Answers from Sakar Murli 02-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 02-10-2020*

1. ब्राह्मणों का श्वांस ______ है, जिससे कठिन से कठिन कार्य भी _____ हो जाता है।
°हिम्मत, _आसान_

2. *परमात्म मिलन-ज्ञान की विशेषता* है – *अविनाशी प्राप्तियां* होना। यह सब प्राप्तियां भविष्य में ही होंगी। _(सही / गलत)_
° नहीं। अभी संगमयुग की विशेषता है एक कदम उठाओ और *हजार कदम प्रारब्ध* में पाओ। (तो सिर्फ पुरूषार्थी नहीं लेकिन *श्रेष्ठ प्रारब्धी* हैं – इस *स्वरूप को सदा सामने* रखो। प्रारब्ध को देखकर सहज ही चढ़ती कला का अनुभव करेंगे।)
° “ *पाना था सो पा लिया* ” (यह गीत गाओ तो घुटके और झुटके खाने से बच जायेंगे।)

3. यह है ईश्वरीय युनिवर्सिटी, *ईश्वरीय विश्व विद्यालय* । कैसे?
° (ईश्वरीय विश्व विद्यालय) एक ही होता है, जो *ईश्वर* आकर खोलते हैं, जिससे *सारी विश्व का कल्याण* हो जाता है।
° (ईश्वरीय विश्व विद्यालय, वर्ल्ड युनिवर्सिटी।) *सारी युनिवर्स को चेंज किया जाता* है।

4. ____ होते हुए भी फिर भी बाप को भूल जाते हैं। बाप की ____, यह है पढ़ाई का तन्त। याद की यात्रा से _____ अवस्था को पाने में मेहनत लगती है, इसमें ही माया के विघ्न आते हैं।
°निश्चय, _याद_, _कर्मातीत_

5. बाप कहते हैं मैं इनका लोन लेता हूँ, इसलिए मेरा ____ अलौकिक जन्म कहा जाता है।अभी पार्ट है – विश्व को ____ बनाना। उनका नाम बड़ा अच्छा है – ____ गॉड फादर। बाप रचयिता है _____ का।
°दिव्य, _नया_, _हेविनली_, _स्वर्ग_

6. राइट रांग को समझाने वाला एक ही ______ होता है, जिसको ____ कहते हैं। बाप ही आकर हर एक को राइटियस बनाते हैं। राइटियस बनेंगे तो फिर मुक्ति में जाकर _____ में आयेंगे।
°राइटियस, _ट्रूथ_, _जीवनमुक्ति_

7. बाप ही आकर समझाते हैं, बाप को ज्ञान का सागर कहा जाता है तो जरूर ज्ञान देंगे ना। *प्रेरणा की तो बात होती नहीं*। _(सही / गलत)_
° *सही* (भगवान कोई प्रेरणा से समझाते हैं क्या। तुम जानते हो उनके पास सृष्टि के आदि-मध्य-अन्त का ज्ञान है। वह फिर तुम बच्चों को सुनाते हैं।)

8. *सच्चा श्री श्री 108 का टाइटिल* कईयों को मिल सकता। _(सही / गलत)_
° नहीं। *बाप को ही* श्री श्री 108 जगतगुरू कहा जाता है, जो 108 रत्नों को पास कराते। (8 रत्न गाये जाते हैं। वह पास विद् ऑनर होते हैं इसलिए उनको जपते हैं। फिर उनसे कम 108 की पूजा करते हैं।)

9. हर एक आत्मा की अपने ____ पर सवारी है। अभी तुम्हारी बुद्धि में 84 का ____ है। जानते हो अभी हम ____ जाते हैं, फिर ____ में आयेंगे।
°रथ, चक्र, _घर_, _स्वर्ग_

10. ड्रामा को भी तुम बच्चे जानते हो। तो *ड्रामा की कौन-सी विशेषताएं* आज बाबा ने सुनाई? (4)
° आदि से लेकर अन्त तक पार्ट बजाने नम्बरवार आते हो। यह *खेल चलता ही रहता* है। (ड्रामा शूट होता जाता है।)
° यह *एवर न्यु* है। (यह ड्रामा कभी पुराना नहीं होता है।)
° और सब नाटक आदि विनाश हो जाते हैं। (यह बेहद का *अविनाशी ड्रामा* है। इनमें सब *अविनाशी पार्टधारी* हैं। *अविनाशी खेल* वा माण्डवा देखो कितना बड़ा है।)
° बाप आकर पुरानी सृष्टि को फिर नया बनाते हैं। वह सब तुमको साक्षात्कार होगा। जितना नज़दीक आयेंगे फिर तुमको खुशी होगी। साक्षात्कार करेंगे। (कहेंगे अब पार्ट पूरा हुआ। *ड्रामा को फिर रिपीट* करना है। फिर *नयेसिर पार्ट बजायेंगे*, जो कल्प पहले बजाया है। इसमें ज़रा भी *फ़र्क नहीं हो सकता* है, इसलिए जितना हो सके तुम बच्चों को ऊंच पद पाना चाहिए।)

11. बाबा हम पढ़े-लिखे नहीं हैं। *मुख से कुछ निकलता नहीं*। यह कहना ठीक है। _(सही / गलत)_
° ऐसा तो होता नहीं। *मुख तो जरूर चलता ही है*। खाना खाते हो मुख चलता है ना। वाणी न निकले यह तो हो नहीं सकता। (बाबा ने बहुत सिम्पुल समझाया है। कोई *मौन में रहते तो भी ऊपर में इशारा देते* हैं कि उनको याद करो। दु:ख हर्ता सुख कर्ता वह एक ही दाता है।)

