*Om Shanti*
*Answers from Sakar Murli 28-10-2020*
1. ____ को किनारे कर कर्म में बिजी हो जाना – यही अलबेलापन है।
° _योग_
2. विनाश के समय अन्तिम डायरेक्शन्स को कैच करने के लिए _____ बुद्धि चाहिए। इस _____ द्वारा आपको आवाज आयेगा कि इस सेफ स्थान पर पहुंच जाओ। जो बच्चे बाप की ____ में रहने वाले हैं, जिन्हें ____ बनने का अभ्यास है वे विनाश में विनाश नहीं होंगे लेकिन ____ से शरीर छोड़ेंगे।
° _वाइसलेस_, _वायरलेस_, _याद_, _अशरीरी_, _स्वेच्छा_
3. यहाँ तो फिर एक है माशूक, तुम सब हो _____ । वह _____ माशूक तो सदैव गोरा है। _____ प्योर। बाप कहते हैं मैं _____ सदैव खूबसूरत हूँ। तुमको भी खूबसूरत बनाता हूँ। इन देवताओं की ____ नेचुरल ब्युटी है।
° _आशिक_, _सलोना_, _एवर_, _मुसाफिर_, _एकरस_
4. सारे विश्व की राजाई का _____ तुमको मिलता है। तो तुमको कितनी _____ होनी चाहिए। वाह बाबा आपकी तो _____ है। नॉलेज तो आपकी ही है। बड़ी अच्छी समझानी है। आदि सनातन देवी-देवता धर्म वालों ने विश्व की ______ कैसे प्राप्त की। यह किसको भी ख्याल में होगा नहीं। उस समय और कोई _____ होता नहीं। बाप कहते हैं मैं विश्व का मालिक नहीं बनता, तुमको बनाता हूँ, ____ से।
° _माखन_, _खुशी_, _कमाल_, _बादशाही_, _खण्ड_, _पढ़ाई_
5. यह बेहद का स्कूल है। एक ही एम ऑब्जेक्ट है – स्वर्ग की _____ प्राप्त करना। स्वर्ग में भी बहुत _____ हैं। कोई राजा-रानी कोई प्रजा। बाप कहते हैं – मैं आया हूँ तुमको फिर से _____ सिरताज बनाने। सब तो बन न सकें। सतयुग-त्रेता में तो ऐसी बातें होती नहीं। वहाँ है _____ । बाद में जो राजायें होते हैं, वह भी प्रजा को बहुत ____ करते हैं। यह तो मात-पिता है।
° _बादशाही_, _पद_, _डबल_, _प्रालब्ध_, _प्यार_
6. बाबा ने आज *साक्षात्कार शब्द* को किस भिन्न रीति याद किया?
° बाबा ने *आशिक-माशूक* का भी मिसाल दिया है। *बैठे-बैठे याद किया और झट सामने* आ जाते। यह भी एक साक्षात्कार है। वह उनको याद करते, वह उनको याद करते। यहाँ तो फिर एक है माशूक, तुम सब हो आशिक। (योग में ही बहुत बच्चे फेल होते हैं। एक्यूरेट याद में कोई घण्टा डेढ़ भी मुश्किल रह सकते हैं। 8 घण्टा तो पुरूषार्थ करना है। तुम बच्चों को शरीर निर्वाह भी करना है।)
7. “मीठे बच्चे – तुम इस पाठशाला में आये हो स्वर्ग के लिए ______ लेने, आत्म-अभिमानी बनो और अपना नाम _____ में नोट करा दो तो स्वर्ग में आ जायेंगे”
° _पासपोर्ट_, _रजिस्टर_
8. कौन-सी *स्मृति* न रहने कारण बच्चे *बाप का रिगार्ड* नहीं रखते हैं?
° कई बच्चों को यही स्मृति नहीं रहती कि *जिसको सारी दुनिया पुकार-याद कर रही, वही ऊंच ते ऊंच बाप हम बच्चों की सेवा में उपस्थित* हुआ है। यह निश्चय नम्बरवार है, जितना जिसको निश्चय है उतना रिगार्ड रखते हैं।
9. गीत:- *जो पिया के साथ है*…… इसका अर्थ हमारे जैसे कोई समझ न सके। क्यों?
