Answers from Sakar Murli 07-09-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 07-09-2020*

1. स्वभाव, संस्कार, सम्बन्ध, सम्पर्क में _____ रहना अर्थात् फरिश्ता बनना।
°लाइट

2. संकल्प और बोल के विस्तार को सार में लाने वाले *अन्तर्मुखी भव*। ऐसे अन्तर्मुखी बच्चे *साइलेन्स की शक्ति* द्वारा क्या-क्या कर सकते? (3)
° भटकती हुई आत्माओं को *सही ठिकाना दिखा सकते* हैं।
° यह साइलेन्स की शक्ति *अनेक रूहानी रंगत* दिखाती है।
° साइलेन्स की शक्ति से हर आत्मा के *मन का आवाज* इतना समीप सुनाई देता जैसे कोई सम्मुख बोल रहा।

3. बाबा ने आज आते ही *आत्म-अभिमानी* बनने लिए कौन-से संकल्प दिये? (2)
° रूहानी बच्चे समझते हैं *हम आत्मा हैं, न कि शरीर* । आत्मा ही *शरीर में प्रवेश* करती है। *एक शरीर छोड़ दूसरा* लेती रहती है। आत्मा नहीं बदलती, शरीर बदलता है। आत्मा तो *अविनाशी* है, तो अपने को आत्मा समझना है।
° यह ज्ञान कभी कोई दे न सके। यह *ज्ञान अभी ही मिलता-परमपिता परमात्मा से* । बाप कहते हैं जबकि मैं आया हूँ तो तुम अपने को आत्मा निश्चय करो।

4. पुराने संस्कार पलटने में मेहनत लगती। याद करने में ही माया विघ्न डालती। तो बाबा ने *सहज याद* की कौन-सी 2 युक्तियां सुनाई?
° बाप कहते हथ कार डे दिल यार डे ( *कर्मयोगी* बनो)। यह है बहुत सहज।
° *जैसे आशिक-माशूक* होते हैं जो एक-दो को देखने बिगर रह न सके। (तुम भक्ति मार्ग से लेकर मुझ माशूक के सब आशिक हो। बुलाते भी हो कि आकर दु:ख से लिबरेट कर पावन बनाओ। तुम सब हो ब्राइड्स, मैं हूँ ब्राइडग्रूम। तुम सब आसुरी जेल में फंसे हुए हो, मैं आकर छुड़ाता हूँ।)

5. परमात्मा तो एक ही है ऊंच ते ऊंच _____ , फिर सब हैं आत्मायें बच्चे। सर्व का _____ दाता एक है फिर हैं देवतायें। उनमें भी नम्बरवन है ____ क्योंकि आत्मा और शरीर दोनों पवित्र हैं। तुम हो संगमयुगी।
°भगवान, सद्गति, कृष्ण

6. बाबा को *क्रियेटर, डायरेक्टर और मुख्य एक्टर* क्यों कहते?
° बाप क्रियेटर भी है, तुम बच्चों को क्रियेट करते हैं। *अपना बनाया है*।
° डायरेक्टर बन डायरेक्शन भी देते हैं। *श्रीमत देते* ।
° फिर एक्ट भी करते हैं। *ज्ञान सुनाते* हैं। यह भी उनकी ऊंच ते ऊंच एक्ट है ना।

7. *बाबा का आना* कब होता है?
° बाप आकर समझाते हैं मेरा आना होता है कल्प के *पुरूषोत्तम संगमयुग पर जबकि सारा विश्व पुरूषोत्तम बनता* है। (इस समय तो सारा विश्व कनिष्ट पतित तमोप्रधान जड़जड़ीभूत है, 5 विकारों से दुःखी। उसको कहा जाता है अमरपुरी, यह है मृत्युलोक। मृत्युलोक में आसुरी गुण वाले मनुष्य होते हैं, अमरलोक में दैवीगुण वाले मनुष्य हैं इसलिए उनको देवता कहा जाता है।)

8. बाप आये हैं तुम पुराने भक्तों को भक्ति का _____ देने। भक्ति का फल है _____ , जिससे ही तुम्हारी सद्गति होती है। भक्ति करने वालों को सीता कहा जाता, भगवान को _____ कहा जाता। इस बेहद के _____ राज्य में सारी दुनिया फंसी हुई है। उन्हों को लिबरेट कर राम राज्य में ले जाते हैं। बुलाते भी हैं हम आत्माओं को अपने घर ले जाओ। यह किसको पता नहीं है कि बाप _____ का भी राज्य-भाग्य देते हैं।
°फल, ज्ञान, राम, रावण, स्वर्ग

