Answers from Sakar Murli 05-09-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 05-09-2020*

1. सर्व शक्तियों से सम्पन्न रहना यही ब्राह्मण स्वरूप की ______ है।
°विशेषता

2..हर समय *बाप के भिन्न-भिन्न सम्बन्धों को अनुभव* करने पर कौन-सी वन्डरफुल बातें वरदान में सुनाई? (4)
° यही *सहज योग* है।
° बाप सदा *सम्बन्ध निभाने लिए बंधे हुए* हैं।
° सारे कल्प में *अभी ही* सर्व अनुभवों की खान प्राप्त होती है (इसलिए सदा सर्व सम्बन्धों का सहयोग लो और निरन्तर योगी, सहजयोगी बनो।)
° जो सर्व सम्बन्धों की अनुभूति वा प्राप्ति में मग्न रहता है, वह पुरानी *दुनिया के वातावरण से सहज ही उपराम* हो जाता।

3. *नई दुनिया की देहली* कैसी थी? (3)
° देहली *परिस्तान* थी, *जमुना का कण्ठा* था। *लक्ष्मी-नारायण का राज्य* था। (चित्र भी हैं। लक्ष्मी-नारायण को स्वर्ग का ही कहेंगे। तुम बच्चों ने साक्षात्कार भी किया है कि कैसे स्वंयवर होता है। यह सब प्वाइंट्स बाबा रिवाइज़ कराते हैं।)

4. हमे इस पुरानी दुनिया से निकल फिर नई दुनिया में आना है। तो इस नई दुनिया को *हद की दुनिया* भी कह सकते। _(सही / गलत)_
° *सही* (क्योंकि वह *बहुत छोटी* है, वहाँ है एक धर्म। अनेक धर्म, अनेक मनुष्य होने से बेहद हो जाती। *वहाँ तो है एक धर्म*, थोड़े मनुष्य। एक धर्म की स्थापना के लिए आना पड़ता है।)

5. देवताओं को सब जानते, वो सम्पूर्ण ______ होने के कारण सम्पूर्ण विश्व के मालिक बनते हैं। 2500 वर्ष में जो आये हैं, उनको जानते हैं परन्तु उनसे पहले जो _________ थे, उनको कितना समय हुआ, कुछ नहीं जानते। हर एक को अपना धर्म _____ लगता है। तुम समझते हो यह बेहद के बाप की ______ है।
°निर्विकारी, आदि सनातन देवी-देवता, प्यारा, फैमिली

6. इस *अन्तिम शरीर* वा जन्म की कौन-सी *विशेषताएं* है? (3)
° तुम्हारी स्टूडेन्ट लाइफ है ना। यह अन्तिम जन्म *बहुत वैल्युबल* है फिर शरीर बदल हम देवता बन जायेंगे।
° तुम्हारी आत्मा इस रथ में बैठ पढ़ती है। आत्मा पवित्र बन जाती इसलिए *बलिहारी इस तन की* है।
° इस पुराने शरीर द्वारा ही तुम शिक्षा पाते हो। *शिवबाबा के बनते* हो। तुम जानते हो हमारी *जीवन अब वर्थ पाउण्ड बन रही* है। (जितना पढ़ेंगे उतना ऊंच पद पायेंगे।)

7. तुम बेहद के स्कूल में बैठे हो। तुम ही फिर ______ बनेंगे। तुम समझ सकते हो ऊंच ____ कौन पा सकते हैं। उनकी ________ क्या होनी चाहिए। याद की यात्रा है मुख्य। इनको ही भारत का प्राचीन _____ कहते हैं जिससे तुम पतित से ______ बनते हो, स्वर्गवासी तो सब बनते हैं फिर है पढ़ाई पर मदार।
°देवता, पद, क्वालिफिकेशन, योग, पावन

8. *आसुरी मत और ईश्वरीय मत* में क्या अन्तर है? (3)
° आसुरी मत से हम उतरती कला में जाते हैं। ईश्वरीय मत से *चढ़ती कला* में जाते हैं।
° ईश्वरीय मत *देने वाला एक* है, आसुरी मत देने वाले अनेक हैं। (माँ-बाप, भाई-बहन, टीचर-गुरू कितनों की मत मिलती है।)
° अभी तुमको एक की मत मिलती है जो *21 जन्म काम आती* है। (तो ऐसे श्रीमत पर चलना चाहिए ना। जितना चलेंगे उतना *श्रेष्ठ पद* पायेंगे।)

9. *अच्छा प्वाइंट्स याद नहीं* पड़ती, तो क्या करना है? (2)
° *बाबा को याद* करो।
° बाप भूल जाता है तो *टीचर को याद* करो। (टीचर जो सिखलाते हैं वह भी जरूर याद आयेगा ना। टीचर भी याद रहेगा, नॉलेज भी याद रहेगी। उद्देश्य भी बुद्धि में है।)

