Answers from Sakar Murli 15-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 15-10-2020*

1. *लवलीन स्थिति* 💛 का अनुभव करने के लिए _____ की युद्ध समाप्त करो।
° _स्मृति-विस्मृति_

2. आप बच्चे *जग की ज्योति* हो, आपके सेकण्ड के *स्व-परिवर्तन से विश्व-परिवर्तन* होता, इतना महत्व है। तो अब क्या करना है? (2)
° इसलिए अपने महत्व वा कर्तव्य को जानकर *बीती सो बीती* कर सदा जागती-ज्योत बनो।
° सिर्फ प्रैक्टिस करो *अभी-अभी कर्मयोगी, अभी-अभी कर्मातीत स्टेज*। (जैसे आपकी रचना कछुआ 🐢 सेकण्ड में सब अंग समेट लेता है। ऐसे आप मास्टर रचता समेटने की शक्ति के आधार से *सेकण्ड में सर्व संकल्पों को समाकर एक संकल्प में स्थित* हो जाओ।)

3. सर्व का सद्गति दाता निराकार रूहानी बाप बैठ रूहानी बच्चों को पहले समझाते अपने को आत्मा निश्चय कर *देही-अभिमानी बनो, तब बाप को याद कर सकेंगे*। इसका वापिस घर जाने से क्या सम्बंध है?
° बाप कहते हैं तुमको वापिस जाना है। अपने को आत्मा समझो, आत्मा समझ बाप को याद करो *तब जन्म-जन्मान्तर के पाप भस्म हों, और कोई उपाय नहीं।* आत्मा ही पतित, आत्मा ही पावन बनती है। (शान्तिधाम ओर सतयुग में आत्मा पावन थी, कलियुग में पतित बन चिल्लाते – हे पतित-पावन आओ।)

4. दैवीगुण भी धारण करने हैं। बहुत मीठे, शान्त, अति ____ स्वभाव का बनना है। कभी भी क्रोध नहीं करना। मुख से सदैव ____ ही निकलें, कांटा नहीं। _____ -पना भी देह-अभिमान है, रूसना, रोना यह सब _____ संस्कार तुम बच्चों में नहीं होने चाहिए। दु:ख-सुख, मान-अपमान सब ____ करना है। अपनी आंखों 👀 को बहुत-बहुत _____ बनाना है।
° _मीठे_, _फूल_, _नाज़ुक_, _आसुरी_, _सहन_, _सिविल_

5. देह-अभिमान होने कारण एक दो की खामियां देखते खुद में अनेक प्रकार की ______ रह जाती हैं।
° _खामियां_

6 *सर्विस में ढीलापन* आने का मुख्य कारण क्या है? (2)
° जब देह-अभिमान के कारण एक दो की *खामियां देखने* लगते हैं। *आपस में अनबनी* होना भी देह-अभिमान है। मैं फलाने के साथ नहीं चल सकता, मैं यहाँ नहीं रह सकता…… यह सब *नाज़ुकपना* है। यह बोल मुख से निकालना माना कांटे बनना, *नाफरमानबरदार* बनना। (बाबा कहते बच्चे, तुम रूहानी मिलेट्री हो इसलिए ऑर्डर हुआ तो फौरन हाज़िर होना चाहिए। कोई भी बात में आनाकानी मत करो।)

7. बाबा का *हुक्म-आज्ञा-श्रीमत* क्यों माननी है?
° श्रीमत मिलती है ऐसा-ऐसा करना है तो समझना चाहिए कि *शिवबाबा की श्रेष्ठ मत* है। (वह है ही सद्गति दाता। दाता कभी उल्टी मत नहीं देंगे।)
° बड़े से बड़ी गवर्मेन्ट बेहद के बाप का ऑर्डर मिलता है, जिसका *राइट हैण्ड फिर धर्मराज* है। उनकी श्रीमत पर न चलने से फिर गिर पड़ते हैं।
° बाबा का हुक्म है, अगर हम नहीं मानेंगे तो *एकदम चकनाचूर* हो जायेंगे। 21 जन्मों की *राजाई में रोला* पड़ जायेगा।

