Answers from Sakar Murli 05-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 05-10-2020*

1. परमात्म प्यार ❤️ में खो जाओ तो दु:खों की _____ भूल जायेगी।
°दुनिया

2. ब्राह्मण परिवार की विशेषता है *अनेक होते भी एक* । इस एकता द्वारा ही सारे विश्व में *एक धर्म, एक राज्य की स्थापना* होती है। तो अब क्या करना है?
° इसलिए विशेष अटेन्शन देकर *भिन्नता को मिटाओ* और *एकता को लाओ* तब कहेंगे सच्चे सेवाधारी। (सेवाधारी स्वयं प्रति नहीं लेकिन सेवा प्रति होते हैं। स्वयं का सब कुछ सेवा प्रति स्वाहा करते हैं, जैसे साकार बाप ने सेवा में हड्डियां भी स्वाहा की ऐसे आपकी हर कर्मेन्द्रिय द्वारा सेवा होती रहे।)

3. शिवबाबा हमारे साथ *कौन-सा व्यापार* करते?
° *पुराने शरीर आदि लेकर नया देते* हैं, सबको रास्ता बताते हैं। (यह भी धन्धा उनको करना है। यह व्यापार तो बहुत बड़ा है।)

4. और *हमे इस व्यापार में* क्या करना है? (3)
° जितना तुम *बाप की याद* में रहेंगे, *कमाई* में आत्मा को बहुत मज़ा आयेगा। (कमाई के लिए मनुष्य रात में भी जागते हैं। सीज़न में सारी रात भी दुकान खुला रहता है। तुम्हारी कमाई रात को और सवेरे को बहुत अच्छी होगी।)
° *स्वदर्शन चक्रधारी* बनेंगे, *त्रिकालदर्शी* बनेंगे। *21 जन्म के लिए धन* इकट्ठा करते हैं। (मनुष्य साहूकार बनने के लिए पुरूषार्थ करते हैं। तुम भी बाप को याद करेंगे तो विकर्म विनाश होंगे, बल मिलेगा। याद की यात्रा पर नहीं रहेंगे तो बहुत घाटा पड़ जायेगा क्योंकि सिर पर पापों का बोझा बहुत है। अब जमा करना है।)
° *विचार सागर मंथन कर रत्न निकालने* हैं। (बाबा कहते हैं जितना हो सके अपनी कमाई करनी है, यही काम आनी है। *एकान्त में* बैठ बाप को याद करना है।)

5. बाप पहले-पहले समझाते मीठे-मीठे बच्चों जब यहाँ बैठते हो, तो अपने को आत्मा समझ बाप को याद करते रहो और कोई तरफ बुद्धि नहीं जानी चाहिए। *आत्मा क्यों समझना* है? (3)
° तुम बच्चे जानते हो *हम आत्मा हैं* । (पार्ट हम आत्मा बजाती हैं इस शरीर द्वारा। आत्मा अविनाशी, शरीर विनाशी है। तो तुम बच्चों को देही-अभिमानी बन बाप की याद में रहना है।)
° हम आत्मा हैं *चाहें तो इन आरगन्स से काम लेवें वा न लेवें*। (अपने को शरीर से अलग समझना चाहिए। बाप कहते हैं अपने को आत्मा समझो। देह को भूलते जाओ। *हम आत्मा इन्डिपिन्डेंट हैं*।)
° यह पढ़ाई है, अपने को आत्मा न समझने से *बाप-टीचर-गुरू सबको भूल जाते* हैं।

6. *शरीर का भान* छोड़ो। क्यों? (2)
° यह पुराना शरीर है ना। *पुरानी चीज़ को छोड़ा जाता है ना*। अपने को अशरीरी समझो।
° अभी तुमको बाप को याद करते-करते बाप के पास जाना है। ऐसे करते-करते फिर तुमको आदत पड़ जायेगी। अभी तो तुमको *घर जाना है फिर इस पुरानी दुनिया को याद क्यों* करें।

7. भक्ति मार्ग में भी ब्रह्म तत्व को या कोई शिव को भी याद करते हैं। परन्तु वह याद कोई *यथार्थ नहीं* है। _(सही / गलत)_
° सही ( *बाप का परिचय ही नहीं* तो याद कैसे करें। तुमको अब बाप का परिचय मिला है।)

8. हमको सिवाए एक बाप के और कोई को ____ नहीं करना है। हम आत्मा का ___ रहना है अब बाप के साथ। ____ में बैठ ऐसे अपने साथ मेहनत करनी है। इसमें है ___ की बात। _____ तो है सिखलाने वाला। उनको तो पुरूषार्थ नहीं करना है। यह बाबा पुरूषार्थ करते हैं, वह फिर तुम बच्चों को भी समझाते हैं। गृहस्थ व्यवहार में तो रहना ही है। बाकी ____ निकालना है। स्टूडेण्ट को पढ़ाई का ____ होता है ना।
°याद , योग, _एकान्त_, _बुद्धि_, _शिवबाबा_, _टाइम_, _शौक_

