*Om Shanti*
*Answers from Sakar Murli 06-11-2020*
1. स्नेह के _____ से मालामाल बन सबको स्नेह दो और स्नेह लो।
° _खजाने_
2. जैसे इकॉनामी से घर-सेन्टर ठीक चलता, वैसे हमे कौन-सी *बेहद की प्रवृत्ति में इकॉनामी* रखनी है?
° चेक करना चाहिए कि *संकल्प, बोल और शक्तियों में* क्या-क्या एक्स्ट्रा खर्च किया? जो *सर्व खजानों की इकॉनामी का बजट* बनाकर उसी अनुसार चलते हैं उन्हें ही महीन पुरूषार्थी कहा जाता है। (उनके संकल्प, बोल, कर्म व ज्ञान की शक्तियां कुछ भी व्यर्थ नहीं जा सकती।)
3. बाप को ही आकर आत्म-अभिमानी बनाना पड़ता है। मीठे-मीठे रूहानी बच्चों प्रति रूहानी बाप बैठ समझाते हैं। तुम सब पहले ____ हो। यह पक्का निश्चय रखना है। बच्चे जानते हैं हम आत्मायें _____ से आती हैं, यहाँ शरीर लेकर नूँधा हुआ ____ बजाने। आत्मा को _____ तो लेते रहना है, मैक्सीमम ___ जन्मों से लेकर मिनीमम एक-दो। आत्मा अपने को ही नहीं जानती तो अपने ____ को कैसे जाने।
° _आत्मा_, _परमधाम_, _पार्ट_, _पुनर्जन्म_, _84_, _बाप_
4. अभी तुम बच्चे बाप के जीवन को जानते हो। उनसे तुमको ____ मिल रहा है। बेहद के बाप को ____ करते हो। तुम मात-पिता….. कहते हो तो जरूर बाप आया होगा तब तो ____ घनेरे दिये होंगे ना। बाप कहते हैं – मैं आया हूँ, ____ सुख तुम बच्चों को देता हूँ। बच्चों की बुद्धि में यह नॉलेज अच्छी रीति रहनी चाहिए, इसलिए तुम _____ चक्रधारी बनते हो। तुमको अब ज्ञान का _____ नेत्र मिला है।
° _वर्सा_, _याद_, _सुख_, _अथाह_, _स्वदर्शन_, _तीसरा_
5. हम आत्मा पहले सो ____ बनते हैं। अभी ______ हैं फिर सतोप्रधान पावन बनना है। बाप आते ही तब हैं जब सृष्टि पुरानी हो जाती है। बाप आकर पुरानी को ____ बनाते हैं। नई दुनिया में है ही आदि सनातन _____ धर्म। उन्हों के लिए ही कहेंगे पहले कलियुगी शूद्र धर्म वाले थे। अब प्रजापिता ब्रह्मा के मुख वंशावली बन _____ बने हो। ब्राह्मण कुल में आते हो। तुम अभी _____ प्रजापिता ब्रह्मा की सन्तान बने हो और सबसे ऊंच कोटि के हो।
° _देवता_, _पतित तमोप्रधान_, _नया_, _देवी-देवता_, _ब्राह्मण_, _डायरेक्ट_
6. बाबा हमारी किन *3 प्रकार से सर्विस* करते? _(आज की मुरली अनुसार)_
° बाप बैठ तुम्हारी *पढ़ाई* की सर्विस, *सम्भालने* की सर्विस और *श्रृंगारने* की सर्विस करते हैं। (गॉड फादर कहते हैं – हम आये हैं सब बच्चों की सर्विस में। बच्चों को सुख का रास्ता बताना है। बाप कहते हैं अब घर चलो। बाप आकर इन दु:खों से छुड़ाते हैं। हाहाकार के बाद जयजयकार।)
7. वास्तव में वैल्यु तुम्हारी है। तुमको ______ का पार्ट मिलता है। अब जबकि हीरे जैसा जन्म मिलता है तो _____ पिछाड़ी क्यों पड़ते हो। बाबा तो कहते हैं गृहस्थ व्यवहार में रहते कमल फूल समान ____ रहो और सृष्टि चक्र की ____ को जानकर ____ -गुण भी धारण करो तो तुम हीरे जैसा बन जायेंगे। बरोबर भारत 5 हज़ार वर्ष पहले ____ जैसा था। यह है – एम ऑब्जेक्ट।
° _हीरो-हीरोइन_, _कौड़ियों_, _पवित्र_, _नॉलेज_, _दैवी_, _हीरे_
8. “मीठे बच्चे – तुम अभी गॉडली ____ पर हो, तुम्हें सबको ____ का रास्ता बताना है, तुम बच्चों को बहुत सर्विस करनी है ______ में।
° _सर्विस_, _सुख_, _प्रदर्शनी म्युज़ियम_
9. इस _____ संगमयुग जैसी महिमा और कोई युग की है नहीं। ____ -मूर्ति अक्षर भी जरूर लिखना है और _____ ब्रह्मा अक्षर भी जरूरी है। ब्रह्मा सो विष्णु, विष्णु सो ब्रह्मा कैसे बनते हैं। सारे चक्र का ज्ञान तुम इन ____ से समझा सकते हो। इस ______ के चित्र को बहुत महत्व देना है।
° _पुरूषोत्तम_, _त्रि_, _प्रजापिता_, _चित्रों_, _लक्ष्मी-नारायण_
10. बाबा ने समझाया है कि *स्लोगन* बनाओ – कौन-सा?