8. मुझे ____ के बिगर तो कभी कोई जान न सके। कल्प पहले वाले ही _____ – ____ निकलते रहेंगे। यह हैं बिल्कुल ____ – ____ बातें। _____ भी जरूर रोज़ पढ़नी है अथवा सुननी है। मुरली नहीं पढ़ी गोया _____ पड़ गई।
° _बच्चों_, _आहिस्ते_, _आहिस्ते_, _नई_, _नई_, _मुरली_, _अबसेन्ट_

9. यह है गीता का युग। परन्तु शास्त्रों में इस *संगमयुग का वर्णन नहीं* है। _(सही / गलत)_
° *सही* , क्योंकि गीता को ही द्वापर में ले गये हैं। (जब राजयोग सिखाया तो जरूर संगम होगा ना। परन्तु किसकी भी बुद्धि में यह बातें नहीं हैं। अभी तुम्हें ज्ञान का नशा चढ़ा हुआ है।)

10. बाप कहते हैं मैं इनके बहुत जन्मों के अन्त में प्रवेश करता हूँ। इनसे भी देखो _____ ऊंच चली जाती है। गायन भी है – ____ को आगे रखा जाता है। पहले ____ फिर नारायण, यथा राजा रानी तथा प्रजा हो जाती है। तुमको भी ऐसा ____ बनना है।
° _लक्ष्मी_, _फीमेल_, _लक्ष्मी_, _श्रेष्ठ_

11. यह रूहानी नॉलेज, रूहानी बाप ही रूहों को देते हैं, राजयोग सिखाते। यह भी लिखते – रूहानी बाप स्प्रीचुअल नॉलेज रूहानी बच्चों को देते हैं। और दुनिया में सभी *कौन-से घोर अन्धियारे* में हैं?
° समझते हैं – *कलियुग* तो अभी *छोटा बच्चा*, रेगड़ी पहन रहा है। तो मनुष्य और ही नींद में सोये हुए हैं। (इस समय तो सारी दुनिया में रावण राज्य है। सभी कहते हैं रामराज्य चाहिए। अब है संगम। जब इन लक्ष्मी-नारायण का राज्य था तो रावण राज्य नहीं था, फिर चेन्ज कैसे होती है, यह कोई नहीं जानते।)

12. अभी तुम पारसबुद्धि बनते हो तो पत्थर की _____ नहीं कर सकते हो। चित्रों के आगे जाकर ____ टेकते हैं। कुछ भी समझते नहीं। अब तुमको ज्ञान मिलता है तो _____ से वैराग्य आ जाता है। यह दुनिया ही बदलती है। वहाँ है ही ____। मनुष्य बन्दरबुद्धि 🐒 बन गये हैं, उनको मैं आकर _____ लायक बनाता हूँ।
° _पूजा_, _माथा_, _भक्ति_, _पूज्य_, _मन्दिर_

13. बाबा से कोई *माथा टेकते* 🛐, तो बाबा को बड़ा अच्छा लगता। _(सही / गलत)_
° गलत (बाप कहते हैं – *बच्चे, तुम माथा क्यों टेकते हो*। आधाकल्प तुमने माथा भी घिसाया, पैसे भी गँवाये, मिला कुछ नहीं। माया ने एकदम माथा मूड लिया है। कंगाल बना दिया है। फिर बाप आकर सबका माथा ठीक कर देते हैं।)

14. जो पीछे आते हैं तो सुख भी थोड़ा, दु:ख भी थोड़ा मिलता है। ____ -वासियों को सुख बहुत तो दु:ख भी बहुत है। शुरू में ही कितने धनवान एकदम विश्व के _____ होते हैं। और धर्म वाले कोई पहले थोड़ेही ____ -वान होते हैं। _____ -श्रद्वालू भी भारत है। यह भी ड्रामा बना हुआ है। बाप कहते हैं मैंने जिसको हेविन बनाया, वह ____ बन गया है।
° _भारत_, _मालिक_, _धन_, _अन्ध_, _हेल_

