Answers from Sakar Murli 12-08-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 12-08-2020*

1. कहा जाता *अन्तर्मुखी सदा सुखी* । ऐसा क्यों? तो हमें क्या करना है?
° (क्योंकि) जो बच्चे सदा *अन्तर्मुखी भव का वरदान प्राप्त कर लेते, वह बाप समान सदा सुख के सागर में लवलीन रहते* हैं। सुखदाता के बच्चे स्वयं भी *सुख दाता* बन जाते हैं। सर्व आत्माओं को सुख का ही खजाना बांटते हैं।
° (क्या करना) तो अब *अन्तर्मुखी बन ऐसी सम्पन्न मूर्ति बन जाओ* जो आपके पास कोई भी किसी भी भावना से आये, अपनी भावना सम्पन्न करके जाये। जैसे बाप के खजाने में अप्राप्त कोई वस्तु नहीं, वैसे आप भी *बाप समान भरपूर* बनो।

2. रूहानी _____ में रहो तो कभी भी अभिमान की फीलिंग नहीं आयेगी।
°शान

3. बेहद-बाबा हम बच्चों से बात ऐसे करते हैं जैसे हम आपस में करते। तो जबकि बाबा ने हमे आत्म-अभिमानी बनाकर पार्टधारी की स्मृति दे घर जाने का रास्ता बताया है (की सतोप्रधान बनना है), तो *अब हमें प्रैक्टिकल में क्या करना है?* (5)
° जो *श्रीमत* (ईश्वरीय मत, डायरेक्शन) बाबा देते, उस पर सपूत बन चलना हैं।
° तो अब श्रीमत पर *कर्म श्रेष्ठ* करना चाहिए (अर्थात्‌ दैवीगुण धारण करने हैं।) भोजन भी शुद्ध, किसी को भी दु:ख न दो लड़कर। विकार में मत जाओ। (बाबा सुधारने आये हैं तो अच्छी रीति सुधरना चाहिए ना।)
° बहुत *खुशी में हर्षित* रहना चाहिए।
° बाप कहते हैं अपने को *आत्मा समझ बाप को (मामेकम्) याद करो* और सर्व संबंधों को हल्का करते जाओ। *8 घण्टा* याद रखनी है। *मैं बाप का बच्चा हूँ*, यह नहीं भूलो।
° सबको *बाप का परिचय* देना है।

4. बाप कहते हैं मेरा ऐसा पार्ट है जो *बीमार को अच्छा* कर दूँ। _(सही / गलत)_
° *गलत*
° हमारा पार्ट है रास्ता बताना कि तुम पवित्र कैसे बनो? पवित्र बनने से ही तुम घर में भी जा सकेंगे। राजधानी में भी जा सकेंगे।
° अर्थात्‌ बाबा बीमारी के बीज (अपवित्रता) को ही समाप्त करने के कर्म हमें सिखलाते है। (यही सच्चा सदाकाल का समाधान है!)

5. हमारा *धन्धा* क्या है? इसमे *क्या समझाना* है?
° हमारा भी वही धन्धा है – सबको रास्ता बताना, *अन्धों की लाठी* बनना।
° (चित्र भी तुम्हारे पास हैं।) तुम तो फिर समझाते हो तुम *आत्मा* हो, शरीर नहीं हो। बाप कहते हैं तुम सभी आत्मायें *भाई-भाई* हो ना। गॉड *फादर* कहते हो ना। तो कभी भी आपस में *लड़ना-झगड़ना नहीं* चाहिए। *वर्सा* दादे से लेना है इसलिए दादे को ही *याद* करते हैं।

6. बाप _____ का ______ है, सब झगड़ों से छुड़ा देते हैं। तुम बच्चों को _______ खुशी बहुत होनी चाहिए। हम बाबा के बच्चे बने हैं। बाप ने हमको ______ किया है वर्सा देने।
°वकीलों, वकील, आन्तरिक, एडाप्ट

7. बाबा हम ब्राह्मण कुल भूषण को *देवताओं से भी ऊंच* कहते। क्यों?
° तुम भारत की बहुत *ऊंच सेवा करते* हो। फिर तुम पूज्य बन जायेंगे। अब *पुजारी को पूज्य, कौड़ी से हीरे जैसा बना रहे* हैं।

