Answers from Sakar Murli 03-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 03-10-2020*

1. ______ रूपी पहरेदार ठीक हैं तो ______ सुख का खजाना खो नहीं सकता।
°अटेन्शन, _अतीन्द्रिय_

2. अपने श्रेष्ठ पवित्र जीवन द्वारा स्वयं को *परमात्म ज्ञान का प्रत्यक्ष प्रमाण*-प्रूफ समझने से ही माया प्रूफ बनेंगे। तो *सम्पूर्ण पवित्र जीवन में चलना* किसे कहेंगे? (3)
° सबसे बड़ी असम्भव से सम्भव होने वाली बात *प्रवृत्ति में रहते पर-वृत्ति* में रहना। (देह और देह की दुनिया के संबंधों से पर (न्यारा) रहना।)
° पुराने शरीर की आंखों से पुरानी दुनिया की वस्तुओं को *देखते हुए न देखना* अर्थात् सम्पूर्ण पवित्र जीवन में चलना। (यही परमात्मा को प्रत्यक्ष करने वा माया प्रूफ बनने का सहज साधन है।)

3. कई फिर ____ तू आत्मा बच्चे भी हैं। बाप तो बच्चों की बहुत _____ करते हैं। बाप कहते हैं – बच्चे, तुम बहुत-बहुत _____ हो। तुमको तो इतने झंझट नहीं।बाबा को भी _____ करना है। माशूक की याद तो बिल्कुल _____ होनी चाहिए।
°योगी, _महिमा_, _भाग्यशाली_, _याद_, _पक्की_

4. *परमधाम* सम्बंधित कौन-सी बातें बाबा ने सुनाई? _(यह योग में बहुत उपयोगी रहता)_ (2)
° ऊंच ते ऊंच नाम है, *ऊंच उनका गांव*। (बाप सभी आत्माओं सहित वहाँ निवास करते हैं। बैठक भी ऊंच है। (वास्तव में कोई बैठने की जगह नहीं है। जैसे स्टॉर ⭐ कहाँ बैठे हैं क्या? खड़े हैं ना।)
° तुम *आत्मायें भी* अपनी ताकत से *वहाँ खड़ी* हो। (ताकत ऐसी मिलती है जो वहाँ जाकर खड़े होते हैं। बाप का नाम ही है सर्वशक्तिमान्, उनसे शक्ति मिलती है।)

5. *परमात्मा* बाप ने अपनी कौन-सी *महिमा* सुनाई? _(योग में यह एक-एक *टाइटल* बहुत काम आते।)_ (4)
° *रूहानी बाप* का नाम क्या है? *शिवबाबा* । वह है ही *भगवान*, *बेहद का बाप*। (मनुष्य को कभी बेहद का बाप अथवा *ईश्वर* वा भगवान नहीं कहा जा सकता।)
° *ऊंच ते ऊंच* है ही भगवान, *परमपिता*। (ऊंच ते ऊंच नाम है, ऊंच उनका गांव।)
° बाप का नाम ही है *सर्वशक्तिमान्*, उनसे शक्ति मिलती है। (आत्मा उसको याद करती है, बैटरी चार्ज हो जाती है।)
° पहले भक्ति शुरू होती है तो *पहले एक ही शिव की पूजा* करते। (यथा राजा-रानी तथा प्रजा। ऊंच ते ऊंच है ही भगवान, उनको ही याद करना है।)

6. बाप खुद अपना परिचय देते हैं कि मैं क्या हूँ, कैसा हूँ। कैसे तुम्हारी आत्मा की बैटरी डल हो जाती है। *अब तुमको राय देता हूँ*……….कौन-सी?
° *मेरे को याद करो तो बैटरी सतोप्रधान फर्स्टक्लास हो जायेगी*। (पवित्र बनने से आत्मा 24 कैरेट बन जाती है। अभी तुम मुलम्मे के बन गये हो। ताकत बिल्कुल खत्म हो गई है। वह शोभा नहीं रही है। अब बाप तुम बच्चों को समझाते हैं बच्चे मुख्य बात है योग में रहना, पवित्र बनना।)

