Answers from Sakar Murli 01-08-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 01-08-2020*

1. रीयल _____ बनकर अपने वायब्रेशन की _चमक_ विश्व में फैलाओ। (स्लोगन)
°डायमण्ड

2. हम अभी सतयुगी नये जन्म में जाते हैं। *सतयुग* की कौन-सी एक नई बात आज बाबा ने सुनाई?
° स्वर्ग में कोई गन्दी चीज़ होती नहीं, जिसमें हाथ-पांव अथवा कपड़े आदि *मैले* हों। देवताओं की कैसी सुन्दर पहरवाइस है। कितने फर्स्ट क्लास कपड़े होंगे। *धोने की भी दरकार नहीं* । (इनको देखकर कितनी खुशी होनी चाहिए। आत्मा जानती है भविष्य 21 जन्म हम यह बनेंगे। ऐसे बाबा के हम बच्चे फिर रोते क्यों हैं! हमको कोई फिक्र थोड़ेही होना चाहिए।)

3. हमें खुशी हैं स्वयं पतित-पावन सर्व का सद्गति दाता, बेहद का बाप / सुप्रीम टीचर हमें नर्कवासी से स्वर्गवासी बनाते। इसका *बहुत सहज रास्ता* कौन-सा बताया? (3) नम्बरवन दैवीगुण *पवित्रता धारण करने की वन्डरफुल युक्ति* कौन-सी सुनाई? जब *सम्पूर्ण पवित्र* बन जाएंगे, तो क्या होगा?
° (बहुत सहज रास्ता) सिर्फ *याद* करना है और अपने में *दैवीगुण* धारण करने हैं। अपनी *जांच* रखनी है।
° (पवित्रता धारण करने की वन्डरफुल युक्ति) बाप ने तुम बच्चों को स्मृति दिलाई है कि तुम *आदि सनातन देवी-देवता धर्म वाले थे* (हम ही पूज्य थे), चक्र खाकर आये अब फिर तुमको *वही बनना है*। यह मीठी स्मृति आने से पवित्र बनने की हिम्मत आती है। (अब हियर नो ईविल…….)
° (सम्पूर्ण पवित्र) आत्मा पवित्र बन जाती है तो फिर अपवित्र शरीर को छोड़ना पड़ता है। सब आत्माओं को पवित्र होकर जाना है। पवित्र दुनिया अब स्थापन हो रही है।

4. बाप की याद के साथ-साथ *घर को भी याद* जरूर करना चाहिए। क्यों? कैसे?
° क्योंकि अब *वापिस* घर जाना है।
° (कैसे घर को याद करना) *घर में ही बाप* को याद करना है।
° भल तुम जानते हो बाबा इस तन में आकर हमको सुना रहे हैं परन्तु *बुद्धि* परमधाम स्वीट होम से टूटनी नहीं चाहिए। टीचर घर छोड़कर आते हैं, तुमको पढ़ाने। पढ़ाकर फिर बहुत दूर चले जाते हैं।

5. बाप ने हमे बोलते-चलते *स्वदर्शन चक्रधारी बनने की स्मृति* क्यों दिलाई है? स्वदर्शन चक्र फिरते रहने से क्या *प्राप्तियां* है? (3)
° अब स्मृति आई है, *सिमरण करने* के लिए।
° (प्राप्तियां) स्वदर्शन चक्र फिरते रहने से *विकर्म विनाश* हो जायेंगे। तुम इस *रावण पर जीत* पा लेंगे। *आसुरीपना खत्म* होता है।

6. यह है बिल्कुल नई ____ । तुमने ही यह सुनी थी और पद पाया था और कोई नहीं जानते। तुमको ____ परमपिता परमात्मा सिखला रहे हैं। अभी तुम ब्रह्मा की सन्तान ब्राह्मण वंशी हो। तुम ईश्वरीय _____ बने हो। ईश्वर बैठ तुमको शिक्षा देते हैं। अभी तुम देवी-देवता बन रहे हो। यह सारा दिन _____ करते रहो तो भी तुम्हारा बहुत कल्याण है। उनको बागवान कहा जाता है। देवी-देवता धर्म का _____ शिवबाबा ने ही लगाया है।
°पढ़ाई, राजयोग, औलाद, सिमरण, बीज

