Answers from Sakar Murli 14-09-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 14-09-2020*

1. *संगमयुग पर श्रेष्ठ आत्मा* कौन है?
° जो *सदा बेफिक्र बादशाह* है।

2. जो *बाप समान वरदानी मूर्त* बच्चे हैं, उनकी निशानी क्या है? (3)
° वह कभी किसी की *कमजोरी को नहीं देखते* (वह सबके ऊपर रहमदिल होते हैं।)
° जैसे बाप किसी की कमजोरियां दिल पर नहीं रखते, ऐसे वरदानी बच्चे भी किसी की कमजोरी *दिल में धारण नहीं* करते।
° वे हरेक की *दिल को आराम देने वाले मास्टर दिलाराम* होते हैं। (इसलिए साथी हो या प्रजा सभी उनका गुणगान करते हैं। सभी के अन्दर से यही आशीर्वाद निकलती है कि यह हमारे सदा स्नेही, सहयोगी हैं।)

3. *सतयुग* में सीलॉन, बर्मा, कराची आदि होंगे?
° नहीं, कुछ भी नहीं। (सतयुग में तुम सब *मीठी नदियों के किनारे पर* रहते हो। खेती बाड़ी आदि सब होती है, सृष्टि तो बड़ी है। *मनुष्य बहुत थोड़े* रहते हैं फिर पीछे वृद्धि होती है।)

4. पढ़ा हुआ सब भूल सिर्फ *एक बात* कौन-सी धारण करनी है? और कुछ न भी समझो, सिर्फ *एक बात* कौन-सी बुद्धि में रखो?
° मीठे बच्चे बाप को *याद* करो। तुम कहते भी थे ना बाबा आप आयेंगे तो हम *वारी* जायेंगे। तुम्हें फिर हमारे पर *कुर्बान* जाना है। (लेन-देन होती है ना। बाप को कहते, हम पुराना सब कुछ आपको देते हैं। यह सब खत्म होना है। आप हमको फिर नई दुनिया में देना। बाप आते ही हैं सबको ले जाने।)
° और कुछ न समझो सिर्फ एक बात बुद्धि में रखो – *एक शिवबाबा दूसरा न कोई* । (यह आत्मा ने कहा – बाबा, हम आपको ही याद करेंगे। यह तो सहज है ना। हाथों से कर्म करते रहो और बुद्धि से बाप को याद करते रहो।)

5. जो सर्विसएबुल हैं, उनका नाम बाला है। बाबा ने यहां *देहली* के कौन-से *2 अनन्य रत्न* याद किये?
° झट नाम लेंगे *जगदीश भाई* का। तुम्हारे लिए मैगजीन भी निकालते हैं। उसमें सब कुछ आ जाता है। अनेक प्रकार की प्वाइंट्स लिखते हैं, *बृजमोहन भाई* भी लिखते हैं।

6. *लिखने* की सेवा से क्या लाभ है?
° लिखना कोई मासी का घर थोड़ेही है। जरूर *विचार सागर मंथन* करते हैं, अच्छी सर्विस करते हैं। कितने *लोग पढ़कर खुश* होते हैं। बच्चों को भी *रिफ्रेशमेंट* मिलती है।

7. तुम हो संगमयुगी, _______ बन रहे हो। जानते हो पहले नम्बर में पुरूषोत्तम यह ________ हैं ना। अब फिर स्थापना होती है। फाउन्डेशन लगता है ना। ______ कितना छोटा होता है फिर उनसे कितना बड़ा ______ बढ़ जाता है।
°पुरूषोत्तम, लक्ष्मी-नारायण, कलम, झाड़

8. इस *सच्ची-सच्ची गीता पाठशाला* की कौन-सी 3 अनोखी बातें बाबा ने सुनाई?
° पाठशाला में कभी बूढ़े आदि पढ़ते हैं क्या? यहाँ तो *बूढ़े, जवान आदि सब पढ़ते* हैं।
° और जगहों को पाठशाला नहीं कहेंगे। कोई भी जो सतसंग हैं, *एम ऑब्जेक्ट (क्या बनेंगे)* कुछ नहीं है। (सत् तो एक बाप ही है, जिसके लिए कहा जाता है संग तारे…. कुसंग बोरे…..। कुसंग कलियुगी मनुष्यों का।)
° *सत् का संग* तो एक ही है। (अभी तुमको वण्डर लगता है। सारे सृष्टि के आदि-मध्य-अन्त का ज्ञान कैसे बाप देते हैं, तुमको तो खुशी होनी चाहिए।)

9. बाप कहते हैं तुम बच्चे कितने *भाग्यशाली* हो। यहां ऋषि-मुनियों की बात करते बाबा ने हम बच्चों को *कौन-सा टाइटल दिया?*
° तुम हो *राजऋषि*। *ऋषि* अर्थात् पवित्र। तुम स्वर्ग के *राजा* बनते हो तो पवित्र जरूर बनना पड़े। (सतयुग-त्रेता में जिनका राज्य था उनका ही फिर होगा। तुम अभी कहते हो हम श्रीमत पर अपना राज्य स्थापन कर रहे हैं। सतयुग आना है, कलियुग जाना है।)

10. पुराना शरीर छोड़ फिर जाए दूसरा लेते, इसमें *रोने की बात* है। _(सही / गलत)_
° गलत (इसमे रोने की क्या दरकार है। यह तुम जानते हो- *ड्रामा अनादि बना हुआ है। हर एक को पार्ट बजाना ही है।* बाप ने समझाया है – सतयुग में हैं नष्टोमोहा। मोहजीत की भी कहानी है ना।)

