Answers from Sakar Murli 10-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 10-10-2020*

1. संगमयुग का एक-एक सेकण्ड 🕒 वर्षो के समान है इसलिए ______ में समय नहीं गंवाओ।
° _अलबेलेपन_

2. कौन-से सेवाधारी बच्चों को *आधारमूर्त बनने का वरदान* प्राप्त हो जाता? _(हमारे *स्वप्न* कैसे होने चाहिए?)_ (3)
° विश्व कल्याणकारी बच्चे *स्वप्न में भी फ्री नहीं* रह सकते। (जो दिन रात सेवा में बिजी रहते हैं उन्हें *स्वप्न में भी कई नई-नई बातें*, सेवा के प्लैन व तरीके दिखाई देते हैं।)
° वे सेवा में बिजी होने के कारण अपने *पुरूषार्थ के व्यर्थ* से और *औरों के भी व्यर्थ से बचे* रहते हैं। (उनके सामने बेहद विश्व की आत्मायें सदा इमर्ज रहती हैं। उन्हें जरा भी अलबेलापन आ नहीं सकता।)

3. *नई* देहली कब कहेंगे?
° पुरानी दुनिया सो फिर नई होगी। *देहली तो जब परिस्तान होगी तब नई देहली कहेंगे।* (नई दुनिया में नई देहली थी, जमुना घाट पर। उन पर लक्ष्मी-नारायण के महल थे। परिस्तान था। अभी तो कब्रिस्तान होना है, सब दफन हो जाने हैं इसलिए बाप कहते हैं – मुझ ऊंच ते ऊंच बाप को याद करो तो पावन बनेंगे।)

4. बाप कहते हैं मैं तुमको पढ़ाता हूँ, तुम सिर्फ _____ याद करो। देह सहित सभी सम्बन्धों से बुद्धि का ____ तोड़ो। अपनी _____ भी छोड़ी तो बाकी रही आत्मा। अपने को आत्मा समझ मुझ बाप को याद करो। जब तक मेरी ____ पर नहीं चलेंगे तो कट कैसे उतरेगी। बाबा समझाते हैं बच्चे तुमने ही _____– 84 का चक्र लगाया है तो तुमको ही आकर समझाना पड़े।
° _मामेकम्_, _योग_, _देह_, _श्रीमत_, _आलराउन्ड_

5. *ओम् शान्ति* कहने से ही क्या याद आना चाहिए? _(आज की मुरली अनुसार)_
° *बाप* जरूर याद आना चाहिए। (बाप का पहला-पहला कहना है मनमनाभव।जरूर आगे भी कहा है तब तो अभी भी कहते हैं ना। )

6. बाबा ने कहा *चींटी मार्ग की सर्विस* करते हो, ऐसा क्यों? सेवा में सबसे *मुख्य धारणा* कौन-सी है? _(जिससे तीर लगे)_
° बाबा का नाम नहीं लेते हो इसलिए तुम्हारा कोई सुनते नहीं हैं। *बाबा की याद न होने से* तुम्हारे में जौहर नहीं भरता। जिस योगबल से तुम विश्व के मालिक बनते हो। (सारा दिन बाबा को तो बिल्कुल याद ही नहीं करते। झरमुई झगमुई में लगे रहते हैं और लिखते हैं कि हमने ऐसा भाषण किया, हमने यह समझाया।)
° *”बाबा कहते हैं, बाबा कहते हैं”*, यह तो धुन 🎶 लगा देनी चाहिए। (बाबा ऐसे कहते हैं, यह कहने से तुम छूट जायेंगे। घड़ी-घड़ी बाबा का नाम लेकर समझाओ तो शिवबाबा याद रहेगा। बाबा का नाम लेंगे तब ही किसको तीर लगेगा। बाबा ऐसे कहते हैं, बाबा यह समझाते हैं, ऐसे-ऐसे तुम बोलो फिर देखो तुम्हारा कितना प्रभाव निकलता है। तुम्हारा एक ही भाषण ऐसा सुनें तो कमाल हो जाए।)

7. ______ शिवबाबा कहना है, सिर्फ शिव नहीं। ____ द्वारा स्थापना कौन कराते हैं? क्या ब्रह्मा क्रियेटर हैं? ऐसे-ऐसे ____ से बोलो तब काम कर सकते हो। नहीं तो देह-अभिमान में बैठ भाषण करते हैं।
° _त्रिमूर्ति_, _ब्रह्मा_, _नशे_

8. बाबा भारतवासी बच्चों से *विशेष कौन-से प्रश्न* पूछते हैं? (3) _(जो हम भी बाबा-बाबा कह दूसरों को सहज समझा सकते)_
° तुम भारतवासी बच्चे जो इतने साहूकार थे, सर्वगुण सम्पन्न 16 कला सम्पूर्ण देवता धर्म के विश्व के मालिकथे, तुम पवित्र थे, काम कटारी नहीं चलाते थे, बहुत धनवान थे। फिर तुमने इतना *देवाला* कैसे निकाला है – कारण का पता है? बच्चे, तुम *गुलाम* कैसे बन गये? इतना सब धन दौलत कहाँ गँवा दिया? ख्याल करो तुम पावन से *पतित* कैसे बन गये?

