*Om Shanti*
*Answers from Sakar Murli 10-08-2020*
1. जो *श्रेष्ठ वेला में जन्म लेने वाले भाग्यशाली बच्चे* हैं, उनकी निशानियाँ क्या है? (3)
° वह जन्मते ही *अपने पन का अनुभव* करते हैं।
° वह जन्मते ही *सर्व प्रापर्टी के अधिकारी* होते हैं। (जैसे बीज में सारे वृक्ष का सार समाया हुआ है ऐसे नम्बरवन वेला वाली आत्मायें सर्व स्वरूप की प्राप्ति के खजाने के आते ही अनुभवी बन जाते हैं।)
° वे कभी ऐसे नहीं कहेंगे कि सुख का अनुभव होता, शान्ति का नहीं, शान्ति का होता सुख का व शक्ति का नहीं। *सर्व अनुभवों से सम्पन्न* होते हैं।
2. अपने प्रसन्नता की छाया से शीतलता का अनुभव कराने के लिए ____ और _____ बनो।
°निर्मल, निर्मान
3. हम बच्चों को किस बात की बहुत खुशी होनी चाहिए? (2)
° तुम बच्चों को कितनी खुशी होनी चाहिए। बाबा *कल्प-कल्प* आकर हमको *राजयोग* सिखलाए मनुष्य से *देवता* बनाते हैं।
° तुमको मालमू पड़ा है हम सो *देवी-देवता थे फिर अब बनते* हैं। यहाँ तुम आते ही हो सत्य नारायण की कथा सुनने, जिससे *नर से नारायण* बनेंगे। नारायण बनेंगे तो जरूर लक्ष्मी भी होगी। *लक्ष्मी-नारायण* होंगे तो जरूर उन्हों की *राजधानी* भी होगी ना।
4. इस पार से उस पार जाने के लिए याद की यात्रा में अच्छा ____ बनना है। माया के _____ नहीं खाने हैं। _______ याद करना है। याद नहीं करते तो घुटका खाते हैं।
°तैराक, घुटके, मामेकम्
5. *आज का गीत* 🎶 कौन-सा था? इसका कौन-सा *अर्थ* है, जो सिर्फ हम रूहानी ब्राह्मण-बच्चे ही जानते?
° *तुम्हें पाके हमने* जहान पा लिया है……..
° अब बेहद के बाप *शिवबाबा को तो पा लिया* है। बेहद के बाप से हमे (यहाँ शान्ति में बैठ, ब्रह्मा द्वारा) स्वर्ग-सुखधाम का वर्सा मिलता है, जिस *वर्से को कोई भी छीन नहीं सकता।*
° हम आदि सनातन *देवी-देवता धर्म के, पूज्य, विश्व के मालिक* होंगे। जहां एक धर्म, एक राज्य, *पवित्रता-शान्ति-सुख-सम्पत्ति-महल* सबकुछ होंगा, सतोप्रधान *नैचुरल ब्यूटीफुल* , आधाकल्प से भी जास्ती सुख (फिर भल ड्रामा-नाटक अनुसार रावण राज्य में वर्सा का नशा चला जाता, पुजारी बन जाता।)
6. जो भी मनुष्य मात्र हैं उन्हों को अपने शरीर के नाम का नशा है। क्यों? हम *आत्मा* के बारे में क्या-क्या जानते? (3)
° क्योंकि मनुष्य देह-अभिमानी हैं। हम आत्मा हैं यह जानते ही नहीं। (आत्मा सो परमात्मा कहते)
° (हम क्या जानते) *सुनती तो आत्मा है* । हम आत्मा हैं, न कि शरीर।
° हम आत्माओं का *स्वधर्म है ही शान्त*।
° *आत्मा सो विश्व के मालिक देवी-देवता बन रही*। हम सो देवता फिर क्षत्रिय घराने में आयेंगे (84 जन्मों का हिसाब)। फिर घर जाते फिर सुख का पार्ट।
7. वहाँ देवताओं को दाढ़ी आदि भी नहीं होती। क्लीनशेव होती है। _(सही / गलत)_
° *सही* (नैन-चैन से मालूम पड़ता है यह मेल है, यह फीमेल है। आगे चल तुमको बहुत साक्षात्कार होते रहेंगे।)
8. ज्ञान का सागर पतित-पावन तो ____ भगवान है। बाप आकर सब बातें समझाए अ- ____ बनाते हैं। बाप तो न कभी शरीर में आते हैं, न ___ करते हैं। न सिर्फ रास्ता बताते हैं परन्तु ____ भी बनाते हैं।
°निराकार, भुल, भूल, लाइफ
9. कोई को भी *दृष्टि से तीर* कब लगेगा?
° जब वह *जौहर* भरता (इसके लिए अभी याद की यात्रा में मस्त रहना है।)
10. दिन-प्रतिदिन तुम नई-नई प्वाइंट्स सुनते रहते हो। तो *प्वाइंट्स नोट करना* क्यों अच्छा है? (2)
° *भाषण करते समय रिहर्सल* करेंगे। यह-यह प्वाइंट्स समझायेंगे।
° *टॉपिक की लिस्ट* होनी चाहिए। आज इस टॉपिक पर समझायेंगे।
11. *’रावण कौन है, राम कौन है?’* सच क्या है, वह हम आपको बताते हैं। इस टॉपिक पर क्या समझानी है?
° रावण (5 विकार) तो आज सबमें हैं। इस समय रावण राज्य सारी दुनिया में है। बाप (निराकार राम) आकर फिर रामराज्य की स्थापना करते हैं। यह हार और जीत का खेल है।
12. कोई-कोई चार्ट दिखाते हैं – हम सारे दिन में *5 घण्टा याद में रहा*। बाबा ने क्या कहा?
° हम विश्वास नहीं करते, जरूर भूल हुई है। (याद के चार्ट को समझते ही नहीं)
13. कोई समझते हैं हम *जितना समय यहाँ पढ़ते हैं उतना समय तो चार्ट ठीक* रहता है। यह ठीक हैं?
° नहीं। बहुत हैं यहाँ बैठे हुए भी, सुनते हुए भी बुद्धि बाहर में कहाँ-कहाँ चली जाती है। पूरा सुनते भी नहीं हैं। इधर-उधर देखते रहते हैं। (इसलिए बाबा कहते हैं नये-नये को जल्दी यहाँ क्लास में आने की छुट्टी न दो। नहीं तो वायुमण्डल को बिगाड़ते हैं।)
14. *सबसे बड़ी भूल* कौन-सी है?
° *अपने स्वधर्म को भूलना* (अभी तुम्हें अभुल बनना है, अपने घर और राज्य को याद करना है।)
15. हम सृष्टि चक्र का राज़ समझते हैं। वह समझते हैं कि धर्म स्थापक गॉड के पास पहुँचे। कई फिर यह समझते हैं वह भी पुनर्जन्म लेते-लेते अभी तमोप्रधान है। *सच* क्या है? हम और कौन-सी *वन्डरफुल बात* जानते?
° (सच) जो भी धर्म स्थापन करने आते हैं वह सब पुनर्जन्म लेते-लेते अभी आकर तमोप्रधान बने हैं। अन्त में सारा झाड़ जड़जड़ीभूत अवस्था को पा लिया है। (इसलिए उनको गुरू नहीं कह सकते। वह धर्म स्थापन करने आते हैं। *सद्गति दाता सिर्फ एक है*।)
° (वन्डरफुल बात) धर्म स्थापक *फिर अपने समय पर धर्म स्थापन करने आयेंगे* ।
