*Om Shanti*
*Answers from Sakar Murli 11-09-2020*
1. करनकरावनहार की _____ से भान और अभिमान को समाप्त करो।
°स्मृति
2. गृहस्थ व्यवहार में रहते कमल फूल समान, सहनशील, युक्तियुक्त रहना है। और बाबा ने कहा *योगयुक्त* बच्चे जिम्मेवारियों, माया, वा मन के *बन्धन से मुक्त* होंगे। तो ऐसी स्थिति बनानी कैसे है? (2)
° लौकिक जिम्मेवारी तो खेल हैं, इसलिए *डायरेक्शन प्रमाण खेल की रीति से हंसकर खेलो* तो कभी छोटी-छोटी बातों में थकेंगे नहीं। (अगर बंधन समझते हो तो तंग होते हो। क्या, क्यों का प्रश्न उठता है।)
° *जिम्मेवार बाप है आप निमित्त हो* । इस स्मृति से बन्धनमुक्त बनो तो योगयुक्त बन जायेंगे।
3. कोई-कोई को बहुत _____ होती है। ओहो! अब बाबा आये हैं, हम तो चले अपने ______ -धाम। बाप कहते हैं – अभी पूरी _______ स्थापन ही कहाँ हुई है। तुम इस समय हो ______ सन्तान फिर होंगे देवतायें। डिग्री कम हो गई ना। मीटर में प्वाइन्ट होती हैं, इतनी प्वाइन्ट कम।
°खुशी, सुख, राजधानी, ईश्वरीय
4. यह ड्रामा का _____ एक्यूरेट चल रहा है, जिसका जो _____ जिस घड़ी होना चाहिए, वही _____ हो रहा है, यह महीन बात यथार्थ रीति समझना है।
°खेल, पार्ट, रिपीट
5. आज मुरली में *परमात्मा* शिवबाबा की कौन-कौन सी *महिमा* सुनाई है? (3)
° *रूहानी बाप एक* को ही कहा जाता है। बाकी सब हैं आत्मायें। उनको *परम आत्मा* कहा जाता है। बाप कहते हैं मैं भी हूँ आत्मा। परन्तु मैं *परम सुप्रीम सत्य* हूँ। मैं ही *पतित-पावन, ज्ञान का सागर* हूँ। (बाप कहते हैं मैं आता ही हूँ भारत में, बच्चों को विश्व का मालिक बनाने।)
° *पारलौकिक बाप*
° बाप को कहा जाता है *रांझू रमज़बाज* । सब उनको याद करते हैं ना – हे *भगवान* दु:ख हरो, रहम करो, लिबरेट करो। वो *लिबरेटर* बाप सबका एक ही है।
6. बाबा ने कहा तुम ही मालिक थे ना। अब स्मृति आई है। बच्चों को स्मृति दिलाते हैं – तुम पहले-पहले सतयुग में आये फिर पार्ट बजाते, 84 जन्म भोग अब पिछाड़ी में आ गये हो। फिर बाबा ने हमे *आत्म-अभिमानी* कैसे बनाया? (6)
° तुम अपने को आत्मा समझो। *आत्मा अविनाशी है*, शरीर विनाशी है। आत्मा ही *देह के साथ आत्माओं से बात* करती है। (आत्म-अभिमानी हो करके नहीं रहते हैं तो जरूर देह-अभिमान है। मैं आत्मा हूँ, यह सब भूल गये हैं। कहते भी हैं पाप आत्मा, पुण्य आत्मा, महान् आत्मा।)
° *आत्मा जब शरीर में प्रवेश करती है तो नाम पड़ता* है क्योंकि शरीर से ही पार्ट बजाना होता है। (तो मनुष्य फिर शरीर के भान में आ जाते हैं, मैं फलाना हूँ।)
° अभी समझते – हाँ मैं आत्मा हूँ। हमने *84 का पार्ट* बजाया है। अभी हम आत्मा को जान गया हूँ। हम आत्मा *सतोप्रधान* थी, फिर अभी *तमोप्रधान* बनी हूँ।
° बाबा बार-बार तुम्हें कहते हैं पहले अपने को आत्मा समझो। *मैं बाबा का हूँ।*
° बाप कहते हैं – बच्चे, देह सहित देह के सब धर्मों को त्याग मुझे याद करो। अभी तुम सम्मुख बैठे हो। अपने को *देह नहीं समझना है, मैं आत्मा हूँ*।
° हम आत्मा *शान्त स्वरूप* हूँ। इस *शरीर द्वारा कर्म* करती हूँ। *शान्ति तो हमारा स्वधर्म* है। (बहुत कहते हैं मन की शान्ति हो। अरे आत्मा तो स्वयं शान्त स्वरूप है, उनका *घर ही है शान्तिधाम* । तुम अपने को भूल गये हो।)
7. हम आत्मा *सतोप्रधान* थी, फिर अभी *तमोप्रधान* बनी हूँ। इसके लिए बाबा ने कौन-सा *मिसाल* दिया?