11. इस *बेहद की दुनिया* (ड्रामा) को बाबा ने कौन-से 5 नाम दिये?
° यह है बेहद का *घर*, *माण्डवा* अथवा *स्टेज़* , इनको *कर्मक्षेत्र* भी कहा जाता है। (कर्म तो जरूर करना होता है। सब मनुष्यों के लिए यह कर्मक्षेत्र है। सबको कर्म करना ही है, पार्ट बजाना ही है। पार्ट हर एक आत्मा को पहले से मिला हुआ है।)
° अनेक वैराइटी धर्मों का झाड़ है मनुष्यों का। (एक सूरत न मिले दूसरे से। बना-बनाया ड्रामा है ना। एक जैसा पार्ट कोई का हो नहीं सकता। इनको कहा जाता है *कुदरती बना-बनाया बेहद का ड्रामा* ।)

12. यह जो दु:ख-सुख का खेल चलता, यह *दु:ख-सुख सब परमात्मा ही देते* हैं। _(सही / गलत)_
° गलत (यह हर एक के कर्मों के हिसाब का खेल है। बाप किसी को भी दु:ख नहीं देते। *वह तो आते ही हैं सुख का रास्ता बताने।* बाबा कहते हैं – बच्चे, मैंने किसी को भी दु:खी नहीं किया है। यह तो तुम्हारे ही कर्मों का फल है।)

13. ड्रामा प्लैन अनुसार मनुष्य तो कहेंगे हमारा (ड्रामा में) दोष क्या है। तुम्हारा भी *कोई दोष नहीं* है। _(सही / गलत)_
° *सही* (यह भी ड्रामा है। राम राज्य, रावण राज्य का खेल बना हुआ है। खेल में कोई हार जाते हैं तो उनका दोष थोड़ेही है। यह तो अनादि बना बनाया ड्रामा है। उनको कुछ कर थोड़ेही सकते हैं। कोई कहते हैं हमने गुनाह क्या किया जो ऐसा पार्ट रखा है। अब गुनाह की तो बात नहीं। यह तो पार्ट है।)

14. धनवान आदमी दुनिया का चक्र लगाते हैं। *सारी दुनिया* देख कर आते हैं। _(सही / गलत)_
° गलत (यहाँ *सारी दुनिया को कोई देख न सके।* हाँ सतयुग में देख सकते हैं क्योंकि सतयुग में है ही एक राज्य, इतने थोड़े राजायें होंगे, यहाँ तो देखो *कितनी बड़ी दुनिया है।* इतनी बड़ी दुनिया का चक्र कौन लगाये।)

15. पुकारते है बाबा आकर इस पाप की पुरानी _____ दुनिया से नई ______ पुण्य की दुनिया में ले चलो। सूर्य चांद बत्तियों के होते हुए भी _____ कहा जाता है। सतयुग त्रेता को कहा जाता है ____ और भक्ति मार्ग को कहा जाता है ____ ।
°कलियुगी, सतयुगी, अन्धियारा, दिन, रात

16. बाप कहते हैं मैं जो हूँ, जैसा हूँ, ऐसा कोई नहीं जानते हैं। अभी हम बाप को पूरी रीति जान गये। शिवलिंग की पूजा भी करते हैं। जरूर यह जड़ है तो _____ भी होगा! भगवान तो रचता है _____ में। उनकी निशानी है सिर्फ पूजा के लिए। शिव काशी के मंदिर में जाते हैं, किसको पता थोड़ेही है भगवान _____ है। हम भी उनके बच्चे हैं। बाप कहते हैं तुम हमको बुलाते हो कि दु:ख की दुनिया से ले जाओ। अब मैं आया हूँ तो मेरा ______ चाहिए ना। बाप बच्चों को बैठ समझाते हैं, अच्छी ____ मिलती है तो वह लेनी चाहिए ना।
°चैतन्य, ऊपर, निराकार, सुनना, मत

17. एक ____ ही है, जिसने किसी का भी राज्य छीना नहीं है क्योंकि _____ असुल में अहिंसक है ना। तुम _____ -वासियों को तो बाप विश्व का मालिक बनाते हैं।
°भारत, भारत, भारत

18. हमारा *गुरूद्वारा* कौन-सा है?
° तुम्हारा गुरूद्वारा है – *मुक्ति और जीवनमुक्ति धाम* , सतगुरू द्वार। (गुरू का द्वार अर्थात् घर कहेंगे ना। सतगुरू आकर *मुक्ति-जीवनमुक्ति का द्वार* खोलते हैं। अकाल-मूर्त हैं ना। जिसको काल भी खा नहीं सकता। आत्मा है ही बिन्दी, उनको काल कैसे खायेगा।)

19. ______ का गुण धारण कर माया के विघ्नों में पास होना है। अनेक आपदायें आयेंगी, अत्याचार होंगे-ऐसे समय पर _____ करते बाप की याद में रहना है, सच्ची _____ करनी है।
°सहनशीलता, सहन, कमाई

20. अभी कौन-सा *समय* आने वाला है? (आ गया है!)
° अभी तो सुबह को क्लास आदि में जाते हो, सेन्टर्स पर। वह भी समय आयेगा जो तुम *बाहर निकल भी नहीं सकेंगे।* (दिन-प्रतिदिन जमाना बिगड़ता जाता है और बिगड़ना है। दु:ख के दिन बहुत ज़ोर से आयेंगे। रक्त की नदियाँ भी बहेंगी। कहाँ भी सेफ्टी नहीं रहेगी।)

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