Answers from Sakar Murli 12-09-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 12-09-2020*

1. *ज्ञानी तू आत्मा* कौन है? _(स्लोगन)_
° वह है जो धोखा खाने से *पहले परखकर* स्वयं को *बचा ले* ।

2. हम ब्रह्माकुमार-कुमारियां भी *मास्टर आदि देव, आदि रत्न* है। यह समझने से क्या प्राप्तियां हैं? (2)
° यह समझने से ही अपने *जीवन के मूल्य को जान सकेंगे* क्योंकि आदि रत्न अर्थात् प्रभू के रत्न, *ईश्वरीय रत्न* – तो कितनी वैल्यु हो गई।
° यह समझकर हर कार्य करो तो *समर्थ भव का वरदान* मिल जायेगा। (कुछ भी व्यर्थ जा नहीं सकता।)

3. सतयुग में कौन-सी बाते *100%* है ? (5) और कौन-सी बाते *एक* है? (4)
° तुम जानते हो इन लक्ष्मी-नारायण के राज्य में *एक* देवी-देवता *धर्म* था। एक *राज्य* , एक *मत* , एक *भाषा*।
° 100 परसेन्ट *प्योरिटी* , *पीस* , *प्रासपर्टी* ( *सुख* , *सम्पत्ति* ) थी।

4. जबकि सत् शिवबाबा, सत् शिव टीचर, सत् शिव गुरू हमे *ऊंच ते ऊंच श्रीमत* पर एक मत बना रहे। तो उस पर चलना चाहिए। तो यह *श्रीमत हमे क्या कहती?* (4)
° बाप कहते हैं एक तो *देही-अभिमानी* बनो और बाप को *याद* करो। (जितना याद करेंगे, अपना कल्याण करेंगे।)
° श्रीमत क्या सिखलाती है? *सहज राजयोग* । राजाई के लिए पढ़ा रहे हैं। अपने बाप के द्वारा सृष्टि के आदि-मध्य-अन्त को जानकर फिर *दैवीगुण भी धारण करने हैं* । (बाप का कभी सामना नहीं करना चाहिए,अहंकार वश। फिर नशा ही उड़ जाता।)
° बाप कहते हैं गृहस्थ व्यवहार में रहते *सिर्फ एक जन्म पवित्र* रहो। (तुम जन्म-जन्मान्तर तो पतित रहे हो। अब मैं आया हूँ तुमको पावन बनाने। यह अन्तिम जन्म पावन बनो। सतयुग-त्रेता में तो विकार होते ही नहीं।)

5. बाबा कितनी प्वाइंट्स देते हैं-सदा यही _____ रहे कि हम श्रीमत पर अपनी सतयुगी राजधानी स्थापन कर रहे हैं (हम ही देवी-देवता थे), तो _____ खुशी रहेगी। बच्चों को सदैव नशा रहना चाहिए। ______ नशा!
°स्मृति, अपार, नारायणी

6. *हमारी बात मानी नहीं गई* । तो थोड़ा बिगड़ना चाहिए। _(सही / गलत)_
° *गलत* (यह तो होता ही है। कोई किस तरफ, कोई किस तरफ, फिर *मैजारिटी* वाले को उठाया जाता है, इसमें रंज होने की बात नहीं। बच्चे रूठ पड़ते हैं। हमारी बात मानी नहीं गई। *अरे, इसमें रूठने की क्या बात है* । बाप तो सबको रिझाने वाला है।)

7. हम तो *राम-सीता* बनेंगे। _(सही / गलत)_
° *गलत* (ऐसे थोड़ेही कहना चाहिए। तुम्हारी *एम ऑब्जेक्ट ही है नर से नारायण बनना*। तुम फिर राम सीता बनने में खुश हो जाते हो, *हिम्मत* दिखानी चाहिए ना।)

8. बाबा ने आज *कुमारियों-माताओं का बहुत उमंग बढ़ाया* । किन शब्दों में? (4)
° माताएं पढ़ी हुई होती तो *कमाल* कर दिखाती।
° तुमने श्रीमत पर राजाई स्थापन की थी। *नारी से लक्ष्मी बनी थी* तो कितना नशा रहना चाहिए।
° तुम *माताओं का संगठन* तो बहुत अच्छा होना चाहिए (हिम्मत भी हो)। एम ऑब्जेक्ट तो सामने हैं। (बाप कहते मैं तुमको ऐसा लक्ष्मी-नारायण बनाता तो तुम्हें भी औरों पर रहमदिल बनना चाहिए। जब अपना कल्याण तब दूसरे का भी कर सकेंगे।)
° बाप कहते हैं मैं तुम पर उपकार करता हूँ। तुम फिर *मुझ पर अपकार करते हो* । भारत का हाल देखो क्या है। (हमे श्रेष्ठ बन सबको श्रेष्ठ बनाना है।)

