*Om Shanti*
*Answers from Sakar Murli 15-09-2020*
1. किसी भी प्रकार से बाप के कर्तव्य में *सहयोगी बनो तो सहजयोगी* बन जायेंगे। तो बाबा ने कौन-से प्रकार सुनाये? _(स्लोगन)_
° तन-मन-धन, *मन-वाणी-कर्म*
2. जबकि साक्षात्कार मूर्त बन साक्षात्कार कराने लिए *अलबेला-पन से निद्राजीत* बनना है। तो बाबा ने इसकी कौन-सी *वन्डरफुल युक्ति* सुनाई? (2)
° जब *विनाशकाल* भूलता है तब अलबेलेपन की नींद आती है। (इसलिए *भक्तों की पुकार* सुनो, दु:खी आत्माओं के *दुख की पुकार* सुनो, प्यासी आत्माओं के *प्रार्थना की आवाज* सुनो तो कभी भी अलबेलेपन की नींद नहीं आयेगी।)
° अब *सदा जागती ज्योत* बन अलबेलेपन की नींद को तलाक दो और साक्षात्कार मूर्त बनो।
3. तुम्हारे जैसा _____ तो किसको मिल न सके। तुम अभी तैयार हो रहे हो ____ -धाम में आने के लिए। भारत जब स्वर्ग था तो उन जैसा _____ खण्ड कोई होता नहीं। जब बाप आते हैं तब ही _____ राज्य स्थापन होता है।
°सुख, सुख, पावन, ईश्वरीय
4. निर्वाणधाम में जाने के लिए _____ पावन बनना है। रचना के आदि-मध्य-अन्त को _____ समझकर नई दुनिया में ऊंच पद पाना है।
°पूरा, पूरा
5. बाबा ने कहा जिन्हे ज्ञान का अभ्यास नहीं, उनको ज्यादा बात नहीं करनी चाहिए। सिर्फ *एक मुख्य बात समझानी* है। कौन-सी?
° बाबा ने समझाया है *अपने को आत्मा समझ मामेकम् याद करो*, बस, और कुछ बात ही नहीं करना चाहिए।
6. यह चित्र आदि बनाने में भी बड़ी बुद्धि चाहिए। तो उनमें *क्या लिख सकते?* (2)
° बाबा ने कहा था-हर एक चित्र के ऊपर लिखा हुआ हो *शिव भगवानुवाच*।
° यह भी लिखना चाहिए कि *भारत जो स्वर्ग था सो फिर नर्क* जैसा कैसे बना है, आकर समझो। *भारत सद्गति में था, अब दुर्गति* में है। अब सद्गति को पाने के लिए बाप ही नॉलेज देते हैं। यहा तो तुम्हें *रूहानी बाप रूहानी नॉलेज पढ़ाते* हैं और रूह पढ़ती है।
7. पुकारते हैं *तुम मात-पिता…. तुम्हारी कृपा से सुख घनेरे*, इसका अर्थ क्या है?
° अब *बाप तुमको स्वर्ग के सुख लिए पढ़ा रहे*, जिसके लिये तुम पुरूषार्थ कर रहे हो। जो करेगा वह पायेगा। (पावन दुनिया तो एक स्वर्ग ही है। सतयुग में हम सतोप्रधान थे।)
8. तुम्हारा *सबसे अच्छा यादगार* मन्दिर देलवाड़ा मन्दिर है। कैसे? (2)
° नीचे *तपस्या में बैठे* हैं। (तुम जानते हो अभी हम राजयोग सीख रहे हैं फिर नई दुनिया में जायेंगे। वह जड़ मन्दिर, तुम चैतन्य में बैठे हो।)
° मुख्य मन्दिर यह ठीक बना हुआ है। *स्वर्ग की राजाई* दिखाई है (कहाँ दिखायें, इसलिए छत में स्वर्ग को दिखाया है। इस पर बहुत अच्छा समझा सकते हो। बोलो, भारत ही स्वर्ग था फिर अब भारत नर्क है।)
9. सतयुग में लक्ष्मी-नारायण का राज्य था तो वहाँ *9 लाख* होते हैं। फिर *इतनी सब आत्मायें कहाँ गई?*