7. सर्वशक्तिमान बाप की याद से ही *बैटरी चार्ज* हो जाती है। तो यहां बाबा ने कौन-सा *मिसाल* दिया? _(बैटरी)_
° *जैसे मोटर 🚗 में बैटरी* होती है, उसके ज़ोर से ही मोटर चलती है। बैटरी में *करेन्ट भरी हुई* होती है फिर चलते-चलते वह खाली हो जाती है फिर बैटरी *मेन पावर से चार्ज* कर मोटर में डालते हैं। (वह होती हैं हद की बातें। यह है बेहद की बात। तुम्हारी बैटरी तो 5 हज़ार वर्ष चलती है। चलते-चलते फिर ढीली हो जाती है।)

8. आत्मा उसको याद करती है, बैटरी चार्ज हो जाती है।
मालूम पड़ता है – *एकदम खत्म नहीं होती* है, कुछ न कुछ रहती है। यहां बाबा ने कौन-सा मिसाल दिया?
° जैसे *टार्च 🔦 में डिम हो जाती* है ना। (आत्मा तो है ही इस शरीर की बैटरी। यह भी डल हो जाती है। बैटरी इस शरीर से निकलती भी है फिर दूसरी, तीसरी मोटर में जाकर पड़ती है। 84 मोटरों में उनको डाला जाता है तो अब बाप कहते हैं तुम कितने डलहेड पत्थरबुद्धि बन गये हो। अब फिर अपनी बैटरी को भरो। सिवाए बाप की याद के आत्मा कभी पवित्र हो नहीं सकती। एक ही सर्वशक्तिमान् बाप है, जिनसे योग लगाना है।)

9. तुम ईश्वरीय ____ में लग जाओ। कभी भी आपस में _____ में नहीं आना है। _____ बन सर्विस करनी है। अपने तन-मन धन से, बहुत-बहुत _____ से सेवा कर सबको बाप का परिचय (पैगाम) देना है।
°सर्विस, मतभेद, _फ्राकदिल_, _नम्रता_

10. तुम बच्चों से कई पूछते हैं – तुम *इनको* भगवान क्यों कहते हो? तो क्या उत्तर देना है? _(हम तो उनको भगवान नहीँ कहते!)_
° बाप पहले से ही समझाते हैं – *कोई भी स्थूल वा सूक्ष्म देहधारी को भगवान नहीं कह सकते*। (सूक्ष्म देहधारी सूक्ष्मवतनवासी ही ठहरे। उन्हों को देवता कहा जाता है। ऊंच ते ऊंच है ही भगवान, परमपिता। ऊंच ते ऊंच नाम है, ऊंच उनका गांव।)

11. *मुख्य बात है योग* में रहना, *पवित्र* बनना। नहीं तो क्या परिणाम होगा? _(कुक्कड़ ज्ञानी)_
° *बैटरी* भरेगी नहीं। *योग* लगेगा नहीं। भल कुक्कड़ ज्ञानी तो बहुत हैं। ज्ञान भल देते हैं परन्तु वह *अवस्था* नहीं है। (यहाँ बड़े भभके से अनुभव सुनाते हैं। *अन्दर खाता रहता* है। मैं जो वर्णन करता हूँ ऐसी अवस्था तो है नहीं।)