10. हम इस बेहद नाटक के राज़ को समझते है। इस समय जो कुछ प्रैक्टिकल में होता है उसका ही फिर भक्ति मार्ग में त्योहार मनाते हैं। बाबा ने कहा विचार कर *त्योहारों को नम्बरवार लिखो*, सही क्रम में। _(गीता जयंती, शिव जयंती, नारायण जयंती)_
° ऊंच ते ऊंच भगवान *शिवबाबा की जयन्ती* कहेंगे। (वह जब आये तब फिर और त्योहार बनें।)
° शिवबाबा पहले-पहले आकर गीता सुनाते हैं अर्थात् आदि-मध्य-अन्त का ज्ञान सुनाते हैं। योग भी सिखाते हैं। तो पहले-पहले बाप आया शिवजयन्ती हुई *फिर कहेंगे गीता जयन्ती*। (आत्माओं को ज्ञान सुनाते हैं तो गीता जयन्ती हो गई।)
° पहले बाप आते हैं, वही आकर राजयोग सिखलाते हैं तो कहेंगे शिवजयन्ती सो फिर गीता जयन्ती *फिर नारायण जयन्ती*। (वह तो हो जाता सतयुग।)

11. रचता बाप ने समझाया है कि तुम बच्चों ने ऐसे _____ बजाया है। अभी तुमको बेहद के नाटक की ______ मिलती है। यहाँ तुम आत्माओं को घर से _______ आना होता है। यहाँ आकर यह शरीर रूपी ______ पहनते हो। हर एक को अपना-अपना ______ मिला हुआ है।
°पार्ट, नॉलेज, अशरीरी, कपड़े, पार्ट

12. निराकार-रूहानी बाप हमें शरीर द्वारा समझाते, हम निराकारी-रूहानी बच्चे भी शरीर द्वारा बाप के सम्मुख बैठी हैं।(आत्मा-परमात्मा अलग रहे…..।) तो हम जिस बाप के सामने बैठे हैं, उनकी *महिमा* क्या है? उनको *परमपिता* वा *दु:ख हर्ता सुख कर्ता* क्यों कहते?
° ऊंच ते ऊंच बाप को ही *भगवान, ईश्वर, प्रभु, परमात्मा* भिन्न नाम दिये हैं।
° बाप है मुख्य क्रियेटर, *डायरेक्टर* , डायरेक्शन भी देते हैं। श्रीमत देते हैं।
° *परमपिता* अर्थात् वह सभी का पिता है एक।
° बाबा *दु:ख हर्ता सुख कर्ता* है। सुख मिलता है सुखधाम में। शान्ति मिलती है शान्तिधाम में। यहाँ है ही दु:ख। (यह ज्ञान तुमको मिलता है संगम पर।)

13. बाप *प्रेरणा* से कार्य नहीं करते उनका अवतरण होता है, यह किस बात से सिद्ध होता है?
° बाप को कहते ही हैं *करनकरावनहार*। प्रेरणा का तो अर्थ है विचार। प्रेरणा से कोई *नई दुनिया की स्थापना* नहीं होती है। बाप बच्चों से स्थापना कराते हैं, कर्मेन्द्रियों बिगर तो कुछ भी करा नहीं सकते इसलिए उन्हें *शरीर का आधार* लेना होता है।

14. ऊंच ते ऊंच भगवान ही है, जिसने _____ को ऊंच ते ऊंच बनाया फिर नीच ते नीच रावण ने बनाया। बाप _____ बनाते फिर रावण सांवरा बनाते। बाप _____ देते हैं। वह तो है ही वाइसलेस। ______ की महिमा गाते हैं सर्वगुण सम्पन्न……
°कृष्ण, गोरा, वर्सा, देवताओं

15. लौकिक बाप से वर्सा मिलता है। पारलौकिक बाप को भी दु:ख व सुख में याद करते हैं। तो *प्रजापिता ब्रह्मा (अलौकिक बाप)*) को क्यों याद करें?
° तुम जानते हो हम *ब्रह्मा द्वारा* शिवबाबा से वर्सा ले रहे हैं। (जैसे हम पढ़ते हैं, यह रथ भी निमित्त बना हुआ है। बहुत जन्मों के अन्त में इनका शरीर ही *भाग्यशाली रथ* बना है।)

16. बाप संगमयुग पर आते। ब्रह्मा के द्वारा ब्राह्मण। ब्रह्मा के बच्चे तो सब ठहरे। वह है ग्रेट ग्रेट ग्रैन्ड फादर। तो ब्रह्मा बाबा की पॉइंट *कैसे समझा सकते?*
° बोलो, *प्रजापिता ब्रह्मा का नाम नहीं सुना है?* परमपिता परमात्मा ब्रह्मा द्वारा ही सृष्टि रचेंगे ना। (ब्राह्मण कुल है। ब्रह्मा मुख वंशावली भाई-बहिन हो गये। यहाँ राजा-रानी की बात नहीं। यह ब्राह्मण कुल तो संगम का थोड़ा समय चलता है।)

17. बाप आते ही तब हैं जब नई दुनिया की *स्थापना* और पुरानी दुनिया का *विनाश* होना है। इसमें *पहले क्या कहेंगे?*
° पहले हमेशा कहना चाहिए *नई दुनिया की स्थापना*। (पहले पुरानी दुनिया का विनाश कहना रांग हो जाता है। अभी तुमको बेहद के नाटक की नॉलेज मिलती है।)

18. शिव जयन्ती कब हुई वह भी पता नहीं है, ज्ञान सुनाया, जिसको गीता कहा जाता है फिर _____ भी होता है। इसके लिए यह _______ लड़ाई है।
°विनाश, महाभारत

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