Answers from Sakar Murli 07-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 07-10-2020*

1. _____ पर पूरा-पूरा अटेन्शन दो तो फर्स्ट 1️⃣ डिवीजन में नम्बर आ जायेगा।
° _अभ्यास_

2. स्व और सर्व प्रति *सदा विघ्न विनाशक* बनने लिए क्या करना है? (5)
° क्वेश्चन मार्क ❓को विदाई देना और *फुल स्टॉप द्वारा सर्व शक्तियों का फुल स्टॉक* करना।
° सदा विघ्न प्रूफ *चमकीली फरिश्ता ड्रेस पहनकर रखना*, मिट्टी की ड्रेस नहीं पहनना।
° साथ-साथ *सर्व गुणों के गहनों से सजे* रहना।
° सदा *अष्ट शक्ति शस्त्रधारी* सम्पन्न मूर्ति बनकर रहना और *कमल पुष्प के आसन* पर अपने श्रेष्ठ जीवन के पांव रखना।

3. बाप ही *ऊंच ते ऊंच समझदार ते समझदार, ज्ञान सागर* पतित-पावन है। कई बार हंसी में कहते की समझाया उनको जाता है जो बेसमझ होते हैं। तो हम किन-किन बातों से बेसमझ थे? (3)
° मैं आत्मा अविनाशी हूँ, शरीर विनाशी है। फिर भी *आत्म-अभिमान छोड़ देह-अभिमान में फँस पड़े* । तो बेसमझ ठहरे ना। (बाप कहते हैं सब बच्चे बेसमझ हो पड़े हैं, देह-अभिमान में आकर। फिर तुम बाप द्वारा देही-अभिमानी बनते हो तो बिल्कुल समझदार बन जाते हो।)
° फिर भी पुरूषार्थ बहुत करना है क्योंकि बच्चों में दैवीगुण भी चाहिए। बच्चे जानते हैं हम सर्वगुण सम्पन्न, 16 कला सम्पूर्ण…… थे। फिर इस समय *निर्गुण बन पड़े हैं। कोई भी गुण नहीं रहा* है। (हम पूज्य थे तो समझदार थे फिर हम ही पुजारी बन बेसमझ बने हैं। आदि सनातन देवी-देवता धर्म प्राय: लोप हो गया है। इनका दुनिया में किसको पता नहीं है। यह लक्ष्मी-नारायण कितने समझदार थे, राज्य करते थे। तत् त्वम्।
° तुम बच्चों में भी नम्बरवार पुरूषार्थ अनुसार इस *खेल को समझते* हैं। (समझते-समझते भी कितने वर्ष हो गये हैं। फिर भी जो नये हैं वह अच्छे समझदार बनते जाते हैं। औरों को भी बनाने का पुरूषार्थ करते हैं।)

4. अब *पावन* बनना है, तो इसके लिए बाप कौन-सी *दवाई* देते हैं?
° कहते हैं – *योग से तुम भविष्य 21 जन्म निरोगी* बन जायेंगे। तुम्हारे सब रोग, दु:ख खत्म हो जायेंगे। तुम मुक्तिधाम में चले जायेंगे। (अविनाशी सर्जन के पास *एक ही दवाई* है। एक ही इन्जेक्शन आत्मा को आए लगाते हैं।)
° बाप तो *सीधी बात* बताते हैं – बच्चे, तुम मुझे याद करो तो तुम पावन बन जायेंगे। तुम्हारे सब दु:ख दूर हो जायेंगे।(मुख्य बात है याद की। सभी कहते हैं याद में रहना बड़ा मुश्किल है। हम जितना चाहते हैं, याद में रह नहीं सकते हैं। कोई *सच्चाई से अगर चार्ट लिखे* तो बहुत फायदा हो सकता है।)

5. बाप को कहते हैं आकर पतित से *पावन बनाओ*, क्यों?
° क्योंकि *पतितपने में दु:ख* है। (शान्तिधाम को पावन दुनिया नहीं कहेंगे। स्वर्ग को ही पावन दुनिया कहेंगे।)

6. सच्ची-सच्ची शान्ति तो वहाँ है जहाँ शरीर नहीं, उसको कहा जाता है शान्तिधाम। इसलिए बहुत कहते हैं शान्तिधाम में रहें, परन्तु………… क्या? *_(एक लॉ (नियम) है)_*
° यह *अविनाशी नाटक* हैं, इसमें हर एक पार्टधारी को पार्ट बजाने अपने *समय पर आना ही है*। (कोई कहे हम सदा शान्तिधाम में ही बैठ जाएं – तो यह लॉ नहीं है। उसे तो पार्टधारी ही नहीं कहेंगे। यह बेहद की बातें बेहद का बाप ही तुम्हें सुनाते हैं।)