15. बाप कहते हैं मैं आया हूँ तुमको नर से नारायण बनाने। परन्तु *कोटो में कोई* ही निकलते – राजाई पद पाने वाले। उसमें भी 8 रत्न मुख्य गाये जाते हैं। *8 हैं पास विद् ऑनर्स*, सो भी नम्बरवार पुरूषार्थ अनुसार। ऐसा क्यों?
° क्योंकि *देह-अभिमान को तोड़ने में बड़ी मेहनत लगती* है। देह का भान बिल्कुल निकल जाए। (कोई-कोई पक्को का भी ऐसे होता। बैठे-बैठे देह का त्याग कर देते हैं। बैठे-बैठे ऐसे शरीर छोड़ते हैं, वायुमण्डल एकदम शान्त हो जाता है।)

16. प्रदर्शनी 🎪 आदि में भी *पहले-पहले क्या समझाना* है?
° तुम *अल्फ (बाप) का परिचय दो*। (पहले अल्फ और बे। बाप तो एक ही निराकार है। बाप रचयिता ही बैठ रचना के आदि-मध्य-अन्त का ज्ञान समझाते हैं। वही बाप कहते हैं मामेकम् याद करो। देह के सम्बन्ध छोड़ *अपने को आत्मा समझ मामेकम् याद करो*। बाप का परिचय तुम देंगे फिर किसको हिम्मत नहीं रहेगी प्रश्न-उत्तर करने की।)
° *पहले बाप का निश्चय पक्का* हो जाए तब बोलो 84 जन्म ऐसे लिये जाते हैं। चक्र को समझ लिया, बाप को समझ लिया फिर कोई प्रश्न उठेगा नहीं। (बाप का परिचय देने बिगर बाकी तुम तिक-तिक करते हो तो उसमें तुम्हारा टाइम ⌚बहुत वेस्ट हो जाता है। गले ही घुट जाते हैं। सिम्पुल रीति और धीरे से समझाओ।)

17. जो ____ -अभिमानी होंगे वही अच्छा समझा सकेंगे। बड़े-बड़े म्युज़ियम में अच्छे-अच्छे समझाने वालों को _____ देनी पड़े। थोड़े रोज़ अपना _____ छोड़ मदद देने आ जाना है।
° _देही_, _मदद_, _सेन्टर_

18. पिछाड़ी में सेन्टर सम्भालने कोई को बिठा दो। अगर गद्दी सम्भालने लायक *कोई को आपसमान नहीं बनाया है* , तो बाबा क्या समझेंगे? (4)
° बाप समझेंगे कोई काम के नहीं, *सर्विस नहीं की*। (बाबा को लिखते हैं सर्विस छोड़ कैसे जायें! अरे बाबा हुक्म करते हैं फलानी जगह प्रदर्शनी है सर्विस पर जाओ।)
° अगर गद्दी लायक किसको नहीं बनाया है तो *किस काम के*। (बाबा ने हुक्म किया – झट भागना चाहिए।)
° महारथी ब्राह्मणी उनको कहा जाता है। बाकी तो सब हैं *घोड़ेसवार, प्यादे* ।
° सबको सर्विस में मदद देनी है। इतने वर्ष में तुमने किसको आपसमान नहीं बनाया है तो *क्या करते थे* । (इतने समय में मैसेन्जर नहीं बनाया है, जो सेन्टर सम्भालें।)

19. तुम सारे विश्व की सेवा करते हो ना। तुम बच्चों को सारे विश्व पर *घेराव* डालना है। किस बात का?
° *पतित दुनिया को पावन* बनाना यह घेराव डालना है ना। *सभी को मुक्ति-जीवनमुक्ति* धाम का रास्ता बताना है, *दु:ख से छुड़ाना* है। अच्छा!

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