Answers from Sakar Murli 06-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 06-10-2020*

1. सुखदाता द्वारा सुख का भण्डार प्राप्त होना – यही उनके ____ की निशानी है।
° _प्यार_

2. जैसे आजकल स्थूल खुशबू के साधनों से गुलाब 🌹, चंदन व भिन्न-भिन्न प्रकार की खुशबू फैलाते, ऐसे हमे *कौन-सा आटोमेटिक स्विच आन* करनी है? _(जिससे विश्व में अशुद्ध वृत्तियों की बदबू समाप्त हो)_
° *संकल्प का!* (आप शिव शक्ति कम्बाइन्ड बन मन्सा संकल्प व वृत्ति द्वारा *सुख-शान्ति, प्रेम, आनंद की खुशबू* फैलाओ। रोज़ अमृतवेले भिन्न-भिन्न श्रेष्ठ वायब्रेशन के *फाउन्टेन* ⛲के माफिक आत्माओं के ऊपर *गुलावाशी* डालो।)

3. ___ है सुख का रास्ता, ____ से सतयुग की राजाई मिलती है।
° _ज्ञान_, _ज्ञान_

4. ____ की यात्रा बिगर कल्याण होना नहीं है। वर्सा देने वाले बाप को तो जरूर _____ करना है तो विकर्म विनाश होंगे। बाबा को तो घड़ी-घड़ी _____ करना है। नेष्ठा में एक जगह बैठने की बात नहीं। चलते-फिरते ____ करना है।
°याद, _याद_, _याद_, _याद_

5. तमोप्रधान से _____ बनना है। बाप श्रीमत देते हैं ऐसे-ऐसे करो, ______ धारण करो। जो करेंगे वह पायेंगे। तुम्हारे तो खुशी में _____ खड़े हो जाने चाहिए। बेहद का बाप मिला है, उनकी सर्विस में ____ बनना है। अन्धों की _____ बनना है। जितना जास्ती बनेंगे, उतना अपना ही कल्याण होगा।
°सतोप्रधान, _दैवीगुण_, _रोमांच_, _मददगार_, _लाठी_

6. एक-दो से नफ़रत-विरोध के बदले, *एक-दो से प्यार से रहना* हैं। इसके लिए बाबा ने कौन-से दिव्य कारण / समझानी दी? (6)
° बाप कहते हैं *तुम आत्मा रूप-बसन्त बनते* हो। (तुम्हारे मुख से रत्न ही निकलने चाहिए। अगर पत्थर निकलते हैं तो गोया आसुरी बुद्धि ठहरे।)
° तुम कहते हो ना – बाबा हम तो *लक्ष्मी-नारायण* बनेंगे। तुमको तो यहाँ *दैवीगुण* ही धारण करने हैं। (आसुरी चलन तो नहीं होनी चाहिए।)
° जानते हो हम सब भाई-बहन, *ईश्वरीय सन्तान* हैं। (ईश्वर की महिमा है वो ज्ञान का सागर, प्रेम का सागर है, यानी सबको सुख देते हैं। तुम सब दिल से पूछो – जैसे बाप भविष्य 21 जन्मों के लिए सुख देते हैं वैसे हम भी वह कार्य करते हैं?)
° तुम हो ही *दु:ख हर्ता, सुख कर्ता बाप के बच्चे* । (दु:ख देने का ख्याल भी तुमको नहीं आना चाहिए।)
° बच्चों को बहुत-बहुत मीठा बनना है। जो सर्विस करेंगे वही प्यारे लगेंगे। *भगवान बाप आये हैं* बच्चों के पास, उनकी श्रीमत पर चलना पड़े। (श्रीमत पर नहीं चलते हैं तो तूफान लगने से गिर पड़ते हैं।)
° विप्रीत बुद्धि होना असुरों का काम है। अपने को *ईश्वरीय सम्प्रदाय* कहलाकर फिर एक-दो को दु:ख देना उनको असुर कहा जाता है। (ऩफरत करने वाले कलियुगी नर्कवासी हैं।)

