Answers from Sakar Murli 10-09-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 10-09-2020*

1. जहाँ अभिमान होता है वहाँ ______ की फीलिंग जरूर आती है।
°अपमान

2. *सतयुग की धन-समृद्धि* का बाबा ने बहुत सुन्दर वर्णन किया। याद कीजिए। (5)
° स्वर्ग में तो *सोने के महल* बनते हैं। वहाँ तो अथाह धन है।
° दीवारों में भी *हीरे-जवाहरात* लगे रहते हैं। हीरों की *जड़त* का शौक रहता है।
° वहाँ धन की कमी है नहीं। *कारून का खजाना* रहता है। (अल्लाह अवलदीन का एक खेल दिखाते हैं। ठका करने से महल निकल आते हैं। यहाँ भी दिव्य-दृष्टि मिलने से स्वर्ग में चले जाते हैं।)
° वहाँ प्रिन्स-प्रिन्सेज के पास *मुरली आदि सब चीज़ें हीरों की* रहती हैं।
° इन लक्ष्मी-नारायण की दुनिया तो *वाह-वाह* थी। हीरों-जवाहरातों के महल थे। (तुम जानते हो बरोबर हम स्वर्ग के मालिक थे। हमने ये सोमनाथ का मन्दिर बनाया था।)

3. बाबा ने आज आते ही हमे *आत्म-अभिमानी* बना दिया। कैसे (किन शब्दों से)? (6)
° रूहानी बच्चों प्रति अथवा रूहों प्रति, क्योंकि रूह अथवा *आत्मा सुनती है* कानों द्वारा। *धारणा आत्मा में* होती है। बाप की *आत्मा में भी ज्ञान* भरा हुआ है। बच्चों को आत्म-अभिमानी बनना है इस जन्म में।
° आत्मा है जरूर। आत्मा ही *शरीर में प्रवेश करती* है। (दु:ख भी आत्मा को ही होता है। कहा भी जाता है पतित आत्मा, पावन आत्मा)
° आत्मा *कितनी छोटी* है, उसमें कैसे *पार्ट भरा हुआ* है,
° *घड़ी-घड़ी* अपने को आत्मा समझना है।
° तुम बच्चे अब *चैतन्य* में हो, यह शरीर तो विनाशी है। मिट्टी का बनता है, मिट्टी में मिल जाता है। आत्मा तो *अविनाशी* है ना। (बाकी बैटरी डिस्चार्ज होती है।)
° *आत्मायें ही* बाप को *पुकारती* हैं (ओ बाबा हम डिस्चार्ज हो गये हैं, अब आप आओ, हमको चार्ज होना है। l

4. आत्म-अभिमानी बनाने के बाद, *याद की यात्रा* सिखाते हुए बाबा ने एक जबरदस्त मिसाल दिया। कौन-सा?
° जैसे देखो यह इमर्जेन्सी लाइट💡आई है, जो बैटरी पर चलती है। इसको फिर चार्ज करते हैं। *बाप है सबसे बड़ी पावर* । आत्मायें कितनी ढेर हैं। सबको उस पावर से भरना है। बाप है *सर्वशक्तिमान्* । हम आत्माओं का उनसे *योग लगाकर बैटरी को चार्ज* करना होता है।

5. ऐसे सर्वशक्तिमान् बाबा साथ योग लगाने से कौन-सी *प्राप्तियां* होती? (4)
° बाप कहते हैं मेरे साथ बुद्धि योग लगाओ तो तुम्हारी आत्मा में *पावर भरकर सतोप्रधान* बन जायेगी। पढ़ाई तो है ही कमाई। याद से तुम *पावन* बनते हो। *आयु बड़ी* होती है। *बैटरी चार्ज* होती है।

6. बाप से बहुत ____ होना चाहिए। बाबा हम आपके हैं, आपके साथ ही _____ जाने वाले हैं। जैसे पियर घर से ससुरघर वाले ले जाते हैं ना। यहाँ तुमको दो बाप मिले हैं, ______ कराने वाले। श्रृंगार भी अच्छा चाहिए अर्थात् सर्व- _____ सम्पन्न बनना है।
°लव, घर, श्रृंगार, गुण

7. कोई कह देते *ड्रामा आपेही पुरूषार्थ करायेगा।* तो बाबा ने आज कौन-सा वन्डरफुल उत्तर दिया?
° अच्छा *अब ड्रामा पुरूषार्थ करा रहा है ना, तो करो* । एक जगह बैठ तो नही जाना है। (जिन्होंने कल्प पहले पुरूषार्थ किया है, वह करेंगे।)

