Answers from Sakar Murli 01-09-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 01-09-2020*

1. _______ ही ब्राह्मण जीवन के कदम हैं, कदम पर कदम रखना माना ______ के समीप पहुंचना।
°मर्यादायें, मंजिल

2. सर्व _____ के अनुभव द्वारा _____ बनने वाले सदा ______ -मूर्त भव। सर्व आत्मायें ढूंढेगी कि सुख-शान्ति के मास्टर ______ कहाँ हैं। तो जब आपके पास सर्वशक्तियों का ______ होगा तब तो सबको सन्तुष्ट कर सकेंगे। जैसे आजकल एक ही ______ से सब चीजें मिल जाती हैं, ऐसे आपको भी बनना है।
°प्राप्तियों, पावरफुल, सफलता, दाता, स्टॉक, स्टोर

3. सतयुग में *घर-घर में सोझरा* होता। अर्थात्‌ क्या?
° *हर एक आत्मा पवित्र* बन जाती है। उसको कहा जाता है – घर-घर में सोझरा। (तुम्हारी ज्योत जगी हुई है। ज्ञान का तीसरा नेत्र मिला है।)

4. *योग अग्नि* से क्या प्राप्तियां होती? (3) और *ज्ञान धन* से क्या प्राप्तियां है?
° योग अग्नि द्वारा पतित से *पावन* बनेंगे। योग से *एवर हेल्दी* पवित्र। योगी की *आयु बड़ी* होती है।
° नॉलेज से धन मिलता है। , ज्ञान से *एवर वेल्दी* धनवान बनते हैं।

5. *ओम् शान्ति* कहने से ही क्या निश्चय हो जाता? (2)
° *हमारा स्वधर्म शान्त* है, जब घर में रहते हैं।
° हम आत्मायें यहाँ की रहवासी नहीं हैं। हम तो *शान्तिधाम की रहवासी* हैं। (फिर यहाँ आकर पार्ट बजाते, शरीर के साथ कर्म करते।)

6. हम *सेना* क्या करती? किन बातों का हमे *नशा* होना चाहिए? (3)
° (सेना) तुम जानते हो *याद के बल से पवित्र बन हम राजा रानी* बन रहे हैं। फिर दूसरे जन्म में गोल्डन स्पून इन माउथ होगा।
° *बड़ा इम्तहान पास* करने वाले मर्तबा भी बड़ा पाते हैं। जितनी पढ़ाई उतना सुख। यह तो *भगवान पढ़ाते हैं* । यह नशा चढ़ा हुआ रहना चाहिए। चोबचीनी ( *ताकत का माल* ) मिलता है। भगवान बिगर ऐसा *भगवान-भगवती* कौन बनायेंगे। तुम अभी पतित से पावन बन रहे हो फिर *जन्म-जन्मान्तर के लिए सुखी* बन जायेंगे। *ऊंच पद* पायेंगे।

7. जो चढ़ेंगे फिर भी गिरेंगे फिर इतना *पुरुषार्थ ही क्यों करें?* _(सही / गलत)_ (4)
° नहीं, फिर तो ऐसे भी समझें अगर *खाना* मिलना होगा तो *आपेही मिलेगा*, फिर इतनी मेहनत कर कमाते ही क्यों हो? वैसे हम भी देख रहे हैं अब *चढ़ती कला* का समय आया है, वही *देवता घराना* स्थापन हो रहा है तो क्यों न अभी ही वो *सुख* ले लेवें।
° जैसे देखो अब कोई *जज बनना* चाहता है तो जब *पुरुषार्थ* करेगा तब उस *डिग्री* को हांसिल करेंगे ना।
° इस अविनाशी ज्ञान का विनाश नहीं होता। करके इतना पुरुषार्थ न कर *दैवी रॉयल घराने* में न भी आवे परन्तु अगर कम पुरुषार्थ किया तो भी उस *सतयुगी दैवी प्रजा* में आ सकते हैं।
° पुरुषार्थ करना अवश्य है क्योंकि *पुरुषार्थ से ही प्रालब्ध* बनेगी, बलिहारी पुरुषार्थ की ही गाई हुई है।

