Answers from Sakar Murli 31-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 31-10-2020*

1. ____ असम्भव से भी सम्भव करा देती है।
° _दृढ़ता_

2. *जैसे बाप* बहुरूपी है – सेकण्ड में निराकार से आकारी वस्त्र धारण कर लेते हैं, ऐसे आप भी इस मिट्टी की ड्रेस को छोड़ *आकारी फरिश्ता ड्रेस, चमकीली ड्रेस पहन लो* । तो कौन-सी 2 प्राप्तियां होंगी?
° *सहज मिलन* भी होगा,
° और *रूहरिहान का क्लीयर रेसपान्स समझ में आ जायेगा*। (क्योंकि यह ड्रेस पुरानी दुनिया की वृत्ति और वायब्रेशन से, माया से प्रूफ है, इसमें माया इन्टरफियर नहीं कर सकती।)

3. तुम्हारे पास अनगिनत ____ होगा। तुम जानते हो बाबा हमारी ______ खूब भर रहे हैं। कहते हैं कुबेर के पास बहुत धन था। वास्तव में तुम हर एक _____ हो। तुमको ____ रूपी खजाना मिल जाता है। खुदा ______ की भी कहानी है। तुम जानते हो बरोबर हम योगबल से विश्व की बादशाही लेते हैं।
° _धन_, _झोली_, _कुबेर_,_वैकुण्ठ_, _दोस्त_,

4. अभी तुम बच्चे बाप से सम्मुख पढ़ रहे हो। अन्दर में _____ आती है – हम प्रैक्टिकल में बैठे हैं। पुरूषोत्तम संगमयुग को भी जरूर आना है। कब आता है, कैसे आता है – यह कोई भी नहीं जानते। तुम बच्चे जानते हो तो कितना _____ होना चाहिए। हम राजाओं का ____ बन रहे हैं। तो अन्दर में कितनी _______ होनी चाहिए। हम डबल _____ बहुत ऊंच बनते हैं।
° _भासना_, _गद्गद्_, _राजा_, _खुशी_, _सिरताज_

5. भगवान बाप हमको पढ़ाते हैं। कभी कोई समझ न सके कि _____ बाप कैसे आकर पढ़ाते हैं। तुम बच्चे जानते हो हमको बाबा _____ बना रहे हैं। अमरपुरी का मालिक बना रहे हैं, कितनी ____ होनी चाहिए।
° _निराकार_, _अमर_, _खुशी_

6. *सुख-शान्ति-पवित्रता का सागर* भगवान बाप 21 जन्म अर्थात् आधाकल्प 2500 वर्ष के लिए हमे *शान्ति का वर्सा-वरदान-बख़्शीश गैरन्टी देते* (शान्तिधाम-सुखधाम, मन और विश्व में भी शान्ति)। यह लेने हम अपना भी पुरूषार्थ करते हैं, साथ में हमारा क्या *फर्ज* है? (2)
° बच्चों का फर्ज है, सब बच्चों को *शान्ति देना* है। (2-4 को वर्सा मिलने से क्या होगा। कोई को रास्ता बताया जाता है, परन्तु निश्चय न होने कारण दूसरों को आपसमान बना नहीं सकते।)
° औरों को *रास्ता बताते* हैं। तुम *लिखते* भी हो बेहद के बाप से 100 प्रतिशत पवित्रता, सुख, शान्ति का वर्सा पा सकते हो। (यहाँ 100 प्रतिशत अपवित्रता, दु:ख, अशान्ति है। परन्तु मनुष्य समझते नहीं।)

7. तुम्हीं कल्प-कल्प बाप से वर्सा लेते हो अर्थात् माया पर जीत पाते हो फिर हारते हो। यह है _____ की हार और जीत। हम अभी पुरूषोत्तम बन रहे हैं। पुरूषों में उत्तम पुरूष _____ से ही बनते हैं। तुमको _____ पढ़ाते हैं। इस पढ़ाई से ही अपने _____ अनुसार पद पाते हो। जितना जो पढ़ेंगे उतना ग्रेड मिलेगी, _____ की।
हम फिर दूसरों को बताते हैं।
° _बेहद_, _पढ़ाई_, _बाप_, _पुरूषार्थ_, _राजाई_

8. हम *सबको क्या कहते* हैं? _(सेवा)_
° *बाप को याद करो। बस* । (ऊंच ते ऊंच बाप को याद करने से ही ऊंच पद मिलेगा। तुम राजाओं के राजा बनते हो।)

9. इस आसुरी दुनिया में बहुत-बहुत _____ -शील बनकर रहना है। कोई दु:ख दे तो भी _____ करना है। बाप की ____ -मत कभी नहीं छोड़नी है।
° _सहन_, _सहन_, _श्री_