8. बाप ही विश्व की बादशाही देते हैं, उनको कितना _____ करना चाहिए। याद में न रहने से माया का ______ लग जाता है। सबसे कड़ा थप्पड़ है _____ का। युद्ध के मैदान में तुम ब्राह्मण ही हो ना, तो तुमको ही तूफान आयेंगे। परन्तु कोई ______ कर हार नहीं खाना।
°याद, थप्पड़ 👋, विकार, विकर्म

9. बाबा सदा कहते अपने से पूछो (कोई अवगुण तो नहीं, कर्मणा से तो कुछ नहीं करता? दु:ख तो नहीं देता?)। ऐसे *क्यों चेक* करना है? (2)
° (हमारा) *बाप है दु:ख हर्ता, सुख कर्ता*।
° *हम भी सबको सुख का रास्ता बताते* हैं।

10. *बच्चे तंग करते* हैं तो गुस्सा आ जाता है। क्या यह ठीक है?
° बच्चों को अच्छी रीति सम्भालेंगे नहीं तो खराब हो जायेंगे। कोशिश करके *थप्पड़ नहीं लगाओ।* (कृष्ण के लिए भी दिखाते हैं ना ओखली से बांधा। रस्सी से बांधो, खाना न दो। रो-रो कर आखिर कहेंगे अच्छा अब नहीं करेंगे।) बच्चा है फिर भी करेगा, *शिक्षा देनी है*। (बाबा भी बच्चों को शिक्षा देते हैं – बच्चे, कभी विकार में मत जाना, कुल-कलंकित नहीं बनना।)

11. जैसे गन्दगी में कीड़े, वैसे ही *मेरा-पन से माया* का जन्म होता है। तो *मायाजीत* कैसे बनना है? (3)
° माया-जीत बनने का सहज तरीका है-स्वयं को *सदा ट्रस्टी* समझो। ब्रह्माकुमार माना ट्रस्टी, ट्रस्टी की किसी में भी *अटैचमेंट नहीं* होती क्योंकि उनमें मेरापन नहीं होता। (गहृस्थी समझेंगे तो माया आयेगी और ट्रस्टी समझेंगे तो माया भाग जायेगी।)
° इसलिए *न्यारे होकर प्रवृत्ति के कार्य में* आओ तो मायाप्रूफ रहेंगे।

12. तुम जानते हो _____ है दिन, _____ है रात। फिर रात से होता है ____, फिर दिन शुरू होता है। बाप कहते हैं रात को भूलो, अब दिन को _____ करो। स्वर्ग है दिन, नर्क है रात। अभी तुम कितने समझदार बनते हो। तुम्हारी बुद्धि चली जाती है _____ में। वहाँ से हम आये हैं। यहाँ सूक्ष्मवतन का तो मालूम पड़ गया। ब्रह्मा-सरस्वती फिर लक्ष्मी-नारायण बनते हैं, इसलिए _____ को 4 भुजा दी हैं। अब स्मृति आई है कल्प-कल्प 84 का चक्र लगाया है, फिर वापिस जाते हैं। यह है _____-युग। अब ट्रांसफर होते हैं।
°ज्ञान, भक्ति, वैराग्य, याद, घर, विष्णु, संगम

13. भल *वाणी* तो बहुत अच्छी-अच्छी चलाते हैं। साथ में क्या चाहिए?
° *याद* का जौहर नहीं तो वह ताकत नहीं रहती है। *जौहर*-दार तलवार नहीं।

14. बाबा ने कहा *बैज़ेस आदि भगवान ने खुद बनाये* हैं, तो इनका बहुत कदर हो। फिर बैज से समझाना क्या है?
° मुख से सिर्फ इतना बोलो कि *बाप को याद करो* तो तुम्हारे विकर्म विनाश होंगे और तुम यह *लक्ष्मी-नारायण बन जायेंगे*।

15. भारतवासी जो खास *देवी-देवताओं के पुजारी* हैं, उनको क्या समझाना है?
° *सतयुग में देवी-देवता धर्म था* तो उनकी पूजा करते हैं। (जैसे धर्म स्थापक की महिमा करते, हम आदि सनातन देवी-देवता धर्म की महिमा करते हैं।)
° वह *किसने स्थापन किया*।