° बाप आते ही तब हैं जब सब आत्माओं पर कट लगी हुई है। *जैसे सोने में खाद पड़ती है* ना। तुम पहले सच्चा सोना हो फिर चांदी, तांबा, लोहा पड़कर तुम बिल्कुल काले हो गये हो। (यह बात और कोई समझा न सके। सब कह देते हैं आत्मा निर्लेप है। खाद कैसे पड़ती है, यह भी बाप ने समझाया है बच्चों को। बाप कहते हैं मैं आता ही भारत में हूँ। जब बिल्कुल तमोप्रधान बन जाते हैं, तब आता हूँ।)
8. तुम्हारी एम ऑब्जेक्ट ही है – यह ______ बनने की। बन गये फिर तो _____ की दरकार नहीं। बाप जो पढ़ाने वाला है, उनको _____ तो करना चाहिए। तुमको सब सहज कर दिया है। इन लक्ष्मी-नारायण ने भी ______ बनकर ही यह वर्सा लिया है, जो अभी तुम ले रहे हो।
°लक्ष्मी-नारायण, पढ़ाई, याद, आस्तिक
9. अब तुम्हारी बुद्धि में सीढ़ी का ज्ञान है। _____ कला, सर्व का भला। फिर धीरे-धीरे उतरती कला होती है। शुरू से लेकर इस चक्र को अच्छी रीति समझना है। इस समय तुम्हारी चढ़ती कला होती है क्योंकि बाप ____ है ना। बाबा _____ बच्चे कहते रहते हैं और बच्चे फिर बाबा-बाबा कहते रहते हैं।
°चढ़ती, साथ, मीठे-मीठे
10. तुम बच्चों का *प्रभाव* कब निकलेगा? अभी तक किस शक्ति की कमी है?
° जब *योग में मजबूत* होंगे तब प्रभाव निकलेगा। अभी वह जौहर नहीं है। *याद से ही शक्ति* मिलती है। ज्ञान तलवार 🗡️ में *याद का जौहर* चाहिए, जो अभी तक कम है। (अगर अपने को *आत्मा समझ बाप को याद* करते रहो तो बेड़ा पार हो जायेगा। यह सेकण्ड की ही बात है।)
11. आजकल कहते हैं एक राज्य, *एक धर्म, एक भाषा* हो। वन कास्ट, वन रिलीजन, वन गॉड। तो इस टॉपिक पर हम क्या लिख सकते?
° लिखना है। लक्ष्मी-नारायण का चित्र बनाते हो, ऊपर में लिख दो *सतयुग में जब इन्हों का राज्य था तो वन गॉड, वन डीटी रिलीजन था*
12. तुम्हारे पास कोई आते हैं, तो उन्हें *एक साथ समझा देना* है। _(सही / गलत)_
° *गलत* (उनको अलग-अलग समझाओ, पहले एक-एक को अलग-अलग बैठ समझाते थे।)
° बहुत मनुष्य अटेन्शन नहीं देते। अटेन्शन उनका जायेगा जो हमारे *ब्राह्मण कुल का* होगा। और कोई नहीं समझेंगे इसलिए बाबा कहते हैं अलग-अलग बिठाओ फिर समझाओ। *फार्म भराओ* तो मालूम पड़ेगा क्योंकि कोई किसको मानने वाला होगा, कोई किसको। (सबको इकट्ठा कैसे समझायेंगे। अपनी-अपनी बात सुनाने लग पड़ेंगे।)
13. तुमसे कोई पूछे *रचयिता और रचना के आदि-मध्य-अन्त* को जानते हो? क्या कहेंगे?
° तो *तुम झट कहेंगे हाँ*, सो भी तुम सिर्फ अभी ही जान सकते हो फिर कभी नहीं। (बाबा ने समझाया है तुम ही मुझ रचयिता और रचना के आदि-मध्य-अन्त को जानते हो। लक्ष्मी-नारायण भी नहीं जानते। यह तो वण्डर है।)
° तुम कहते हो हमारे में ज्ञान है। तुम्हारी एम ऑब्जेक्ट ही है – यह लक्ष्मी-नारायण बनने की।
( *बाप ही आकर अपना परिचय देते हैं और रचना के आदि-मध्य-अन्त का राज़ समझाते* हैं। बाप है बेहद का मालिक रचता।)
14. मन्दिरों आदि को देखते सदा यह स्मृति रहे कि यह सब हमारे ही _____ हैं। अब हम ऐसा ______ बन रहे हैं। बच्चों को तो अब ______आती होगी, रावण का चित्र कैसा बनाया है।
°यादगार, लक्ष्मी-नारायण, हंसी
15. इस समय सभी मनुष्य मात्र पुकारते-हे पतित-पावन आकर हमको पावन बनाओ। दु:ख हर कर सुख का रास्ता बताओ। कहते भी हैं भगवान जरूर कोई वेष में आ जायेगा। तो *बाबा कौन-से वेष में आये हैं?*
° अब कुत्ते-बिल्ली, ठिक्कर-भित्तर आदि में तो नहीं आयेंगे। गाया हुआ है *भाग्यशाली रथ पर आते हैं* । (बाप खुद कहते हैं मैं इस साधारण रथ में प्रवेश करता हूँ। यह अपने जन्मों को नहीं जानते हैं, तुम अभी जानते हो। इनके बहुत जन्मों के अन्त में जब वानप्रस्थ अवस्था होती है तब मैं प्रवेश करता हूँ।)
16. *ब्रह्मा बाबा* के कौन-से टाइटल्स आज मुरली में आये हैं? (5)
° *प्रजापिता* ब्रह्मा,
सगंमयुगी वन्डरफुल *अलौकिक बाप*, ग्रेट-ग्रेट ग्रैण्ड फादर, आदि देव, एडम….।
