*Om Shanti*
*Answers from Sakar Murli 09-10-2020*
1. _____ शक्ति द्वारा व्यर्थ संकल्पों के बहाव 🌊 का फोर्स समाप्त करो।
° _परिवर्तन_
2. *परिस्थितियों पर विजय* प्राप्त करने का साधन क्या है? कैसे?
° *स्व-स्थिति।* (यह देह भी पर है, स्व नहीं।)
° स्व स्थिति व स्वधर्म *सदा सुख का अनुभव कराता* है और प्रकृति-धर्म अर्थात् पर धर्म या देह की स्मृति किसी न किसी प्रकार के दु:ख का अनुभव कराती है। (तो जो सदा स्व स्थिति में रहता है वह *सदा सुख का अनुभव* करता है, उसके पास दु:ख की लहर आ नहीं सकती।)
° वह *संगमयुगी विजयी रत्न* बन जाते हैं।
3. ज्ञान से तुम बच्चे सालवेन्ट बनते हो, इसलिए देवताओं को _____ -पति कहते हैं। देवतायें बहुत ____ -वान बनते हैं। वहाँ तुम्हारा ____ भी बहुत समय चलता है। तुम्हारे पास बहुत ____ रहता है। तुम भारत में ही रहते थे। तुम्हारा ____ था, कल की बात है।
° _पद्म_, _धन_, _सुख_, _धन_, _राज्य_
4. ऊंच ते ऊंच की महिमा तो बहुत भारी है। *सर्वशक्तिमान्* है तो क्या नहीं कर सकते, सब कुछ उसके हाथ में है। _(सही / गलत)_
° नहीं (बाप कहते हैं ड्रामा अनुसार सब कुछ होता है, मैं कुछ भी करता नहीं हूँ। सर्वशक्तिमान इसलिए है क्योंकि *उनके सिखाए हुए याद की शक्ति द्वारा हम पवित्र-सतोप्रधान सर्वशक्तिमान् बन विश्व पर राज्य* करेंगे। कोई की ताकत नहीं जो छीन सके।)
5. कहते भी हैं यह नाटक है, हम पार्ट बजाने आये हैं। परन्तु फिर भी एक भी मनुष्य को *ड्रामा का ज्ञान* नहीं कहेंगे। क्यों?
° अगर समझते हो कि नाटक है तो *शुरू से अन्त तक* वह याद आना चाहिए। नहीं तो नाटक कहना ही रांग हो जाता है। (उस नाटक के *आदि-मध्य-अन्त* को भी जानना चाहिए ना। हम ऊपर से आते हैं तब तो वृद्धि होती रहती है। इतनी सब आत्मायें कहाँ से आई, यह कोई समझते नहीं कि यह *अनादि बना-बनाया अविनाशी ड्रामा* है। जो आदि से अन्त तक *रिपीट* होता रहता है। तुम *बाइसकोप* शुरू से अन्त तक देखो फिर दुबारा रिपीट करके अगर देखेंगे तो चक्र जरूर हूबहू रिपीट होगा। ज़रा भी फ़र्क नहीं होगा।)
6. ऐसे-ऐसे सवेरे बैठ विचार सागर ______ करना है। प्वाइंट्स निकलेंगी तो तुमको _____ होगी। ____ में घण्टा डेढ़ घण्टा बीत जाता है। जितनी प्रैक्टिस होती जायेगी उतनी ______ बढ़ती जायेगी। बहुत मज़ा आयेगा और फिर घूमते-फिरते भी _____ करना है। फुर्सत बहुत है।
° _मंथन_, _खुशी_, _खुशी_, _खुशी_, _याद_