8. नई दुनिया में एक भी ____ हो न सके। नई दुनिया का _____ है परमपिता परमात्मा, वही पतित-पावन है, उनकी ______ भी जरूर पावन होनी चाहिए। पतित सो पावन, पावन सो पतित, यह बातें दुनिया में किसकी _____ में बैठ न सकें।
°पतित, रचयिता, रचना, बुद्धि

9. मीठे-मीठे सिकीलधे नूरे _____ , श्याम से _____ बनने वाली आत्माओं प्रति मात-पिता बापदादा का दिल व ____ , _____ व प्रेम से याद-प्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।
°रत्न, सुन्दर, जान, सिक

10. निश्चयबुद्धि बनने के बाद फिर कभी किसी भी बात में _____ नहीं उठाना है। विकर्मों से बचने के लिए कोई भी कर्म अपने _____ में स्थित होकर बाप की ____ में करना है। कहते हैं ना ____ की बेड़ी हिलती है परन्तु डूबती नहीं।
°संशय, स्वधर्म, याद, सच

11. पुरुषार्थ और ______ दो चीज़ें हैं, पुरुषार्थ से ____ बनती है। यह अनादि सृष्टि का चक्र फिरता रहता है, जो आदि सनातन भारतवासी पूज्य थे, वही फिर ____ बनें फिर वही पुरुषार्थ कर पूज्य बनेंगे, यह उतरना और _____ अनादि ड्रामा का खेल बना हुआ है।
°प्रालब्ध, प्रालब्ध, पुजारी, चढ़ना

12. यह *ड्रामा हूबहू रिपीट* होता है, तो क्या आलमाइटी परमात्मा सदा ऐसे खेल को देख खुद *थकता नहीं* है? जैसे 4 ऋतुओं में सर्दी, गर्मी आदि का फर्क रहता है तो क्या इस *खेल में फर्क* नहीं पड़ेगा?
° यही तो *खूबी है* इस ड्रामा की, हूबहू रिपीट होता है।
° इस ड्रामा में और भी खूबी है जो *रिपीट होते हुए भी नित्य नया* लगता है। (साक्षी हो देखने से)

13. साधू-सन्यासी आदि से *विकर्म नहीं हो सकता* क्योंकि वह पवित्र रहते हैं। सन्यास किया हुआ है। _(सही / गलत)_
° गलत (वास्तव में पवित्र किसको कहा जाता, यह नहीं जानते। कहते भी हैं हम पतित हैं। *पतित-पावन* को बुलाते हैं। वह जब तक वह *न आये तब तक दुनिया पावन नहीं* बन सकती। और फिर *मन्सा-वाचा कर्मणा विकारों के अंश से भी परे* जाना हैं।)

14. विकारों की *कट* चढ़ी हुई है, उसकी *निशानी* क्या होगी?
° उन्हें *पुरानी दुनिया की कशिश* होती रहेगी। *बुद्धि* क्रिमिनल तरफ जाती रहेगी। याद में रह नहीं सकेंगे।

15. रावण राज्य में सब कर्म विकर्म बनने का मूल बीज़ है – विकार। जिन पुराने संस्कारों कारण ही अच्छे-अच्छे फर्स्टक्लास बच्चे गिर कर सौ गुणा चढ़ाकर नाम बदनाम करते। तो *इस पुराने-पन से परे जाने* की कौन-सी *जबरदस्त युक्ति* बाबा ने आज सुनाई (3)
° *आत्मायें सब भाई-भाई* हैं। *भगवान की सन्तान* होकर फिर क्रिमिनल एसाल्ट कैसे करते हैं। हम बी.के. विकार में जा नहीं सकते। इस युक्ति से ही पवित्र रह सकते हैं।
° (नहीं तो) जैसे *शूद्र* समान पतित हो गया।
° (स्लोगन) गाया भी हुआ है- *अमृत पीकर* विष क्यों खाये! (फिर बाहर में जाए दूसरों को सताते)।