9. बाबा ने कहा सवेरे-सवेरे उठकर *एकान्त में अपने साथ बातें* करते रहो। *विचार सागर मंथन* करो, बाप को याद करो, इससे तुमको खुशी भी रहेगी। तो कैसी-कैसी बातें कर सकते? (4)
° जितना हो सके ऐसे बैठकर विचार करो। *अभी हमको जाना है अपने घर*। इस शरीर को तो यहाँ छोड़ना है।
° बाप को *याद करने से ही विकर्म विनाश होंगे* और आयु भी बढ़ेगी। अन्दर यह चिन्तन चलना चाहिए।
° बाबा हम *अभी आया कि आया आपकी सच्ची गोद में*। वह है रूहानी गोद।
° तो ऐसे-ऐसे अपने साथ बातें करनी चाहिए। बाबा आया हुआ है। *बाबा कल्प-कल्प आकर हमको राजयोग सिखलाते* हैं। (बाप कहते हैं – मुझे याद करो और चक्र को याद करो। स्वदर्शन चक्रधारी बनना है।)

10. *एकान्त का अर्थ* क्या है? एकान्त में बैठ तुमको *कौन-सा अनुभव* करना है?
° *एकान्त* का अर्थ है *एक* की याद में इस शरीर का *अन्त* हो अर्थात् एकान्त में बैठ ऐसा अनुभव करो कि मैं आत्मा इस शरीर (चमड़ी) को छोड़ बाप के पास जाती हूँ। (कोई भी याद न रहे। बैठे-बैठे अशरीरी हो जाओ। जैसेकि हम इस शरीर से मर गये। बस हम आत्मा हैं, शिव बाबा के बच्चे हैं, इस प्रैक्टिस से देह भान टूटता जायेगा।)

11. *जीते जी मरना* किसे कहा जाता है?
° एकान्त में बैठ अब ऐसा अभ्यास करो जो *अनुभव हो मैं शरीर से भिन्न आत्मा हूँ* , इसको ही जीते जी मरना कहा जाता है।

12. फुर्सत है तो मन्दिरों में भी बैज सहित बहुत सर्विस कर सकते। ( *रूहानी मिलट्री*!)। क्या समझा सकते?
° तुम लिखते भी हो – हम *स्वर्ग* की स्थापना कर रहे हैं। *आदि सनातन देवी-देवता धर्म* था, अब नहीं है जो फिर स्थापन करते हैं। यह *लक्ष्मी-नारायण* एम-ऑब्जेक्ट है ना। (लक्ष्मी-नारायण सिर्फ एक तो नहीं थे, उन्हों की राजधानी थी ना। यह *स्वराज्य* स्थापन कर रहे हैं। अब बाप कहते हैं मन-मनाभव। बाप को याद करो तो विकर्म विनाश होंगे।)

13. एम ऑब्जेक्ट कितनी ___ है। एक राज्य, एक धर्म था, बहुत साहूकार थे। मनुष्य चाहते हैं एक राज्य, एक धर्म हो। मनुष्य जो चाहते हैं सो अब _____ दिखाई पड़ते हैं फिर समझेंगे यह तो ठीक कहते हैं। 100 प्रतिशत पवित्रता, सुख, शान्ति का राज्य फिर से _____ कर रहे हैं फिर तुमको खुशी भी रहेगी। याद में रहने से ही ____ लगेगा। शान्ति में रह थोड़े ____ ही बोलने हैं। जास्ती आवाज़ नहीं।
°क्लीयर,आसार,स्थापन,तीर,_अक्षर_

14. कोई समय यह ट्रांसलाइट का चित्र बैटरी सहित उठाकर _____ देंगे और सबको कहेंगे, यह राज्य हम स्थापन कर रहे हैं। यह चित्र सबसे फर्स्टक्लास है। यह चित्र बहुत ______ हो जायेगा। यह गोला, झाड़ आदि के चित्र कम थोड़ेही हैं। एक दिन तुम्हारे पास यह सब चित्र _______ के बन जायेंगे। फिर सब कहेंगे हमको ऐसे चित्र ही चाहिए। इन चित्रों से फिर _____ मार्ग की सर्विस हो जायेगी।
°परिक्रमा, _नामीग्रामी_, _ट्रांसलाइट_, _विहंग_

