____ करने की।
तुम्हारा भी यह ____ जैसा जन्म है फिर गोल्डन एज में आते हो।
°पढ़ाई, याद, याद, हीरे
6. *हम बच्चों के लिए* अभी कलियुग चल रहा है _(सही / गलत)_
° *गलत* (तुम बच्चों के लिए यह है संगमयुग। तुम्हारे लिए कलियुग पूरा हो गया।)
7. *ड्रामा* के बारे में बाबा ने आज क्या सुनाया? (3)
° *बाप जो सुनाते हैं*, तुम जानते हो ड्रामा में सारी नूंध है। अक्षर बाई अक्षर जो कल्प पहले सुनाया था वह फिर आज सुनाते हैं। यह रिकॉर्ड भरा हुआ है। (भगवान खुद कहते हैं मैंने जो 5 हज़ार वर्ष पहले हूबहू अक्षर बाई अक्षर सुनाया है वही सुनाता हूँ। यह शूट किया हुआ ड्रामा है। इसमें फ़र्क ज़रा भी नहीं पड़ सकता। इतनी छोटी आत्मा में रिकार्ड भरा हुआ है।)
° बाप कहते हैं मैं कल्प-कल्प आता हूँ, *मेरा भी ड्रामा में पार्ट है* । पार्ट बिगर मैं भी कुछ नहीं कर सकता हूँ। मैं भी ड्रामा के बन्धन में हूँ। पूरे टाइम पर आता हूँ।
° *ड्रामा के प्लैन अनुसार* मैं तुम बच्चों को वापिस ले जाता हूँ। अब कहता हूँ मनमनाभव।
8. इस *ईश्वरीय विश्व विद्यालय* की कौन-सी जबरदस्त महिमा है?
° यह है ईश्वरीय विश्व विद्यालय, *सारे विश्व को सद्गति देने वाला* दूसरा कोई ईश्वरीय विश्व विद्यालय हो न सके। *ईश्वर बाप खुद आकर* सारे विश्व को चेंज कर देते हैं। (हेल से हेविन बनाते हैं। जिस पर फिर तुम राज्य करते हो)
9. शिव को *बबुलनाथ* क्यों कहते?
° क्योंकि वह आकर तुमको *काम कटारी (कांटे) से छुड़ाए पावन बनाते* हैं।
10. भक्ति मार्ग में तो बहुत शो है, यहाँ तो _____ में याद करना है। बाप कहते हैं यज्ञ, तप, दान, पुण्य आदि करते तुम नीचे गिरते आये हो। ____ से ही सद्गति होती है। समझते हैं ब्रह्म में लीन हो जायेंगे। गोया आत्मा को _______ बना देते हैं।
°शान्त, ज्ञान, मार्टल (विनाशी)
11. बाबा ने आज *विराट रूप के चित्र* को थोड़ी भिन्न अंदाज़ में याद किया। कैसे?
° जन्मों की संख्या (वा जनसंख्या) के हिसाब से! (कैसे हर युग में बढ़ते जाते)
° यह है संगमयुग। यह बहुत छोटा-सा युग है। चोटी सबसे छोटी होती है ना। फिर उनसे बड़ा मुख, उनसे बड़ी बांहें, उनसे बड़ा पेट, उनसे बड़ी टाँगे। (विराट रूप दिखाते हैं, परन्तु उसकी समझानी कोई नहीं देते। तुम बच्चों को यह 84 जन्मों के चक्र का राज़ समझाना है।)