7. ऐसा *मीठा प्यारा दिव्यगुण-सम्पन्न* बनने लिए बाबा ने कौन-सी विधियां सुनाई? (4)
° बाबा कहते हैं *अपना चार्ट रखो*। चार्ट रखने से मालूम पड़ेगा – हमारा रजिस्टर सुधरता जाता है या वही आसुरी चलन है? (बाबा सदैव कहते हैं कभी किसको दु:ख न दो। निंदा-स्तुति, मान-अपमान, ठण्डी-गर्मी सब सहन करना है। चार्ट लिखते रहो तो डर रहेगा। कोई-कोई लिखते भी हैं, बाबा देखेंगे तो क्या कहेंगे। चाल-चलन में बहुत फ़र्क रहता है।)
° कोई ने कुछ कहा तो *शान्त रहना* चाहिए। ऐसे नहीं कि उनके लिए दो वचन और कह देना है। (कोई किसको दु:ख देते हैं तो उनको बाप समझायेंगे ना। बच्चे, बच्चे को कह नहीं सकते। *अपने हाथ में लॉ नहीं लेना* है। कुछ भी बात है तो बाप के पास आना है।)
° *जांच करनी है* कि हम किसको दु:ख तो नहीं देते हैं? आसुरी चलन तो नहीं चलते हैं? (माया ऐसे काम कराती है, बात मत पूछो।)
° बाप बच्चों को समझाते हैं बच्चे माया बड़ा जोर से थप्पड़ लगाती है, विकर्म करा देती है इसलिए *रोज़ कचहरी करो, आपेही अपनी* कचहरी करना अच्छा है। (यह भी समझते नहीं हैं – शिवबाबा ऑर्डर करते हैं। बाबा ने कहा है हमेशा समझो शिवबाबा सुनाते हैं। तो तुम सेफ रहेंगे, उनके साथ कितना रिगार्ड, रायॅल्टी से चलना चाहिए।)

8. सच बताते तो आधा माफ, कोई सच नहीं बताने से सौगुणा दण्ड। तो *सच सुनाना इतना जरूरी क्यों* है?
° नहीं तो फिर वह *आदत बढ़ती जायेगी* । (बाप को सुनायेंगे तो बाबा सावधान करेंगे।)
° सुनाते नहीं, छिपा लेंगे तो फिर *करते ही रहेंगे* । न बतलाने से एक बार के बदले *100 बार* करते रहेंगे। (बाबा कितनी अच्छी राय देते हैं परन्तु कोई-कोई को ज़रा भी असर नहीं होता है। अपनी तकदीर को जैसे लात मारते रहते हैं। बहुत-बहुत नुकसान करते हैं।)

9. बाप कहते तुम अपने को *आत्मा* समझ बाप को याद करो। *देही-अभिमानी* बनेंगे तब ही इतना ऊंच पद पायेंगे। कई बच्चे फालतू बातों में बहुत टाइम वेस्ट करते हैं। ज्ञान की बात ही ध्यान में नहीं आती। यहां बाबा ने कौन-सा (भक्ति का) *मिसाल* दिया?
° यह भी गायन है *घर की गंगा का मान नहीं रखते* । घर की चीज़ का इतना मान नहीं रखते हैं। (जबकि कृष्ण आदि का चित्र घर में भी है फिर श्रीनाथ द्वारे आदि इतना दूर-दूर क्यों जाते हो। भिन्न-भिन्न लिंग, गंगाजल आदि। यह भी ड्रामा में पार्ट है जो तुमको धक्का खाना पड़ता है। यह है ही ज्ञान और भक्ति का खेल।)

10. गीत 🎵:-तू प्यार का सागर है… वो तो ऐसे ही सिर्फ महिमा गाते रहते हैं। इतना प्यार नहीं है क्योंकि पहचान नहीं। *और हमें?*
° तुमको *बाप ने पहचान दी है* मैं प्यार का सागर हूँ और तुमको प्यार का सागर बना रहा हूँ। (बाप प्यार का सागर कितना सबको प्यारा लगता है। वहाँ भी सब एक-दो को प्यार करते हैं।)

11. और सब सतसंगों आदि में, और इस पढ़ाई में क्या *अन्तर* है?
° वह है कनरस, जिससे अल्पकाल सुख मिलता है। यह *बाप द्वारा तो 21 जन्मों का सुख* मिलता है। बाबा *सुख-शान्ति का सागर* है, हमको भी बाप से *वर्सा* मिलना है। (सेवा करेंगे तब तो मिलेगा, इसलिए बैज सदा पड़ा रहे। हमको ऐसा सर्वगुण सम्पन्न बनना है, जांच करनी है।)

