Answers from Sakar Murli 21-11-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 21-11-2020*

1. ____ बुद्धि से प्लैन को प्रैक्टिकल में लाओ तो सफलता समाई हुई है।
° _प्लेन_

2. विश्व कल्याण की ______ का ताज और बापदादा का ____ -तख्त सदा कायम रहे तो निरन्तर स्वत:योगी बन जायेंगे। उन्हें किसी भी प्रकार की मेहनत करने की बात नहीं क्योंकि एक तो संबंध _____ का है दूसरा प्राप्ति ____ है। जहाँ प्राप्त होती है वहाँ स्वत: ____ होती है।
° _जिम्मेवारी_, _दिल_, _समीप_, _अखुट_, _याद_

3. बाप को याद करेंगे तब ____ होगी। ओहो! हम तो विश्व के _____ बनते हैं। फिर ____ पीढ़ी कभी रोयेंगे नहीं। 21 पीढ़ी अर्थात् पूरा बुढ़ापे तक अकाले मृत्यु नहीं होती है, तो अन्दर में कितनी ___ खुशी रहनी चाहिए।
° _खुशी_, _मालिक_, _21_,
_गुप्त_

4. कृष्ण की कितनी महिमा गाते हैं। श्रीकृष्ण तो सतयुग का पहला ____ था। उनमें जो ____ है वह तो अविनाशी है। श्रीकृष्ण की आत्मा का शरीर ____ में ही होता है। नम्बर- ____ में वही जाता है। लक्ष्मी-नारायण नम्बरवन फिर हैं सेकण्ड, थर्ड। तुम बच्चे ____ -पुरी के मालिक बनते हो नम्बरवार, यह माला बनती है ना।
° _प्रिन्स_, _आत्मा_, _सतयुग_, _वन_, _विष्णु_

5. रूहानी ____ बैठ बच्चों को एक बात समझाते हैं। चित्रों में भी ऐसे लिखना है कि त्रिमूर्ति _____ बच्चों प्रति समझाते हैं। ____ आत्माओं को समझाते हैं। ऊंच ते ऊंच भगवान एक ही है, वह है _____ सोल। वर्ल्ड _____ अथॉरिटी है। अर्थात्‌ सर्वशक्तिमान्। मुक्ति-जीवनमुक्ति का ____ वह एक ही बाप है।
° _बाप_, _शिवबाबा_, _परमात्मा_, _सुप्रीम_, _ऑलमाइटी_, _दाता_

6. इस समय ______बच्चों को रूहानी बाप से वर्सा मिलता है।इस समय तुमको ____ -अभिमानी बन बाप को ____ करना है। कर्म भी भल करो, धंधा धोरी आदि भल चलाते रहो, बाकी जितना समय मिले अपने को आत्मा समझ बाप को याद करेंगे तो _____ विनाश होंगे, तुम तमोप्रधान से _____ बनेंगे, और कोई उपाय नहीं । तुम जानते हो शिवबाबा इसमें आया हुआ है। वह सत्य है, चैतन्य है। सत् चित ____ स्वरूप कहते हैं।
° _रूहानी_, _देही_, _याद_, _विकर्म_, _सतोप्रधान_, _आनंद_

7. तुम इस समय सतोप्रधान पुरुषोत्तम बन रहे। सतोप्रधान को ही ____ कहा जाता, जो बाप तुमको बनाते। बाप कहते हैं मेरा पार्ट ही संगम पर है इसलिए संगमयुग ______ युग कहा जाता। यह है आस्पीशियस, बहुत ऊंच ____ समय संगमयुग। जबकि बाप आकर तुम बच्चों को नर से ____ बनाते हैं, ____ वाले मनुष्य, आदि सनातन देवी-देवता धर्म। बाप कहते हैं मैं यह धर्म स्थापन करता हूँ, इसके लिए ____ जरूर बनना पड़ेगा।
° _सर्वोत्तम_, _कल्याणकारी_, _शुभ_, _नारायण_, _दैवीगुण_, _पवित्र_

8. बाप आकर ब्राह्मण ___ स्थापन करते हैं, यह परिवार है, पहले-पहले बाप ब्रह्मा द्वारा ब्राह्मणों को ____ करते हैं।ब्रह्मा की ___ सरस्वती कहते हैं। प्रजापिता ब्रह्मा के तो हैं ही ____ वंशावली। इनमें ____ प्रवेश कर कहते हैं तुम हमारे बच्चे हो। मैंने इनका नाम _____ रखा है।
° _कुल_, _एडाप्ट_, _बेटी_, _मुख_, _बाप_, _ब्रह्मा_

9. तुम जानते हो हम ___ पर जीत पाकर जगतजीत बनेंगे। तुम हो शिव _____ । तुम तो _____ करते हो सारी पुरानी दुनिया का, पुराने शरीर का। अब बाप को याद करेंगे तो आत्मा ____ हो जायेगी। ज्ञान के _____ ले जायेंगे। उस अनुसार नई दुनिया में जन्म लेंगे।
° _माया_, _शक्तियाँ_, _संन्यास_, _पवित्र_, _संस्कार_

10. और अगर *यहाँ से कोई* अच्छी आत्मा शरीर छोड़ती है, तो उन्हें कैसा जन्म मिलेंगा?
° तो भी *अच्छे घर में* राजा के पास वा रिलीजस घर में वह संस्कार ले जायेंगे। *सबको प्यारे* लगेंगे। कहेंगे यह तो *देवी* है।

11. मन्दिर में महिमा गाते हैं – आप सर्वगुण सम्पन्न…… बाप तुम बच्चों को समझाते हैं – तुम ही ____ देवता थे फिर 63 जन्म पुजारी बनें, अब फिर ____ बनते हो। बाप ____ बनाते हैं, रावण पुजारी बनाते हैं।सतयुग-त्रेता में तो पूजा होती नहीं। वह है ____ घराना।
° _पूज्य_, _पूज्य_, _पूज्य_, _पूज्य_

12. तुम बच्चों के पास ऐसी कौन-सी नॉलेज है जिसके कारण तुम किसी भी हालत में *रो नहीं सकते?*
° तुम्हारे पास इस *बने-बनाये ड्रामा की नॉलेज* है, तुम जानते हो इसमें *हर आत्मा का अपना पार्ट* है, बाप हमें *सुख का वर्सा* दे रहे हैं फिर हम रो कैसे सकते। परवाह थी पार ब्रह्म में रहने वाले की, *वह मिल गया* बाकी क्या चाहिए बेहद का बाप-टीचर-गुरू। *बख्तावर बच्चे* कभी रोते नहीं।

13. इस *ज्ञान* की कौन-सी *2 वन्डरफुल महिमा* है, जो एक-दो से बिल्कुल विपरीत है?
° यह पढ़ाई है भी *सेकण्ड की* ।
° फिर कहते हैं सागर को स्याही बनाओ, सारा जंगल कलम बनाओ *तो भी पूरा हो न सके*। (अन्त तक तुमको ज्ञान सुनाता रहूँगा।)

14. (धारणा) ज्ञान तलवार से _____ को जीतना है। के ____ भरने हैं। पुरानी दुनिया और पुराने शरीर का ____ करना है।
° _विकारों_, _संस्कार_, _संन्यास_

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