*Om Shanti*
*Answers from Sakar Murli 27-10-2020*
1. _____ स्वरूप बनो तो चेहरे से खुशनसीबी की झलक दिखाई देगी।
° _अनुभवी_
2. मुरलीधर बन *मुरली के राज़-साज़ द्वारा माया को सदा के लिए न्योछावर / सरेन्डर* करने लिए मुख्य प्रैक्टिकल पॉइंट कौन-सी ध्यान पर रखनी है?
° माया का मुख्य स्वरूप कारण के रूप में आता है। जब *मुरली द्वारा कारण का निवारण* मिल जायेगा तो *माया सदा के लिए समाप्त* हो जायेगी। कारण खत्म अर्थात् माया खत्म।
3. तुम बच्चों को बहुत _____ होना चाहिए। तुम जानते हो हम तो भगवान के बच्चे हैं। अभी हमको जरूर वर्सा मिलना चाहिए। तुम बच्चों के ____ में रोमांच खड़े हो जाने चाहिए – भगवान पढ़ाते हैं, जरूर तुमको भगवान-भगवती बनायेंगे।आपसमान _____ भी बनाते हैं। _____ सागर भी बनाते हैं फिर अपने से भी जास्ती, विश्व का ____ बनाते हैं। पवित्र, अपवित्र का कम्पलीट ____ तुमको बजाना होता है। तुम जानते हो बाबा आया हुआ है फिर से आदि सनातन देवी-देवता धर्म स्थापन करने।
° _फखुर (नशा)_, _खुशी_, _पवित्र_, _ज्ञान_, _मालिक_, _पार्ट_
4. तुम जानते हो हम पुरूषार्थ कर रहे हैं, _____ घराने में पहले-पहले आने के लिए। यह है ही नर से नारायण बनने की कथा। तीसरा _____ आत्मा को मिलता है। हम आत्मा पढ़कर नॉलेज सुन _____ बन रहे हैं। फिर सो राजाओं का राजा बनेंगे। शिवबाबा कहते हैं मैं तुमको डबल _____ बनाता हूँ। तुम्हारी अभी कितनी _____ खुल गई है, ड्रामा अनुसार कल्प पहले मुआफिक।
° _सूर्यवंशी_, _नेत्र_, _देवता_, _सिरताज_, _बुद्धि_
5. “मीठे बच्चे – भिन्न-भिन्न _____ सामने रख याद की यात्रा पर रहो, इस पुरानी _____ को भूल अपने स्वीट ____ और नई _____ को याद करो”
° _युक्तियां_, _दुनिया_, _होम_, _दुनिया_
6. *रूहानी अवस्था* में निश्चयबुद्धि होकर बैठना वा सुनना है। क्यों?
° *रूहानी बाप बैठ रूहानी बच्चों को समझाते हैं इसलिए* रूहानी बच्चों को देही-अभिमानी या रूहानी अवस्था में निश्चयबुद्धि होकर बैठना वा सुनना है। (बाप ने समझाया है – आत्मा ही सुनती है इन आरगन्स के द्वारा, यह पक्का याद करते रहो।)
7. साथ में 84 का चक्र-खेल भी बुद्घि में रखना है। तो इस *खेल* को कौन-से नाम दे सकते? (4) ( _____ और _____ का खेल)
° चलते-फिरते बुद्धि में यह रहे। *सद्गति* और दुर्गति, *ज्ञान* और भक्ति, *सुख* और दु:ख, *दिन* और रात का खेल कैसे चलता है।
8. तुमको निरन्तर बाप की याद और इस नॉलेज में रहना है। इससे तुम्हारे _____ भी विनाश होते हैं और तुम _____ भी पाते हो। जानते हो यह पुरानी ____ तो अब खलास होनी है। अन्दर में _____ रहता है – अभी हम नये मकान में जायेंगे।
° _विकर्म_, _राज्य_, _दुनिया_, _निश्चय_
9. कौन सी एक्ट अथवा पुरूषार्थ *अभी ही* चलता है, सारे कल्प में नहीं?