9. *सबसे ऊंचा धर्म / अमूल्य जीवन* किसका कहेंगे? देवताओं का?
° सब धर्मों में ऊंच तो तुम्हारा ब्राह्मण धर्म है, *प्रजापिता ब्रह्मा के मुख वंशावली ब्राह्मण*, वह तो सब भाई-बहन होने चाहिए।
° वास्तव में *देवताओं से भी ऊंच* ब्राह्मणों को कहेंगे, चोटी हैं ना। (क्योंकि यह ब्राह्मण ही मनुष्यों को *देवता बनाते* हैं। *पढ़ाने वाला है परमपिता परमात्मा* , स्वयं ज्ञान का सागर।)
° तुम हो संगमयुगी। देवताओं का नहीं, *ब्राह्मणों का अमूल्य जीवन* है। (बाप तुमको बच्चा बनाए तुम्हारे पर कितनी मेहनत करते, देवतायें थोड़ेही इतनी मेहनत करेंगे। वह पढ़ाने लिए बच्चों को स्कूल भेज देंगे। तो कितना रिगॉर्ड होना चाहिए।)

10. सर्विसएबुल बच्चों को *सर्विस का बहुत शौक* होना चाहिए। तो बाबा ने उमंग बढ़ाने लिए किन्हों का मिसाल दिया?
° लड़ाई के मैदान में जाने के लिए *मिलेट्रीके* पास लिस्ट रहती। ड्रिल सिखलाते हैं कि जरूरत पर बुला लेंगे। यहाँ तो वह बात नहीं है (तो आपेही सर्विसएबुल बनना चाहिए ना!)

11. कई बच्चे चलते-चलते *तकदीर को आपेही शूट* करते हैं। कैसे?
° अगर बाप का बनकर *सर्विस* नहीं करते, अपने पर और दूसरों पर *रहम* नहीं करते तो वह अपनी तकदीर को शूट करते हैं अर्थात् *पद* भ्रष्ट हो जाते हैं। अच्छी रीति *पढ़ें* , *योग* में रहें तो पद भी अच्छा मिले। सर्विसएबुल बच्चों को तो *सर्विस* का बहुत *शौक* होना चाहिए।

12. कॉन्फ्रेन्स में टॉपिक रखी है ”मानव जीवन में *धर्म की आवश्यकता*।” इस पर क्या समझानी बाबा ने दी? (3)
° समझाना चाहिए धर्म की तो आवश्यकता है ना। *पहले-पहले कौन-सा धर्म था*, फिर कौन-से धर्म आये हैं! (वास्तव में *डायरेक्ट ऑलमाइटी अथॉरिटी से योग लगाकर ऑलमाइटी बनना* है, विश्व के मालिक बन जाते हो। तुम्हारे राज्य को कोई छीन न सके। उस समय और कोई खण्ड होते नहीं।)
° सारा चक्र बना ही है धर्मों पर। यह है ही *वैराइटी धर्मों का झाड़*, यह झाड़ है अन्धों के आगे आइना।
° बोलो, धर्म स्थापक फिर *अपने समय पर आयेंगे*। (हर एक को सतोप्रधान से सतो-रजो-तमो में आना ही है। अभी है रावण राज्य। तुम्हारी है सच्ची गीता, जो निराकार गॉड फादर सुनाते हैं।)

13. औरों की भेंट में यहाँ तुम्हारी *स्थापना बड़ी वन्डरफुल* है। कैसे?
° तुम अभी बाहर सर्विस पर निकले हो, *आहिस्ते-आहिस्ते वृद्धि* होती जाती है। *तूफान लगने से बहुत पत्ते गिरते* भी हैं ना। और धर्मों में तूफान लगने की बात नहीं रहती। उनको तो ऊपर से आना ही है, यहाँ मेहनत बहुत है। ( *क्रिमिनल आई* धोखा देती है, सिविल आई बनने में मेहनत लगती है। देवताओं के कितने अच्छे कैरेक्टर्स हैं।)

14. इस समय (कलियुग अन्त में) *पूज्य* किनको कह सकते?
° इस समय कोई *एक भी पूज्य नहीं* हो सकता। (ऊंच ते ऊंच भगवान पूज्य फिर है सतयुगी देवतायें पूज्य। इस समय तो सब पुजारी हैं, अव्यभिचारी पूजा फिर सतो फिर देवताओं से भी उतर कर जल की, मनुष्यों की, पक्षियों आदि की पूजा करने लग पड़ते। दिन-प्रतिदिन अनेकों की पूजा होने लगती है।)

15. *मोक्ष* पर बाबा ने कौन-सी 2 अच्छी पॉइंट्स सुनाई?
° मोक्ष को *वर्सा* नहीं कहा जाता। (बाप से तो वर्सा मिलना चाहिए!)
° खुद *शिवबाबा को भी पार्ट बजाना पड़ता* है। (तो फिर और किसको मोक्ष में कैसे रख सकते।)

16. भगवानुवाच हैं ____ अर्थात् अशरीरी आये थे, फिर अशरीरी बनकर जाना है। भगवानुवाच के अर्थ को नहीं समझते हैं। बाप कहते हैं तुम आत्मायें यहाँ यह _____ धारण कर पार्ट बजाने आई हो, फिर वापिस जाना है। नये-नये किस्म के धर्म इमर्ज होते रहते हैं, इसलिए इनको _____ धर्मों का झाड़ कहा जाता।
°नंगे, शरीर, वैराइटी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *