*Om Shanti*
*Answers from Sakar Murli 13-10-2020*
1. निर्विघ्न राज्य अधिकारी 👑 बनने के लिए _____ सेवाधारी बनो।
° _निर्विघ्न_
2. एक बाप की मत पर चल सदा सन्तुष्ट रह ____ देवी बनना है। यहाँ कोई भी ____ नहीं रखनी है। बाप से सर्व प्राप्तियां कर ____ -पति बनना है।
° _सन्तोषी_, _आश_, _पद्म_
3. बाप कहते हैं सर्व का _____ दाता तो मैं ही हूँ। तुम बच्चों को ___ जन्म के लिए खुशी ही खुशी देते हैं। ऐसे बाप को ____ भी करना चाहिए। याद से ही तुम्हारे _____ भस्म होंगे और तुम ______ बन जायेंगे। यह समझने की बातें हैं। जितना औरों को जास्ती समझायेंगे उतना ____ पद पायेंगे।
° _सद्गति_, _21_, _याद_, _पाप_, _सतोप्रधान_, _ऊंच_
4. *फाइनल पेपर* 📄के प्रकृति और पांच विकार (पुराने संस्कारों) के विकराल लास्ट रूप में पास होने लिये क्या जरूरी है? (2)
° ऐसे समय पर *समेटने की शक्ति* द्वारा अभी-अभी साकारी, अभी-अभी आकारी और अभी-अभी निराकारी *स्थिति में स्थित होने का अभ्यास* चाहिए।
° *देखते हुए न देखो*, सुनते हुए न सुनो। जब ऐसी *फुलस्टॉप की स्टेज* हो तब प्रकृतिपति बन प्रकृति की हलचल को स्टॉप कर सकेंगे।
5. “मीठे बच्चे – बाबा आये हैं तुम्हें मुक्ति-जीवनमुक्ति की राह बताने, तुम _____ होकर रहो तो यह राह सहज देखने में आयेगी”
° _आत्म-अभिमानी_
6. सच्ची शान्ति (वा मुक्ति) कहा जाता है *शान्तिधाम* को। क्यों?
° क्योंकि आत्मा शरीर बिगर कुछ भी बोल नहीं सकती। *कर्मेन्द्रियों द्वारा ही आवाज़ होता* है। मुख न हो तो आवाज़ कहाँ से आयेगा।
7. यहां स्टेज पर आत्मा को *कर्मेन्द्रियां मिली हैं कर्म करने* लिए। तो इस सन्दर्भ में सतयुग और कलियुग के बीच मुख्य अन्तर क्या है?
° रावण राज्य में *विकर्म* (विकार, दु:ख) होते। यह विकर्म छी-छी कर्म हो जाते हैं।
° सतयुग में रावण 5 विकार ही नहीं तो कर्म *अकर्म* हो जाते हैं। उसको कहा जाता है – स्वर्ग।
8. कहते हैं बाबा *ऐसी जगह* ले चलो जहाँ दु:ख का नाम न हो। वह कहां कहेंगे?
° वह तो *भारत जब स्वर्ग था* तब दु:ख का नाम नहीं था। स्वर्ग से नर्क में आये हैं, अब फिर स्वर्ग में जाना है। यह खेल है।
9. *सच्चा-सच्चा सतसंग* यह है। कैसे?
° तुम यहाँ *सत बाप को याद करते* हो, वही ऊंच ते ऊंच भगवान परमपिता परमात्मा है। (बाबा हम सिर्फ आपको ही याद करेंगे, आपसे ही वर्सा लेंगे। बाप कहते हैं देह सहित देह के सर्व सम्बन्धों को भूल जाना है। एक बाप को याद करना है। आत्मा को यहाँ ही पवित्र बनना है। याद नहीं करेंगे तो फिर सज़ायें खानी पड़ेंगी। पद भी भ्रष्ट हो जायेगा इसलिए बाप कहते हैं याद की मेहनत करो। आत्माओं को समझाते हैं।)
10. हर एक चीज़ *पहले सतोप्रधान* फिर सतो-रजो-तमो में आती है। यहां बाबा ने किसका मिसाल दिया?
° *छोटे बच्चे* 👶 को सतोप्रधान कहेंगे। महात्मा से भी ऊंच, विकारों का पता नहीं, बिल्कुल इनोसेंट।
11. देवताओं की महिमा गाते हैं – सर्वगुण सम्पन्न….. *अहिंसा* परमोधरम। अर्थात् क्या?