10. इस 5 हज़ार वर्ष के बेहद *झाड़* की कौन-सी 2 विशेषताएं सुनाई?
° *इनकी एक्यूरेट आयु का तुमको पता है*, और जो झाड़ होते हैं उनकी आयु का किसको पता नहीं होता है, अन्दाज़ बता देते हैं।
° तूफान आया, झाड़ गिरा, आयु पूरी हो गई (उस झाड़ की)। परन्तु इस बेहद के झाड़ की आयु *पूरे 5 हज़ार वर्ष* है। इसमें एक दिन न कम, न जास्ती हो सकता है। यह *बना-बनाया* झाड़ है। इसमें *फ़र्क नहीं* पड़ सकता। ड्रामा में जो सीन जिस समय चलनी है, *उस समय ही* चलेगी। *हूबहू रिपीट* होना है। आयु भी एक्यूरेट है। (बाप को भी नई दुनिया स्थापन करने आना है। *एक्यूरेट टाइम पर आते* हैं। एक सेकेण्ड का भी उसमें फ़र्क नहीं पड़ सकता। यह भी अब तुम्हारी बेहद की बुद्धि हुई। तुम ही समझ सकते हो। पूरे 5 हज़ार वर्ष बाद बाप आकर प्रवेश करते हैं, इसलिए शिवरात्रि कहते हैं।)

11. कृष्ण के लिए जन्माष्टमी कहते हैं। *शिव की जन्माष्टमी नहीं कहते*, शिव की *रात्रि* कहते हैं, क्यों?
° क्योंकि अगर जन्म हो तो फिर मौत भी हो। मनुष्यों का *जन्म* दिन कहेंगे। (शिव के लिए हमेशा *शिवरात्रि* कहते हैं। उनका जन्म *दिव्य अलौकिक* है, जो और कोई का हो नहीं सकता। यह कोई जानते नहीं – शिवबाबा कब, कैसे आते हैं, शिवरात्रि का अर्थ क्या है। यह है बेहद की रात। भक्ति की *रात पूरी हो दिन होता* है। अब तुम जानते हो, अब दिन शुरू होना है। पढ़ते-पढ़ते जाए अपने घर पहुँचेंगे, फिर दिन में आयेंगे। आधाकल्प दिन और आधाकल्प रात गाई जाती है परन्तु किसकी भी बुद्धि में नहीं आता।)

12. कलियुग की आयु 40 हज़ार वर्ष बाकी, सतयुग की लाखों वर्ष, इस गलत *मान्यता में क्या गड़बड़* है? (2)
° फिर *आधा-आधा का हिसाब* ठहरता नहीं।
° विश्व तो है ही, उनमें पार्ट बजाते-बजाते मनुष्य ही तंग हो जाते हैं। अगर *84 लाख जन्मों का आवागमन होता तो पता नहीं क्या होता*। (न जानने के कारण कल्प की आयु भी बढ़ा दी है।)

13. इनमें पहले यह नॉलेज थोड़ेही थी। न कोई गुरू था – जिसने नॉलेज दी। इसका कौन-सा वन्डरफुल *तर्क* बाबा देते?
° अगर गुरू होता तो सिर्फ एक को ज्ञान देंगे क्या। गुरूओं के *फालोअर्स* तो बहुत होते हैं ना। *एक थोड़ेही होगा* । (यह समझने की बातें हैं ना। सतगुरू है ही एक। वह हमको रास्ता बताते हैं। हम फिर दूसरों को बताते हैं।)

14. मनुष्य समझते नहीं। कहते ऋषि-मुनि आदि तो *पवित्र* हैं। परन्तु……… क्या?
° पैदाइस तो फिर भी विष से होती है ना। मूल बात ही यह है। रावण राज्य में पवित्रता हो न सके। ( *पवित्रता-सुख आदि सबका सागर* एक ही बाप है। *सम्पूर्ण पवित्र* तो देवताओं को ही कहेंगे।)

15. तुम एक तरफ पुकारते हो कि पतित-पावन आओ, अब मैं आया हूँ कहता हूँ बच्चे ______ -पना छोड़ दो, तो तुम छोड़ते क्यों नहीं। पावन नहीं बनेंगे तो तुम्हारा ही ______ है। मेहनत कर पावन से फिर पतित बन जायेंगे, तो की कमाई ____ हो जायेगी। _____ आयेगी हम खुद ही पतित बन पड़े हैं फिर दूसरे को कैसे कहेंगे कि पावन बनो। अन्दर खायेगा कि हमने कितना फरमान का ______ किया। यहाँ तुम बाप से डायरेक्ट ______ करते हो, जानते हो बाबा हमको सुखधाम-शान्तिधाम का मालिक बना रहे हैं। कभी कोई पाप हो तो छिपाना नहीं है।
° _पतित_, _नुकसान_, _चट_, _लज्जा_, _उल्लंघन_, _प्रतिज्ञा_

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