16. तुम तो हो सेना। तुम्हारा नाम ही है *प्रजापिता ब्रह्माकुमार-कुमारियाँ* । फिर कोई भी अन्दर आये (सेंटर में), तो क्या समझा सकते? _(ब्रह्मा बाबा से संबंधित बातें) (3)_
° पहले-पहले तो ये पूछो कि किसके पास आये हो? कहेंगे हम *बी. के.* के पास आये हैं। अच्छा *ब्रह्मा* कौन है? प्रजापिता ब्रह्मा का नाम कभी सुना है? हाँ *प्रजापिता के तो तुम भी बच्चे* हो। सिर्फ जानते नहीं हो।
° ब्रह्मा भी जरूर किसी का बच्चा होगा ना। *उनके बाप का कोई शरीर देखने में नहीं आता* है। (ब्रह्मा-विष्णु-शंकर इन तीनों के ऊपर है *शिवबाबा*। त्रिमूर्ति शिव कहा जाता है तीनों का रचयिता। वह है आत्माओं का पिता।)
° अच्छा, फिर ब्रह्मा कहाँ से आया। बाप कहते हैं मैं *इनमें प्रवेश कर*, इनका *नाम रखता हूँ ब्रह्मा* । (शिवबाबा कहते हैं यह मेरा दिव्य अलौकिक जन्म हैं। तुम बच्चों को तो एडाप्ट करता। बाकी इनमें प्रवेश करता हूँ, बाजू में आकर बैठता हूँ। यह हो गये बाप-दादा।)

17. समझाने की _____ भी होती हैं ना। धीरे-धीरे तुम्हारी वृद्धि होती जायेगी। अभी बाबा बड़ी _____ खोल रहे हैं। इसमें समझाने के लिए _____ तो चाहिए ना। आगे चलकर तुम्हारे पास यह सब चित्र ______ के बन जायेंगे जो फिर तुमको समझाने में भी सहज हो।
°युक्तियाँ, युनिवर्सिटी, चित्र, ट्रांसलाइट

18. तुम्हारी *सच की नांव* को तूफान लगते हैं (कोई रिद्धि-सिद्धि दिखाते, अपने को भगवान कहते, हिलाने की कोशिश करते)। परन्तु अन्त में क्या होंगा?
° तुम जानते हो कि हमारी सच की नांव कभी डूब नहीं सकती। आज जो विघ्न डालते हैं, *वह कल समझेंगे* कि सद्गति का रास्ता यहाँ ही मिलना है। सबके लिए यह *एक ही हट्टी है*। (कोई का भी सच्चा कनेक्शन नहीं है। सच्चा कनेक्शन है ही तुम बच्चों का। बाप को याद करने बिगर ज्योत जगेगी कैसे? ज्ञान भी सिर्फ एक बाप ही देते हैं।)

19. जो चलते-चलते *भाग गये* , (शादी आदि), उनका क्या होगा?
° ड्रामा में पार्ट होगा तो आकर *फिर पुरूषार्थ करेंगे* , जायेंगे कहाँ। (बाप के पास ही सबको पूँछ लटकाना पड़ेगा। लिखा हुआ है भीष्मपितामह आदि भी अन्त में आते हैं। तुम भी हर 5 हज़ार वर्ष के बाद पार्ट बजाते हो, राजाई लेते हो, गंवाते हो। दिन-प्रतिदिन सेन्टर्स बढ़ते जाते हैं।)

20. *बेहद का वैराग्य* दिलाने लिए (ताकि हम योग द्वारा फूल चार्ज हो जाये), बाबा ने इस दुनिया के बारे में क्या सुनाया? (4)
° (झाड़ का मिसाल) सब मनुष्य जैसे *सूख गये हैं।* (सब एक-दो को दु:ख देते रहते हैं। अभी सबका शरीर खलास हो जायेगा। बाकी आत्मायें चली जायेंगी।)
° अभी यह पुरानी दुनिया है, *सब चीज़ों से ताकत निकल गई है*। सोना भी खानियों से नहीं निकलता है।
° कुछ भी नहीं है। *कर्जा ही कर्जा* लेते रहते हैं। अनाज, चीनी आदि *कुछ नहीं मिलता*। अब विश्व को बदलना है।
° बाप आते ही हैं सर्व की सद्गति करने। फिर *न तो यह जंगल रहेगा, न जंगल में रहने वाले रहेंगे*। अभी तुम हो संगमयुग पर, जानते हो कि यह पुरानी दुनिया *कब्रिस्तान* हुई पड़ी है। कोई मरने वाले से दिल थोड़ेही लगाते हैं, यह दुनिया तो गई कि गई। *विनाश* हुआ कि हुआ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *