Answers from Sakar Murli 16-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 16-10-2020*

1. यथार्थ _____ वृत्ति का सहज अर्थ है – जितना न्यारा उतना प्यारा।
° _वैराग्य_

2. *रहमदिल बाप के रहमदिल बच्चो* की क्या निशानियाँ है? (2)
° किसी को भी भिखारी के रूप में देखेंगे तो उन्हें रहम आयेगा कि *इस आत्मा को भी ठिकाना मिल जाए, इसका भी कल्याण हो जाए*।
° उनके *सम्पर्क में जो भी आयेगा उसे बाप का परिचय* जरूर देंगे। (जैसे कोई घर 🏡 में आता है तो पहले उसे पानी 💧पूछा जाता है, ऐसे ही चला जाए तो बुरा समझते हैं, ऐसे जो भी सम्पर्क में आता है उसे बाप के परिचय का पानी जरूर पूछो अर्थात् *दाता के बच्चे दाता बनकर कुछ न कुछ दो* ताकि उसे भी ठिकाना मिल जाए।)

3. “मीठे बच्चे – तुम्हें संगम पर सेवा करके _____ लायक बनना है फिर भविष्य में पुरूषोत्तम बनने से तुम ____ लायक बन जायेंगे”
° _गायन_, _पूजा_

4. *बाप की दिल* ♥️ पर कब चढ़ेंगे? (2)
° जब यह *देह-अभिमान की बीमारी समाप्त* हो जाए। (जिस कारण ही सभी विकारों ने महारोगी बनाया)
° दिल पर चढ़ना है तो *विशाल बुद्धि* बनो, *ज्ञान चिता* पर बैठो। *रूहानी सेवा* में लग जाओ और वाणी चलाने के साथ-साथ *बाप को अच्छी रीति याद* करो।

5. *अपनी दिल ❤️ से* क्या पूछ सकते? (2)
° हम कितनों को *आपसमान* बनाते हैं? मास्टर पतित-पावनी बन सबको पावन (राज़-राज़ेश्वर) बनाने की सेवा कर रहे हैं?
° हमारे में कोई अवगुण तो नहीं है? *दैवीगुण* कहाँ तक धारण किये हैं?

6. छोटे बच्चे अल्फ बे पढ़ते हैं ना। तुम बैठे हो तुमको भी *अल्फ बे* पढ़ा रहे हैं। कैसे?
° अल्फ (शिवबाबा) और बे (बादशाही का वर्सा)। बाप कहते हैं मुझे *याद करो तो तुम विश्व के मालिक* बनेंगे। (कोई भी आसुरी काम नहीं करना है। दैवीगुण धारण करने हैं।)

7. बाप तुम्हें विश्व का मालिक बनाते हैं, मंजिल बहुत बड़ी है। तो इस अन्तिम समय में बाप कौन-सा *फरमान* करते?
° *मामेकम् याद करो*। देहधारियों को याद नहीं करना है। (मैं तो विदेही हूँ, इसमें बैठ तुमको ज्ञान देता हूँ।)

8. बाप कहते हैं मुझे *पुराने तन में पुरानी राजधानी में* आना पड़ता। _(सही / गलत)_
° *सही* (अभी यह रावण की राजधानी है। तन भी पराया है क्योंकि इस शरीर में तो पहले से ही आत्मा है। मैं पराये तन में प्रवेश करता हूँ। नहीं तो नाम पड़ता, बदलता। मुझे तो कहते ही हैं शिवबाबा।)

9. गीत 🎼:-जाग सजनियां जाग…….. नवयुग अर्थात् नई दुनिया सतयुग आया। अब *किसको कहते हैं जागो?*
° *आत्माओं को।* (क्योंकि आत्मायें घोर अन्धियारे में सोई पड़ी हैं। कुछ भी समझ नहीं। बाप को ही नहीं जानते। अब बाप जगाने आये हैं। अभी तुम बेहद के बाप को जानते हो। उनसे बेहद का सुख मिलना है नये युग में। सतयुग-स्वर्ग को नया, कलियुग नर्क को पुराना युग कहेंगे। नया युग फिर पुराना होता, रावण आता, 5000 वर्ष का चक्र आदि)

10.बाबा ने कहा जगत अम्बा वा लक्ष्मी की बायोग्राफी के *कान्ट्रास्ट* पर समझा सकते। तो क्या है कान्ट्रास्ट? (5)
° लक्ष्मी को *सतयुगी* देवी और जगत अम्बा को *संगमयुगी* ब्राह्मणी कहेंगे। (ब्राह्मण संगम पर ही होते हैं। इस संगमयुग को कोई नहीं जानते। प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा नयी पुरूषोत्तम सृष्टि रची जाती है।)
° वही *जगत अम्बा* फिर लक्ष्मी बनती है। फिर *लक्ष्मी* सो 84 जन्मों के बाद जगत अम्बा होगी।
° जैसे ब्रह्मा को इतनी भुजायें देते हैं (बच्चों का प्रतीक), *अम्बा के तो सब बच्चे हैं*। माँ-बाप ही प्रजापिता बनते हैं। (लक्ष्मी-नारायण को कभी सतयुग में जगतपिता जगत माता नहीं कहेंगे।)
° *जगत अम्बा* सरस्वती है एक। *नाम कितने रख दिये* हैं – दुर्गा, काली आदि।
° *प्रजापिता ब्रह्मा की बेटी* है सरस्वती, उनको अम्बा कहते हैं। (बाकी हैं बच्चे और बच्चियां। हैं सब एडाप्टेड, मुख वंशावली, मेरे है कहकर एडाप्टेड)

11. शिवबाबा बेहद का बाप है, *आत्माओं को एडाप्ट* करते हैं। _(सही / गलत)_
° गलत ( *आत्मायें तो हैं ही* । उनको एडाप्ट नहीं किया जाता है। बाप कहते हैं तुम आत्मायें सदैव मेरे बच्चे हो। फिर अभी मैं आकर *प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा बच्चों को एडाप्ट* करता हूँ। आत्माओं को नहीं एडाप्ट करते, बच्चे और बच्चियों को करते हैं। यह भी बड़ी सूक्ष्म समझने की बातें हैं।)

12. इन (ब्रह्मा-सरस्वती की) बातों को समझने से *क्या प्राप्ति* है?
° तुम यह लक्ष्मी-नारायण बनते हो। कैसे बनें, यह हम समझा सकते हैं। *क्या ऐसे कर्म किये जो यह विश्व के मालिक बनें।* तुम प्रदर्शनी आदि में भी पूछ सकते हो। तुमको मालूम है इन्हों ने यह *स्वर्ग की राजधानी कैसे ली* ।

13. *भारत और बाप* की इतनी अपरमअपार महिमा क्यों हैं?
° बेहद का बाप कहते हैं मैं यहाँ भारत में आता हूँ। यहाँ *आकर नर्क को स्वर्ग बनाते हैं, सबको शान्ति देते* हैं।

14. यह है भी गीता का युग। _______ लड़ाई भी बरोबर हुई थी। _____ एक को सिखाया होगा क्या, यहाँ तो ढेर पढ़ते हैं। तुम कहते हो ज्ञान सागर बाप द्वारा हम ज्ञान सीख रहे हैं, राज-राजेश्वरी बनने के लिए। ज्ञान सागर _____ भी सिखलाते हैं, राज- _____ भी सिखलाते हैं।
° _महाभारत_, _राजयोग_, _ज्ञान_, _योग_

15. सतयुग में इतने *थोड़े मनुष्य*, कलियुग में इतने *बहुत मनुष्य* हैं। यह कैसे समझाएं? _(कौन-सा चित्र)_
° इसके लिए फिर *गोला* भी जरूर चाहिए।

16. प्रदर्शनी में इतने सबको बुलाते हैं। ______ को तो कभी कोई ने निमंत्रण नहीं दिया है। तो ऐसे-ऐसे विचार चलाने पड़ें, इसमें बड़ी _____ -बुद्धि चाहिए।
° _कस्टम कलेक्टर_, _विशाल_

17. ब्रह्मा बाप का *रिगार्ड बढ़ाने* लिए बाबा ने कौन-सी बातें सुनाई? (2)
° *हुसेन के घोड़े को कितना सजाते* हैं। (पटका कितना छोटा होता, घोड़ा कितना बड़ा होता है। आत्मा भी कितनी छोटी बिन्दी है, उनका श्रृंगार कितना बड़ा है।)
° यह *अकालमूर्त का तख्त* है ना।

18. *सर्वव्यापी* की टॉपिक पर बावा ने कौन-सी पॉइंट सुनाई?
° बाप कहते हैं मैं आत्माओं को राजयोग *सिखलाता हूँ फिर सर्वव्यापी कैसे* होंगे। ( *बाप-टीचर-गुरू सर्वव्यापी कैसे* होंगे। बाप कहते हैं मैं तो तुम्हारा बाप हूँ फिर ज्ञान सागर हूँ। तुमको बेहद की हिस्ट्री-जॉग्राफी समझने से बेहद का राज्य मिल जायेगा।)

19. माया एकदम ____ से पकड़ लेती है। काला _____ कर लिया। तुम औरों को शिक्षा देकर खुद गिरते हो तो हज़ार गुणा _____ चढ़ जाता है। कहते हैं माया ने ____ मार दिया। माया ऐसा ____ मारती है जो एकदम अक्ल ही गुम कर देती है।
° _नाक_, _मुँह_, _पाप_, _थप्पड़_, _घूँसा_

20. समझदार बन _____ के तूफानों से कभी हार नहीं खाना है। ____ धोखा देती हैं इसलिए अपनी सम्भाल करनी है। कोई भी विकारी बातें इन _____ से नहीं सुननी हैं। हम आत्मा हैं। बाप हम _____ को पढ़ाते हैं।
° _माया_, _आंखें_, _कानों_, _आत्माओं_

21. पुरानी दुनिया में इतने अनेक प्रकार के *बॉम्ब्स* 💣 क्यों बनाये हैं?
° पुरानी दुनिया के *विनाश* लिए यह बॉम्ब्स काम आयेंगे।(रखने के लिए थोड़ेही बनाये हैं। यह पुरानी दुनिया गई कि गई।)

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