12. जब कोई मरता है तो कहते हैं *स्वर्गवासी* हुआ। इन बातों को अभी तुमने समझा है। और हम क्या कहते? _(स्वर्गवासी के विषय पर)_
° अभी तुम कहते हो *हम स्वर्गवासी बनने के लिए स्वर्ग की स्थापना करने वाले बाप के पास* बैठे हैं। (ज्ञान की बूंद मिलती है। थोड़ा भी ज्ञान सुना तो स्वर्ग में जरूर आयेंगे, बाकी है पुरूषार्थ पर।)

13. *ट्रेन में भी तुम सर्विस* कर सकते हो। क्या समझाना है?
° तुम कोई को भी समझा सकते हो कि *ऊंच ते ऊंच कौन* है? उनको *याद* करो। वर्सा उनसे ही मिलेगा। आत्मा को बाप से *बेहद का वर्सा* मिलता है। (कोई दान-पुण्य करने से राजा के पास जन्म लेते हैं सो भी अल्पकाल के लिए। सदा तो राजा नहीं बन सकते। तो बाप कहते हैं यहाँ तो 21 जन्मों की गैरन्टी है। वहाँ यह पता नहीं पड़ेगा कि हम बेहद के बाप से यह वर्सा ले आये हैं। यह ज्ञान इस समय तुमको मिलता है तो कितना अच्छी रीति पुरूषार्थ करना चाहिए।)

14. बच्चों को युक्तियां भी बहुत समझाई जाती हैं, अपने *पति को* पवित्रता के लिए क्या समझा सकते?
° बोलो, *बाबा कहते हैं* बच्चे काम महाशत्रु है, इन पर जीत पहनो। माया जीते *जगतजीत* बनो। अब हम *स्वर्ग के मालिक* बनें या तुम्हारे कारण अपवित्र बन नर्क में जायें। *बहुत प्यार, नम्रता* से समझाओ। (मुझे नर्क में क्यों ढकेलते हो। ऐसी बहुत बच्चियां हैं – समझाते-समझाते आखिर पति को ले आती हैं। फिर पति कहता कि यह हमारा गुरू है, इसने हमको बहुत अच्छा रास्ता बताया। बाबा के आगे चरणों में आए गिरते हैं।)

15. अभी कुछ न कुछ विकर्म रहे हुए हैं, हिसाब-किताब है इसलिए ____ पूरा नहीं लगता है। ____ नहीं करते हैं तो गोया अपने पांव पर कुल्हाड़ा ⛏️ मारते। अभी कोई भी नहीं कह सकते कि हम ______ अवस्था में हैं। नज़दीक आने से फिर बहुत निशानियाँ दिखाई पड़ेंगी। सारा मदार तुम्हारी अवस्था पर और _____ पर है। तुम्हारी पढ़ाई पूरी होने पर होगी तो फिर देखेंगे _____ सिर पर खड़ी है। अच्छा!
°योग, _पुरुषार्थ_, _कर्मातीत_, _विनाश_, _लड़ाई_

16. बाबा ने *अन्त में साक्षात्कार द्वारा सजाओं* का वर्णन कैसे किया? (2)
° बाप कहते हैं ग़फलत छोड़ो। नहीं तो बहुत *पछताना* पड़ेगा। अपने पुरूषार्थ का फिर पिछाड़ी में साक्षात्कार जरूर होगा फिर बहुत *रोना* पड़ेगा। क्या *कल्प-कल्प* यही वर्सा मिलेगा। *दास-दासी* जाकर बनेंगे। (पिछाड़ी में फिर तुम बच्चों को साक्षात्कार होंगे। साक्षात्कार बिगर सज़ा कैसे मिल सकती। कायदा ही नहीं।)
° अन्त में सबको साक्षात्कार होगा। यह-यह बनेंगे, क्लास में ट्रांसफर होते हैं तो मार्क्स निकलती हैं ना। *ट्रांसफर होने पहले रिजल्ट निकलती* है। तुम भी अपने क्लास में जाते हो तो मार्क्स का पता पड़ेगा फिर बहुत *ज़ार-ज़ार रोयेंगे*। (फिर क्या कर सकेंगे? रिजल्ट तो निकल गई ना। जो तकदीर में था वो ले लिया। बाप सब बच्चों को सावधान करते हैं। कर्मातीत अवस्था अभी हो न सके।)

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