Answers from Sakar Murli 09-09-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 09-09-2020*

1. *फरिश्ता* कौन है? _(स्लोगन)_
° जो देह के सूक्ष्म अभिमान के सम्बन्ध से भी *न्यारा* है।

2. मनन शक्ति द्वारा *शुद्ध संकल्पों का स्टॉक* जमा करने से, वा *ज्ञान की गहराई* में जाकर अनुभवी मूर्त बनने से क्या प्राप्तियां है? (2)
° अनुभवी *सदा अविनाशी और निर्विघ्न* रहते हैं। (उन्हें कोई भी हिला नहीं सकता।)
° अनुभवी के आगे *माया* की कोई भी कोशिश सफल नहीं होती। अनुभवी *कभी धोखा नहीं* खा सकते। (इसलिए अनुभवों को बढ़ाते हुए हर गुण के अनुभवी मूर्त बनो।)

3. तुम्हारे इस *योगबल की करामात* क्या है? (3)
° यही योगबल है जिससे तुम्हारी *सब कर्मेन्द्रियाँ वश* हो जाती हैं।
° योग बल के सिवाए तुम पावन बन नहीं सकते। योगबल से ही *सारी सृष्टि पावन बनती* है इसलिए पावन बनने के लिए वा *भोजन को शुद्ध* बनाने के लिए याद की यात्रा में रहो। युक्ति से चलो। नम्रता से व्यवहार करो।

4. बाप आकर समझाते, तुम एकदम ऊंच चोटी थे। अब महसूस करते। स्वप्न में भी नहीं था कि बाप आकर क्या करेंगे। अब बाप मिला हुआ है तो समझते हो ऐसे *बाप के ऊपर तो न्योछावर* होना पड़े। यहां बाबा ने कौन-सा मिसाल दिया? (2)
° जैसे *पतिव्रता स्त्री* होती है तो पति पर कितना न्योछावर जाती है। (आगे चिता पर चढ़ती थी। बाबा तो ऐसी कोई तकलीफ नहीं देते। भल नाम ज्ञान चिता है परन्तु जलने करने की कोई बात नहीं। बाप बिल्कुल ऐसे समझाते हैं जैसे मक्खन से बाल।)
° यह *बाप तो ऐसा बील्वेड है* जिस पर कहते हैं जीते जी न्योछावर जायें क्योंकि *पतियों का पति* , बापों का बाप सबसे ऊंच है। (भूले-चूके भी बाप को नहीं भूलना है। कुछ भी हो जाये। गीत भी है तुम्हारे दर को कभी नहीं छोड़ेंगे। चाहे कुछ भी कहो। बाहर में रखा ही क्या है?)

5. थोड़ा भी कुछ समझकर जाते हैं तो *स्वर्ग में जरूर आ जायेंगे* । इसलिए पुरुषार्थ करने की कोई आवश्यकता नहीं। _(सही / गलत)_ _(2)_
° गलत (भल बाबा कहते हैं थोड़ा भी सुना है तो स्वर्ग में आ जायेंगे। परन्तु हर एक मनुष्य पुरूषार्थ तो ऊंच बनने का ही करते हैं ना। तो *पुरूषार्थ है फर्स्ट।*)
° राजाई में भी पोजीशन तो होती हैं ना। हर एक के *पुरुषार्थ अनुसार मर्तबा* होता है। (पुरुषार्थ बच्चों को करना है और प्रारब्ध भी बच्चों को पानी है।)

6. *सच्ची शान्ति* किसे कहेंगे?
° बाप कहते हैं बच्चे, तुम्हारा *स्वधर्म ही है शान्त*, इस शरीर से तुम कर्म करते हो। (जब तक शरीर धारण न करे तब तक आत्मा शान्त रहती है।)

7. रूहानी बाप आकर स्वर्ग नई दुनिया की स्थापना करते हैं। तो बाबा से *सब कुछ मांगना / पुछ लेना* है। _(सही / गलत)_ (4)
° गलत (तुम बाप से कोई भी प्रकार की *मांगनी नहीं* कर सकते हो। बाप सब कुछ समझाते हैं।)
° कुछ भी *पूछने की दरकार नहीं* रहती, सब कुछ आपेही समझाते रहते हैं। (बाप कहते हैं मुझे कल्प-कल्प इस भारत खण्ड में आकर क्या करना है, सो मैं जानता हूँ। रोज़-रोज़ समझाते रहते हैं। कोई भल एक अक्षर भी न पूछे तो भी सब कुछ समझाते रहते हैं!)
° बाप समझाते मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों तुम 5 हज़ार वर्ष बाद फिर से मिले हो। बाबा आपसे क्या मिलना है, यह तो *प्रश्न ही नहीं। आप तो हो ही हेविनली गॉड फादर।* (नई दुनिया के रचयिता। तो जरूर आपसे बादशाही ही मिलेगी।)
° तुमसे भी प्रश्न पूछते हैं, बाप सब कुछ बतलाते रहते हैं। सिर्फ उस पर *पूरा ध्यान देना है।*