° हम शूद्र सो ब्राह्मण, *ब्राह्मण सो देवता कैसे* बनते हैं, आकर समझो। इस *चक्र को जानने से तुम चक्रवर्ती राजा* बनेंगे। स्वर्ग का मालिक बन जायेंगे। (ऐसे स्लोगन बनाकर बच्चों को सिखलाना चाहिए। बाबा युक्तियां तो बहुत बतलाते हैं।)
11. ____ पर तुम बहुत सर्विस कर सकते हो। तुम्हारा यह सब है अर्थ सहित ____ । यह तो जीयदान देने वाला ____ है। इनकी ____ का किसको भी पता नहीं है। और बाबा को हमेशा ____ चीज़ पसन्द आती है, जो कोई भी दूर से पढ़ सके।
° _बैज_, _बैजेस_, _चित्र_, _वैल्यु_, _बड़ी_
12. भल इस ज्ञान को सुनते भी हैं परन्तु ऊंच पद कोई ____ पाते हैं। उनके लिए ही कहा जाता है ____ में कोई। _____ भी कोई लेते हैं ना।
° _बिरले_, _कोटों_, _स्कॉलरशिप_
13. ब्राह्मण हैं पुरूषार्थी। *ब्राह्मणों की माला* पिछाड़ी में बनती है। यहां बाबा ने कौन-सा (जवाहरातों का) मिसाल याद किया?
° *मोती की माला* बनाने में बड़ी मेहनत लगती है। (बड़ी सम्भाल से मोतियों को टेबुल पर रखा जाता है कि कहाँ हिले नहीं। फिर सुई से डाला जाता है। कहाँ ठीक न बनें तो फिर माला तोड़नी पड़े। यहां तो बहुत बड़ी माला है। तुम बच्चे जानते हो – हम पढ़ते हैं नई दुनिया के लिए।)
14. सबको चिंता रहती है हम कैसे अपने पैसे आगे के लिए *ट्रांसफर* करें। परन्तु दूसरे जन्म के लिए ईश्वर अर्थ दान-पुण्य करते हैं तो उसका *रिटर्न* इस ही पुरानी सृष्टि में अल्पकाल के लिए मिलता है। यहाँ तुम्हारा ट्रांसफर होता है *नई दुनिया में और 21 जन्मों के लिए* । तो अब क्या करना है?
° *तन-मन-धन प्रभू के आगे अर्पण* करना है। (सो तो जब आये तब अर्पण करेंगे ना। प्रभू को कोई जानते ही नहीं तो गुरू को पकड़ लेते हैं। बाप समझाते हैं – मैं गरीब निवाज़ हूँ इसलिए मैं आता ही भारत में हूँ। तुमको आकर विश्व का मालिक बनाता हूँ। डायरेक्ट और इनडायरेक्ट में कितना फ़र्क है। तुम बच्चों को अब समझ मिलती है तो तुम बेसमझ से समझदार बने हो।)
15. बाप से तुम वर्सा लेते हो इन द्वारा। ____ भी उनसे वर्सा ले रहे हैं। वर्सा देने वाला एक ही है। उनको ही ____ करना है। बाप कहते हैं – बच्चे, मैं इनके बहुत जन्मों के ____ में आता हूँ, इनमें ____ कर इनको भी पावन बनाता हूँ जो फिर यह ____ बन जाते हैं।
° _दादा_, _याद_, _अन्त_, _प्रवेश_, _फरिश्ता_
16. अब तुम अपने बाप को ___ करो। बाप फिर ____ भी है। टीचर को स्टूडेन्ट कभी भूल न सकें। बाप को बच्चे भूल न सकें, ___ को भी भूल न सकें। बाबा कहते हैं – बच्चे, तुम्हें कोई देहधारी ____ आदि करने की दरकार नहीं है।
° _याद_, _टीचर_, _गुरू_, _गुरू_
17. तुम बच्चों की बुद्धि में जब ज्ञान की अच्छी धारणा हो जाती है तो कौन-सा *डर निकल जाता* है?
° भक्ति में जो डर रहता कि *गुरू* हमें *श्राप* न दे देवे, यह डर ज्ञान में आने से, ज्ञान की धारणा करने से निकल जाता है क्योंकि ज्ञान मार्ग में श्राप कोई दे न सके। (रावण श्राप देता है, बाप वर्सा देते हैं। रिद्धि-सिद्धि सीखने वाले ऐसा तंग करने का, दु:ख देने का काम करते हैं, ज्ञान में तो तुम बच्चे सबको सुख पहुँचाते हो।)