7. *सवेरे-सवेरे उठकर बाबा (और स्वयं) से मीठी-मीठी बातें* करनी हैं। रोज़ खुशी की खुराक खाते हुए अतीन्द्रिय सुख का अनुभव करना है। तो कैसी-कैसी बातें-चिन्तन कर सकते? (9)
° *बाबा, आप कितने मीठे हो* । बाबा बस, अभी तो हम चलते हैं अपने सुखधाम में।
° बाबा आप *कितनी अच्छी युक्ति बताते हो*, श्रेष्ठाचारी राज्य स्थापन करने की। (फिर हम श्रेष्ठाचारी माताओं की गोद में जायेंगे। अनेक बार हम ही उस नई सृष्टि में गये हैं।)
° अभी *हमारे खुशी के दिन आते* हैं। (यह खुशी की खुराक है इसलिए गायन भी है अतीन्द्रिय सुख पूछना हो तो गोप-गोपियों से पूछो।)
° अब *हमको बेहद का बाप मिला* है। हमको फिर से स्वर्ग का मालिक श्रेष्ठाचारी बनाते हैं। (कल्प-कल्प हम अपना राज्य-भाग्य लेते हैं। हार खाते हैं फिर जीत पाते हैं। अभी बाप को याद करने से ही रावण पर जीत पानी है फिर हम पावन बन जायेंगे।)
° अब फिर आधाकल्प हम कोई गुरू नहीं करेंगे। *शान्तिधाम, सुखधाम जायेंगे*। (बाप कहते हैं तुम सुखधाम के राही हो। अब दु:खधाम से सुखधाम में जाना है।)
° *वाह हमारा बाबा* , कैसे हमको पढ़ा रहे हैं।
° मनुष्यों को *भगवान का परिचय कैसे दें।* (सृष्टि तमोप्रधान बनती जाती है। यहाँ अब तुम सतोप्रधान बनने का पुरूषार्थ करते हो। गीता में भी अक्षर है मन-मनाभव। सिर्फ यह नहीं जानते कि भगवान कौन।)
° मीठी-मीठी बातें करनी चाहिए। *अभी हम श्रेष्ठाचारी दुनिया में जायेंगे* । (बूढ़ों के दिल में तो यह रहता है ना कि हम शरीर छोड़ गर्भ में जायेंगे। बाबा कितना नशा चढ़ाते हैं। ऐसी-ऐसी बातें बैठ करो तो भी तुम्हारा जमा हो जाए। शिवबाबा हमको नर्कवासी से स्वर्गवासी बना रहे हैं।)
° पहले-पहले हम आते हैं, सारा *आलराउन्ड पार्ट हमने बजाया* है। अब बाबा कहते हैं इस छी-छी चोले को छोड़ दो। देह सहित सारी दुनिया को भूल जाओ। यह है *बेहद का संन्यास* ।
8. हम बाबा से *राजयोग* सीखते, इसका कौन-सा यादगार बना हुआ है?
° इस *देलवाड़ा मन्दिर* की तो अपरमअपार महिमा है। (अभी हम राजयोग सीखते हैं। उसका यादगार तो जरूर बनेगा ना। यह हूबहू हमारा यादगार है। बाबा, मम्मा और बच्चे बैठे हैं। नीचे योग सीख रहे हैं, ऊपर में स्वर्ग की राजाई है। झाड़ में भी कितना क्लीयर है।)
9. अभी तुमको *ज्ञान का तीसरा नेत्र* मिलता है। बाप तीसरा नेत्र देने की कथा सुनाते हैं। इसका यादगार कौन-सी *3 कथाएं* भक्ति मार्ग में गाई हुई है?
