*Om Shanti*
*Answers from Sakar Murli 11-12-2020*
1. बेहद की _____ द्वारा साधना के बीज को प्रत्यक्ष करो।
° _वैराग्यवृत्ति_
2. जब बाप और नॉलेज द्वारा *आत्मिक स्वरूप का सितारा⭐* चमक गया तो बुझ नहीं सकता, लेकिन चमक की परसेन्टेज कम और ज्यादा हो सकती। तो यह *सितारा सदा चमकता रहे*, इसके लिए क्या करना है? (2)
° *रोज़ अमृतवेले अटेन्शन रूपी घृत* डालते रहेंगे। जैसे दीपक में घृत डालते हैं तो वह एकरस जलता है।
° ऐसे सम्पूर्ण अटेन्शन देना अर्थात् *बाप के सर्व गुण वा शक्तियों को स्वयं में धारण करना* । इसी अटेन्शन से आकर्षण मूर्त बन जायेंगे।
3. बच्चे बड़ी _____ में डूबे हुए रहने चाहिए। कहा जाता है – _____ जैसी खुराक नहीं। तुम _____ उड़ने वाली आत्मायें हो। पूरा _____-वीर बनना है, माया हिला न सके।
° _खुशी_, _खुशी_, _परियाँ_, _महा_
4. भगवान पढ़ा रहे हैं रूहानी ______ को। अब _____ राज्य में चलने लिए 5 विकारों रूपी रावण पर _____ पाने का पुरुषार्थ कर रहे हो। यह पढ़ाई तो _____ पढ़ाते हैं, यह है ईश्वरीय पढ़ाई, इसमें _______ ही विजयन्ती होंगे अर्थात् विश्व पर राज्य करेंगे।
° _स्टूडेन्ट_, _राम_, _जीत_, _ईश्वर_, _निश्चयबुद्धि_
5. बाप को खिवैया भी कहा जाता है, तुम हो ____ । खिवैया आते हैं, सभी की नईया को ____ लगाने। कहते भी हैं ____ की नईया डोलेगी परन्तु डूबेगी नहीं। आखिर तो ज्ञान की ही ____ होगी। हीरो-हीरोइन का ____ तुम्हारा अभी बज रहा है, इस समय ही युद्ध चलती।
° _नईया_, _पार_, _सच_, _विजय_, _पार्ट_
6. _____ को देखो। आत्मा यहाँ _____ के बीच रहती। आत्मा सुनकर _____ हिलाती। हमेशा आत्मा से बात करो। तुम आत्मा इस शरीर रूपी ____ पर बैठी हो। तुम तमोप्रधान थी अब _____ बनो। अपने को आत्मा समझ बाप को याद करने से देह का ____ छूट जायेगा।
° _आत्मा_, _भ्रकुटी_, _कांध_, _तख्त_, _सतोप्रधान_, _भान_
7. अब बाप कहते _____ -अभिमानी बनो। आत्मा ही सुनती, सब कुछ _____ करती। खाती-पीती सब कुछ _____ करती। आत्मा ही जन्म-जन्मान्तर भिन्न-भिन्न _____ पहनती आई है।
° _देही_, _धारण_, _आत्मा_, _ड्रेस_
8. अब हम आत्माओं को वापिस जाना है, बाप से ____ लगाना है। मूल बात है यह। सब आत्मायें हैं, यह सब धर्म तो ____ के हैं। परन्तु सब आत्माओं का ____ तो एक ही है। सभी आत्माओं का स्वधर्म ____ है।
° _योग_, _देह_, _बाप_, _शान्त_
9. बाप को तो _____-भोक्ता कहा जाता है। वह है _____-आकार। बाप कहते हैं मैं ही कल्प-कल्प आकर तुमको पढ़ाता हूँ और _____ हो देखता हूँ।
° _अ_, _निर_, _साक्षी_
10. स्त्रियों के लिए वह समझते हैं नर्क का द्वार 🚪है। और *बाप क्या कहते?* _(बहुत सुन्दर बात!)_
° यह तो *स्वर्ग का द्वार* हैं। (तुम बच्चियाँ अभी स्वर्ग स्थापन करती हो। सतयुग है स्वर्ग का द्वार।)
11. भल पवित्र तो रहते हैं, बाकी ____ की धारणा नम्बरवार होती है। बाबा की बुद्धि तो सब सेन्टर्स के ____ बच्चों तरफ चली जाती है। उनके आगे ज्ञान ____ करता हूँ। मैजारिटी ____ तू आत्मा होते हैं तो मजा भी आता है।
° _ज्ञान_, _अनन्य_, _डांस_, _ज्ञानी_
12. इस ईश्वरीय मिशन में जो पक्के निश्चयबुद्धि है, वे स्तुति-निंदा सबमें ____ से काम लेंगे, _____ नहीं करेंगे, किसी को भी _____ दृष्टि से नहीं देखेंगे। आत्मा को ही देखेंगे, आत्मा से ____ करेंगे, स्त्री-पुरुष साथ में रहते ____ फूल समान रहेंगे, किसी भी प्रकार की _____ नहीं रखेंगे।
° _धीरज_, _क्रोध_, _दैहिक_, _बात_, _कमल_, _तमन्ना (इच्छा)_
13. जो पक्के निश्चयबुद्धि हैं, वह समझते हैं कल्प पहले भी हमने यह _____ किया था। बाप कहते हैं – बच्चे, अब _____ गुण धारण करो। कोई _____ काम नहीं करो।
° _राज्य_, _दैवी_, _बेकायदे_
14. जो बात काम की नहीं है, उसे एक कान से सुन दूसरे से निकाल देना है, *हियर नो ईविल……* इसका कौन-सा चित्र है?
° *बन्दर का* चित्र दिखाते हैं। (🙈🙉🙊)
15. अंगूठी 💍में भी *रत्न* जब डालते हैं, कोई का दाम *हज़ार रूपया* तो कोई का दाम *10-20 रूपया* । क्यों?
° बच्चों में भी नम्बरवार हैं। कोई तो *पढ़कर मालिक* बन जाते हैं। कोई फिर *पढ़कर दास-दासियाँ* बन जाते हैं। राजधानी स्थापन होती है ना।
16. *गूंगे-बहरे* किन्हें कहेंगे?
° भल सुनते हैं परन्तु *एक कान से सुन दूसरे कान से निकाल देते* हैं। न कुछ धारण करते हैं, न कराते हैं। ऐसे गूंगे-बहरे भी बहुत हैं।
17. “मीठे बच्चे – मधुबन होलीएस्ट ऑफ दी होली बाप का घर है, यहाँ तुम किसी भी _____ को नहीं ला सकते”। शिवबाबा को ____ भी कहते हैं ना, यह इन्द्र सभा है, ____ वर्षा है।
° _पतित_, _इन्द्र_, _ज्ञान_
18. कोई-कोई तो बड़ी अच्छी ____ करते हैं। कन्याओं ने भी भीष्म पितामह आदि को ____ मारे हैं ना। अगर देहधारी ने गीता सुनाई तो फिर ऐसा क्यों कहते मैं जो हूँ जैसा हूँ, कोई _____ जानते। यह नहीं जानते कि कृष्ण के बहुत जन्मों के अन्त के ____ में मैं प्रवेश करता हूँ।
° _सर्विस_, _बाण_, _विरला_, _शरीर_