8. ऐसा बापदादा जो स्वर्ग का मालिक बनाते हैं, *कितना साधारण* है। यहां यज्ञ इतिहास की कौन-सी वन्डरफुल सीखने योग्य बात सुनाई?
° शुरू में बच्चियाँ जब बीमार पड़ती थी तो *बाबा खुद उन्हों की सेवा करते थे* । अहंकार कुछ भी नहीं। (बापदादा ऊंच ते ऊंच है। कहते हैं जैसे कर्म मैं इनसे कराऊंगा, या करूंगा।)

9. बड़े से बड़ा आसामी है ______ और _______ । फिर तुम जानते हो _____ कौन है? तुम तो कहेंगे हम इनके घराने के हैं, यह लक्ष्मी-नारायण तो सतयुग में राज्य करते हैं। बच्चे समझ गये हैं, हमको तो यह ______ शोभते नहीं। हम अभी शिक्षा पा रहे हैं। पुरूषार्थ कर रहे हैं। फिर ऐसे बन जायेंगे। ______ फिराते-फिराते हम देवता बन जायेंगे। बच्चों को अभी बाप _____ रहे हैं।
°भगवान, प्रजापिता ब्रह्मा, विष्णु, अलंकार, स्वदर्शन चक्र, जगा

10. अभी तुम बच्चे जानते हो बाबा आया हुआ है। _______ भी कहती हैं – बाबा हर 5 हज़ार वर्ष के बाद हम आपसे स्वर्ग का वर्सा लेते हैं। हम अभी आये हैं स्वर्ग की _____ लेने। तुम जानते हो कि सभी एक्टर्स का अपना _____ है। तुम फिर इसी ही नाम रूप में आकर इसी समय बाप से वर्सा लेने का पुरूषार्थ करेंगे। कितनी अथाह ______ है। अच्छा, तुम तो ऐसे बने हो। फिर कोई को ______बनाते हो?
° बुढ़ियाँ, राजाई, पार्ट, कमाई, आप समान

11. माया उल्टा काम कराने की कोशिश करेंगी, परन्तु बच्चों को *दैवीगुण धारण करने हैं*। क्यों?
° *हम ईश्वरीय सन्तान हैं* वह है सबका बाप, सबके लिए शिक्षा यह एक ही देंगे। बाप शिक्षा देते हैं-बच्चे *स्वर्ग का मालिक बनना है।*

12. तो *पुलिस* वालों को क्या करना है?
° अपना पुलिस आदि का *काम भी करो* , नहीं तो डिसमिस कर देंगे। अपना काम तो करना ही है, आंख दिखानी पड़ती है। *जितना हो सके प्रेम से काम लो।* नहीं तो युक्ति से आंख दिखाओ। हाथ नहीं चलाना है। (मूल बात है पवित्र रहना।)

13. *बहुत नम्रता से* चलना है (क्रोध पर भी *फूलों की वर्षा* करो)। साथ-साथ पवित्रता के लिये कैसे समझा सकते? (2)
° बोलो, *आप तो भगवान (समान) हो* फिर यह क्या मांगते हो? (हथियाला बांधते समय कहते हैं – मैं तुम्हारा पति ईश्वर गुरू सब कुछ हूँ।)
° अब मैं पवित्र रहना चाहती हूँ, तो तुम रोकते क्यों हो। *भगवान को तो पतित-पावन कहते* है ना। *आप ही पावन बनाने वाले बन जाओ।* (ऐसे प्यार से नम्रता से बात करनी चाहिए।)

14. बाप आया है स्वर्ग की बादशाही फिर से देने। तो इनको *रिफ्यूज़ नहीं करना* है। विश्व की बादशाही रिफ्यूज़ की तो क्या होगा?
° खत्म। फिर *रिफ्यूज़ (किचड़े के डिब्बे) में जाकर पड़ेंगे*। यह सारी दुनिया है किचड़ा। तो इनको रिफ्यूज़ ही कहेंगे। दुनिया का हाल देखो क्या है।)

15. इस समय (कलियुग अन्त में) *पुण्य आत्मा* कौन-कौन हैं?
° वास्तव में *पुण्य आत्मा एक भी नहीं* है। सब हैं पाप आत्मायें। पुण्य करें तो पुण्य आत्मा बन जायें। पुण्य आत्मायें होती हैं सतयुग में। (हॉस्पिटल आदि बनाई सो क्या हुआ। सीढ़ी उतरने से थोड़ेही बच जायेगा। गिरते ही जाते हैं।)

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