*Om Shanti*
*Answers from Sakar Murli 14-10-2020*
1. निर्मल स्वभाव _____ की निशानी है। निर्मल बनो तो _____ मिलेगी।
° _निर्मानता_, _सफलता_
2. *सम्पूर्णता की आंख* खोलना अर्थात् क्या?
° *सम्पूर्ण स्टेज तक पहुंचना* अर्थात् सम्पूर्णता की आंख खोलना!
3. जब आप जहान के ___ अपनी सम्पूर्णता की आंख खोलेंगे तब सेकण्ड में विश्व परिवर्तन होगा। फिर आप _____ मूर्त आत्मायें अपनी नज़र से भक्त आत्माओं को निहाल कर सकेंगी, जिनकी लम्बी क्यू है। इसलिए सम्पूर्णता की आंख खुली रहे। आंखों का मलना और संकल्पों का _____ व ______ खाना बन्द करो तब दर्शनीय _____ बन सकेंगे।
° _नूर_, _दर्शनीय_, _घुटका_, _झुटका_, _मूर्त_
4. बुद्धि को पवित्र बनाने के लिए याद की यात्रा में ____ रहना है। कर्म करते भी एक _____ याद रहे – तब विकर्माजीत बनेंगे। बाबा _____ पर जाते तो भी ख्याल रहता, हम याद में नहीं रहेंगे तो बाबा क्या कहेंगे। याद से आत्मा पवित्र होगी, अविनाशी ज्ञान _____ भी जमा होगा। फिर अगर अपवित्र बन जाते तो सारा ज्ञान बह जाता। ______ ही मुख्य है। बाप तो अच्छी-अच्छी बात ही समझाते हैं।
° _मस्त_, _माशूक_, _पिकनिक_, _धन_, _पवित्रता_
5. बाप तो है ही टीचरों का ______ , बापों का _____ । यह तो तुम बच्चे जानते हो हमारा बाबा बहुत _____ है। ऐसे बाप को तो बहुत _____ करना है। पढ़ना भी पूरा है। बाप को याद नहीं करेंगे तो ____ नष्ट नहीं होंगे। बाप सभी आत्माओं को साथ ले जायेंगे।
° _टीचर_, _बाप_, _प्यारा_, _याद_, _पाप_
6. 5 हज़ार वर्ष बाद एक ही बार संगम पर बाप आकर बच्चों को पढ़ाकर पावन बनाकर नई पावन खूबसूरत दुनिया बनाते (लक्ष्मी-नारायण का राज्य)। तो आत्म-अभिमानी जरूर बनना है। अपने को आत्मा समझो, *आत्मा सो परमात्मा*। _(सही / गलत)_
° नहीं, अपने को आत्मा समझ परमपिता *परमात्मा शिव को याद* करना है। (याद की यात्रा मुख्य है, जिससे ही तुम पतित से पावन बनते हो। पहले अपने को आत्मा समझेंगे तब पारलौकिक बाप को याद कर सकेंगे।)
7. सतयुग में *एक ही* लौकिक दैवी *बाप* कहेंगे। ऐसे क्यों? _(परलौकिक बाप?)_
° वहाँ पारलौकिक बाप को याद नहीं करते हैं क्योंकि *सुख* है। (भक्ति मार्ग में फिर दो बाप बन जाते हैं। लौकिक और पारलौकिक। दु:ख में सब पारलौकिक बाप को याद करते हैं। सतयुग में भक्ति होती नहीं। वहाँ तो है ही ज्ञान की प्रालब्ध, आधाकल्प सुख का वर्सा!)
8. ज्ञान मार्ग है ____ का मार्ग, जिससे तुम 21 जन्म समझदार बन जाते हो। तुम संगमयुगी हो शुद्ध ____ भोजन खाने वाले। देवतायें कभी _____ आदि थोड़ेही खाते हैं। इन देवताओं को कहा ही जाता है निर्विकारी। इस संगम पर ही तुम _____ देवी-देवता बनने की मेहनत करते हो। यह राजाई स्थापन हो रही है। बाप कहते हैं – मैं तुमको राजाओं का राजा बनाता हूँ तो ____ जरूर बनानी पड़े। अभी भी तुम गुल-गुल (फूल) बन अच्छे घर में ____ लेते रहेंगे।
° _समझ_, _पवित्र_, _प्याज़_, _पुरूषोत्तम_, _प्रजा_, _जन्म_
9. जब तक यहाँ न आयें तब तक कुछ भी समझ न सकें कि अभी ____ है वा कलियुग है। बाप कहते हैं ज्ञान सागर मैं ही हूँ, जो इस देवी-देवता धर्म के होंगे वह सब आकर फिर से अपना ____ लेंगे। अभी _____ लग रही है – तुम समझ जायेंगे। मीठे बच्चे – संगमयुग पर ही तुम्हें ______ बनने की मेहनत करनी पड़ती सतयुग अथवा कलियुग में यह मेहनत होती नहीं।
° _संगम_, _वर्सा_, _सैपलिंग_, _आत्म-अभिमानी_
10. सतयुग में कभी कोई ऐसे नहीं कहेंगे कि *हमको शान्ति चाहिए।* _(सही / गलत)_
° *सही* (बाप तुमको ऐसा साहूकार बना देते हैं जो देवताओं को भगवान से कोई चीज़ मांगने की दरकार नहीं रहती। यहाँ तो दुआ भी मांगते हैं ना।)
11. यह है बहुत छोटा युग इसलिए इनको _____ युग कहा जाता है। इनको कहा ही जाता है गीता का युग। तुम ____ -योग सीख रहे हो – जानते हो आदि सनातन देवी-देवता ____ का फाउन्डेशन लग रहा है। सूर्यवंशी-चन्द्रवंशी दोनों _____ स्थापन हो रही हैं। ब्राह्मण ____ स्थापन हो चुका है। ब्राह्मण ही फिर सूर्यवंशी-चन्द्रवंशी बनते हैं। जो अच्छी रीति मेहनत करेंगे वह सूर्यवंशी बनेंगे।
° _लीप_, _राज_, _धर्म_, _राजाई_, _कुल_
12. हमारा *बीजरूप* कौन है?