9. बाबा ने कहा *बूढ़ी माताओं* को भी सिखलाकर तैयार करना चाहिए (उनका भी भाग्य बन जाए)। वह *प्रदर्शनी में* क्या समझा सकते? (3)
° कोई को भी यह चित्र दिखाकर बोलो इनका राज्य था ना। अभी तो है नहीं। बाप कहते हैं-अब तुम *मुझे याद करो तो तुम पावन बनकर पावन दुनिया में* चले जायेंगे। अब पावन दुनिया स्थापन हो रही है। (कितना सहज है। बुढ़ियाँ बैठकर प्रदर्शनी पर समझायें तब नाम बाला हो।)
° कृष्ण के चित्र में भी लिखत बहुत अच्छी है। बोलना चाहिए *यह लिखत जरूर पढ़ो*। इनको पढ़ने से ही *तुमको नारायणी नशा अथवा विश्व के मालिकपने का नशा चढ़ेगा* ।(सामने एम ऑब्जेक्ट को देखकर ही खुशी होती है। हम यह शरीर छोड़ जाए विश्व के मालिक बनेंगे। जितना याद में रहेंगे उतना पाप कटेंगे।)
° *देखो लिफाफे पर छपा है* – वन रिलीजन, वन डीटी किंगडम, वन लैंगवेज….. वह जल्दी स्थापन होगी। (बुढ़ियों को ऐसा सिखलाकर होशियार बनाओ जो प्रदर्शनी पर बाबा कहे कि 8-10 बुढ़ियों को भेजो तो झट आ जाएं। जो करेगा सो पायेगा।)

10. श्रीकृष्ण, सीढ़ी वा *लक्ष्मी-नारायण के चित्र* पर क्या लिख सकते? (4)
° तुम दिखाते हो विनाश के बाद *श्रीकृष्ण आ रहा है* । क्लीयर लिख देना चाहिए।
° *सतयुगी* एक ही देवी-देवताओं का राज्य, एक भाषा, *पवित्रता, सुख, शान्ति फिर से स्थापन हो रही है।* (द्वापर-कलियुग में सब नर्कवासी हैं। अभी तुम संगमयुगी हो।)
° आदि सनातन देवी-देवता धर्म, सुख-शान्ति का राज्य स्थापन हो रहा है – *त्रिमूर्ति शिवबाबा की श्रीमत पर*
(इसमें सिर्फ लिखना है एक ही सत्य त्रिमूर्ति शिवबाबा, सत्य त्रिमूर्ति शिव टीचर, सत्य त्रिमूर्ति शिव गुरू। त्रिमूर्ति अक्षर नहीं लिखेंगे तो समझेंगे परमात्मा तो निराकार है, वह टीचर कैसे हो सकता है।)
° यह स्थापना हो रही है। (बाप आये हैं *ब्रह्मा द्वारा एक धर्म की स्थापना* बाकी सबका विनाश करा देंगे।)

11. *छोटे-छोटे अक्षर* में लिखत होनी चाहिए। _(सही / गलत)_
° *गलत* (ऐसे-ऐसे बड़े-बड़े अक्षर में बड़े-बड़े चित्र हों। छोटे बच्चे छोटे चित्र पसन्द करते हैं। *अरे, चित्र तो जितना बड़ा हो उतना अच्छा।*)

12. यह लक्ष्मी-नारायण का चित्र कहां-कहां *प्रयोग* कर सकते? (2)
° *चक्कर पर जाते हैं* तो यह चित्र लक्ष्मी-नारायण का ले जाना पड़े।
° लक्ष्मी-नारायण का चित्र *टीन की सीट पर बनाकर* हर एक जगह पर रखना है।

13. यह तो बाप-टीचर-गुरू भी है। तो वो *गुरू* अच्छे की यह सतगुरू? और वह *टीचर* अच्छे की यह सुप्रीम टीचर?
° (गुरू) वो गुरू लोग शास्त्र सुनाते हैं। उनको टीचर नहीं कहेंगे वह कोई ऐसे नहीं कहते कि हम दुनिया की हिस्ट्री-जॉग्राफी सुनाते हैं। बाप तुमको *शास्त्रों का सार* समझाते हैं *और फिर वर्ल्ड की हिस्ट्री-जॉग्राफी भी* बतलाते हैं।
° (टीचर) उस टीचर से तुम कितना भी पढ़ो, क्या कमायेंगे? सो भी नसीब। पढ़ते-पढ़ते कोई एक्सीडेंट हो जाए, मर जाए तो पढ़ाई खत्म। यहाँ तुम *यह पढ़ाई जितनी भी पढ़ेंगे, वह व्यर्थ जायेगी नहीं।*

14. बाप को याद (और सर्व प्राप्तियों का अनुभव) करने के बदले और *दुनियावी बातों में पड़ जाते* हैं, इससे ही सारी गड़बड़ होती। तो इससे बचाने लिए बाबा ने कौन-सी शिक्षायें दी? (3)
° अरे *तुम गोरे बनते हो* फिर काले, तमोप्रधान से क्यों दिल लगाते हो। (इस कब्रिस्तान से दिल नहीं लगानी है। हम तो बाप से *वर्सा ले रहे* हैं।)
° पुरानी दुनिया से दिल लगाना माना *जहन्नुम (नर्क, दोज़क)* में जाना है। (बाप आकर दोज़क से बचाते हैं फिर भी मुंह दोज़क तरफ क्यों कर देते?
° पुरानी दुनिया से बिल्कुल दिल नहीं लगानी चाहिए। *कोई से दिल लगाई और मरे।*

15. यह ज्ञान का भोजन किन्हें *हज़म* नहीं हो सकता है?
° जो भूलें करके, छी-छी ( *पतित* ) बनकर फिर क्लास में आकर बैठते हैं, उन्हें ज्ञान हज़म नहीं हो सकता। (वह मुख से कभी भी नहीं कह सकते कि भगवानुवाच काम महाशत्रु है। उनका दिल अन्दर ही अन्दर खाता रहेगा। वह आसुरी सम्प्रदाय के बन जाते हैं।)
° अमृत पीते-पीते विष खा लेते हैं तो *100 गुणा काले* बन जाते। (हड्डी-हड्डी टूट जाती। गिरने से कल्प-कल्पान्तर का घाटा बहुत-बहुत पड़ जाता है।)

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