7. हमारी *मुख्य रूहानी सर्विस* क्या है? (5)
° बाप से शिक्षा लेकर पतित से पावन बनना और दूसरों को भी *पावन बनने का रास्ता बताना*।
° पहले-पहले कोई को भी *आत्मा का ज्ञान देना* है। (तुम आत्मा हो। आत्मा अविनाशी है। जब समय होता है आत्मा शरीर में आकर प्रवेश करती है।)
° उनकी मत से सब *मनुष्यों को श्रेष्ठ* बनाना।
° आत्मा में अन्दर *ज्ञान* है जो तुम बच्चों को और भाई-बहिनों को *समझाना* है। (बड़े-बड़े करोड़पति को भी समझा सकते!)
° बच्चे भी *मददगार* तो बनेंगे ना।

8. भक्ति मार्ग के कौन-से 4 *दृष्टान्त* और 2 *गायन* आज बाबा ने याद किये? देवताओं और असुरों की *लड़ाई* क्यों हो न सके?
° (दृष्टान्त) नारद का मिसाल, कछुए का, सर्प का, भ्रमरी का दृष्टान्त।
° (गायन) देवताओं का जन्म दिन अथवा भगवान का जन्म दिन
° (लड़ाई क्यों हो न सके) क्योंकि असुर हैं कलियुग में, देवतायें हैं सतयुग में। बीच में है संगमयुग।

9. जैसे अब वापिस जाना है।विनाश सामने खड़ा है। सतयुग में दैवी परिवार बहुत ____ होता है। वर्ल्ड वार लग जायेगी। उससे पहले तुम बच्चों को अपनी पढ़ाई से ______ अवस्था प्राप्त करनी है।
°छोटा, कर्मातीत,

10. “ *धरत परिये धर्म न छोड़िये* ” का क्या अर्थ बाबा ने सुनाया? इसके लिये क्या *श्रेष्ठ* करना है? (6) कौन-सी *डेट फिक्स* करनी है?
° (अर्थ) कोई भी सरकमस्टांश आ जाए, माया के महावीर रूप सामने आ जाएं लेकिन *धारणायें* न छूटे। संकल्प द्वारा त्याग की हुई बेकार वस्तुयें *संकल्प में भी* स्वीकार न हों।
° (क्या श्रेष्ठ करना) सदा अपने श्रेष्ठ *स्वमान* , श्रेष्ठ *स्मृति* और श्रेष्ठ *जीवन* के समर्थी स्वरूप द्वारा श्रेष्ठ *पार्टधारी* बन *श्रेष्ठता का खेल* करते रहो। (कमजोरियों के सब खेल समाप्त हो जाएं।)
° (डेट फिक्स) जब ऐसी *सम्पूर्ण आहुति* का संकल्प दृढ़ होगा तब *परिवर्तन समारोह* होगा। इस समारोह की डेट अब संगठित रूप में निश्चित करो।)

11. तुम बच्चे उस शिवबाबा को सिमरण करते हो। ब्रह्मा को नहीं। तो भक्ति मार्ग में ब्रह्मा की *मन्दिर में पूजा* क्यों होती? और *दाढ़ी* क्यों दिखाते?
° (पूजा क्यों) क्योंकि वह *सम्पूर्ण अव्यक्त मूर्त* बनते।
° (दाढ़ी क्यों) ब्रह्मा को दाढ़ी दिखाते हैं तो मालूम पड़े यह *यहाँ का* है।

12. जब सब आ जाते हैं फिर तो वापिस जायेंगे। *घर भेजने वाले* हैं धर्म स्थापक। _(सही / गलत)_
° *गलत* … (वह तो भिन्न नाम-रूप में तमोप्रधान अवस्था में है। सतो, रजो, तमो में आते हैं ना। इस समय सब तमोप्रधान जड़जड़ीभूत अवस्था में हैं। अब सबको वापिस जाना है जरूर। *बाबा ही वापिस घर ले जाते*।
फिर से चक्र फिरना चाहिए। पहले नया धर्म चाहिए जो सतयुग में था। बाप ही आकर आदि सनातन देवी-देवता धर्म की स्थापना करते हैं।)

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