° ब्रह्म में वा पानी में तो नहीं लीन हो गई। वह सब *मुक्तिधाम में* रहती हैं। हर एक *आत्मा* अविनाशी है। उनमें *अविनाशी पार्ट* नूंधा हुआ है जो कभी मिट नहीं सकता। (आत्मा विनाश हो न सके। आत्मा तो बिन्दी है। बाकी निर्वाण आदि में कोई भी जाता नहीं, सबको पार्ट बजाना ही है।)
10. *बाप का पार्ट* पिछाड़ी में है। क्या पार्ट है? (2)
° जब सब आत्मायें आ जाती हैं तब मैं *आकर सबको ले जाता* हूँ।
° *नई दुनिया की स्थापना* फिर पुरानी दुनिया का विनाश। यह भी ड्रामा में नूंध है।
11. बरोबर यह बात तो ठीक है, परमात्मा सर्वव्यापी कैसे हो सकता। भगवान तो _____ है, उनसे _____ मिलता है। बाप जो समझाते हैं उसको _____ करना है।
° _बाप_, _वर्सा_, _धारण_
12. जो आदि सनातन देवी-देवता धर्म वाले थे, उन्हे ही टच होंगा। और इसी समय फाउन्डेशन लगाना पड़ता। उसमें मुख्य है *पवित्रता* , वह *कैसे धारण* होंगी? (2)
° बहन-भाई तो बनाना ही पड़े। (हम एक बाप के बच्चे सब *आत्मायें भाई-भाई* हैं। फिर भाई-बहन बनते हैं।)
° भगवान बाप ही पावन होने की युक्ति बताते हैं। भगवानुवाच *मामेकम् याद* करो। मैं *पतित-पावन* हूँ, मुझे याद करने से तुम्हारे *विकर्म विनाश* होंगे और *मुक्तिधाम* में आ जायेंगे। (बाप कहते देह के सब धर्म छोड़ मुझे याद करो तो तुम सतोप्रधान बन जायेंगे। मैं गुजराती हूँ, फलाना हूँ – यह सब छोड़ो। *अपने को आत्मा समझो* और बाप को याद करो। यह है योग अग्नि। पवित्र बनने बिगर घर जा न सकें।)
13. अब जैसे कि नई सृष्टि की स्थापना हो रही है, पहले-पहले हैं ____ । नई सृष्टि की स्थापना में प्रजापिता ब्रह्मा तो जरूर चाहिए। ब्रह्मा द्वारा ______ होंगे। इनको रूद्र ज्ञान यज्ञ भी कहा जाता है, इसमें _____ जरूर चाहिए। प्रजापिता ब्रह्मा की औलाद जरूर चाहिए। वह है ग्रेट-ग्रेट ग्रैन्ड फादर। _____ हैं पहले नम्बर में चोटी वाले।
°ब्राह्मण, ब्राह्मण, ब्राह्मण, ब्राह्मण
14. बाप ही बच्चों को ज्ञान का तीसरा नेत्र देते, जिससे तुमको सृष्टि के आदि-मध्य-अन्त का ज्ञान मिला है। तो *पुरानी दुनिया (भक्ति) को ब्रह्मा की रात क्यों कहते?*
° (क्योंकि) भक्ति मार्ग में *दर-दर ठोकरें* खानी होती हैं। (अनेक प्रकार के जप-तप-यज्ञ करते, शास्त्र आदि पढ़ते हैं), जिस कारण ही ब्रह्मा की रात कहा जाता है। आधाकल्प रात, आधाकल्प दिन। (तुम कल्प पहले भी ब्राह्मण थे और देवता बने थे, जो बने थे वही फिर बनेंगे। आदि सनातन देवी-देवता धर्म के तुम हो। तुम ही पूज्य और पुजारी बनते हो। फिर पूज्य पावन देवी-देवता बनना हैं।)
15. सतगुरू है ही एक – सबकी सद्गति करने वाला। बाप कहते हैं मैं तुमको सब ______ का सार समझाता हूँ। ज्ञान, भक्ति फिर भक्ति का है ____। यह पुरानी दुनिया अब खत्म होनी है इसलिए इस दुनिया का ___ करना है। दुनिया को छोड़कर कहाँ जाना नहीं है, लेकिन इसे बुद्धि से _____ है।
°वेदों-शास्त्रों, वैराग्य, _संन्यास_, _भूलना_
