*Om Shanti*
*Answers from Sakar Murli 04-11-2020*
1. शुभ ____ कारण को निवारण में परिवर्तन कर देती है।
° _भावना_
2. जो *योगयुक्त, युक्तियुक्त* सेवाधारी हैं वह *सेवा करते भी सदा उपराम रहते* हैं। ऐसे नहीं सेवा ज्यादा है इसलिए अशरीरी नहीं बन सकते। तो इसके लिए कौन-सी युक्तियां अपना सकते? (2)
° याद रहे कि *मेरी सेवा नहीं, बाप ने दी है* तो निर्बन्धन रहेंगे। *ट्रस्टी* हूँ, *बंधनमुक्त* हूँ ऐसी प्रैक्टिस करो।
° *अति के समय अन्त की स्टेज, कर्मातीत अवस्था* का अभ्यास करो। (जैसे बीच-बीच में संकल्पों की ट्रैफिक को कन्ट्रोल करते हो, ऐसे)। तब अन्त के समय पास विद आनर बन सकेंगे।
3. हमे किस बात की *बहुत खुशी* रहनी चाहिए? (2)
° *ओहो! शिवबाबा हमको पढ़ाते हैं।* यही बैठ चिंतन करो। भगवान हमको पढ़ाते हैं, *वाह तकदीर वाह!* ऐसे-ऐसे विचार करते मस्ताना हो जाना चाहिए। वाह तकदीर वाह! बेहद का बाप हमको मिला है, हम बाबा को ही याद करते हैं।)
° तुम बच्चों को तो अभी बड़ी खुशी होती है कि हम अब *कृष्ण की राजधानी में जाते* हैं। हम भी *प्रिन्स-प्रिन्सेज* बन सकते हैं। (सब तो पहले नम्बर में नहीं आयेंगे। नम्बरवार माला बनेगी ना। बाप कहते हैं-बच्चे, खूब पुरूषार्थ करो। यहाँ तुम आये हो नर से नारायण बनने। प्यार भी सबका कृष्ण पर है, झूले में झुलाते हैं।)
4. तुम्हारा _____ है मेरा तो एक दूसरा न कोई। ____ -मोहा बनना है। बाप को याद करना माना ____ पर चढ़ना। शरीर को भूल आत्मा को चले जाना है बाप की ____ में।
° _अन्जाम (वायदा)_, _नष्टो_, _फाँसी_, _याद_
5. कल्प-कल्प के संगमयुग पर आकर इस पाठशाला द्वारा बाबा हमें पुरूषार्थ कराकर लक्ष्मी-नारायण विश्व का मालिक बनाते है। अब शिवबाबा तो परफेक्ट है, उसमें कोई भी कट नहीं। तो हम पवित्र आत्मा जो थी, उसमें कट लगी है। तो कट कैसे उतरे?
° *जितना-जितना बाप को याद करेंगे*, कट उतरती जायेगी।(जितना योग में रहेंगे उतना कट उतरेगी। तुमको अब ज्ञान सागर से ज्ञान मिल रहा है। तुम्हारी बुद्धि में एम ऑब्जेक्ट है।)
° *5 विकारों को निकालना* है। (हम देवता थे। सतयुग में यह लक्ष्मी-नारायण पूज्य थे, अब फिर पूज्य बन रहे हैं, पूज्य सतोप्रधान आत्मायें, उनके शरीर भी सतोप्रधान थे।)
° बाबा साफ कहते हैं-बच्चे, *चार्ट रखो* कि सारे दिन में हम कितना समय याद करते हैं? (याद की यात्रा, यह अक्षर राइट है। याद करते-करते कट निकलते-निकलते अन्त मती सो गति हो जायेगी।)
° बाप मीठे-मीठे बच्चों को राय देते हैं – चार्ट लिखो और *एकान्त में* बैठ ऐसे *अपने साथ बातें* करो। (यहाँ तो एकान्त बहुत अच्छी है इसलिए मधुबन की महिमा है।)
6. जितना बाप को याद करेंगे उतना बाप से ____ जुटेगा, खुशी भी होगी। पढ़ाई से नहीं, ____ से लव जुटेगा। भारत का है ही प्राचीन योग, जिससे आत्मा ____ बन अपने धाम चली जायेगी।
° _लव_, _याद_, _पवित्र_
7) ………. यह भी *मनमनाभव* है ना। क्या?
° पवित्रता धारण करनी है। *हम यह बनते हैं*, दैवीगुण धारण करते हैं। यह भी मनमनाभव है ना। (बाबा हमको यह बनाते हैं। यह तो प्रैक्टिकल अनुभव की बात है।)
8. यह बैज तो ____ से लगा दो। भगवान की _____ पर हम यह बन रहे हैं। इनको देखकर उनको ____ करते रहो। बाबा की _____ से हम यह बनते हैं। बाबा आपकी तो _____ है, बाबा हमको आगे थोड़ेही पता था कि आप हमको विश्व का मालिक बनायेंगे।
° _छाती_, _श्रीमत_, _प्यार_,
_याद_, _कमाल_
9. बाप तुम बच्चों को पढ़ाते हैं, तुम ही पढ़ते हो। फिर सतयुग में यह ____ होगा नहीं। वहाँ है प्रालब्ध। बाप ____ पर आकर यह नॉलेज सुनाते हैं फिर तुम पद पा लेते हो। यह टाइम ही है बेहद के बाप से बेहद का ____ पाने का इसलिए बच्चों को _____ नहीं करनी चाहिए, माया-वश। बाप तो तदबीर कराते हैं। तकदीर में कितना फ़र्क पड़ जाता है। डबल सिरताज बनने के लिए _____ करना पड़े।
° _ज्ञान_, _संगम_, _वर्सा_, _ग़फलत_, _पुरूषार्थ_
10. (धारणा) किसी भी बात में ____ नहीं उठाना है, ____ नहीं करनी है। प्रिन्स बनने वाला हूँ, यह _____ खुशी में रहना। अपनी ____ सर्विस करनी है।
° _संशय_, _ईर्ष्या_, _आन्तरिक_, _गुप्त_
11. अभी बाप कहते हैं – ड्रामा अनुसार तुम्हारा _____ है। _____ अवश्य स्थापन होनी है। जितना कल्प पहले _____ किया है, उतना ही वह करेंगे जरूर। तुम ____ हो देखते रहते हो। यह प्रदर्शनियाँ आदि तो बहुत देखते रहेंगे। तुम्हारी _____ मिशन है। यह है ______ गॉड फादरली मिशन।
° _पार्ट_, _राजधानी_, _पुरूषार्थ_, _साक्षी_, _ईश्वरीय_, _इनकारपोरियल_
12. बाप कहते हैं _____ व्यवहार में भल रहो। लौकिक बाप का _____ भी बच्चों को उतारना है। ____ फुल चलना है।
° _गृहस्थ_, _कर्ज़ा_, _लॉ_
13. गाते भी हैं आप सर्वगुण सम्पन्न…… हैं। हम निर्गुण हैं। अब ____ कहते हैं फिर से ऐसे _____ -वान बनो।
° _बाप_, _गुण_
14. वह तो पण्डे लोग *यात्रा पर ले जाते* हैं। यहाँ तो……….. क्या?
° *आत्मा खुद यात्रा करती* है। अपने परमधाम जाना है क्योंकि ड्रामा का चक्र अब पूरा होता है। (यह भी तुम जानते हो कि यह बहुत गन्दी दुनिया है। परमात्मा को तो कोई भी नहीं जानते, न जानेंगे इसलिए कहा जाता है विनाश काले विपरीत बुद्धि। उन्हों के लिए तो यह नर्क ही स्वर्ग के समान है। उन्हों की बुद्धि में यह बातें बैठ न सकें।)
15. *कौन-सा बल* क्रिमिनल आंखों को फौरन ही बदल देता है?
° *ज्ञान के तीसरे नेत्र का बल* जब आत्मा में आ जाता है तो क्रिमिनलपन समाप्त हो जाता है। बाप की श्रीमत है-बच्चे, तुम *सब आपस में भाई-भाई* हो, भाई-बहन हो, तुम्हारी आंखें कभी भी क्रिमिनल हो नहीं सकती। (तुम सदैव याद की मस्ती में रहो। वाह तकदीर वाह! हमें भगवान पढ़ाते हैं। ऐसे विचार करो तो मस्ती चढ़ी रहेगी।)
16. निराकार तो जरूर कोई ____ में आयेगा ना। _____ द्वारा आदि सनातन देवी-देवता धर्म की स्थापना होती है। यह है ही बहुत जन्मों के _____ का जन्म। बाप कहते हैं मैं इनमें _____ कर तुमको राजयोग सिखला रहा हूँ। इनको तो नशा रहता है – हम शिवबाबा का बच्चा _____ हूँ। बाबा विश्व का रचयिता है तो जरूर हम भी स्वर्ग का मालिक बनेंगे। परन्तु जितना तुम बच्चे _____ में रह सकते हो, उतना हम नहीं। बाबा को तो बहुत ख्याल करने पड़ते हैं।
° _शरीर_, _ब्रह्मा_, _अन्त_, _प्रवेश_, _अकेला_, _याद_
17. मनुष्य *ईश्वर प्रति* क्या नहीं जानते? (2)
° ईश्वर *सर्वव्यापी कह मेरी ग्लानि करते* रहते हैं, ड्रामा प्लैन अनुसार।
° मनुष्य यह भी नहीं समझते कि यह ड्रामा है। इसमें क्रियेटर, डायरेक्टर भी ड्रामा के वश हैं। भल सर्वशक्तिमान् गाया जाता है – परन्तु तुम जानते हो *वह भी ड्रामा के पट्टे पर चल रहे* हैं। (बाबा जो खुद आकर बच्चों को समझाते हैं, कहते हैं मेरी आत्मा में *अविनाशी पार्ट नूँधा हुआ* है उस अनुसार पढ़ाता हूँ। जो कुछ समझाता हूँ, ड्रामा में नूँध है।)
18. अभी तुम बच्चों की बेहद के बाप से प्रीत है। एक बाप के सिवाए और कोई याद न रहे। एकदम लाइन क्लीयर होनी चाहिए। अब हमारे 84 जन्म पूरे हुए। अब हम बाप के फरमान पर पूरा चलेंगे। काम महाशत्रु है, उनसे हार नहीं खानी है। *अगर हार हुई*, तो क्या हालत होंगी? (3)
° *पश्चाताप्* कर क्या करेंगे? एकदम *हड्डी-हड्डी टूट* जाती है। *बहुत कड़ी सज़ा* मिल जाती है।
° *कट* उतरने बदले और ही जोर से *चढ़ जाती* है।
° *योग लगेगा नहीं* । याद में रहना बड़ी मेहनत है। (बहुत गप भी मारते हैं-हम तो बाप की याद में रहते हैं।)