° वह क्या जानें, पिया कौन है, किसका पिया है? *आत्मा खुद को ही नहीं जानती तो बाप को कैसे जाने* । (सब हैं देह-अभिमानी। आत्म-अभिमानी कोई है नहीं। अगर *आत्म-अभिमानी* बनें तो आत्मा को अपने बाप का भी पता हो। यहाँ तो तुम बच्चों को *बाप बैठ सम्मुख समझाते* हैं।)
10. साथ रहने वाले *जास्ती उन्नति* को पाते हैं और दूर वाले कम उन्नति को पाते हैं। _(सही / गलत)_
° *नहीं*, प्रैक्टिकल देखा जाता है जो दूर हैं वह जास्ती पढ़ते हैं और उन्नति को पाते हैं। (इतना जरूर है बेहद का बाप यहाँ हैं। ब्राह्मण बच्चों में भी नम्बरवार हैं। बच्चों को दैवीगुण भी धारण करने हैं, अवगुण-बुरे काम न हो। बांधेलियाँ कितनी मार खाती हैं, तड़फती हैं फिर भी याद में रह अच्छा उठा लेती हैं। पद भी ऊंच बन जाता है। बाबा सबके लिए नहीं कहते हैं। नम्बरवार पुरूषार्थ अनुसार तो हैं ही। बांधेलियाँ आदि बाहर में रहकर भी बड़ी कमाई करती हैं।)
11. कोई *विरले* हैं जो……. क्या?
° जो *सदैव प्वाइंट्स लिखते रहते* हैं। चार्ट भी लिखते-लिखते फिर थक जाते हैं। तुम बच्चों को प्वाइंट्स लिखनी चाहिए। बहुत *महीन-महीन प्वाइंट्स* हैं। (जो सब तुम कभी याद नहीं कर सकेंगे, खिसक जायेंगी। फिर पछतायेंगे कि यह प्वाइंट तो हम भूल गये। सबका यह हाल होता है। भूलते बहुत हैं फिर दूसरे दिन याद पड़ेगा। बच्चों को अपनी उन्नति के लिए ख्याल करना है। बाबा जानते हैं कोई विरले यथार्थ रीति लिखते होंगे। बाबा व्यापारी भी है ना। वह है विनाशी रत्नों के व्यापारी। यह है ज्ञान रत्नों के।)
12. यह पुरूषोत्तम संगमयुगी *पढ़ाई* कितना ऊंच बनाने वाली है, इसमें पैसे आदि की दरकार नहीं है। पढ़ाई का शौक होना चाहिए। यहां बाबा ने *किसका मिसाल* दिया?
° एक आदमी बहुत गरीब था, पढ़ने के लिए पैसे नहीं थे। फिर पढ़ते-पढ़ते मेहनत करके इतना साहूकार हो गया जो *क्वीन विक्टोरिया का मिनिस्टर* बन गया। (तुम भी अभी कितने गरीब हो। बाप कितना ऊंच पढ़ाते हैं। इसमें सिर्फ बुद्धि से बाप को याद करना है। बत्ती आदि जगाने की भी दरकार नहीं। कहाँ भी बैठे याद करो। परन्तु माया ऐसी है जो बाप की याद भुला देती है। याद में ही विघ्न पड़ते हैं। यही तो युद्ध है ना। आत्मा पवित्र बनती ही है बाप को याद करने से।)
13. योग के लिए _____ मिलता है – ऐसे-ऐसे याद करो। और फिर सृष्टि चक्र का भी _____ है। रचयिता और रचना के आदि-मध्य-अन्त को और कोई नहीं जानते। भारत का प्राचीन _____ सिखलाते हैं। प्राचीन तो कहा जाता है _____ को।
° _ज्ञान_, _ज्ञान_, _योग_, _नई दुनिया_
14. हमारे कौन-से *दो फोटो* से सेवा कर सकते?