7. सर्व के सद्गति दाता पतित-पावन हैं। सर्व को पावन बनाने वाले ____ नहीं हो सकते। ____ आदि सब तत्व हैं, वह कैसे सद्गति करेंगे। ____ ही पार्ट बजाती है।
° _तत्व_, _पानी_, _आत्मा_

8. बाप ने कितना समझाया है – कोई ऐसी युक्ति रचो जो मनुष्य समझें – पूज्य हैं नई दुनिया में, ____ हैं ____ दुनिया में। पावन को पूज्य, ____ को पुजारी कहा जाता है। वहाँ हैं श्रेष्ठ। गाते भी हैं सम्पूर्ण श्रेष्ठाचारी। अभी तुम बच्चों को ऐसा बनना है। तुम जानते हो हम आत्मा शरीर सहित पावन थी। अभी वही आत्मा शरीर सहित ____ बनी है। 84 जन्मों का हिसाब है ना।
° _पुजारी_, _पुरानी_, _पतित_, _पतित_

9. बाप बच्चों को यह ज्ञान देते हैं कि मनमनाभव। तुम ____ सहित कहते हो, तुम्हें बाप हर बात यथार्थ रीति ____ सहित समझाते हैं। बाप कहते हैं मेरा काम ही है पतित से _____ बनाना। मुझे तो बुलाते ही इसलिए हो।
° _अर्थ_, _अर्थ_, _पावन_

10. परमात्मा किन चीजों का *दाता* है? (3)
° सर्व का *सद्गति* दाता, *मुक्ति-जीवनमुक्ति* का दाता, एक ही ज्ञान सागर बाप है इसलिए उनको *ज्ञान दाता* कहा जाता है। (भगवान ने ज्ञान दिया था परन्तु कब दिया, किसने दिया, यह किसको पता नहीं है।)

11. तुम जानते हो – अभी यह दुनिया ____ का जंगल बन गई है। यह लक्ष्मी-नारायण तो _____ हैं ना। उन्हों के आगे कांटे जाकर कहते हैं आप सर्वगुण सम्पन्न…… हम पापी कपटी हैं। सबसे बड़ा कांटा है – _____का। बाप कहते हैं इस पर जीत पहन ___ -जीत बनो।
° _कांटों_, _फूल_, _काम विकार_, _जगत_

12. मनुष्य कहते हैं भगवान को कोई न कोई रूप में आना है, ____ -रथ पर विराजमान हो आना है। भगवान को आना ही है पुरानी दुनिया को ____ बनाने। नई दुनिया को सतोप्रधान, पुरानी को _______ कहा जाता है। जबकि अभी पुरानी दुनिया है तो जरूर ____ को आना ही पड़े। बाप को ही रचयिता कहा जाता है। तुम बच्चों को कितना सहज समझाते हैं। कितनी ____ होनी चाहिए।
° _भागी_, _नया_, _तमोप्रधान_, _बाप_, _खुशी_

13. सिर्फ शिवजयन्ती नहीं है परन्तु ____ शिव जयन्ती है। जरूर जब शिव की जयन्ती होगी तो ____ की भी जयन्ती होगी। लौकिक, पारलौकिक और यह है ____ बाप। यह है प्रजा- _____ ब्रह्मा।
° _त्रिमूर्ति_, _ब्रह्मा_, _अलौकिक_, _पिता_

14. *शिवरात्रि* का अर्थ भी नहीं जानते। अभी तुम जानते हो (कलियुग रात्री को सतयुग दिन बनाते), बाप आते ही हैं – सबकी ज्योत जगाने। तो हमें *कैसे मनाना* है?
° तुम यह *बत्तियां आदि जगायेंगे* तो समझेंगे इनका कोई बड़ा दिन है। (अब तुम जगाते हो अर्थ सहित।)

15. जब इस मनुष्य सृष्टि झाड़ का बीज रूप परमात्मा है, तो उस परमात्मा द्वारा जो नॉलेज प्राप्त हो रही है वो सब मनुष्यों के लिये जरूरी है। सभी धर्म वालों को यह नॉलेज लेने का अधिकार है। भल हरेक धर्म की _____ अपनी-अपनी है, हरेक का ____ अपना-अपना है, हरेक की ____ अपनी-अपनी है, हरेक का ____ अपना-अपना है लेकिन यह नॉलेज सबके लिये हैं।
° _नॉलेज_, _शास्त्र_, _मत_, _संस्कार_

16. भल वो इस ज्ञान को न भी उठा सके, हमारे घराने में भी न आवे परन्तु सबका ____ होने कारण उनसे ____ लगाने से फिर भी ____ अवश्य बनेंगे। इस कारण अपने ही सेक्शन में ____ अवश्य पायेंगे। बहुत मनुष्य ऐसे कहते हैं हमें भी मुक्ति चाहिए, मगर सजाओं से छूट मुक्त होने की ____ भी इस योग द्वारा मिल सकती है।
° _पिता_, _योग_, _पवित्र_, _पद_, _शक्ति_

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