° परमात्मा *बाप* , क्योंकि बाप ही आकर स्वर्ग की स्थापना करते हैं ब्रह्मा द्वारा। (ब्रह्मा को प्रजापिता कहा जाता है। रचता नहीं कहेंगे। इन द्वारा बच्चे एडाप्ट किये जाते हैं। ब्रह्मा को भी तो क्रियेट करते हैं ना। बाप आकर प्रवेश कर यह रचते हैं। *शिवबाबा कहते हैं तुम मेरे बच्चे हो*।)
13. *श्रीकृष्ण का नाम* उनके माँ बाप से भी अधिक बाला है, क्यों? (3)
° क्योंकि श्रीकृष्ण से पहले जिनका भी जन्म होता है वो जन्म योगबल से नहीं होता। (कृष्ण के माँ बाप ने कोई *योगबल से जन्म* नहीं लिया है।)
° *पूरी कर्मातीत अवस्था* वाले राधे-कृष्ण ही हैं, वही सद्गति को पाते हैं। (जब सब पाप आत्मायें खत्म हो जाती हैं तब गुलगुल (पावन) नई दुनिया में श्रीकृष्ण का जन्म होता है, उसे ही वैकुण्ठ कहा जाता है।)
° संगम पर श्रीकृष्ण की आत्मा ने, *सबसे अधिक पुरुषार्थ* किया है इसलिए उनका नाम बाला है।
14. तुम कृष्ण को रिसीव करने वाले रहेंगे। भल तुम्हारा *छी-छी जन्म* होगा क्योंकि रावण राज्य है ना। _(सही / गलत)_
° *सही* , शुद्ध जन्म तो हो न सके। गुल-गुल (पवित्र) जन्म कृष्ण का ही पहले-पहले होता है। उसके बाद नई दुनिया बैकुण्ठ कहा जाता है। (कृष्ण बिल्कुल गुल-गुल नई दुनिया में आयेंगे।)
15. तुम किसको भी समझा सकते हो – हम यह बनने के लिए पढ़ रहे हैं। विश्व में इनका _____ अब स्थापन हो रहा है। हमारे लिए तो नई _____ चाहिए।
° _राज्य_, _दुनिया_
16. अभी तुमको *दैवी सम्प्रदाय* नहीं कहेंगे। _(सही / गलत)_
° *सही* (तुम हो ब्राह्मण सम्प्रदाय। देवता बनने वाले हो। दैवी सम्प्रदाय बन जायेंगे फिर तुम्हारी आत्मा और शरीर दोनों स्वच्छ होंगे। अभी तुम संगमयुगी पुरूषोत्तम बनने वाले हो।)
17. तुम्हारे में तो कितनी _____ रहती है। घर बैठे तुमको ____ मिल जाता है। _______ बाप से तुम इतनी ताकत लेते हो। तुम्हारे में भी पहले सुख की ताकत रहती है। फिर ____ हो जाती है।
° _ताकत_, _सुख_, _सर्वशक्तिमान्_, _गुम_
18. उन्हों _(साधु-सन्यासी)_ में भी पहले शान्ति की ताकत थी, *अब वह ताकत नहीं रही* है। बाबा ने यहां कौन-सा अच्छा तर्क सुनाया?
° *आगे तो सच कहते थे* कि रचता और रचना को हम नहीं जानते। अभी तो अपने को भगवान शिवोहम् कह बैठते हैं। (बाप समझाते हैं – इस समय सारा झाड़ तमोप्रधान है इसलिए साधुओं आदि का भी उद्धार करने मैं आता हूँ। यह दुनिया ही बदलनी है। सब आत्मायें वापिस चली जायेंगी।)
19. *एक भी नहीं* जिसको यह पता हो……. क्या? (2)
° *हमारी आत्मा में अविनाशी पार्ट भरा हुआ* है जो फिर से रिपीट करेंगे। (आत्मा इतनी छोटी है, इनमें अविनाशी पार्ट भरा है जो कभी विनाश नहीं होता। इसमें बुद्धि बड़ी अच्छी पवित्र चाहिए। वह तब होगी जब याद की यात्रा में मस्त रहेंगे।)
° कोई भी ऐसा नहीं है जो समझें कि *आत्मा पहले सतोप्रधान थी* फिर तमोप्रधान बनी है। (क्योंकि वह तो आत्मा को निर्लेप समझते हैं। आत्मा सो परमात्मा है, ऐसे-ऐसे कह देते हैं।)
20 *चढ़े तो चाखे…….* यह क्यों गाया जाता?
° कहाँ ऊंच ते ऊंच राजाओं का राजा *डबल सिरताज* , कहाँ *प्रजा* । पढ़ाने वाला तो एक ही है। (इसमें समझ बड़ी अच्छी चाहिए। बाबा बार-बार समझाते हैं याद की यात्रा है मुख्य। मेहनत सिवाए पद थोड़ेही मिलता।)