° याद की यात्रा में रह *आत्मा को पावन बनाने का पुरूषार्थ*, सारी दुनिया को पतित से पावन बनाने की एक्ट सारे कल्प में सिर्फ इसी संगम समय पर चलती है। (यह एक्ट हर कल्प रिपीट होती है। तुम बच्चे इस अनादि अविनाशी ड्रामा के वण्डरफुल राज़ को समझते हो।)
10. अब तुम्हारे तो हैं ____ चित्र, इसलिए तुम समझा सकते हो – रांग क्या, राइट क्या है। बाबा ने चित्रों पर भी समझाया है कि यह है ____ के चित्र। तुम्हारे इन चित्रों में ____ के आदि-मध्य-अन्त का राज़ आ जाता है। बच्चे जो सर्विस करने वाले हैं, ____ -समान बनाते जाते हैं। पढ़कर पढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए। जितना जास्ती पढ़ेंगे उतना ____ पद पायेंगे। बाप कहते हैं मैं तदबीर तो कराता हूँ, परन्तु ____ भी हो ना। हर एक ड्रामा अनुसार पुरुषार्थ करते रहते हैं।
° _रीयल_, _सद्गति_, _सृष्टि_,
_आप_, _ऊंच_, _तकदीर_
11. बाबा को कहते नॉलेजफुल, बाप, टीचर, सतगुरू, पतित-पावन, *लिब्रेटर, गाइड। कहाँ का गाइड?*
° *शान्तिधाम, मुक्तिधाम का*। (वहाँ तक बाप ले जाकर छोड़ेंगे। बच्चों को पढ़ाकर, सिखलाकर, गुल-गुल बनाकर घर ले जाए छोड़ेंगे। बाप के सिवाए तो कोई ले जा नहीं सकते। तुम्हारी बुद्धि में है कि शान्तिधाम तो हमारा घर है। वहाँ जाकर फिर नई दुनिया में हम पहले-पहले आयेंगे।)
12. कहते रहते हैं एक राज्य, एक धर्म, एक भाषा, एक मत हो। वह तो ____ द्वारा ही स्थापन हो सकता है।
° _एक_
13. बोलते सब ऐसे हैं, हमको पावन बनाओ। पतित आत्मा, पावन आत्मा, महान् आत्मा आदि। हे पतित-पावन आकर मुझे पावन बनाओ। *परन्तु आत्मा कैसे पावन बनेगी*?
° उसके लिए चाहिए *अविनाशी सर्जन* । (आत्मा पुकारती उसको है जो पुनर्जन्म रहित है। आत्मा को पवित्र बनाने की दवाई उनके पास ही है।)
14. उस *फिल्म* और इस *ड्रामा के पार्ट* में क्या अन्तर है?
° वह फिल्म घिसकर पुरानी हो जाती है। *यह है अविनाशी*। (यह भी वण्डर है। कितनी छोटी आत्मा में सारा पार्ट भरा हुआ है। बाप तुम्हें कितनी गुह्य-गुह्य महीन बातें समझाते हैं। अभी कोई भी सुनते हैं तो कहते हैं यह तो बड़ी वण्डरफुल बातें समझाते हो। आत्मा क्या है, वह अभी समझा है। शरीर को तो सब समझते हैं, डाक्टर आदि। तुम्हारी बुद्धि में यह सब बातें हैं – कि यह नाटक है, सभी आत्मायें पार्टधारी हैं जिनमें अविनाशी पार्ट भरा हुआ है।)
15. वह बाप है अकाल ____ । आत्मा का यह तख्त है ना, जिससे यह पार्ट बजाते हैं। तो बाप को भी पार्ट बजाने, सद्गति करने के लिए ___ चाहिए ना। बाप कहते हैं मुझे _____ तन में ही आना है।
° _मूर्त_, _तख्त_, _साधारण_
16. ब्रह्मा बाबा ने अपना कौन-सा *अनुभव* आज सुनाया?