9. तो हम भारतवासी ऐसे *पतित*-गुलाम क्यों बने? _(आज की मुरली अनुसार)_
° *मेरे से योग न लगाने से* तुम और ही पतित बन पड़ते हो। मुझे याद करो तो तुम्हारे विकर्म विनाश होंगे। (तुम्हारा *मेरे से योग* टूटने से यह हाल हुआ है। अब फिर मेरे से योग लगाओ तो विकर्म विनाश होंगे। मुक्तिधाम में पवित्र आत्मायें रहती हैं। अभी तो सारी दुनिया पतित है। पावन दुनिया का तुमको मालूम ही नहीं है।)

10. *भाषण* में और क्या-क्या समझा सकते? (6)
° शिवबाबा कहते हैं, वही ऊंच ते ऊंच *पतित-पावन* है। जरूर पावन बनाने के लिए यहाँ आकर समझाते हैं। (शिवबाबा कहते मैं आता भी हूँ भारत में और *राजयोग सिखलाने* आता हूँ, कहता हूँ *मामेकम् याद* करो, मुझ ऊंच बाप को याद करो क्योंकि वह बाप देने *वाला* दाता है। बरोबर भारत में तुम विश्व के मालिक थे ना।)
° शिवबाबा समझाते हैं भगवान तो *एक* ही है। जो *दु:ख हर्ता सुख कर्ता* है, नई दुनिया स्थापन करने वाला है। (इसी *भारत पर स्वर्ग* था। हीरे-जवाहरातों के महल थे, एक ही राज्य था। सब क्षीरखण्ड थे। जैसे बाप की महिमा अपरमअपार है, वैसे भारत की महिमा भी अपरमअपार है। भारत की महिमा सुनकर खुश होंगे।)
° बाबा कहते हैं – हमने तो स्वर्ग, शिवालय स्थापन किया, स्वर्ग में *इन लक्ष्मी-नारायण का राज्य था* ना। तुम यह भी भूल गये हो। (तुमको यह भी पता नहीं है कि राधे-कृष्ण ही स्वयंवर के बाद लक्ष्मी-नारायण बनते हैं। कृष्ण जो विश्व का मालिक था, उनको कलंक बैठ लगाते हो, मेरे को भी कलंक लगाते हो। मैं *तुम्हारा सद्गति दाता*, तुम मुझे कुत्ते बिल्ली, कण-कण में कह देते हो। बाप कहते हैं सर्व का सद्गति दाता, पतित-पावन मैं हूँ। तुम फिर पतित-पावनी गंगा कह देते हो।)
° बोलो, *हम बाप की महिमा करते हैं*, बाप खुद कहते हैं मैं कैसे साधारण पतित तन में बहुत जन्मों के अन्त में आता हूँ। (यह अपने जन्मों को नहीं जानते हैं। भागीरथ यह है, इनके भी वानप्रस्थ अवस्था में मैं आता हूँ।)
° हर बात में बोलो बाबा कहते हैं। यह हठयोगी तुमको मुक्ति थोड़ेही दे सकते हैं। जबकि *सर्व का सद्गति दाता* एक है फिर और किसी को गुरू किसलिए करते हो? (क्या तुमको संन्यासी बनना है या हठयोग सीखकर ब्रह्म में लीन होना है? लीन तो कोई हो नहीं सकता।)
° क्या हालत हो गई, इसलिये फिर मुझे (बाबा को) आना पड़ता है। तुम कितने धर्म कर्म भ्रष्ट हो गये हो। बताओ *हिन्दू धर्म किसने कब स्थापन किया?* ऐसे अच्छी ललकार से भाषण करो।

11. जिनके पास *मकान 🏢, विमान* ✈️ 🚁 आदि हैं वह स्वर्ग में हैं। _(सही / गलत)_
° गलत (बाप कहते हैं भारत जब *शिवालय* था तो उसे *स्वर्ग* कहा जाता था।)

12. “अहम् ब्रह्मस्मि” माया के हम मालिक हैं। _(सही / गलत)_
° *गलत* (बाप कहते हैं तुम यह भी नहीं जानते कि माया किसको कहा जाता और सम्पत्ति किसको कहा जाता है! तुम धन को माया कह देते हो।)

13. बाप समझाते हैं यह अनेक धर्मों का _____ वृक्ष है। पहले-पहले है _____ धर्म। अब वह कहाँ गया? लाखों वर्ष कह देते हैं यह तो ____ हज़ार वर्ष की बात है। तुम _____ भी उन्हों के बनाते रहते हो।
° _कल्प_, _देवी-देवता_, _5_, _मन्दिर_

14. दिखाते हैं पाण्डवों और कौरवों की ____ लगी। पाण्डव पहाड़ों पर गल मरे फिर क्या हुआ? मैं कैसे हिंसा करुँगा। मैं तो तुमको अहिंसक _____ बनाता हूँ। काम कटारी न चलाना, उसको ही ______ कहते हैं। वह हैं ______ की वंशावली। अच्छा!
° _लड़ाई_, _वैष्णव_, _वैष्णव_, _विष्णु_

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *