Answers from Sakar Murli 08-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 08-10-2020*

1. *बीती को बिन्दी* क्यों लगाना है? _(स्लोगन)_
° नहीं तो एक बार की हुई गलती को बार-बार सोचना अर्थात् *दाग पर दाग* लगाना है।

2. एकान्तवासी बनने से एकाग्रता आती, *एकाग्रता 🎯 अर्थात् एक ही श्रेष्ठ संकल्प में स्थित रहना*। जिस एक बीज रूपी संकल्प में सारा वृक्ष रूपी विस्तार समाया हुआ है। तो इस *एकाग्रता से क्या प्राप्तियां* होती? (4)
° जहाँ एकाग्रता है वहाँ स्वत: *एकरस स्थिति* है। एकाग्रता से संकल्प, बोल और कर्म का व्यर्थ पन समाप्त हो जाता है और *समर्थ पन* आ जाता है।
° एकाग्रता को बढ़ाओ तो सर्व प्रकार की *हलचल समाप्त* हो जायेगी। सब संकल्प, बोल और कर्म सहज *सिद्व* हो जायेंगे।

3. मीठे बच्चे – डायरेक्ट बेहद का बाबा आये हैं तुम्हें बहुत ____ से पढ़ाने, तुम भी _____ से पढ़ो – नशा रहे हमको पढ़ाने वाला स्वयं भगवान है। सच्चा बाप सच्ची सेवा सिखलाते हैं, तुम विश्व का भी कल्याण करते हो। तो कितना _____ से करना चाहिए। बाबा कितनी ____ से सर्व की सद्गति करते हैं।
° _रुचि_, _रुचि_, _रुचि_, _रुचि_

4. ऐसे-ऐसे ख्यालात कई बच्चों को आते हैं। इस *आवागमन* से, दु:ख सुख से छूट जायें। यह सोचना ठीक है। _(सही / गलत)_
° नहीं (बाप कहते हैं यह कभी हो नहीं सकता। मोक्ष पाने के लिए कोशिश करना ही वेस्ट हो जाता है। बाप ने समझाया है एक भी आत्मा पार्ट से छूट नहीं सकती। *आत्मा में अविनाशी पार्ट भरा है। वह है ही अनादि अविनाशी, बिल्कुल एक्यूरेट* एक्टर्स हैं। एक भी कम जास्ती नहीं हो सकते। तुम बच्चों को सारी नॉलेज है।)

5. बाबा हर एक बात बार-बार समझाते रहते हैं क्योंकि ____ – _____ बच्चे आते रहते हैं। उनको आगे की _____ कौन पढ़ाये। तो बाप नये-नये को देख फिर _____ प्वाइंट्स ही रिपीट करते हैं।
° _नये_, _नये_, _पढ़ाई_, _पुरानी_

6. इस समय ही बाप आकर _____ की बातें सुनाते हैं। सतयुग में तो है ही _____ । यह इस समय तुमको ही समझाया जाता है। गीता में भी शुरू में फिर पिछाड़ी में यह बात आती है – ______ । पढ़ाया जाता है स्टेट्स पाने के लिए। तुम _____ बनने के लिए अब पुरूषार्थ करते हो।
° _ज्ञान_, _प्रालब्ध_, _मनमनाभव_, _राजा_

7. बड़े-बड़े तीर्थ बनाते हैं। वास्तव में *सबका तीर्थ यह भारत* ही है, कैसे?
° यहां बेहद का *बाप आते* हैं। बाप ने भारत में ही आकर *सर्व की सद्गति* की है। (बाप कहते हैं मुझे लिबरेटर, गाइड कहते हो ना। हम तुमको इस पुरानी दुनिया, दु:ख की दुनिया से लिबरेट कर शान्तिधाम, सुखधाम में ले जाते हैं। बच्चे जानते हैं बाबा हमें शान्तिधाम, सुखधाम ले जायेंगे। बाकी सब शान्तिधाम जायेंगे। दु:ख से बाप आकर लिबरेट करते हैं।)

8. यह बाप चला जायेगा तो इनका क्रियाकर्म, सेरीमनी आदि कुछ भी नहीं करना होता। क्योंकि उनको ____ ही नहीं।
° _शरीर_

9. ज्ञान कोई वहाँ सतयुग में साथ नहीं चलता। वहाँ बाप को *याद करने की दरकार ही नहीं* रहती। क्यों?
° जीवनमुक्ति में हैं। वहाँ याद करना होता है क्या? *दु:ख* की *फरियाद* वहाँ होती ही *नहीं*!

