*Om Shanti*
*Answers from Sakar Murli 14-04-2021*
1. सर्वशक्तिमान् बाप को साथी बना लो तो _____ से छूट जायेंगे।
° _पश्चाताप_
2.1) जैसे एक आंख में बाप का _____, दूसरी में बाप द्वारा मिला हुआ _____ सदा स्मृति में रहता।
° _स्नेह_, _कर्तव्य (सेवा)_
2.2) ऐसे स्नेही-मूर्त साथ अभी _____ रूप बनो, शब्दों में ऐसा जौहर हो जो किसी का भी _____ विदीरण कर दे। जैसे माँ, ऐसे ज्ञान (सत्य) स्पष्ट शब्दों में दो, लेकिन स्नेह समाया हो तो _____-मूर्त बन जायेंगे।
° _शक्ति_, _हृदय_, _सफलता_
3. _____ बन ज्ञान रूप अवस्था (अचल, स्थिर) में रह महावाक्य धारण करो तब कल्याण करेंगे। _____ अवस्था धारण करने का मुख्य फाउण्डेशन – वेट एण्ड सी। जब ज्ञानी बच्चे इकट्ठे मुरली सुनते तो चारों तरफ _____ की मीठी महसूसता का वायुमण्डल बनता, क्योंकि वे आन्तरिक डीप जाते।
° _अन्तर्मुखी_, _धैर्यवत_, _शान्ति_
4. अपने मन वा दिल रूपी मन्दिर को ईश्वरीय _____ रूपी मूर्तियों से सजाओ और _____ संकल्पों की खुशबू फैलाओ। मन मन्दिर उजियारा बनें तब अपने उजियारे प्यारे _____ देश में चले।
° _गुणों_, _पवित्र_, _वैकुण्ठ_
5. किससे भूल होती तो सूक्ष्म रीति अपनी _____ शक्ति उन्हें पहुंचाकर अशुद्ध संकल्प भस्म करना, यही सर्वोत्तम सर्विस है। साथ अपने ऊपर भी _____ देना, कोई अशुद्ध संकल्प न हो। इसमें खुद भी सावधान रह, दूसरों प्रति ऐसी _____ सर्विस करना।
° _योग_, _अटेन्शन_, _दिव्य_
6. तन मन धन सहित यज्ञ में स्वाहा, तो अपना कुछ नहीं। पहले तन-मन सम्पूर्ण रीति _____ में लगाना। _____ भी व्यर्थ नहीं। मन परमात्मा को अर्पण किया, वो है शुद्ध शान्त स्वरूप, इसलिए अशुद्ध संकल्प स्वत: _____ होते, नहीं तो मन पूर्ण स्वाहा नहीं हुआ अर्थात् _____ मन नहीं बना।
° _सर्विस_, _धन_, _शान्त_, _ईश्वरीय_
7. कोई सावधानी देता तो समझना मेरी _____ की। उसको रिगार्ड देना, यही _____ बनने की युक्ति है। यही ज्ञान सहित आन्तरिक सच्चा _____ है, ऐसे चलना ही निर्माणचित अति मधुर अवस्था है।
° _परवरिश_, _सम्पूर्ण_, _प्रेम_
8.1) तुमको _____ -मुख रहना है क्योंकि निश्चयबुद्धि होने कारण तुम्हारी नस नस में सम्पूर्ण ईश्वरीय ताकत समाई है। ऐसी आकर्षण शक्ति अपना दिव्य _____ अवश्य निकालती।
° _हर्षित_, _चमत्कार_
8.2) जैसे छोटे बच्चे, वैसे तुम्हारी ईश्वरीय _____ जीवन चाहिए। कोई क्रोध वश हो, उनके सामने ज्ञान रूप हो बचपन की मीठी रीति _____ रहो तो वह खुद शान्ति होगा।
° _रमणीक_, _मुस्कराते_
9. ईश्वर सम्पूर्ण ज्ञान रूप वैसे सम्पूर्ण प्रेम रूप भी है, परन्तु फर्स्ट _____ । पहले ज्ञान रूप बन भिन्न-भिन्न _____ पर जीत पाकर पीछे प्रेम रूप। ज्ञान बिगर सिर्फ प्रेम इस पुरुषार्थी जीवन में _____ डालता। ज्ञान रूप बन पीछे _____ में जाने से अति मौज अनुभव होता।
° _ज्ञान_, _माया_, _विघ्न_, _ध्यान_
10. शारीरिक भोगना आती, अगर वह _____ सुखरूप अवस्था में उपस्थित हो तो पास्ट कर्मभोग चुक्तू भी करता, फ्युचर लिए _____ का हिसाब भी बनाता। यही सुहावना पुरुषार्थ का समय है जिस समय दोनों कार्य सम्पूर्ण _____ होते, ऐसा तीव्र पुरुषार्थी ही अतीन्द्रिय सुख-आनंद में रहता।
° _साक्षी_, _सुख_, _सिद्ध_
11. इस वैरायटी-विराट ड्रामा में सम्पूर्ण निश्चय हो, क्योंकि यह बना बनाया ड्रामा बिल्कुल _____ है, हर एक्टर अपना पार्ट बजा रहा। एक दो को ईश्वरीय रूप से देख, _____ का ज्ञान उठाए अपने लक्ष्य स्वरूप की _____ से शान्त-निर्माणचित, धैर्यवत, मिठाज़, शीतलता सर्व दैवीगुण इमर्ज करना।
° _वफादार_, _महसूसता_, _स्मृति_
12. निश्चयबुद्धि साक्षी हो हर खेल हर्षित देखते आन्तरिक धैर्यवत और _____ -चित रहते, यही ज्ञान की परिपक्व अवस्था है जो अन्त में _____ के समय प्रैक्टिकल रहती। तुमको आने वाली भारी परीक्षाओं से योगबल द्वारा पास होने आगे से _____ अवश्य करनी है, ईश्वरीय फाउण्डेशन पक्का!
° _अडोल_, _सम्पूर्णता_, _रिहर्सल_
13. मीठे-मीठे सिकीलधे, ज्ञान _____ , ज्ञान _____ प्रति मात-पिता बापदादा का यादप्यार और गुडमार्निग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को _____।
° _गुल्जारी_, _सितारों_, _नमस्ते_