12. हर बात आदि से अन्त तक ऊपर से नीचे तक बाप समझाते हैं।अभी तुम फिर पवित्र सतोप्रधान बन रहे हो, इसमें ही मेहनत है। और आपस ब्राह्मण भाई-बहन में तो बिलकुल शुद्ध दृष्टि चाहिए (सब देवता बनते हैं!)। तो *दृष्टि को शुद्ध करने लिए कौन-सी युक्तियां* बाबा ने सुनाई? (6)
° *अपने को देखना* है (माया धोखा तो नहीं देती? क्रिमिनल आई तो नहीं बनती? कोई पाप का ख्याल तो नहीं आता?)
° कुदृष्टि कभी नहीं जानी चाहिए। उनको रोकना है। (यह भी *हमारी मीठी बहन वा भाई* है। वह *रूहानी लव* रहना चाहिए। इसमें बहुत-बहुत मेहनत है।)
° है भी सहज याद। अपने को आत्मा समझ बाप को याद करना है। बाबा ने समझाया है – यह आंखें बहुत धोखा देने वाली हैं, उनको बदलना है। (हम *आत्मा* हैं। अभी तो हम *शिवबाबा के बच्चे* हैं। *एडाप्ट* किये हुए *भाई-बहन* हैं। हम अपने को *बी.के.* कहलाते हैं।)
° *सच्चे बाप के आगे सच्चा* रहना, झूठ बोला तो बहुत दण्ड पड़ जायेगा। (कोर्ट में कसम उठाते हैं ना। सच्चे ईश्वर बाप के आगे सच कहेंगे। सच्चे बाप का बच्चा भी सच्चा होगा। बाप ट्रूथ है ना। वह सत्य ही बतलाते हैं। बाकी सब हैं गपोड़े।)
° अपनी *अवस्था का वर्णन* करना चाहिए। *अनुभव सुनाना* चाहिए। (हम घर में कैसे रहते हैं? अवस्था पर क्या असर पड़ता है?)
° *डायरी* रखो – कितना समय इस अवस्था में रहता हूँ? (बाप समझाते हैं रूसतम से माया भी रूसतम होकर लड़ती है।)

13. श्री श्री 108 अपने को कहलाते हैं, वास्तव में यह तो माला है ना, जो सिमरते हैं। तुम बच्चों को अब ज्ञान मिला हुआ है। तो *108 की माला* पर क्या समझा सकते? (2)
° बोलो, 108 की जो माला है उसमें *ऊपर में फूल तो है निराकार*। उनको ही सब याद करते हैं।
° उनकी याद से ही हम (माला का दाना) *स्वर्ग की पटरानी* अर्थात् महारानी बनते हैं। *नर से नारायण, नारी से लक्ष्मी* बनना – यह है सूर्यवंशी मखमल की पटरानी बनना फिर खादी की हो जाती है। (तो ऐसी-ऐसी प्वाइंट्स बुद्धि में रख फिर समझाना चाहिए। फिर तुम्हारा नाम बहुत बाला हो जायेगा। बात करने में शेरनी बनो। तुम शिव शक्ति सेना हो ना।)

14. *भक्ति मार्ग में तो तुम बाप को कितना याद करते* आये हो – हे भगवान, पूजा भी पहले-पहले उस निराकार भगवान की ही करते हैं। परन्तु यथार्थ परिचय न होने के साथ और कौन-सी बात नहीं थी? _(जिस कारण उतरते आये।)_
° ऐसे नहीं कि उस समय तुम *आत्म-अभिमानी* बनते हो। (आत्म-अभिमानी फिर पूजा थोड़ेही करेंगे।)

15. *वेश्याओं* को क्या समझा सकते? (3)
° तुम्हारे नाम के कारण भारत की इतनी आबरू (इज्जत) गई है (वैश्यालय)। अब *बाप आये हैं शिवालय में ले चलने* । (हम श्रीमत पर आये हैं तुम्हारे पास। अभी तुम विश्व की मालिक बन जाओ। भारत का नाम बाला करो, हमारे मुआफिक। हम भी बाप को याद करने से पवित्र बन रहे हैं। तुम भी यह एक जन्म छी-छी काम छोड़ दो।)
° कोई नया युगल हो, बोले *हम पवित्र रहते हैं* । पवित्र रहने से ही विश्व के मालिक बनते हैं। तो क्यों नहीं पवित्र बनेंगे। (रहम तो करना है ना। फिर तुम्हारा नाम बाला बहुत हो जायेगा। कहेंगे इनमें तो ऐसी ताकत है जो ऐसा गन्दा धंधा इनसे छुड़ा दिया।)
° बड़ी नम्रता से जाकर कहना है, हम आपको परमपिता परमात्मा का पैगाम देने आये हैं। अब विनाश सामने खड़ा है। बाप कहते हैं मैं सबका उद्धार करने आया हूँ। *तुम भी यह एक जन्म विकार में मत जाओ*। (ऐसा काम करो जिसमें वाह-वाह हो। हज़ारों मदद देने वाले निकल आयेंगे। यह अपना संगठन बनाओ। मुख्य-मुख्य को चुनो, सेमीनार करो।)

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