° बाप ने हिंसा और अहिंसा का अर्थ समझाया है। किसको मारना इसको हिंसा कहा जाता है। सबसे बड़ी हिंसा है काम कटारी चलाना। *देवतायें हिंसक नहीं होते। काम कटारी नहीं चलाते*। बाप कहते हैं अब मैं आया हूँ तुमको मनुष्य से देवता बनाने।
12. यहाँ कोई भी *अपने को देवता* नहीं कह सकते। क्यों?
° *समझते हैं* हम नीच पापी विकारी हैं। फिर अपने को देवता कैसे कहेंगे।
13. एक बाप से ही *सुख-शान्ति का वर्सा* मिलता है। ऐसा क्यों?
° क्योंकि *सर्व के शान्ति का, सुख का दाता* तो एक ही बाप है। (तुम जानते हो शान्तिधाम, सुखधाम में ले जाने वाला एक ही बाप है।)
14. और कोई भी सतसंग आदि नहीं होगा जहाँ कहे – हे रूहानी _____ । यह है रूहानी _____ , जो रूहानी _____ से ही बच्चों को मिलता है। रूह अर्थात् निराकार। शिव भी निराकार है ना। तुम्हारी आत्मा भी _____ है, बहुत छोटी।
° _बच्चों_, _ज्ञान_, _बाप_, _बिन्दी_
15. बहुत भक्ति करते हैं तो फिर मैं ही उनको *साक्षात्कार* कराता हूँ। यह तो *बहुत अच्छी बात* है। _(सही / गलत)_
° इससे फायदा कुछ भी *नहीं* । सिर्फ खुश हो जाते हैं। पाप तो फिर भी करते हैं, *मिलता कुछ भी नहीं। पढ़ाई बिगर* कुछ बन थोड़ेही सकेंगे। (देवतायें सर्वगुण सम्पन्न हैं। तुम भी ऐसे बनो ना। बाकी तो वह है सब भक्ति मार्ग का साक्षात्कार। *सचमुच कृष्ण से झूलो, स्वर्ग में उनके साथ रहो। वह तो पढ़ाई पर है।* जितना श्रीमत पर चलेंगे उतना ऊंच पद पायेंगे। परमपिता परमात्मा की श्रीमत से कृष्ण की आत्मा ने यह पद पाया है।)
16. तुम हो ____ वंशावली, वह हैं कुख वंशावली। वह हथियाला बांधते हैं ____ चिता पर बिठाने का। अभी तुम सच्ची-सच्ची ब्राह्मणियां _____ चिता पर बिठाने हथियाला बांधते हो।
° _मुख_, _काम_, _ज्ञान_
17. सबसे गन्दी *बीमारी* कौन-सी है?
° *बाइसकोप* । अच्छे बच्चे भी बाइसकोप में जाने से खराब हो पड़ते हैं इसलिए तुम्हें बाइसकोप में जाना मना है।
18. अभी तुम बच्चों को समझाया है – मूलवतन सूक्ष्मवतन साकार-वतन। खेल सारा यहाँ चलता है। यह चक्र फिरता ही रहता है। *तुम ब्राह्मण बच्चों को ही ऐसे स्वदर्शन चक्रधारी* बनना है। देवताओं को नहीं। _(सही / गलत)_
° *सही* (परन्तु ब्राह्मणों को यह अलंकार नहीं देते हैं क्योंकि पुरूषार्थी हैं। आज अच्छे चल रहे हैं, कल गिर पड़ते हैं इसलिए देवताओं को दे देते हैं।)
19. संगम पर *कौन-सी ऐसी नॉलेज* मिली है, जिससे सतयुगी देवतायें मोहजीत कहलाये?
° संगम पर तुम्हें बाप ने *अमरकथा सुनाकर अमर आत्मा की नॉलेज* दी। ज्ञान मिला – यह अविनाशी बना-बनाया *ड्रामा* है, हर एक आत्मा अपना-अपना *पार्ट* बजाती है। (वह एक शरीर छोड़ दूसरा लेती है, इसमें *रोने की बात नहीं*। इसी नॉलेज से सतयुगी देवताओं को मोहजीत कहा जाता। वहाँ मृत्यु का नाम नहीं। खुशी से पुराना शरीर छोड़ नया लेते हैं।)
20. मनुष्यों ने अनेक प्रकार के व्रत बनाये हैं। परन्तु बाप ने कौन-सा *व्रत* सिखाया था?
° अभी तुमको व्रत रखना चाहिए – *सदैव पवित्र रहने का* क्योंकि पावन दुनिया में जाना है तो पतित नहीं बनना है।