° इसको ही फिर *तीजरी* की कथा कह दिया है। *अमरकथा* , *सत्य नारायण* की कथा भी मशहूर है। (सुनाने वाला एक ही बाप है जो फिर भक्ति मार्ग में चलती है।)
10. सारी दुनिया की ____ होने में टाइम लगता है ना। यह बेहद की दुनिया है। _____ है ही अविनाशी खण्ड। यह कभी प्राय: लोप होता नहीं। एक ही खण्ड रहता है – _____ -कल्प। फिर और खण्ड इमर्ज होंगे नम्बरवार। तुम बच्चों को कितना ____ मिलता है। बोलो – वर्ल्ड की हिस्ट्री-जॉग्राफी कैसे ____ लगाती है – आकर समझो।
° _सफाई_, _भारत_, _आधा_, _ज्ञान_, _चक्र_
11. प्राचीन ऋषि मुनियों का कितना मान है, परन्तु वह भी सृष्टि के _______ को नहीं जानते। वह हठयोगी हैं। हाँ बाकी उनमें ______ की ताकत है जिससे भारत को थमाते हैं। नहीं तो भारत पता नहीं क्या हो जाता। मकान को _____ आदि लगाई जाती है ना – तो शोभा होती है। कुछ सुधार कर अपना नाम बाला किया है। अब वह भी सब ______ बन गये हैं।
° _आदि-मध्य-अन्त_, _पवित्रता_, _पोची_, _तमोप्रधान_
12. *पहले-पहले* क्या समझाना है?
° *बाप की पहचान* देनी है। (बाप का नाम, रूप, देश, काल जानते हो? ऊंच ते ऊंच बाप का पार्ट तो मशहूर होता है ना।)
13. अभी तुम जानते हो – वह बाप ही हमको ____ दे रहे हैं। तुम फिर से अपनी ______ स्थापन कर रहे हो। तुम बच्चे मेरे मददगार हो। तुम _____ बनते हो। तुम्हारे लिए पवित्र _____ जरूर स्थापन होनी है।
° _डायरेक्शन_, _राजधानी_, _पवित्र_, _दुनिया_
14. और हम *लिख* 📝 क्या सकते?
° *पुरानी दुनिया बदल रही* है। फिर यह सूर्यवंशी-चन्द्रवंशी राज्य होगा। (फिर रावण राज्य होगा।)
15. चित्रों पर समझाना बहुत ____ लगता है, इनमें तिथि-तारीख सब लिखा हुआ है। भारत का प्राचीन ____ -योग माना याद। याद से _____ विनाश होते हैं और ____ से स्टेट्स मिलती है। ____ -गुण धारण करने हैं।
° _मीठा_, _राज_, _विकर्म_, पढ़ाई, _दैवी_
16. धन्धे में मनुष्य को नींद नहीं आती। सुस्त लोग नींद करते हैं। तुम जितना हो सके _____ को ही याद करते रहो। तुमको बुद्धि में रहता है शिवबाबा के लिए हम _____ बनाते हैं। शिवबाबा के लिए हम यह करते हैं। भोजन भी _____ से बनाना है। बाबा खुद भी _____ करते हैं। अच्छा!
° _शिवबाबा_, _भोजन_, _शुद्धि_, _याद_
17. इस *ईश्वरीय ज्ञान* की कौन-सी महिमा *मम्मा* ने सुनाई? (2)
° अपना जो ईश्वरीय ज्ञान है, वो बड़ा ही *सहज सरल और मीठा* है (क्योंकि स्वयं परमात्मा पढ़ा रहा है), इससे जन्म-जन्मान्तर के लिये *कमाई* जमा होती है। यह ज्ञान इतना सहज है जो *कोई भी* महात्मा, अहिल्या, धर्मात्मा, बालक से लेकर वृद्ध प्राप्त कर सकता। (विद्वान बनना, भाषा सीखना, हठयोग, हठक्रिया, जप तप की कोई जरुरत नहीं है।)
° यह तो नेचुरल आत्मा को *अपने परमपिता परमात्मा के साथ योग* लगाना है। (भल कोई इस ज्ञान को न भी धारण कर सके तो भी सिर्फ योग से भी बहुत फायदा होगा। इससे एक तो *पवित्र* बनते हैं, दूसरा फिर *कर्मबन्धन भस्मीभूत* होते हैं और *कर्मातीत* बनते हैं, इतनी ताकत है इस सर्वशक्तिवान परमात्मा की याद में। भल वो अपने साकार ब्रह्मा तन द्वारा हमें योग सिखला रहे हैं परन्तु याद फिर भी डायरेक्ट उस ज्योति स्वरूप शिव परमात्मा को करना है, उस याद से ही कर्मबन्धन की मैल उतरेगी।)
