Answers from Sakar Murli 14-12-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 14-12-2020*

1. सम्बन्ध-सम्पर्क और स्थिति में _____ बनो, दिनचर्या में नहीं।
° _लाइट_

2. मन्सा पवित्रता अर्थात् _____ में भी अपवित्रता नहीं। सदा आत्मिक स्वरूप अर्थात् भाई-भाई की श्रेष्ठ _____। वाचा में सदा _____ और मधुरता, कर्मणा में सदा _____, सन्तुष्टता-हर्षितमुखता। ऐसे सम्पूर्ण पवित्र आज्ञाकारी बच्चों का बाप भी _____ करते। वही अपने हर कर्म से बाप का कर्तव्य सिद्ध करने वाले _____ रत्न हैं।
° _संकल्प_, _स्मृति_, _सत्यता_, _नम्रता_, _गुणगान_, _समीप_

3. तुम जो मेरे बच्चे बने हो, _____ में चल रहे। तुम्हारे लिए यह संगम है जबकि तमोप्रधान से _____ बनते। सतोप्रधान आत्मा को सतयुग में नया _____ चाहिए। वहाँ सब कुछ _____ होता है। सुखधाम में इन लक्ष्मी-नारायण की ______ थी। तुम _____ कर रहे हो नर से नारायण बनने का।
° _स्वर्ग_, _सतोप्रधान_, _शरीर_, _नया_, _राजाई_, _पुरुषार्थ_

4. सत्य बाप से हम यह नॉलेज पाकर 21 जन्म ______ बनेंगे। बाप कहते – बच्चे, तुम सतयुग में विश्व के ______ थे। बहुत ____ -वान, बहुत _____ थे। नई दुनिया में एक राज्य, एक _____ थी। उसको कहा जाता _____ राज्य।
° _देवी-देवता_, _मालिक_, _धन_, _सुखी_, _भाषा_, _अद्वैत_

5. वहाँ कोई _____ वस्तु नहीं होती जिसके लिए मुश्किलात आये। वह है ही _____ -धाम। तुम अभी वहाँ के लिए _____ कर रहे हो। तुम बेगर टू _____ बनते हो।
° _अप्राप्त_, _सुख_, _तैयारी_, _प्रिन्स_

6. गॉडली युनिवर्सिटी में कभी भी _____ नहीं होना। सुखधाम का मालिक बनने की ऊंची पढ़ाई एक दिन भी _____ नहीं करनी है। _____ रोज़ जरूर सुननी है।
° _अबसेन्ट_, _मिस_, _मुरली_

7. यह एक ही ______ है जबकि बाप आकर रूहानी बच्चों को पढ़ाते। ______ सिखलाते। कहते हे आत्मा _____ धरो, अब सुख के दिन आते हैं। आत्माओं से _____ करते हैं। इस शरीर का _____ आत्मा है। आत्मा कहती – मैं _____ आत्मा, शरीर विनाशी है।
° _पुरुषोत्तम संगमयुग_, _राजयोग_, _धीरज_, _बात_, _मालिक_, _अविनाशी_

8. बाप कितना सहज समझाते, पहले तो यह _____ रहना चाहिए। अब निराकार ईश्वर आये हैं तुमको पढ़ाने, तुम _____ सम्प्रदाय बने हो, फिर _____ सम्प्रदाय बनेंगे। अभी तुम संगमयुग पर ____ बन रहे। _____ के गुण गाये जाते हैं ना, यह तुम्हारी _____ आब्जेक्ट है।
° _नशा_, _ईश्वरीय_, _दैवी_, _पावन_, _श्रीकृष्ण_, _एम_

9. यह भी समझाया है, देवताओं की और परमात्मा की *महिमा अलग-अलग* है। क्या अलग है?
° *पतित-पावन, लिबरेटर, गाइड* बाप ही है। सब दु:खों से लिबरेट कर अपने शान्तिधाम में ले जाते हैं।)

10. पहले-पहले समझाओ कि ऊंच ते ऊंच भगवान एक है, ____ भी उनको करना चाहिए। एक को याद करना ही ______ याद कहा जाता। बाप पढ़ाते हैं जिससे हम _____ बनते हैं। ______ भी धारण करने हैं इसलिए बाबा कहते हैं अपना _____ रखो। ______ है पहला अवगुण फिर दुश्मन है काम।
° _याद_, _अव्यभिचारी_, _देवता_, _दैवीगुण_, _चार्ट_, _देह-अभिमान_

11. गोल्डन एज से उतरते-उतरते तमोप्रधान बुद्धि बने हैं। अब फिर सतोप्रधान बनना है। उसके लिए *एक ही दवाई* मिलती है – कौन-सी?
° बाप कहते हैं *अपने को आत्मा समझ बाप को याद* करो तो जन्म-जन्मान्तर के पाप भस्म हो जायेंगे। (तुम बैठे हो पापों को भस्म करने तो फिर आगे पाप नहीं करना चाहिए। नहीं तो वह सौ गुणा बन जायेगा।)

12. किन *दो शब्दों का राज़* तुम्हारी बुद्धि में होने कारण पुरानी दुनिया से बेहद का वैराग्य रहता है?
° *उतरती कला और चढ़ती कला* का राज़ तुम्हारी बुद्धि में है। (तुम जानते हो आधाकल्प हम उतरते आये, अभी है *चढ़ने का समय* । बाप आये हैं *नर से नारायण* बनाने की सत्य नॉलेज देने। हमारे लिए अब कलियुग पूरा हुआ, *नई दुनिया में जाना है* इसलिए इससे बेहद का वैराग्य है।)

13. लिखा हुआ है ____ ब्रह्मा द्वारा डिटीज्म की स्थापना। ब्रह्मा का भी राज़ समझाया है – _____ सो लक्ष्मी-नारायण। पिछाड़ी का नाम इनका _____ रखा है। बाकी यह ब्रह्मा तो देखो एकदम ____ एज में खड़ा है। यही फिर _____ कर कृष्ण वा श्री नारायण बनते हैं।
° _प्रजापिता_, _ब्रह्मा-सरस्वती_, _ब्रह्मा_, _आइरन_, _तपस्या_

14. वह ब्राह्मण होते हैं _____ यात्रा वाले, तुम हो रूहानी। वह _____ , तुम पावन। वह कोई ____ की सन्तान नहीं हैं, यह तुम समझते हो।
° _जिस्मानी_, _पतित_, _प्रजापिता_

15. विकार में गये तो _____ दण्ड, पहला नम्बर दुश्मन है यह काम। 5 मंजिल से गिरेंगे तो ____ -गुड एकदम टूट जायेंगी। ऊपर से गिरने से एकदम ____ -चूर हो जाते हैं। बाप से प्रतिज्ञा तोड़ ____ मुंह किया तो आसुरी दुनिया में चला गया। उनको ब्राह्मण भी नहीं, ____ कहा जायेगा।
° _सौ गुणा_, _हड_, _चकना_, _काला_, _शूद्र_

16. पतित को एलाउ नहीं है। उन्हों के लिए विजिटिंग रूम ठीक है। तो कब *एलाउ* है? (2)
° जब *पावन बनने की गैरन्टी* करे, *दैवीगुण* धारण करे तब एलाउ हो। (दैवीगुण धारण करने में टाइम लगता है। पावन बनने की एक ही प्रतिज्ञा है।)

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