*Om Shanti*
*Answers from Sakar Murli 17-08-2020*
1. *डायमण्ड जुबली* मनाना अर्थात् क्या? (2)
° *डायमण्ड* बन, *डायमण्ड* बनने का मैसेज देना।
2. सन्तुष्टता द्वारा सर्व से प्रशन्सा प्राप्त करने वाले सदा प्रसन्नचित भव। जब सभी सदा प्रसन्न रहेंगे तब _______ का आवाज गूंजेगा अर्थात् ______ का झण्डा लहरायेगा।
°प्रत्यक्षता, विजय
3. अब मैं ज्ञान सागर तुमको ____ -सागर में ले जाता हूँ। सचखण्ड की स्थापना करने वाला है _____ बाबा। ____ -गुरू तो एक ही है।
°क्षीर, सच्चा, सत
4. मैं संगमयुग पर आकर तुमको _____ आत्मा बनाता हूँ, _____ -बुद्धि। तुम बच्चे समझते हो – अब हमारी _____ कला होती है। अब बाप कहते हैं – मीठे-मीठे बच्चों, मेरा बनकर फिर मेरी ____ पर चलो। एक सत का _____ ही पार करता है, बाकी सब डुबोते हैं।
°पुण्य, पारस, चढ़ती, मत, संग
5. गीत:- जो पिया के साथ है…। तो हम *कौन-से पिया के साथ* है? उनकी *ज्ञान वर्षा* से क्या होता?
° (कौन-से पिया) जो रूहानी बाप, परमपिता परमात्मा, शिवबाबा है। वही *ज्ञान का सागर* , सर्व का सद्गति दाता है।
° (ज्ञान वर्षा) इस धरती को फिर से *सब्ज, सुख से भरपूर नई दुनिया-स्वर्ग* कर देते। (दैवीगुणों वाले निर्विकारी दैवी सम्प्रदाय)
6. हम बच्चों को किस बात की *अथाह खुशी* होनी चाहिए?
° इस गन्दी-करप्ट दुनिया में बाप आये हैं, बच्चों को *स्वर्ग का मालिक बनाने* तो अथाह खुशी होनी चाहिए ना!
7. हम सर्वोत्तम कुल वाले बच्चों का *मुख्य कर्तव्य* क्या है? हर एक *चित्र के नीचे* क्या लिख देना है? *प्रदर्शनी के उद्घाटन* लिए क्या लिख सकते? *घर-घर में* क्या समझा सकते?
° (मुख्य कर्तव्य) सदा *ऊंची रूहानी सेवा* करना। सारे *विश्व को पावन* बनाना, श्रीमत पर *बाप के मददगार* बनना – यही सर्वोत्तम ब्राह्मणों का कर्तव्य है।
° (चित्र के नीचे) पारलौकिक परमपिता परमात्मा *त्रिमूर्ति शिव भगवानुवाच* । (त्रिमूर्ति न लिखने से कहेंगे शिव तो निराकार है, वह कैसे ज्ञान देंगे?)
° (प्रदर्शनी का उद्घाटन) *बाप परमधाम से आये हैं – हेविन का उद्घाटन करने*। बाप कहते हैं मैं हेविनली गॉड फादर हेविन का उद्घाटन करने आया हूँ।
° (घर-घर में) भारतवासी तुम *सतोप्रधान थे* फिर 84 जन्मों बाद तमोप्रधान बने हो। अब फिर *सतोप्रधान बनो* । *मनमनाभव* । (हम जानते हैं अभी यह भक्तिमार्ग की रात पूरी होती है।)
8. राजा *बनना अच्छा* है या दासी बनना अच्छा?
° *राजा* (राजा बनना है तो इस पढ़ाई में लग जाओ)
9. इन शब्दों का *अर्थ* क्या है – सतगुरू अकाल, जप साहेब?
° सतगुरू अकाल….. अर्थात् जिसको *काल नहीं खाता* । (मनुष्य को तो काल खा जाता है।)
° (जप साहेब) बाप कहते हैं *मुझे याद करो* – जप साहेब को। साहेब तो एक है। (वास्तव में तुमको जपना नहीं है, याद करना है। यह है अजपाजाप। मुख से कुछ बोलो नहीं।)
10. मनुष्य दुर्गती में इतने पतित दु:खी *निधनके* क्यों बने? *नम्बरवन अवगुण* कौन-सा है? अभी बाप कौन-सा *आर्डीनेन्स* निकालते? बच्चों को अभी *नये नाम* क्यों नहीं मिलते?
° (निधनके क्यों) बाप ने समझाया है मैं तुम सभी आत्माओं का बाप हूँ। परन्तु *मुझे और मेरे कर्तव्य को न जानने कारण* ही मनुष्य ऐसे बने। (तुम्हारा बाप है या नहीं है?)
° नम्बरवन अवगुण है जो *बाप को नहीं जानते* । (दूसरा अवगुण है अपवित्रता)
° (आर्डीनेन्स) तुम 63 जन्म पतित रहे हो, अब *पावन दुनिया स्वर्ग में चलना चाहते हो तो पवित्र बनो*। (वहाँ पतित आत्मा जा नहीं सकती इसलिए ही मुझ बेहद के बाप को तुम बुलाते हो।)
° (नाम नहीं रखते) क्योंकि यदि *माया जीत लेती है* तो ब्राह्मण से बदल शूद्र बन जाते हैं (ब्राह्मणों की माला तो होती नहीं!)
11. *अमरनाथ* लिए बाबा ने कौन-से 3 तर्क सुनाये?
° जिनको *सूक्ष्मवतन* में दिखाते हो वह फिर स्थूल वतन में कहाँ से आया? (पहाड़ आदि तो यहाँ हैं ना।)
° वहाँ *पतित* हो कैसे सकते? (जो पार्वती को ज्ञान देते हैं।)
° बर्फ का लिंग तो कहाँ भी बना सकते।
12. विश्व में शान्ति तब होती है जब _____ होता है। इस _____ द्वारा ही स्वर्ग के गेट खुलते हैं।
°विनाश, लड़ाई