10. इस समय तुम बाप के खिदमतगार बच्चे बने हो। भारत की खास सच्ची सेवा करते हो, परन्तु गुप्त। तुम से बहुत पूछते, तुम *ब्रह्माकुमार-कुमारियों का उद्देश्य* वा शुद्ध भावना कौनसी है?
° तुम्हारा उद्देश्य है – कल्प 5 हज़ार वर्ष पहले की तरह *फिर से श्रीमत पर विश्व में सुख और शान्ति का राज्य स्थापन करना* । (तुम्हारी शुद्ध भावना है कि श्रीमत पर हम सारे विश्व की सद्गति करेंगे। तुम नशे से कहते हो हम सबको सद्गति देने वाले हैं। तुम्हें बाप से पीस प्राइज़ मिलती है। नर्कवासी से स्वर्गवासी बनना ही प्राइज़ लेना है।)

11. एकदम तीखे में तीखा नर्क है फिर बाप आकर तीखा _____ बनाते हैं। इस समय है 100 प्रतिशत _____ , फिर 100 प्रतिशत सुख-शान्ति होगी। आत्मा जाकर अपने ___ विश्राम पायेगी। समझाने में बड़ा सहज है। बाप कहते हैं मैं आता ही तब हूँ जब नई दुनिया की _____ कर पुरानी का _____ करना होता है। इतना कार्य सिर्फ एक तो नहीं करेंगे। _____ बहुत चाहिए।
° _स्वर्ग_, _दु:ख_, _घर_, _स्थापना_, _विनाश_, _खिदमतगार_

12. अभी तुम बच्चे बाबा की _____ से राज्य स्थापन करते हो। ____ -गुण धारण करते हैं इसलिए तुम्हारा ही गायन पूजन है। अभी तुम पुजारी हो फिर पूज्य बनते हो। बाप तो है ही निराकार, वह सदैव ____ है।कहते हैं – अब _____ याद करो। दूसरे कोई ______ को याद नहीं करना है।
° _श्रीमत_, _दैवी_, _पूज्य_, _मामेकम्_, _देहधारी_

13. *अब जज करो*, भक्तिमार्ग में राइट सुना है या हम राइट बताते हैं। बाबा ने यह आज किस बात के लिए कहा?
° बाप ने तुमको *हम सो का अर्थ* भी समझाया है। वह तो कह देते शिवोहम्, आत्मा सो परमात्मा। अब बाप ने करेक्ट कर बताया है। (हम सो का अर्थ बहुत लम्बा-चौड़ा है। हम सो ब्राह्मण, देवता, क्षत्रिय। हम आत्मा चक्र में ऐसे आती हैं। विराट रूप का चित्र भी है।)

14. *विराट रूप* का चित्र भी है, परन्तु उसमें कौन-सी भूल है?
° *चोटी ब्राह्मण और बाप को दिखाया नहीं* है। (देवतायें कहाँ से आये? पैदा कहाँ से हुए? कलियुग में तो है शूद्र वर्ण। सतयुग में फट से देवता वर्ण कैसे हुआ? बीच में ब्राह्मण चाहिए। कुछ भी समझते नहीं।)

15. संन्यासी कहते हैं हम ____ योगी, तत्व योगी हैं। ब्रह्म तो ____ है, जहाँ आत्मायें रहती हैं। कितनी भारी भूल कर दी है। बाप आकर सब ___ दूर कर देते हैं।
° _ब्रह्म_, _तत्व_, _भ्रम_

16. भक्ति मार्ग में कहते भी हैं हे प्रभू तेरी गति मत न्यारी है। ____ तो कोई कर न सके। _____ तो अनेकानेक की मिलती हैं। यहाँ की मत कितनी _____ कर देती है। सारे विश्व को _____ कर देती है।
° _गति_, _मतें_, _कमाल_, _चेंज_

17. *दिव्य दृष्टि की चाबी* हमको दे दो तो हम कोई को साक्षात्कार करा दें। शिवबाबा का उत्तर?
° नहीं, *यह चाबी किसको मिल नहीं सकती*। (उनके एवज में तुमको फिर विश्व की बादशाही देता हूँ। मैं नहीं लेता हूँ। मेरा ही पार्ट है साक्षात्कार कराने का। साक्षात्कार होने से कितना खुश हो जाते हैं।)

18. *साक्षात्कार* होने से कितना खुश हो जाते हैं। मिलता कुछ भी नहीं। _(सही / गलत)_
° *सही* (ऐसे नहीं कि साक्षात्कार से कोई *निरोगी* बन जाते हैं या *धन* मिल जाता है। नहीं, मीरा को साक्षात्कार हुआ परन्तु *मुक्ति* को थोड़ेही पाया। मनुष्य समझते हैं वह रहती ही वैकुण्ठ में थी। परन्तु *वैकुण्ठ* कृष्णपुरी है कहाँ। यह सब हैं साक्षात्कार।)

19. इनको भी पहले-पहले ____ का साक्षात्कार हुआ तो बहुत खुश हो गया। वह भी जब देखा कि मैं महाराजा बनता हूँ। _____ भी देखा फिर राजाई का भी देखा तब ______ बैठा ओहो! मैं तो विश्व का मालिक बनता हूँ। बाबा की _____ हो गई। बस बाबा यह सब आप ले लो, हमको तो विश्व की बादशाही चाहिए। तुम भी यह _____ करने आये हो ना।
° _विष्णु_, _विनाश_, _निश्चय_, _प्रवेशता_, _सौदा_

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