Answers from Sakar Murli 07-01-2021

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 07-01-2021*

1. दिल और दिमाग दोनों का बैलेन्स रख सेवा करने से _____ मिलती है।
° _सफलता_

2. जो आधारमूर्त होते, उनके ऊपर ही सारी _____ रहती। अभी आप जिस रूप से, जहाँ भी कदम उठायेंगे वैसे अनेक आत्मायें आपको _____ करेंगी। लेकिन यह जिम्मेवारी अवस्था बनाने में बहुत _____ करती क्योंकि इससे अनेक आत्माओं की _____ मिलती, जिस कारण जिम्मेवारी _____ हो जाती, थकावट मिटाने वाली।
° _जिम्मेवारी_, _फालो_, _मदद_,
_आशीर्वाद_, _हल्की_

3. पहले हम सोझरे में थे, जबकि भारत _____ था। स्वर्ग, वैकुण्ठ, बहिश्त, _____ – यह सब इस भारत के नाम थे। भारत पवित्र और प्राचीन ____ -वान था। स्वर्ग के राज-राजेश्वर, राज-राजेश्वरी श्री _____ थे, सुखधाम। बाप से तुमको स्वर्ग का वर्सा लेना है, सतयुग में थे _____ -मुक्त देवी-देवताओं। पावन खण्ड माना ____ -खण्ड।
° _स्वर्ग_, _हेविन_, _धन_, _लक्ष्मी-नारायण_, _जीवन_, _सच_

4. तुम देवताओं जैसा धनवान एवर-_____ , एवरहेल्दी, वेल्दी कोई नहीं होता। भारत कितना _____ था, हीरे-जवाहरात तो पत्थरों मिसल थे। तुम सर्व-_____ सम्पन्न, 16 कला _____ थे यथा महाराजा-महारानी, सतयुग में बहुत सुख था। भ्रष्टाचारियों को _____ देवता बनाना, यह बाप का ही काम है, बाप पावन बनाते। अभी तुम 21 जन्म लिए वर्सा लेने आये हो, तुम ही _____ पद फिर से लेते।
° _हैप्पी_, _साहूकार_, _गुण_, _सम्पूर्ण_, _श्रेष्ठाचारी_, _सूर्यवंशी_

5. यह है स्प्रीचुअल _____ नॉलेज, सुप्रीम रूह बैठ नॉलेज देते। बच्चों को _____ -अभिमानी बनना पड़े। अपने को आत्मा निश्चय कर _____ याद करो। आत्मा में ही अच्छे-बुरे ______ होते, जिस अनुसार जन्म मिलता। पत्थरबुद्धि को ______ बनाना मासी का घर नहीं। एक बाप को याद करो, राजाई याद करो, देह-संबंध छोड़ो। _____ आत्मा बनने की मेहनत करनी है।
° _रूहानी_, _देही_, _मामेकम्_,
_संस्कार_, _पारसबुद्धि_, _पुण्य_

6. यह जो वर्सा भारत को था वह बाप से _____-युग पर ही मिला था। पुकारते हैं – हे _____-पावन _____ हर्ता सुख कर्ता। ईश्वर वा प्रभू कहने से भी याद नहीं आता कि वह सभी आत्माओं का _____ है।
° _संगम_, _पतित_, _दु:ख_, _बाप_

7. एक ही _____ बाबा है जो सचखण्ड की स्थापना करने वाला है। तुम ______ -जयन्ती तो मनाते हो ना। बाप है नई दुनिया का रचयिता, ______ गॉड फादर। एक _____ बिगर सर्व का सद्गति दाता कोई हो नहीं सकता।आत्मायें- _____ अलग रहे बहुकाल…..
° _सच्चा_, _शिव_, _हेविनली_, _सतगुरू_, _परमात्मा_

8. बाप अपने बच्चों को कौन सी *एक कहानी* सुनाने आये हैं?
° बाबा कहते मीठे बच्चे – मैं तुम्हें *84 जन्मों की कहानी* सुनाता हूँ। तुम जब *पहले-पहले* जन्म में थे तो एक ही *दैवी धर्म* था फिर तुमने ही दो युग के बाद बड़े-बड़े मन्दिर बनाये हैं। *भक्ति शुरू* की है। अभी तुम्हारा यह अन्त के भी अन्त का जन्म है। *तुमने पुकारा* दु:ख हर्ता सुख कर्ता आओ…. अब *मैं आया* हूँ।

9. जब देवता धर्म गुम हो जाता तब बाप को आना पड़ता – एक ______ की स्थापना कर बाकी सबका विनाश करा देते। _____ -पिता ब्रह्मा द्वारा बाप स्थापना करा रहे, आदि सनातन ______ धर्म की। यह भी सारा _____ बना हुआ है, इनकी एण्ड होती नहीं, बाप आते अन्त में। जबकि सृष्टि के आदि-मध्य-अन्त का नॉलेज सुनाते तो जरूर _____ पर आयेंगे। तुम्हारा एक बाप है, आत्मायें सभी _____ हैं, मूलवतन में रहने वाली।
° _धर्म_, _प्रजा_, _देवी-देवता_, _ड्रामा_, _संगम_, _ब्रदर्स_

10. *दु:ख* भी ईश्वर ही देते हैं। _(सही / गलत)_
° गलत (बाप कहते हैं – मैं तो सभी को *इतना सुख देता हूँ* जो फिर आधाकल्प तुम बाप का सिमरण नहीं करेंगे। फिर जब रावण राज्य होता है तो सबकी पूजा करने लग पड़ते हैं।)

11. वानप्रस्थ अवस्था वाले गुरू करते, मन्त्र लेने लिए। तुमको तो अभी *देहधारी गुरू करने की दरकार नहीं*। क्यों?
° तुम सबका *मैं बाप, टीचर, गुरू हूँ* । मुझे कहते भी हो – हे *पतित-पावन शिवबाबा*। अभी स्मृति आई है। (सब आत्माओं का *बाप* है, आत्मा सत है, चैतन्य है क्योंकि अमर है। सभी आत्माओं में पार्ट भरा हुआ है। बाप भी *सत चैतन्य* है। वह *मनुष्य सृष्टि का बीजरूप* होने कारण कहते हैं – मैं सारे झाड़ के आदि-मध्य-अन्त को जानता हूँ इसलिए मुझे *नॉलेजफुल* कहा जाता है।)

12. कहते हैं फलाना पार निर्वाण गया, बाप कहते यह सब हैं गपोड़े, *वापिस कोई भी जा नहीं सकते* । बाबा ने इसका एक अनोखा कारण सुनाया। कौन-सा?
° जबकि *पहले नम्बर वालों को ही 84 जन्म लेने पड़ते* हैं। (तो और कोई कैसे जा सकता!)

13. वास्तव में ___ सूर्य, ____ चन्द्रमा और ____ सितारे हैं। उन्हों की महिमा है। पहले होती है ______ भक्ति एक शिवबाबा की, फिर _____ की, फिर उतरते-उतरते अभी तो देखो _____ पर मिट्टी का दीवा जगाए, तेल आदि डाल उनकी भी पूजा करते हैं।
° _ज्ञान_, _ज्ञान_, _ज्ञान_, _अव्यभिचारी_, _देवताओं_, _टिवाटे_

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