° हमारा अपना घरघाट मित्र-सम्बन्धी आदि कुछ भी नहीं, *हमको क्या याद पड़ेगा*, सिवाए बाप के और तुम बच्चों के कुछ नहीं है। *सब कुछ एक्सचेंज कर दिया* । बाकी बुद्धि कहाँ जायेगी। *बाबा को रथ दिया है*। जैसे तुम वैसे हम पढ़ रहे हैं। सिर्फ रथ बाबा को लोन पर दिया है।
17. हम बच्चों को किन्हो-किन्हो का *उद्धार* करना है? (3)
° यह भी समझाते रहते हैं – *वेश्याओं* की सर्विस करो। *गरीबों* का भी उद्धार करना है।
° तुम्हारे ऊपर बहुत रेसपान्सिबिलिटी है। *अहिल्यायें, कुब्जायें, भीलनियां, गणिकायें* इन सबका उद्धार करना है।
° गायन भी है *साधुओं* का भी उद्धार किया है। (अभी वह तुम्हारे बन जाएं तो रिवोलूशन हो जाए। यह पिछाड़ी में होगा।)
18. (वेश्याओं को) अभी तुम यह धंधा छोड़ _____ की मालिक बनो। होशियार हो जायेंगे तो फिर अपने _____ को भी समझायेंगे। हाल में चित्र आदि रख बैठकर समझाओ तो सब कहेंगे वाह वेश्याओं को शिवालय वासी बनाने के लिए यह ____ निमित्त बनी हैं। समझाने की युक्तियां तो सब बच्चों को बताते रहते हैं। ऐसा कार्य करके दिखाओ जो मनुष्यों के मुख से _____ निकले। गायन भी है शक्तियों में ____ बाण भगवान ने भरे थे। तुम जानते हो यह बाण 🏹 तुमको इस दुनिया से उस दुनिया में ले जाते हैं। तो तुम बच्चों को बहुत ____ बुद्धि बनना है। एक जगह भी तुम्हारा नाम हुआ, गवर्मेन्ट को मालूम पड़ा तो फिर बहुत प्रभाव निकलेगा।
° _शिवालय_, _ऑफिसर्स_, _बी.के._, _वाह-वाह_, _ज्ञान_, _विशाल_
19. तुम *धन* क्या करेंगे! _(हमे तो कुछ नहीं चाहिए)_। तो जो धन आता, उसको कैसे सफल करते?
° तुम बड़े-बड़े *सेन्टर्स* खोलेंगे। पैसे से *चित्र* आदि बनाने होते हैं। (मनुष्य देखकर बड़ा वण्डर खायेंगे। कहेंगे पहले-पहले तो तुमको प्राइज़ देनी चाहिए। गवर्मेन्ट हाउस में भी तुम्हारे चित्र ले जायेंगे। इन पर बहुत आशिक होंगे। दिल में चाहना होनी चाहिए – मनुष्य को देवता कैसे बनायें।)
20. इस सृष्टि चक्र की भेंट *बड़ के झाड़* से क्यों की जाती?
° शाखायें ढेर निकलती हैं, थुर है नहीं। यह भी कितने धर्मों की शाखायें निकली हैं, *फाउन्डेशन देवता धर्म है नहीं। प्राय:लोप* है। (बाप कहते हैं वह धर्म है परन्तु धर्म का नाम फिरा दिया है। पवित्र न होने के कारण अपने को देवता कह न सकें। न हो तब तो बाप आकर रचना रचे ना। अभी तुम समझते हो हम पवित्र देवता थे। अभी पतित बनें हैं। हर चीज़ ऐसे होती है। तुम बच्चों को यह भूलना नहीं चाहिए। पहली मुख्य मंजिल है बाप को याद करने की, जिससे ही पावन बनना है।)
21. सतयुग-त्रेता में सूर्यवंशी दैवी राजाओ का *धर्म शास्त्र* कोई कहेंगे?
° नहीं, सूर्यवंशी-चन्द्रवंशी का तो एक ही शास्त्र है, परन्तु वह गीता कोई रीयल नहीं है क्योंकि तुमको जो *ज्ञान मिलता है वह तो यहाँ ही खत्म हो जाता। वहाँ कोई शास्त्र नहीं।* (द्वापर से जो धर्म आते हैं उन्हों के शास्त्र चले आ रहे हैं। अब फिर एक धर्म की स्थापना होती है तो बाकी सब विनाश हो जाने हैं।)
