*Om Shanti*
*Answers from Sakar Murli 06-08-2020*
1. _____ की शमा चारों ओर जलाओ तो बाप को सहज देख सकेंगे।
°पवित्रता
2. अभी तुम जानते हो – हम कितने साहूकार थे। अभी फिर बनते हैं। बाबा लिखते भी हैं तुम ______ -पति बनते हो। तुम बच्चे जानते हो बाबा हमारा ______ भरपूर कर देते हैं। आधाकल्प के लिए जितना चाहिए उतना ____ लो, परन्तु पुरूषार्थ पूरा करो। गफलत नहीं करो। कहा जाता है ना फालो _____ । तो यह जाकर बनेंगे। नर से _____ , नारी से लक्ष्मी।
°पदमापदम, खजाना, धन, फादर, नारायण
3. यह बहुत ही नया-रमणीक- रहस्ययुक्त ज्ञान है, जब कोई ऐसी बात सुनी जाती है तो चिन्तन चलता है। तुम बच्चों का भी *सवेरे-सवेरे उठ यही चिन्तन-सिमरण करना है*। किन बातों का? (4) इस चिन्तन के फलस्वरूप हमें *कैसा बनना* है?
° कितनी छोटी (वन्डरफुल!) *आत्मा के आधार पर यह कितना बड़ा शरीर चलता* है।
° *आत्मा में 84 जन्मों का पार्ट* नूँधा हुआ है। शरीर तो विनाश हो जाता है। बाकी आत्मा रहती है।
° *आत्म-अभिमानी बनना है* । (आत्मा की महिमा है तो शरीर की भी महिमा होती है।) आत्मा इन शरीर के कानों द्वारा *सुनती* । आत्मा ही *बोलती* है शरीर द्वारा। आत्मा ही शरीर द्वारा अच्छे वा बुरे *कर्म करती* है। (अब फिर हम घर जायेंगे। जहाँ सब आत्मायें आती हैं, वह हमारा घर है।)
° इस शरीर में जो आत्मा है, उनको *परमपिता परमात्मा पतित-पावन ज्ञान-सुख-शान्ति सागर बैठ पढ़ाते* हैं। (आत्मा का ज्ञान रत्नों से श्रृंगार करते)
° (कैसा बनना) जैसे बाप मीठा है, ऐसे *मीठा गुल-गुल* बन सबको *सुख देना* है। कोई भी अकर्तव्य कार्य नहीं करना है। *उत्तम से उत्तम कल्याण का ही कार्य करना* है। (इसके लिए बाप-समान शरीर में होते भी देही-अभिमानी- अशरीरी-नष्टोमोहा रहना है।) (जबकि बाप ब्रह्मा द्वारा ऊंच ब्राह्मणों को रच नई दुनिया की स्थापना कर रहे हैं। हमारा यह ईश्वरीय गोद में जन्म अति-दुर्लभ हीरे जैसा है।)
4. हम आत्माओं को बाप कहते हैं मीठे-मीठे बच्चों! तुम कितना _____ बन रहे हो। तुम्हारी बुद्धि में सृष्टि के आदि-मध्य-अन्त का सारा _____ है।
°समझदार, ज्ञान
5. तुम भी सागर से निकली हुई ज्ञान ____ हो। तुम भी ज्ञान सागर से निकली हो फिर सब ______ चली जायेंगी, जहाँ बाबा रहते हैं, वहाँ तुम आत्मायें भी रहती हो। ज्ञान सागर आकर तुमको _____ मीठा बनाते हैं। आत्मा जो ____ बन गई है उनको मीठा बनाते हैं। 5 विकारों रूपी छी-छी ______ तुमसे निकल जाती है, तो तुम तमोप्रधान से सतोप्रधान बन जाते हो।
°नदी, वहाँ (घर), पवित्र, खारी, नमकीन
6. क्या लक्ष्मी-नारायण को कहेंगे *सदैव* पवित्रता का सागर?
° नहीं। *एक बाप ही* सदैव पवित्रता का सागर है।
7. ______ आत्मा को _______ बाप द्वारा ________ मत मिलती है। अभी की श्रीमत ही _______ बन जाती है, जो आधाकल्प चलती है। कुछ भी नहीं समझते हो तो बाप से पूछो क्योंकि बाप है _______ सर्जन।
°अविनाशी, अविनाशी, अविनाशी, अविनाशी, अविनाशी
8. *मोहजीत राजा की कहानी* है (बच्चे ने शरीर छोड़ा यह खबर सुनाई, फिर भी उनके परिवार में कोई रोया नहीं), वह सचमुच सतयुग में था। _(सही / गलत)_
° *गलत* (कोई मोहजीत राजा वास्तव में होता नहीं। यह तो कथायें बहुत बनाई हैं ना। वहाँ अकाले मृत्यु होती नहीं। तो पूछने की भी बात नहीं रहती। इस समय तुमको मोहजीत बनाते हैं।)
9. हम ब्राह्मण *नई दुनिया में* है। _(सही / गलत)_
° *गलत* (नई दुनिया स्थापन होती है।)
10. बाबा के *सम्मुख* आते हो, तो पहले क्या याद करना है? और क्यों?
° (क्या याद करना) हम *ईश्वर बाप के सम्मुख* जाते हैं। *शिवबाबा* तो *निराकार* है। उनके सम्मुख हम कैसे जायें। तो उस बाप को *याद* कर फिर बाप के सम्मुख आना है। तुम जानते हो वह इसमें बैठा हुआ है। यह शरीर तो पतित है।
° (क्यों) शिवबाबा की याद में न रह कोई काम करते हो तो (देह-भान के संस्कार पक्के होते अर्थात्) पाप लग जाता है।
11. बाप श्रीमत देते हैं तो फिर उस पर चलना है। _______ का उल्लंघन नहीं करना है। श्रीमत से ही तुम _____ बनते हो।
°कायदे कानून, श्री
12. बाबा ने कहा मंजिल बड़ी है, इसलिए अपना *रोज़ का खाता* रखो। उसमे क्या-क्या चेक करना है? (3)
° कमाई की या नुकसान किया?
° बाप को कितना याद किया?
° कितने को रास्ता बताया? (अन्धों की लाठी तुम हो ना। तुमको ज्ञान का तीसरा नेत्र मिलता है। अच्छा!)
13. भारत अब _____ जैसा कंगाल है ना। पुरूषार्थ कर अपनी जीवन ____ जैसी बनानी है। गफलत नहीं करनी है। _____ के पिछाड़ी हैरान नहीं होना है। अभी बाबा हमको क्या बनाते हैं। एम-ऑब्जेक्ट तो है ना। हम नर से नारायण बनते हैं।
°कौड़ी, हीरे, कौड़ियों
14. *चैलेन्ज और प्रैक्टिकल की समानता* द्वारा स्वयं को पापों से सेफ रखने वाले विश्व सेवाधारी भव। तो कौन-सी *छोटी बातें* भी पाप को बढ़ाती है? (5) अब *क्या करना* है? (2)
° (छोटी बातें) संकल्प में भी किसी भी विकार की कमजोरी, व्यर्थ बोल, व्यर्थ भावना, घृणा वा ईर्ष्या की भावना पाप के खाते को बढ़ाती है।
° (क्या करना) इसलिए *पुण्य आत्मा भव* के वरदान द्वारा स्वयं को *सेफ* रख *विश्व सेवाधारी* बनो। संगठित रूप में *एकमत, एकरस* स्थिति का अनुभव कराओ।