12. जबकि *इस पुरूषोत्तम संगमयुग पर ही* ज्ञान सागर परमात्मा शिवबाबा हमें उत्तम ते उत्तम पुरुष लक्ष्मी-नारायण बनाते (स्वर्ग के मालिक)। इसका भक्ति में कौन-सा *यादगार त्योहार* है?
° *पुरूषोत्तम मास* भी होता है। (सतयुग-त्रेता-द्वापर-कलियुग…… यह 4 युग तो हैं। पांचवा फिर है पुरूषोत्तम संगमयुग। इस युग में मनुष्य चेंज होते हैं। कनिष्ट से सर्वोत्तम बनते हैं।)

13. शास्त्रों में दिखाते – बड़ी प्रलय हुई। फिर नम्बरवन *श्रीकृष्ण पीपल के पत्ते पर अगूंठा चूसता सागर में* आया। इसका आध्यात्मिक रहस्य क्या है?
° *पहले-पहले ज्ञान सागर से निकला हुआ उत्तम ते उत्तम पुरूष श्रीकृष्ण* है। (ज्ञान सागर से स्वर्ग की स्थापना होती है। उनमें नम्बरवन पुरूषोत्तम यह श्रीकृष्ण है और यह है ज्ञान का सागर, पानी का नहीं। प्रलय भी होती नहीं।)

14. यज्ञ में कोई लाख *सालिग्राम* (हम आत्माओं का यादगार) भी बनाते हैं। इसका *आध्यात्मिक रहस्य* क्या है?
° क्योंकि *तुम सभी भारत की सेवा कर रहे* हो बाप के साथ। बाप की पूजा होती है तो बच्चों की भी पूजा होनी चाहिए। (यह नहीं जानते कि रूद्र पूजा क्यों होती है। बच्चे तो सब शिवबाबा के हैं। इस समय सृष्टि की कितनी आदमशुमारी है इसमें सब आत्मायें शिवबाबा के बच्चे ठहरे ना। परन्तु *मददगार सिर्फ तुम बनते*।)

15. यह पुरानी प्वाइंट बाबा फिर क्यों *रिपीट* करते?
° कई *बच्चे नये-नये आते* हैं तो बाप को फिर पुरानी प्वाइंट रिपीट करनी पड़ती हैं।

16. कौन-सी बात सोचने वा बोलने से *कभी भी उन्नति* नहीं हो सकती?
° *ड्रामा में होगा तो पुरूषार्थ कर लेंगे*। ड्रामा करायेगा तो कर लेंगे। (यह कहना ही रांग है। तुम जानते हो अभी जो हम पुरुषार्थ कर रहे हैं, यह भी ड्रामा में नूँध है। पुरुषार्थ करना ही है।)

17. कोई कुछ *खाते-पीते नहीं* हैं, *आग-पानी से चले जाते*। यह तो बहुत अच्छी बात है। _(सही / गलत)_
° नहीं (कोई सारी आयु खाता-पीता नहीं फिर भी क्या? *प्राप्ति तो कुछ नहीं* है ना। झाड़ को भी खाना तो मिलता है ना नेचुरल।)
° हमको तो इस सहज *राजयोग से जन्म-जन्मान्तर* का फायदा है। जन्म-जन्मान्तर के लिए *दु:खी से सुखी* बनाते। बाप कहते हैं – बच्चे, ड्रामा अनुसार हम तुमको गुह्य बातें सुनाता हूँ।)

18. कई मुक्ति को ही मोक्ष कहते, इसको ही ऊंच पद समझते (और जीवन-मुक्ति समझते जो जीवन में रहकर अच्छा कर्म करते)। बाकी *कर्मबन्धन से मुक्त हो जाना* वो तो *कोटों में से कोई विरला* ही होता। _(सही / गलत)_
° *नहीं* , यह है उन्हों की अपनी मत। *हम तो परमात्मा द्वारा जान चुके हैं* पहले विकारी कर्मबन्धन से मुक्त होने के बाद ही आदि-मध्य-अन्त दु:ख से छूट सकेंगे। (पहले *जब ईश्वरीय नॉलेज को धारण करे* तब ही उस स्टेज पर पहुँच सके, और उस *स्टेज पर पहुँचाने वाला स्वयं परमात्मा* चाहिए क्योंकि मुक्ति जीवनमुक्ति देते वह हैं।)

19. बाप ही *पुरानी दुनिया* नर्क रचेंगे। _(सही / गलत)_
° गलत ( *मकान 🏡 हमेशा नया बनाया जाता* है। शिवबाबा नई दुनिया रचते हैं ब्रह्मा द्वारा।)

20. वानप्रस्थी बनना अर्थात् गुरू द्वारा वाणी से परे जाने का पुरूषार्थ करना। परन्तु *वापिस कोई जा नहीं सकते*। _(सही / गलत)_
° *सही* (क्योंकि विकारी भ्रष्टाचारी हैं। यह लक्ष्मी-नारायण निर्विकारी श्रेष्ठाचारी हैं। कुमारियां भी निर्विकारी हैं – इसलिए उनके आगे माथा टेकते हैं।)

21. शंकर *आंख खोलते हैं तो विनाश* होता है। _(सही / गलत)_
° यह कहना भी ठीक *नहीं* है। (बाप कहते हैं – न मैं विनाश कराता हूँ, न वह करते हैं, यह रांग है। देवतायें थोड़ेही पाप करेंगे। अब शिवबाबा बैठ यह बातें समझाते हैं।)

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