8. बाबा ने हमे *आत्म-अभिमानी* बनाने लिए कौन-सी बातें सुनाई? (3)
° निराकार भगवानुवाच – निराकारी आत्माओं प्रति। असुल तुम *निराकार* हो फिर साकारी बनते हो। साकार बिगर तो आत्मा कुछ कर ही नहीं सकती। आत्मा शरीर से निकल जाती तो *चुरपुर* कुछ भी हो नहीं सकती। आत्मा फौरन जाकर दूसरे *शरीर में अपना पार्ट* बजाती है। (इन बातों को अच्छी रीति समझो, अन्दर घोटते रहो।)
° हम *आत्मा बाबा से वर्सा लेते* हैं। वर्सा मिलता है सतयुग का।
° यह समझना है – मैं आत्मा हूँ, बाबा आया हुआ है, हमको *पवित्र बनाकर अपने घर ले जाते हैं। फिर राजधानी* में आ जायेंगे।

9. वह सत्य चैतन्य ज्ञान-सागर *स्वदर्शन चक्रधारी बाबा* हमे क्या कहते? (2)
° बाप कहते हैं वास्तव में *मैं हूँ स्वदर्शन चक्रधारी।* आत्मा में सारे सृष्टि चक्र का ज्ञान आ जाता।
° बाबा भी परमधाम में रहने वाला है। बाप आकर *अपना परिचय देते* हैं। मैं पतित-पावन आया हूँ तुम्हारे पास। मुझे बुलाया ही है कि आकर पतित से पावन बनाओ, लिबरेट करो। बाप कहते हैं मैं आता ही हूँ तब जब रात पूरी होती है, तो दिन बनाने आता हूँ। दिन में 21 जन्म फिर रात में 63 जन्म, आत्मा ही भिन्न-भिन्न जन्म लेती है। तुमको भी स्वदर्शन चक्रधारी बनाता हूँ।

10. बाबा हमें राजयोग सिखाते भविष्य 21 जन्मों के लिए। साथ मे सच्ची गीता, सच्ची रामायण सुनाते। तो आज *सच्ची रामायण* के विषय पर कौन-सी बेहद बाते सुनाई? (3)
° एक राम-सीता की बात नहीं थी। इस समय तो *सारी दुनिया लंका है*। चारों ओर पानी है ना। यह है बेहद की लंका, जिसमें रावण का राज्य है।
° एक बाप है ब्राइडग्रूम ( *राम* )। बाकी सब हैं ब्राइड्स ( *सीताएं* )।
° तुमको अब रावण राज्य से बाप छुड़ाते हैं। यह है शोक वाटिका। *सतयुग को कहा जाता है अशोक वाटिका* । (वहाँ कोई शौक होता नहीं। इस समय तो शोक ही शोक है। अशोक एक भी नहीं रहता।)

11. बाप का बनें तो *सबकुछ छोड़ यहाँ आकर बैठ जाना* है। _(सही / गलत)_
° *_गलत_*
° *सबको यहाँ तो नहीं बिठा सकते।* घर में रहकर भी याद करना है।
° नौकरी तो करनी ही है। कितने ढेर बच्चे हैं, इतने सब तो रह नहीं सकते। रहना सबको गृहस्थ व्यवहार में है।
° ऐसे भी नहीं यहाँ आकर हॉस्टल में रहना है। नहीं, गृहस्थ व्यवहार में बाल बच्चों के साथ रहना है। *बाबा पास आते ही हैं रिफ्रेश होने।*

12. बेहद का वैराग्य सिखलाने वाला चाहिए। बाप ने समझाया था यह _______ है, इनके बाद परिस्तान बनना है। यह _____ -लोक है। यह तो पराया रावण का छी-छी ____ है। बाप कहते हैं – बच्चे, अब नया _____ प्रवृत्ति मार्ग स्थापन हो रहा है। यह ज्ञान बाप ______ पर ही देते हैं क्योंकि अभी तुमको पतित से पावन होना है। अच्छा!
°कब्रिस्तान, मृत्यु, घाट, दैवी, संगम

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