15. ____ भी तुम सौगात देते रहो। शिवबाबा का भण्डारा तो सदा भरपूर है। आगे चलकर बहुत सर्विस होगी। ____ भी अच्छे हों जो मनुष्य पढ़कर जागें। बच्चे वृद्धि को पाते रहते हैं। इस लक्ष्मी-नारायण के चित्र को देखने से ही समझ में आ जाता है – शिव-बाबा यह ____ दे रहे हैं। _____ की स्थापना करने वाला बाप ही है।
°लिटरेचर, _स्लोगन_, _वर्सा_, _सतयुग_

16. तुम्हारे पास बच्चे इतने आयेंगे जो ____ नहीं रहेगी। ढेर आयेंगे। बहुत खुशी होगी। दिन-प्रतिदिन तुम्हारा ____ बढ़ता जायेगा। ड्रामा अनुसार जो फूल बनने वाले होंगे उनको ___ होगा।
°फुर्सत, _फोर्स_, _टच_

17. तुम खुदाई ______ हो ना। सच्ची-सच्ची बात बाबा पहले से ही बता देते हैं – क्या-क्या करना है। ऐसे ____ ले जाने पड़ेंगे। सीढ़ी का भी ले जाना पड़े। ड्रामा अनुसार स्थापना तो होनी ही है। बाबा सर्विस के लिए जो _____ देते हैं, उस पर ध्यान देना है। बाबा कहते हैं ____ किस्म-किस्म के लाखों बनाओ। ट्रेन की टिकेट लेकर 100 माइल तक सर्विस करके आओ। एक ____ से दूसरे में, फिर तीसरे में, बहुत सहज है। बच्चों को सर्विस का ____ रहना चाहिए।
°खिदमतगार, _चित्र_, _डायरेक्शन_, _बैजेस_, _डिब्बे_, _शौक_

18. बाप भी है ____ आत्मा। उनको शरीर तो है नहीं। अभी इस ____ में बैठ तुमको समझाते हैं। यह वन्डरफुल बात है। भागीरथ पर विराजमान होंगे तो जरूर दूसरी ____ है। बहुत जन्मों के अन्त का जन्म इनका है। नम्बरवन पावन वही फिर नम्बरवन पतित बनते हैं।
°परम, _शरीर_, _आत्मा_

19. *ब्रह्मा बाबा* अपने को भगवान, विष्णु आदि तो कहते नहीं। _(सही / गलत)_
° सही ( *यहाँ एक भी आत्मा पावन है नहीं*, सब पतित ही हैं।)

20. बाबा इनकी *बुद्धि को टच* करो। _(सही / गलत)_ (2)
° टच कोई *बाबा थोड़ेही करते* हैं। (समय पर आपेही टच होगा। बाप तो रास्ता बतायेंगे ना।)
° बहुत बच्चियां लिखती हैं – हमारे पति की बुद्धि को टच करो। ऐसे सबकी बुद्धि को टच करेंगे *फिर तो सब स्वर्ग में* इकट्ठे हो जायें। पढ़ाई की ही मेहनत है।

21. और धर्मों की स्थापना और *दैवी झाड़ की स्थापना 🌱* में क्या अन्तर है?
° और धर्मों में *ऊपर से आते* हैं। (जैसेकि झाड़ स्थापन हुआ ही पड़ा है, इसमें फिर नम्बरवार आते जायेंगे, वृद्धि को पाते जायेंगे। तकलीफ महिमा कुछ नहीं। धर्म स्थापक के पिछाड़ी आते रहते हैं।)
° यहाँ तो बाप भविष्य देवी-देवता धर्म की स्थापना कर रहे हैं। *संगमयुग पर नया सैपलिंग 🌱लगाते* हैं ना। (पहले पौधों को गमले में लगाकर फिर नीचे लगा देते हैं। वृद्धि होती जाती है।) तुम भी *अब पौधा लगा रहे हो फिर सतयुग में वृद्धि को पाए राज्य-भाग्य* पायेंगे। तुम नई दुनिया की स्थापना कर रहे हो।

22. समझते हैं हम बहुत सुधार कर रहे। *5 वर्ष के अन्दर इतना अनाज* होगा जो अनाज की कभी तकलीफ नहीं होगी। और तुम क्या जानते हो?
° ऐसी हालत होगी जो अन्न खाने के लिए नहीं मिलेगा। ऐसे नहीं अनाज कोई सस्ता होगा।
(तुम बच्चे जानते हो हम 21 जन्म के लिए अपना राज्य-भाग्य पा रहे हैं। यह *थोड़ी बहुत तकलीफ* तो सहन करनी ही है। कहा जाता है *खुशी जैसी खुराक नहीं*। अतीन्द्रिय सुख गोप-गोपियों का गाया हुआ है।)

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