16. यह *ईश्वरीय नॉलेज सर्व मनुष्य आत्माओं के लिये* है (सर्व धर्म लिए, भल हरेक के अपने नॉलेज-शास्त्र-मत-संस्कार है)। इसके लिए मम्मा ने कौन-सा श्रेष्ठ *तर्क* दिया? (2)
° जब इस *मनुष्य सृष्टि झाड़ का बीज रूप परमात्मा है* तो उस परमात्मा द्वारा जो नॉलेज प्राप्त हो रही है वो सब मनुष्यों के लिये जरुरी है।
° सभी को यह नॉलेज लेने का अधिकार है। भल ज्ञान न भी उठा सके, परन्तु सबका पिता होने कारण उनसे *योग लगाने से* फिर भी पवित्र अवश्य बनेंगे। इस *पवित्रता के कारण अपने सेक्शन में पद अवश्य पायेंगे* (योग को तो सभी मानते, और मुक्ति लिए भी सजाओं से मुक्त होने की शक्ति इस योग द्वारा ही मिल सकती।)

17. ज्ञान अमृत है ही ज्ञान _____ के पास। शास्त्र पढ़ने से तो कोई पतित से पावन बन नहीं सकते। दूसरो को समझाने की बच्चों में नम्बरवार _____ रहती है। नम्बरवार में रहते हैं।
°सागर, ताकत, याद

18. महारथियों को भाषण पर बुलाते। तो *महाराजाओं* को क्या समझा सकते? (2)
° तुम ही पहले *पावन पूज्य* थे, अभी तो यह है ही पतित दुनिया। पावन दुनिया में तुम भारतवासी *आदि सनातन देवी-देवता धर्म के डबल सिरताज* सम्पूर्ण निर्विकारी थे। महारथियों को तो ऐसे समझाना होगा ना।
° इस नशे से समझाना होता है। भगवानुवाच-काम चिता पर बैठ सांवरे बन जाते हैं फिर *ज्ञान चिता पर बैठने से गोरा* बनेंगे।

19. *चित्र* तो बहुतों के काले बनाते हैं (रामचन्द्र, श्रीनाथ आदि) उनसे पूछना चाहिए- *काला क्यों बनाया है?* कह देंगे यह तो ईश्वर की भावी। यह तो चलता आता है। तो उन्हें क्या समझा सकते? (4)
° बाप समझाते हैं *काम चिता* पर बैठने से पतित दु:खी वर्थ नाट ए पेनी बन जाते हैं। वह है *निर्विकारी* दुनिया। यह है विकारी दुनिया।
° ऐसे-ऐसे समझाना चाहिए। यह *सूर्यवंशी* , यह चन्द्रवंशी फिर *वैश्य वंशी* बनना ही है (वाम मार्ग)।
° जो *सतोप्रधान गोरे थे* , वही काम चिता पर बैठने से काले तमोप्रधान बने हैं।
° वह है *गोल्डन एज* , यह है *आइरन एज*। कट चढ़ जाती है ना। अभी तुम्हारी *कट उतर रही* है। (जो याद करते)

20. वास्तव में पावन बन फिर पावन दुनिया में जाना है। परन्तु कई समझते हैं फलाने ने *मोक्ष* को पाया। इसके लिए बाबा ने कौन-सा तर्क सुनाया?
° उनको *क्या पता* , अगर मोक्ष को पा लिया फिर तो उनका *क्रियाकर्म* आदि भी नहीं कर सकते। (यहाँ ज्योत आदि जगाते हैं कि उनको कोई तकलीफ न हो। अंधियारे में ठोकरें न खायें। आत्मा तो एक शरीर छोड़ दूसरा जाकर लेती है, एक सेकण्ड की बात है। अंधियारा फिर कहाँ से आया?)

21. *रिद्धि-सिद्धि* की बातों में कुछ रखा नहीं। इसके लिए बाबा ने कौन-सी वन्डरफुल बात सुनाई?
° समझो कोई को *पंख* आ जाते हैं, उड़ने लगते हैं – फिर क्या, *उससे फायदा क्या* मिलेगा? बाप तो कहते हैं मुझे *याद करो तो विकर्म विनाश होंगे* (और अनादि गुण जागृत होंगे!)

22. कृष्ण को *योगेश्वर* क्यों कहते?
° *ईश्वर* की याद ( *योग* ) से कृष्ण बना है। (उनको स्वर्ग में योगेश्वर नहीं कहेंगे। वह तो प्रिन्स है। पास्ट जन्म में ऐसा कर्म किया है, जिससे यह बना है।)

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