Answers from Sakar Murli 07-08-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 07-08-2020*

1. _____ की विशेषता से डायमण्ड की चमक को बढ़ाओ।
°सत्यता

2. तुम अभी सच्ची _____ कर रहे हो। स्वर्ग में तुमको सब कुछ _____ माल मिलेगा।अभी तुम जानते हो बाप को ______ करते-करते हम गोल्डन एज में चले जायेंगे।
°कमाई, नया, याद

3. सतयुग में होते हैं *आत्म-अभिमानी*। _(सही / गलत)_
° *सही*
° अपने को (शरीर छोड़ते समय) आत्मा जानते हैं। हमारा शरीर बड़ा हुआ है, अब यह छोड़कर फिर छोटा लेना है।

4. तुम जानते हो वहाँ ( *सतयुग में* ) हमें क्या नहीं मिलेगा! क्या- *क्या मिलेंगा?* (3)
° *बेहद की बादशाही* , बेहद का सुख मिलता है।
° वहाँ कोई बीमारी आदि होती नहीं। *हेल्थ वेल्थ हैप्पीनेस सब* रहता है।
° *बुढ़ापा भी वहाँ बहुत अच्छा* रहता। खुशी रहती है। कोई प्रकार की तकलीफ नहीं रहती है। प्रजा भी ऐसी बनती है।

5. ज्ञान है बुद्धि के लिए भोजन। तो चिन्तन कर आपेही भोजन बनाना चाहिए। बाबा ने आज कहा त्रिमूर्ति शिव भगवानुवाच।
a) तो *शिवबाबा का पार्ट / सर्विस* सबसे ऊँच कैसे है?
b) ब्रह्मा और विष्णु का तो बड़ा पार्ट है 84 जन्मों का। (हम जानते हैं विष्णु का अथवा कृष्ण का अन्तिम 84 वां जन्म, जिसका नाम ब्रह्मा रखा है।) तो सबसे *जास्ती पार्ट किसका कहेंगे* – ब्रह्मा या विष्णु का?
c) शिवबाबा की रचना तो सब है फिर भी वास्तविक (डायरेक्ट) *बच्चा किसे कहेंगे* ? का
d) मनुष्य तो कह देते – *शंकर* आंख खोलते हैं तो विनाश हो जाता है। इस पर क्या सुनाया?
° a) *सारे झाड़ का बीजरूप है शिवबाबा*। जितनी शिव की रचना है उतनी ब्रह्मा की नहीं। सभी आत्मायें उनकी औलाद हैं। *बेहद की आत्माओं का कल्याण करते* । ब्रह्मा द्वारा स्वर्ग की स्थापना करते। तुम सबका हिसाब-किताब चुक्तू कराए तुमको पतित से पावन बनाए ले जाता हूँ।
° b) ब्रह्मा का भी बहुत थोड़ा समय पार्ट है। विष्णु का सतयुगी राजधानी में 8 जन्म पार्ट चलता है। ब्रह्मा का तो एक ही जन्म का पार्ट है। *विष्णु का पार्ट बड़ा कहेंगे*।
° c) यह दोनों बच्चे हैं शिव के। वास्तव में बच्चा एक है (एडाप्टेड)। हिसाब करेंगे तो *ब्रह्मा है शिव का बच्चा* । बाप और दादा।
° d) सब कुछ *प्रैक्टिकल* में चाहिए ना। सिर्फ आंख खोलने से थोड़ेही हो सकता।

6. *ब्रह्मा बाबा* के कौन-कौन से नाम आज मुरली में सुनाये? (6)
° ब्रह्मा, आदि देव, एडम, आदम, प्रजापिता, अलौकिक फादर।

7. तुम यहाँ मेहनत कर रहे हो _____ बनने के लिए। तुम बच्चे ब्रह्मा द्वारा ब्राह्मण बन फिर _____ बन जाते हो, विष्णुपुरी के मालिक। अब बाप समझाते हैं – मैं आया हूँ पत्थरबुद्धियों को _____ -बुद्धि बनाने। दिन-प्रतिदिन बाप तुम बच्चों को ______ बुद्धि बनाते हैं। तुम बच्चों को तो बड़ी _____ में नाचना चाहिए – हमको पढ़ाते कौन हैं? शिवबाबा। त्रिमूर्ति शिव।हम बाप से वर्सा ले रहे।
°पावन, देवता,पारस, रिफाइन, खुशी