° बाबा ने कहा था सबका फोटो होना चाहिए, बाजू में *वैकुण्ठ के ताज-तख्त वाला फोटो* हो। हम यह बन रहे हैं।
(एक तरफ तुम साधारण, एक तरफ *डबल सिरताज*। तुम्हारा एक चित्र है ना – जिसमें पूछते हो क्या बनना चाहते हो? यह बैरिस्टर आदि बनना है या राजाओं का राजा बनना है। एम ऑब्जेक्ट सामने है। हम यह बन रहे हैं। वह बैरिस्टरी पढ़ते हैं तो योग बैरिस्टर से है। इनका योग परमपिता परमात्मा से है तो डबल सिरताज बनते हैं।)
15. *चित्रों को छपाने* लिए कौन-सी बातें बाबा ने सुनाई? (3)
° बाबा कहते *कपड़े पर* छप सकते हैं।
° अगर किसके पास बड़ी स्क्रीन प्रेस न हो तो *आधा-आधा* कर दे। फिर *जॉइंट* ऐसा कर लेते हैं जो पता भी नहीं पड़ता है। (बेहद का बाप, बड़ी सरकार कहते हैं, कोई छपाकर दिखाये तो मैं उनका नाम बाला करूँगा। यह चित्र कपड़े पर छपाए कोई विलायत ले जाए तो तुमको एक-एक चित्र का कोई 5-10 हज़ार भी दे देवे। पैसे तो वहाँ ढेर हैं।)
° बन सकते हैं, इतनी *बड़ी-बड़ी प्रेस* हैं, शहरों की सीन सीनरी ऐसी-ऐसी छपती हैं – बात मत पूछो। यह भी छप सकते हैं। (यह तो ऐसी *फर्स्टक्लास चीज़* है – कहेंगे सच्चा ज्ञान तो इनमें ही है, और कोई के पास तो है ही नहीं।)
16. विलायत में *चित्रों पर समझाने* वाले कैसे चाहिए?
° समझाने वाला भी *इंगलिश में होशियार* चाहिए। (इंगलिश तो सब जानते हैं। उन्हों को भी सन्देश तो देना है ना। वही विनाश अर्थ निमित्त बने हुए हैं।)
17. *जैसा कर्म वैसा फल* कहा जाता है। सतयुग में ऐसे नहीं कहेंगे। _(सही / गलत)_
° सही, अभी तुम जन्म-जन्मान्तर की प्रालब्ध बनाते हो। गरीब साहूकार का फ़र्क तो वहाँ रहता है ना, अभी के पुरूषार्थ अनुसार। *वह प्रालब्ध है अविनाशी 21 जन्मों के लिए*। (यहाँ अच्छे कर्म करेंगे तो एक जन्म के लिए अच्छा फल मिलेगा। कोई ऐसे कर्म करते हैं जो जन्म से ही रोगी होते हैं। यह भी कर्मभोग है ना। बच्चों को कर्म, अकर्म, विकर्म का भी समझाया है। यहाँ जैसा करते हैं तो उसका अच्छा वा बुरा फल पाते हैं। कोई साहूकार बनते हैं तो जरूर अच्छे कर्म किये होंगे। यहाँ मिलता है अल्पकाल का। यह सब बातें बुद्धि में धारण करनी है।)
18. मैं ______ तो हूँ ही अशरीरी। तुम सबको शरीर है। देहधारी हो। ब्रह्मा-विष्णु-शंकर को भी _____ शरीर है। जैसे तुम आत्मा हो वैसे मैं भी परम आत्मा हूँ। मेरा जन्म दिव्य और _____ है, और कोई भी ऐसे जन्म नहीं लेते हैं। यह मुकरर है। यह सब _____ में नूध है।
° _परमात्मा_, _सूक्ष्म_, _अलौकिक_, _ड्रामा_
19. बाप कहते हैं मैं पुराने _____ देश, पतित शरीर में आता हूँ। यहाँ पावन शरीर है नहीं। बाप कहते हैं मैं इनके बहुत जन्मों के अन्त में प्रवेश कर _____ मार्ग की स्थापना करता हूँ। आगे चल तुम ________ बनते जायेंगे। _______ करेंगे फिर समझेंगे। आगे भी ऐसा पुरूषार्थ किया था, अब कर रहे हैं। पुरूषार्थ बिगर तो कुछ भी मिल न सके। तुम जानते हो हम नर से ______ बनने का पुरूषार्थ कर रहे हैं।
° _पतित_, _प्रवृत्ति_, _सर्विसएबुल_, _पुरूषार्थ_, _नारायण_