8. प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा शिवबाबा स्थापना कर रहे हैं। तो हम ब्राह्मणों का *धंधा* क्या है? (2)
° तुम ब्राह्मण *श्रीमत पर सेवा* करते हो।
° सिर्फ मनुष्यों को *रास्ता बताते* हो – मुक्ति और जीवनमुक्ति को पाना है तो ऐसे पा सकते हो। दोनों चाबी हाथ में हैं। तुम्हारा सारा दिन यही धंधा है।
° तुम्हारा धन्धा है रचना के आदि-मध्य-अन्त को जानना और किसको मुक्ति-जीवनमुक्ति का रास्ता बताना।

9. तुम किसको भी समझाओ तो हमेशा *योग* अक्षर बोलो। _(सही / गलत)_
° *गलत* (योग अक्षर रांग है। टीचर को स्टूडेन्ट की *याद* रहती है। फादर है सुप्रीम सोल। तुम आत्मा सुप्रीम नहीं हो। तुम हो पतित। अब बाप को याद करो। टीचर को, बाप को, गुरू को याद किया जाता है।)

10. गुरू लोग मंत्र देते। तो हमारा सतगुरू *बाबा कौन-सा मंत्र देते* ? (2)
° उनका मंत्र एक ही है – *मनमनाभव* ।
° फिर क्या होगा? *मध्याजी भव* । तुम विष्णुपुरी में चले जायेंगे।

11. पुरुषार्थ नहीं होता तो कोई हर्जा नहीं – *प्रजा तो प्रजा ही सही*। _(सही / गलत)_
° *गलत* (फिर तो ऐसे होंगे जैसे यहाँ के भील। सूर्यवंशी लक्ष्मी-नारायण बनना है तो फिर इतना *पुरूषार्थ करना चाहिए*। अच्छा!)

12. *अमरलोक* कैसे कह सकते?
° आत्मा तो अविनाशी है, वह कभी मरती नहीं। *एक शरीर छोड़ फिर दूसरा लेकर पार्ट बजाती है*। उनको मृत्युलोक नहीं कहा जाता। वह है ही अमरलोक। चोला सिर्फ बदलती है। यह बातें बड़ी सूक्ष्म समझने की हैं।

13. सबके सहयोगी रहते कम्पेनियन सिर्फ एक को बनाने से क्या *प्राप्ति* होती? (3) तो अब *क्या करना* है? (2)
° (प्राप्ति) *मायाजीत, मोहजीत, विजयी* रहेंगे। (अगर जरा भी किसी में मोह होगा तो तीव्र पुरूषार्थी के बजाए पुरूषार्थी बन जायेंगे)
° इसलिए क्या भी हो, कुछ भी हो *खुशी में नाचते रहो* , मिरूआ मौत मलूका शिकार – इसको कहते हैं नष्टोमोहा। ऐसा *नष्टोमोहा* रहने वाले ही विजय माला के दाने बनते हैं।

14. गाया भी जाता है – सेकेण्ड में जीवनमुक्ति। यह *तुरन्त मिल जाती*। _(सही / गलत)_
° *गलत* (ऐसे थोड़ेही मिल जाती है, यह *समझा जाता है* – बच्चे बनेंगे तो मिलेगी जरूर)

15. पेट कोई जास्ती नहीं खाता है – एक मनुष्य का पेट 4-5 रूपया, एक मनुष्य का पेट 400-500 रूपया। पैसा बहुत है तो ____ हो जाती है। गरीबों को पैसे ही नहीं तो _____ भी नहीं। वह सूखी रोटी में ही खुश होते हैं। बच्चों को जास्ती _____ के हंगामें में भी नहीं जाना चाहिए। ____ का शौक नहीं रहना चाहिए।
°हबच, हबच, खान-पान,खाने

16. *गन्धर्वी विवाह* किया यह खुशी की बात है। _(सही / गलत)_
° *गलत* (यह तो *कमज़ोरी है*। कुमारी अगर कहे हम पवित्र रहना चाहते हैं तो कोई मार थोड़ेही सकते हैं। ज्ञान कम है तो डरते हैं।)

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